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सरकार ने E100 तक इथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को दी अनुमति

National 📅 October 30, 2026

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (Central Motor Vehicles Rules, 1989) में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत अब ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-Fuel Vehicles) को अनुमति दी गई है, जो E100 तक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चल सकते हैं।

  • E100 ईंधन में लगभग शुद्ध इथेनॉल का उपयोग किया जाता है, जिससे वाहन लगभग पूरी तरह इथेनॉल पर चल सकते हैं।

  • इस संशोधन के माध्यम से वाहनों के उत्सर्जन प्रमाणन (Emission Certification) से संबंधित प्रावधानों को अद्यतन किया गया है।

  • नए प्रावधानों में E85 के साथ E100 को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। E85 ईंधन में 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है।

  • इन ईंधनों के लिए प्रमाणित वाहनों को उनकी संबंधित श्रेणी के लागू उत्सर्जन एवं सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (Flex-Fuel Vehicles) क्या हैं?

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं, जो एक से अधिक प्रकार के ईंधन पर चलने में सक्षम होते हैं। इन्हें लचीले ईंधन उपयोग की सुविधा को ध्यान में रखकर विकसित किया जाता है।

  • फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine) होता है, जो पेट्रोल तथा पेट्रोल और इथेनॉल या मेथनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर चल सकता है।

  • सामान्य पेट्रोल वाहनों की तरह इनमें भी एक ही ईंधन टैंक, ईंधन प्रणाली और इंजन होता है।

  • इथेनॉल के रासायनिक गुणों और ऊर्जा सामग्री में पेट्रोल की तुलना में अंतर होने के कारण इनमें कुछ विशेष इथेनॉल-अनुकूल पुर्जों की आवश्यकता होती है।

  • इसके लिए ईंधन पंप (Fuel Pump) और ईंधन इंजेक्शन प्रणाली (Fuel Injection System) में आवश्यक तकनीकी बदलाव किए जाते हैं।

  • इथेनॉल की ऊर्जा सामग्री पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसलिए इथेनॉल का मिश्रण बढ़ने पर सामान्यतः वाहन का माइलेज कम हो सकता है।

  • हालांकि, अधिक इथेनॉल मिश्रण पर चलने के लिए अनुकूलित कई फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में बेहतर त्वरण (Acceleration) क्षमता देखने को मिल सकती है।

  • पश्चिमी देशों में वर्ष 1990 के दशक से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का उत्पादन किया जा रहा है और बाजार में इनके 100 से अधिक मॉडल उपलब्ध हैं।

  • इन वाहनों में ईंधन प्रणाली के पुर्जों और सामग्रियों का चयन स्वीकृत ईंधन मिश्रण के अनुसार किया जाता है।

  • इनके इंजन का इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण तंत्र (Engine Control System) ईंधन में इथेनॉल की मात्रा के अनुसार अपने संचालन को स्वचालित रूप से समायोजित कर लेता है।

  • इससे वाहन चालक को निर्माता द्वारा प्रमाणित ईंधन विकल्पों में से अपनी आवश्यकता के अनुसार ईंधन चुनने की सुविधा मिलती है।

  • भारत में टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन (Toyota Motor Corporation), टाटा मोटर्स (Tata Motors) और हुंडई मोटर कंपनी (Hyundai Motor Company) जैसी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियाँ फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के विकास पर कार्य कर रही हैं।

इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blending Programme) का रोडमैप

भारत में पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, कच्चे तेल के आयात को घटाना और घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।

  • वर्ष 2001: भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की प्रायोगिक शुरुआत की गई।

  • वर्ष 2004: इस कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की गई।

  • वर्ष 2006: कई राज्यों में E5 (पेट्रोल में 5% इथेनॉल मिश्रण) लागू किया गया।

  • जनवरी 2013: तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौरान इथेनॉल मिश्रण से संबंधित नीतिगत ढाँचे को अधिसूचित किया गया।

  • प्रारंभ में भारत ने 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पेट्रोल के साथ 5% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया था।

  • हालांकि, पर्याप्त इथेनॉल उत्पादन क्षमता के अभाव में वर्ष 2014 तक इथेनॉल मिश्रण का स्तर लगभग 1.5% पर ही बना रहा। इसका प्रमुख कारण गन्ने पर अत्यधिक निर्भरता और पर्याप्त उत्पादन की कमी थी।

  • मई 2018: राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) के माध्यम से इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल का आधार व्यापक किया गया। इसमें गन्ने के अलावा मक्का और अधिशेष खाद्यान्न को भी शामिल किया गया।

  • इस नीति ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और क्षेत्रों के बीच समन्वय को प्रोत्साहित किया।

  • जून 2021: नीति आयोग (NITI Aayog) ने वाहन निर्माता कंपनियों, तेल कंपनियों और कृषि विशेषज्ञों से परामर्श के बाद इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के लिए विस्तृत रोडमैप जारी किया।

  • अगस्त 2021: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने समर्पित इथेनॉल संयंत्र स्थापित करने के लिए निजी निवेश को आमंत्रित किया। इसके लिए सुनिश्चित खरीद समझौतों और बैंक वित्तपोषण की व्यवस्था को प्रोत्साहित किया गया।

  • जून 2022: भारत ने पेट्रोल में 10% इथेनॉल मिश्रण (E10) का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच महीने पहले हासिल कर लिया।

  • इसके बाद भारत ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य भी निर्धारित वर्ष 2030 से पाँच वर्ष पहले हासिल कर लिया।

इथेनॉल मिश्रण के प्रमुख लाभ

  1. कच्चे तेल के आयात में कमी: घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल के अधिक उपयोग से भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो सकती है।

  2. विदेशी मुद्रा की बचत: पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ने से पेट्रोलियम आयात पर होने वाले खर्च को कम करने में सहायता मिल सकती है।

  3. किसानों को लाभ: गन्ना, मक्का और अधिशेष खाद्यान्न से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलने से कृषि क्षेत्र को नए बाजार उपलब्ध हो सकते हैं।

  4. प्रदूषण में कमी: उपयुक्त तकनीक से निर्मित वाहनों में इथेनॉल के उपयोग से कुछ हानिकारक उत्सर्जकों में कमी आ सकती है।

  5. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी: इथेनॉल के उत्पादन और उपयोग की पूरी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए, इसके उपयोग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में सहायता मिल सकती है। इसका वास्तविक लाभ इथेनॉल के कच्चे माल और उत्पादन प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

क्या E85 और E100 सभी वाहनों पर लागू होंगे?

नहीं, E85 और E100 ईंधन का उपयोग केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकता है, जिन्हें विशेष रूप से इन ईंधनों के अनुकूल बनाया गया है और जिनका संबंधित ईंधन के लिए प्रमाणन प्राप्त है।

  • E85 और E100 सभी सामान्य पेट्रोल वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

  • किसी वाहन का E10 या E20 ईंधन के अनुकूल होना यह प्रमाणित नहीं करता कि वह E85 या E100 पर भी चल सकता है।

  • मंत्रालय की नई अधिसूचना के तहत पुराने वाहनों के मालिकों को E85 या E100 ईंधन अपनाने अथवा अपने वाहनों में बदलाव कराने के लिए बाध्य नहीं किया गया है।

  • वाहन चालकों को ईंधन का चयन करने से पहले अपने वाहन पर लगे फ्यूल कम्पैटिबिलिटी स्टिकर (Fuel Compatibility Sticker) की जाँच करनी चाहिए।

  • इसके अतिरिक्त, वाहन निर्माता द्वारा दी गई मालिक पुस्तिका (Owner’s Manual) में दिए गए निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।

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