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भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू हुआ

  • भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement—FTA) 20 अक्टूबर को लागू हो गया।

  • इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड में भारत के 100 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को शुल्क-मुक्त बाजार पहुँच प्राप्त होगी।

  • इस समझौते पर 27 अप्रैल को नई दिल्ली में भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के बीच हस्ताक्षर किए गए थे।

  • ओशिनिया क्षेत्र में न्यूजीलैंड, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

  • वित्त वर्ष 2025–26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.15 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात 566.51 मिलियन अमेरिकी डॉलर और आयात 589.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर था।

  • इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार में वृद्धि होने की उम्मीद है। बेहतर बाजार पहुँच, व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने और गहरे आर्थिक सहयोग से द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा।

  • यह समझौता ‘भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी: 2030 तक का रोडमैप’ का समर्थन करता है। इस रोडमैप के अंतर्गत वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुँचाने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  • पिछले पाँच वर्षों में लागू होने वाला यह भारत का सातवाँ व्यापार समझौता है।

  • इससे पहले भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मॉरीशस, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA), यूनाइटेड किंगडम (UK), ओमान और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते लागू किए हैं।

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते की प्रमुख विशेषताएँ

1. भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त बाजार पहुँच

  • इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड में भारत के 100 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी। इसमें सभी टैरिफ श्रेणियाँ शामिल हैं।

  • इससे भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को लाभ मिलने और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

  • कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होगी।

  • शुल्क-मुक्त पहुँच से भारतीय उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे, जिससे निर्यात बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

2. भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को लाभ

  • भारत को अपने विनिर्माण क्षेत्र के लिए कुछ आवश्यक कच्चे माल और औद्योगिक इनपुट पर शुल्क-मुक्त पहुँच प्राप्त होगी।

  • इनमें लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला तथा धातुओं का अपशिष्ट और कबाड़ शामिल हैं।

  • इन वस्तुओं पर आयात लागत कम होने से भारतीय उद्योगों की उत्पादन लागत घट सकती है।

  • इससे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देने में मदद मिलेगी।

3. भारत द्वारा शुल्क उदारीकरण

  • भारत ने इस समझौते के अंतर्गत अपनी 70.03 प्रतिशत टैरिफ श्रेणियों में शुल्क उदारीकरण की पेशकश की है। ये श्रेणियाँ द्विपक्षीय व्यापार के मूल्य का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा कवर करती हैं।

  • वहीं, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए 29.97 प्रतिशत टैरिफ श्रेणियों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है।

  • इसका उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ घरेलू उत्पादकों और महत्त्वपूर्ण कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों के हितों की रक्षा करना है।

4. शुल्क रियायतों से बाहर रखे गए प्रमुख उत्पाद

भारत ने घरेलू हितों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित प्रमुख उत्पादों को शुल्क उदारीकरण से बाहर रखा है:

  • डेयरी उत्पाद: दूध, क्रीम, मट्ठा (व्हे), दही और पनीर सहित अन्य दुग्ध उत्पाद।

  • पशु उत्पाद: भेड़ के मांस को छोड़कर अन्य पशु उत्पाद।

  • कृषि उत्पाद: प्याज, चना, मटर, मक्का और बादाम आदि।

  • चीनी एवं कृत्रिम शहद।

  • पशु, वनस्पति एवं सूक्ष्मजीवों से प्राप्त वसा और तेल।

  • हथियार एवं गोला-बारूद।

  • तांबा और उससे बनी वस्तुएँ: कैथोड, कारतूस, छड़ें, बार और कॉइल आदि।

  • एल्युमीनियम और उससे बनी वस्तुएँ: सिल्लियाँ, बिलेट और वायर बार आदि।

  • रत्न एवं आभूषण सहित अन्य संवेदनशील उत्पाद।

5. भारत में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहन

  • इस समझौते में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment—FDI) को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता शामिल है।

  • इसका उद्देश्य दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करना तथा भारत के विकास लक्ष्यों को समर्थन देना है।

  • यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ के दृष्टिकोण के अनुरूप विनिर्माण, निवेश और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित कर सकती है।

6. बागवानी और कृषि क्षेत्र में सहयोग

भारत और न्यूजीलैंड के बीच कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं।

इनमें निम्नलिखित पहलें शामिल हैं:

  • उत्कृष्टता केंद्रों (Centres of Excellence) की स्थापना।

  • बेहतर रोपण सामग्री की उपलब्धता।

  • किसानों एवं उत्पादकों की क्षमता निर्माण।

  • संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देना।

  • बागों के प्रबंधन के लिए तकनीकी सहायता।

  • कटाई के बाद की प्रक्रियाओं में सुधार।

  • आपूर्ति शृंखला की दक्षता बढ़ाना।

  • खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करना।

इन पहलों से कृषि उत्पादकता, उत्पादों की गुणवत्ता और कृषि उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

7. सेवा क्षेत्र में भारत को बाजार पहुँच

  • न्यूजीलैंड ने भारत को लगभग 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुँच संबंधी प्रतिबद्धताएँ प्रदान की हैं।

  • इनमें भारत के लिए महत्त्वपूर्ण कई सेवा क्षेत्र शामिल हैं।

प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:

  1. कंप्यूटर संबंधी सेवाएँ।

  2. व्यावसायिक एवं पेशेवर सेवाएँ।

  3. दृश्य-श्रव्य सेवाएँ।

  4. अन्य व्यावसायिक सेवाएँ।

  5. दूरसंचार सेवाएँ।

  6. निर्माण सेवाएँ।

  7. वितरण सेवाएँ।

  8. शिक्षा सेवाएँ।

  9. पर्यावरण संबंधी सेवाएँ।

  10. वित्तीय सेवाएँ।

  11. पर्यटन एवं यात्रा संबंधी सेवाएँ।

इन प्रावधानों से भारतीय सेवा प्रदाताओं को न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी सेवाओं का विस्तार करने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

8. सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) संबंधी प्रतिबद्धता

  • इस समझौते में न्यूजीलैंड ने लगभग 139 उप-क्षेत्रों में भारत के प्रति सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (Most-Favoured Nation—MFN) संबंधी प्रतिबद्धता दी है।

  • इन उप-क्षेत्रों में भारत के प्रमुख हित वाले सेवा क्षेत्र शामिल हैं।

MFN का अर्थ: सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र का सिद्धांत व्यापार समझौतों में समान व्यवहार से संबंधित है। इस समझौते के अंतर्गत संबंधित क्षेत्रों में यदि न्यूजीलैंड भविष्य में किसी अन्य देश को अधिक अनुकूल व्यवहार देने की प्रतिबद्धता करता है, तो समझौते की शर्तों और लागू अपवादों के अधीन भारत को भी उस व्यवहार का लाभ मिल सकता है।

इस प्रावधान से भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए प्रतिस्पर्धात्मक अवसर बेहतर होने की उम्मीद है।

9. कुशल भारतीयों के लिए अस्थायी रोजगार वीजा

  • इस समझौते के अंतर्गत अस्थायी रोजगार प्रवेश (Temporary Employment Entry—TEE) वीजा की एक नई व्यवस्था स्थापित की गई है।

  • इसके तहत कुशल भारतीयों के लिए प्रतिवर्ष 5,000 वीजा का कोटा निर्धारित किया गया है।

  • इस वीजा के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को अधिकतम तीन वर्ष तक न्यूजीलैंड में रहने का अवसर मिल सकता है।

भारत के लिए रुचि वाले प्रमुख व्यवसायों में शामिल हैं:

  • आयुष चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सक।

  • योग प्रशिक्षक।

  • भारतीय रसोइये।

  • संगीत शिक्षक।

  • सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ।

  • इंजीनियर।

  • स्वास्थ्य सेवा पेशेवर।

  • शिक्षा क्षेत्र के पेशेवर।

  • निर्माण क्षेत्र के कुशल कर्मचारी।

यह व्यवस्था कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

10. भारतीय विद्यार्थियों के लिए शिक्षा एवं कार्य के अवसर

  • इस समझौते में न्यूजीलैंड में भारतीय विद्यार्थियों की शैक्षिक गतिशीलता और पढ़ाई के बाद रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

  • समझौते के अनुसार, भारतीय विद्यार्थियों पर संख्यात्मक सीमा हटाने का प्रावधान शामिल है।

  • पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को प्रति सप्ताह न्यूनतम 20 घंटे काम करने की अनुमति सुनिश्चित की गई है।

  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में स्नातक तथा स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए तीन वर्ष तक पढ़ाई के बाद काम करने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

  • डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए यह अवधि चार वर्ष तक हो सकती है।

इन प्रावधानों से भारतीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव, कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय करियर के अवसर प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

11. युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीजा

  • समझौते के अंतर्गत भारत के युवाओं के लिए बहु-प्रवेश वर्किंग हॉलिडे वीजा की व्यवस्था की गई है।

  • इसके तहत प्रतिवर्ष 1,000 युवा भारतीयों को वीजा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

  • यह वीजा 12 महीने तक वैध होगा।

  • इस पहल का उद्देश्य युवाओं को अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करने, नए कौशल सीखने और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने का अवसर देना है।

12. व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाना

  • इस समझौते में व्यापार सुविधा से संबंधित व्यापक उपाय शामिल किए गए हैं।

  • इनका उद्देश्य व्यापार की लेन-देन लागत कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना है।

  • सामान्य माल की सीमा शुल्क निकासी 48 घंटे के भीतर करने की प्रतिबद्धता शामिल है।

  • वहीं, एक्सप्रेस शिपमेंट और शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं की निकासी 24 घंटे के भीतर करने का प्रावधान है।

इन उपायों से माल की आवाजाही तेज होने, आपूर्ति शृंखला की दक्षता बढ़ने और निर्यातकों एवं आयातकों के लिए व्यापार प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।

13. स्वास्थ्य सेवाओं और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग

  • समझौते में स्वास्थ्य एवं पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में भारत के लिए विशेष बाजार पहुँच का प्रावधान शामिल है।

  • इससे भारत की आयुष चिकित्सा प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायता मिल सकती है।

  • यह प्रावधान चिकित्सा पर्यटन (Medical Value Travel) को प्रोत्साहित करने और स्वास्थ्य एवं कल्याण सेवाओं में सहयोग बढ़ाने पर भी केंद्रित है।

  • इसके माध्यम से भारत की पारंपरिक चिकित्सा, योग और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं को वैश्विक बाजार में बढ़ावा देने के अवसर मिल सकते हैं।

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते का महत्त्व

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। इसके माध्यम से भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में व्यापक शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी, जबकि भारतीय उद्योगों को आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता और कम उत्पादन लागत से लाभ हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, सेवा क्षेत्र, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, निवेश और कुशल पेशेवरों की आवाजाही में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं सामाजिक संबंध मजबूत हो सकते हैं।

मुख्य उद्देश्य: द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना, भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करना और वर्ष 2030 तक वस्तुओं एवं सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुँचाने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना।

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