भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा अवदाब (Deep Depression) तीव्र होकर चक्रवात ‘अरनब’ (Cyclone Arnab) में बदल गया है। इसके आंध्र प्रदेश के तट से टकराने से पहले अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm) में बदलने की आशंका जताई गई है।
चक्रवात अरनब की वर्तमान स्थिति
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चक्रवात का केंद्र अंडमान द्वीपसमूह के श्री विजयपुरम से लगभग 590 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित था।
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यह विशाखापत्तनम से लगभग 650 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, काकीनाडा से 730 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, मछलीपट्टनम से 830 किलोमीटर पूर्व तथा बापटला से 910 किलोमीटर पूर्व में स्थित था।
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चक्रवात की आशंका को देखते हुए ओडिशा सरकार ने अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए कर्मचारियों और आवश्यक उपकरणों को तैनात किया जा रहा है।
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‘अरनब’ (Arnab) नाम का प्रस्ताव बांग्लादेश द्वारा दिया गया है। इसका उच्चारण ‘ओरनब’ (Ornab) किया जाता है।
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नामकरण (Naming of Tropical Cyclones)
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नामकरण मौसम पूर्वानुमान, चेतावनी और निगरानी से संबंधित सूचनाओं को सरल एवं प्रभावी तरीके से प्रसारित करने के लिए किया जाता है। चक्रवात कई दिनों तक सक्रिय रह सकते हैं और एक ही समुद्री क्षेत्र में एक समय पर एक से अधिक चक्रवात भी उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में नामकरण से चक्रवातों की पहचान करने और उनके संबंध में भ्रम दूर करने में सहायता मिलती है।
चक्रवातों के नामकरण का इतिहास
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प्रारंभिक समय में चक्रवातों का नामकरण किसी निश्चित व्यवस्था के अंतर्गत नहीं किया जाता था। कई बार तूफानों को उनके कारण हुई घटनाओं या दुर्घटनाओं के आधार पर नाम दिया जाता था।
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20वीं शताब्दी के मध्य में अटलांटिक महासागर में आने वाले तूफानों को महिलाओं के नाम देने की परंपरा शुरू हुई।
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बाद में मौसम वैज्ञानिकों ने चक्रवातों की पहचान के लिए वर्णमाला के क्रम में व्यवस्थित नामों की सूची तैयार करने का निर्णय लिया।
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1979 में चक्रवातों के नामकरण में पुरुषों के नाम भी शामिल किए गए। इसके बाद पुरुषों और महिलाओं के नाम बारी-बारी से रखे जाने लगे।
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वर्ष 1953 से अटलांटिक क्षेत्र के उष्णकटिबंधीय तूफानों का नामकरण राष्ट्रीय तूफान केंद्र (National Hurricane Center) द्वारा तैयार की गई सूचियों के आधार पर किया जाने लगा। वर्तमान में इन सूचियों का रखरखाव एवं अद्यतन विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की अंतरराष्ट्रीय समिति द्वारा किया जाता है।
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अटलांटिक क्षेत्र में छह नामकरण सूचियों का उपयोग चक्रानुक्रम में किया जाता है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2019 में उपयोग की गई सूची का दोबारा उपयोग वर्ष 2025 में किया गया।
चक्रवातों का नामकरण क्यों किया जाता है?
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चक्रवातों को छोटे और आसानी से बोले जाने वाले नाम दिए जाते हैं, ताकि मौसम संबंधी सूचनाओं का तेजी से प्रसार किया जा सके।
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नामकरण से मौसम विभाग, तटीय क्षेत्रों, समुद्री जहाजों और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच संचार आसान होता है।
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नामों के माध्यम से चक्रवातों की पहचान करना अक्षांश एवं देशांतर आधारित जटिल पहचान प्रणाली की तुलना में अधिक सरल होता है।
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इससे एक ही समुद्री क्षेत्र में सक्रिय अनेक चक्रवातों के संबंध में भ्रम की स्थिति कम होती है।
चक्रवातों के नामकरण की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था
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विश्वभर में छह क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (Regional Specialised Meteorological Centres – RSMCs) तथा पाँच क्षेत्रीय उष्णकटिबंधीय चक्रवात चेतावनी केंद्र (Tropical Cyclone Warning Centres – TCWCs) चक्रवातों की निगरानी और चेतावनी जारी करने का कार्य करते हैं।
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भी छह क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्रों में से एक है।
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IMD को उत्तर हिंद महासागर में उत्पन्न होने वाले चक्रवातों का नामकरण करने की जिम्मेदारी दी गई है।
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जब किसी चक्रवाती तूफान की अधिकतम निरंतर सतही हवा की गति 62 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक हो जाती है, तब उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नाम दिया जाता है।
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IMD उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के 13 देशों को चक्रवात और तूफानी ज्वार (Storm Surge) से संबंधित मौसम संबंधी चेतावनियाँ एवं परामर्श प्रदान करता है।
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चक्रवातों का नामकरण
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बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में आने वाले चक्रवातों के नामकरण के लिए विश्व मौसम विज्ञान संगठन/एशिया एवं प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (WMO/ESCAP) के अंतर्गत एक क्षेत्रीय व्यवस्था बनाई गई।
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इस व्यवस्था को वर्ष 2004 में लागू किया गया।
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प्रारंभ में आठ देशों ने चक्रवातों के नाम सुझाए थे। ये देश हैं: बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड
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इन देशों द्वारा प्रस्तावित नामों को एक निश्चित क्रम में सूचीबद्ध किया गया था।
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नामों का चयन करते समय यह ध्यान रखा जाता है कि वे किसी देश की राजनीति, धर्म, संस्कृति या लैंगिक पहचान से संबंधित विवाद उत्पन्न न करें।
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नामकरण सूची का उपयोग निर्धारित क्रम में कॉलम के अनुसार किया जाता है।
चक्रवातों के नामकरण से संबंधित प्रमुख नियम
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एक बार किसी चक्रवात के लिए उपयोग किए गए नाम को दोबारा किसी अन्य चक्रवात के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता।
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चक्रवात का नाम अधिकतम आठ अक्षरों का हो सकता है।
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नाम किसी भी सदस्य देश या समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला अथवा आपत्तिजनक नहीं होना चाहिए।
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नामों का चयन इस प्रकार किया जाता है कि वे लिंग, राजनीति, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से तटस्थ रहें।
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यदि दक्षिण चीन सागर में उत्पन्न कोई चक्रवात थाईलैंड को पार करके बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करता है, तो उसका नाम नहीं बदला जाता।
चक्रवातों की नई नामकरण सूची (2020)
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वर्ष 2020 में उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों के लिए एक नई नामकरण सूची जारी की गई।
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इस सूची में 13 देशों द्वारा प्रस्तावित कुल 169 नाम शामिल किए गए।
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प्रत्येक देश ने 13 नाम प्रस्तावित किए थे।
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इससे पहले आठ देशों द्वारा कुल 64 नामों की सूची तैयार की गई थी।