केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 अक्टूबर को नई दिल्ली में वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (Financial Stability and Development Council—FSDC) की 30वीं बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में चर्चा के प्रमुख बिंदु
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भारतीय वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा: परिषद ने भारतीय वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा एवं साइबर हमलों से निपटने की क्षमता की समीक्षा की।
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वित्तीय क्षेत्र साइबर सुरक्षा रणनीति (FSCSS): परिषद ने अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group—IMG) द्वारा तैयार की गई वित्तीय क्षेत्र साइबर सुरक्षा रणनीति पर ध्यान दिया। इस समूह में वित्तीय क्षेत्र के नियामक तथा साइबर सुरक्षा से संबंधित एजेंसियाँ शामिल हैं।
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साइबर सुरक्षा को मजबूत करना: FSCSS के प्रभावी क्रियान्वयन से भारतीय वित्तीय क्षेत्र की समग्र साइबर सुरक्षा एवं संकटों से निपटने की क्षमता मजबूत होने की अपेक्षा है।
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महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा: बैठक में देश की महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा, सुरक्षा प्रणालियों की सुदृढ़ता तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) की साइबर सुरक्षा संबंधी तैयारियों को बेहतर बनाने पर चर्चा की गई।
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वित्तीय प्रौद्योगिकी में नवाचार: वित्तीय क्षेत्र में नियामकीय सुधारों और डिजिटल आधुनिकीकरण के महत्त्व को ध्यान में रखते हुए, परिषद ने वित्तीय प्रौद्योगिकी (FinTech) क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
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वित्तीय परिसंपत्तियों का टोकनीकरण: परिषद ने वित्तीय परिसंपत्तियों तथा अन्य वास्तविक परिसंपत्तियों के टोकनीकरण की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC)
1. स्थापना एवं उद्देश्य
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वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC) की स्थापना भारत सरकार द्वारा दिसंबर 2010 में की गई थी।
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यह वित्तीय क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने, विभिन्न नियामक संस्थाओं के बीच समन्वय को संस्थागत रूप देने तथा वित्तीय क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए गठित एक शीर्ष स्तरीय निकाय है।
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इसका उद्देश्य वित्तीय प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करना तथा वित्तीय क्षेत्र से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर समन्वित दृष्टिकोण विकसित करना है।
2. संरचना एवं सदस्य
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अध्यक्ष: केंद्रीय वित्त मंत्री।
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अन्य सदस्य:
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वित्त राज्य मंत्री।
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रतिनिधि।
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के प्रमुख।
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भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के प्रमुख।
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पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के प्रमुख।
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संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के सचिव।
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मूल संरचना के अनुसार, पूर्ववर्ती वायदा बाजार आयोग (Forward Markets Commission—FMC) के प्रमुख का भी उल्लेख किया गया था।
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परिषद आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों को अपनी बैठकों में आमंत्रित कर सकती है।
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आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs—DEA) का वित्तीय स्थिरता एवं साइबर सुरक्षा प्रभाग (FS&CS Division), परिषद को सचिवालय संबंधी सहायता प्रदान करता है।
3. FSDC के प्रमुख कार्य
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वित्तीय स्थिरता की निगरानी: अर्थव्यवस्था की व्यापक-विवेकपूर्ण निगरानी (Macro-prudential Supervision) करना तथा वित्तीय प्रणाली की स्थिरता से संबंधित जोखिमों का आकलन करना।
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वित्तीय समूहों की निगरानी: बड़े वित्तीय समूहों (Financial Conglomerates) के कामकाज की निगरानी से संबंधित मुद्दों पर विचार करना।
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नियामकीय समन्वय: वित्तीय क्षेत्र की विभिन्न नियामक संस्थाओं के बीच समन्वय को बेहतर बनाना, जबकि उनकी स्वायत्तता को बनाए रखना।
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वित्तीय क्षेत्र का विकास: वित्तीय क्षेत्र के विकास से संबंधित नीतिगत एवं नियामकीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करना।
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वित्तीय समावेशन: वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना तथा समाज के विभिन्न वर्गों तक वित्तीय सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करना।
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अंतरराष्ट्रीय समन्वय: वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (Financial Action Task Force—FATF) तथा वित्तीय स्थिरता बोर्ड (Financial Stability Board—FSB) जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निकायों के साथ भारत के समन्वय को सुविधाजनक बनाना।
FSDC की उप-समिति (FSDC Sub-Committee—FSDC-SC)
1. गठन एवं संरचना
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FSDC को एक उप-समिति के माध्यम से सहयोग प्रदान किया जाता है, जिसे FSDC उप-समिति (FSDC-SC) कहा जाता है।
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इस उप-समिति की अध्यक्षता भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर करते हैं।
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FSDC के अध्यक्ष और वित्त राज्य मंत्री को छोड़कर, परिषद के अन्य सभी सदस्य उप-समिति के भी सदस्य होते हैं।
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इसके अतिरिक्त, RBI के सभी चार उप-गवर्नर तथा FSDC के सचिव भी उप-समिति के सदस्य होते हैं।
2. वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report—FSR)
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वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR), भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित एक महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट है, जो देश की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता का आकलन प्रस्तुत करती है।
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यह रिपोर्ट वित्तीय प्रणाली में मौजूद प्रमुख जोखिमों एवं कमजोरियों की पहचान करती है, जिनका व्यापक प्रभाव पूरी वित्तीय प्रणाली पर पड़ सकता है।
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इसका उद्देश्य नीतिनिर्माताओं, बाजार सहभागियों तथा आम जनता को वित्तीय स्थिरता से संबंधित जोखिमों के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
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यह रिपोर्ट वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद की उप-समिति (FSDC-SC) के सामूहिक आकलन को दर्शाती है।
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इसमें वित्तीय क्षेत्र के विकास, नियमन तथा समसामयिक आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में वित्तीय प्रणाली की सुदृढ़ता का मूल्यांकन किया जाता है।
| विषय | महत्त्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| FSDC की स्थापना | दिसंबर 2010 |
| FSDC का अध्यक्ष | केंद्रीय वित्त मंत्री |
| FSDC की 30वीं बैठक | 23 अक्टूबर, नई दिल्ली |
| FSDC उप-समिति का अध्यक्ष | RBI गवर्नर |
| सचिवालय संबंधी सहायता | आर्थिक कार्य विभाग (DEA) का FS&CS प्रभाग |
| साइबर सुरक्षा रणनीति | वित्तीय क्षेत्र साइबर सुरक्षा रणनीति (FSCSS) |
| वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट | वित्तीय प्रणाली के जोखिमों एवं स्थिरता का आकलन करने वाली रिपोर्ट |
| प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ | FATF और FSB |
निष्कर्ष: वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद भारत की वित्तीय प्रणाली को स्थिर, सुरक्षित एवं समावेशी बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वित्तीय नियामकों के बीच समन्वय, साइबर सुरक्षा को मजबूत करना, वित्तीय साक्षरता बढ़ाना तथा वित्तीय क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं।