उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार
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संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष 2006 में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार की शुरुआत की थी।
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यह पुरस्कार संगीत, नृत्य और नाटक के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले युवा कलाकारों को प्रदान किया जाता है।
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प्रत्येक वर्ष 40 वर्ष तक की आयु के प्रतिभाशाली कलाकार इस पुरस्कार के लिए पात्र होते हैं।
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नामांकन प्राप्त होने की तिथि पर कलाकार की आयु की गणना संबंधित वर्ष की 1 अप्रैल से की जाती है।
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प्रत्येक युवा पुरस्कार के अंतर्गत ₹25,000 की पुरस्कार राशि और अकादमी के अध्यक्ष के हस्ताक्षर तथा अकादमी की मुहर से युक्त ताम्रपत्र प्रदान किया जाता है।
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जिस व्यक्ति को यह पुरस्कार एक बार मिल चुका है, वह किसी अन्य क्षेत्र या श्रेणी में उसी पुरस्कार के लिए दोबारा पात्र नहीं होता।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के प्रमुख क्षेत्र
यह पुरस्कार निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रदान किया जा सकता है:
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संगीत — शास्त्रीय एवं अन्य संगीत विधाएँ।
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नृत्य — विभिन्न शास्त्रीय एवं अन्य नृत्य शैलियाँ।
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रंगमंच — नाटक और रंगमंच से संबंधित कलाएँ।
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पारंपरिक, लोक एवं जनजातीय कला — लोक एवं जनजातीय नृत्य, संगीत, नाटक तथा कठपुतली कला।
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प्रदर्शनकारी कलाओं में योगदान एवं शोधवृत्ति — प्रदर्शनकारी कलाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान और विद्वत्तापूर्ण कार्य।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान कौन थे?
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जन्म 21 मार्च, 1916 को बिहार के डुमराँव में हुआ था।
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छह वर्ष की आयु में वे वाराणसी चले गए, जहाँ उन्होंने अपने चाचा से शहनाई वादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनके चाचा काशी विश्वनाथ मंदिर में शहनाई बजाते थे।
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उन्होंने शहनाई को उत्तर भारत में विवाह जैसे अवसरों पर बजाए जाने वाले लोक वाद्य से आगे बढ़ाकर एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय वाद्य के रूप में स्थापित किया।
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वे शहनाई वादन में सुरों की शुद्धता और मींड, पुकार, खटका, मुरकी, जमजमा, तान तथा गमक जैसी तकनीकों के उत्कृष्ट प्रयोग के लिए प्रसिद्ध थे।
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वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर लाल किले से शहनाई वादन करने का उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त हुआ।
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वर्ष 2001 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वे भारत रत्न प्राप्त करने वाले तीसरे शास्त्रीय संगीतकार थे।
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उनका निधन 21 अगस्त, 2006 को हुआ।