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दुशांबे में एससीओ की बैठक को राजनाथ सिंह ने संबोधित किया

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की शासनाध्यक्ष परिषद (CHG) की 25वीं बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

  • एससीओ की शासनाध्यक्ष परिषद संगठन का एक महत्त्वपूर्ण तंत्र है, जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग तथा व्यावहारिक सहयोग के अन्य क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए उत्तरदायी है।

  • शासनाध्यक्ष परिषद की पिछली बैठक 18 नवंबर, 2025 को मॉस्को में आयोजित की गई थी, जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया था।

  • ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान ने बैठक में भाग लेने वाले विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों का स्वागत किया।

  • बैठक में एससीओ के सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए संपर्क व्यवस्था (कनेक्टिविटी) से जुड़े उपायों पर चर्चा की गई।

  • बैठक को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों के पारस्परिक हितों से जुड़े क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने के महत्त्व पर जोर दिया। इन क्षेत्रों में व्यापार, निवेश, संपर्क व्यवस्था, नवाचार और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान शामिल हैं।

  • उज्बेकिस्तान ने एससीओ की शासनाध्यक्ष परिषद की घूर्णन अध्यक्षता ग्रहण की।

  • बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक का संयुक्त विज्ञप्ति-पत्र (Joint Communiqué) स्वीकार किया। इसमें वर्ष 2027 के लिए एससीओ का बजट, संबंधित वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णय तथा वर्ष 2026–2030 के लिए पीएमटीईसी (PMTEC) कार्ययोजना शामिल हैं।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है?

  • शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation—SCO) एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून, 2001 को चीन के शंघाई शहर में की गई थी।

  • इस संगठन की स्थापना चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों द्वारा की गई थी।

  • उज्बेकिस्तान को छोड़कर शेष पाँच देश पहले ‘शंघाई फाइव’ समूह के सदस्य थे। इस समूह का गठन 26 अप्रैल, 1996 को सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य विश्वास को मजबूत करने संबंधी संधि पर हस्ताक्षर के साथ हुआ था।

  • एससीओ के चार्टर पर जून 2002 में सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित राष्ट्राध्यक्षों की बैठक के दौरान हस्ताक्षर किए गए। यह चार्टर 19 सितंबर, 2003 को प्रभावी हुआ।

  • एससीओ का चार्टर संगठन का मूल वैधानिक दस्तावेज है। इसमें संगठन के उद्देश्यों, सिद्धांतों, संरचना और प्रमुख गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।

  • एससीओ यूरेशियाई क्षेत्र में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने वाला एक प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन है। यह विश्व के प्रमुख अंतर-क्षेत्रीय संगठनों में से एक है।

एससीओ के प्रमुख निकाय

1. राष्ट्राध्यक्ष परिषद (Heads of State Council—HSC)

  • यह एससीओ का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।

  • इसकी बैठक वर्ष में एक बार आयोजित होती है।

  • यह संगठन से संबंधित महत्त्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेती है तथा नीतिगत दिशा-निर्देश निर्धारित करती है।

2. शासनाध्यक्ष परिषद (Council of Heads of Government—CHG)

  • इसमें सदस्य देशों के प्रधानमंत्री अथवा शासनाध्यक्ष भाग लेते हैं।

  • इसकी बैठक वर्ष में एक बार आयोजित होती है।

  • यह बहुपक्षीय सहयोग की रणनीति और प्राथमिकताओं पर चर्चा करती है।

  • यह आर्थिक तथा अन्य क्षेत्रों के महत्त्वपूर्ण और समसामयिक मुद्दों पर विचार करती है।

  • यह एससीओ के बजट को स्वीकृति प्रदान करती है।

3. अन्य मंत्रिस्तरीय एवं क्षेत्रीय तंत्र

एससीओ के अंतर्गत विदेश मामलों, राष्ट्रीय रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, व्यापार, संस्कृति, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, आपदा प्रबंधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, न्यायपालिका, पर्यटन, उद्योग, ऊर्जा, गरीबी उन्मूलन और खेल जैसे क्षेत्रों में भी बैठकें आयोजित की जाती हैं।

एससीओ के सदस्य देश

एससीओ में वर्तमान में 10 सदस्य देश शामिल हैं। चीन, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस

पर्यवेक्षक देश: अफगानिस्तान और मंगोलिया को पर्यवेक्षक देशों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

संवाद साझेदार (Dialogue Partners): एससीओ के संवाद साझेदारों में अजरबैजान, आर्मेनिया, बहरीन, मिस्र, कंबोडिया, कतर, कुवैत, लाओस, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, तुर्किये और श्रीलंका शामिल हैं।

एससीओ की सदस्यता का विस्तार

  • वर्ष 2005 में भारत, ईरान और पाकिस्तान को एससीओ में पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था।

  • 9 जून, 2017 को अस्ताना में आयोजित ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान संगठन के पूर्ण सदस्य बने।

  • जुलाई 2023 में भारत की मेजबानी में आयोजित आभासी शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान एससीओ का पूर्ण सदस्य बना।

  • वर्ष 2024 में बेलारूस को पूर्ण सदस्यता प्रदान की गई, जिससे संगठन के सदस्य देशों की संख्या बढ़कर 10 हो गई।

एससीओ के स्थायी निकाय

एससीओ के दो स्थायी निकाय हैं।

1. एससीओ सचिवालय, बीजिंग (चीन): यह संगठन की प्रशासनिक गतिविधियों, बैठकों के समन्वय और अन्य संस्थागत कार्यों में सहायता करता है।

2. क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना की कार्यकारी समिति (RATS), ताशकंद (उज्बेकिस्तान): यह आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से संबंधित खतरों के विरुद्ध सदस्य देशों के सहयोग एवं समन्वय को बढ़ावा देती है।

एससीओ की अध्यक्षता सदस्य देशों के बीच बारी-बारी से, सामान्यतः एक वर्ष के लिए, प्रदान की जाती है।

एससीओ के प्रमुख उद्देश्य

एससीओ के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. सदस्य देशों के बीच पारस्परिक विश्वास, मैत्री और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करना।

  2. राजनीति, व्यापार, अर्थव्यवस्था, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना।

  3. क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने तथा उन्हें सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयास करना।

  4. एक लोकतांत्रिक, न्यायसंगत और तर्कसंगत नई अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था की स्थापना की दिशा में प्रयास करना।

भारत और शंघाई सहयोग संगठन

  • भारत को जुलाई 2005 में अस्ताना शिखर सम्मेलन के दौरान एससीओ में पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था।

  • पर्यवेक्षक के रूप में भारत ने संगठन की विभिन्न मंत्रिस्तरीय बैठकों में भाग लिया। इन बैठकों का मुख्य ध्यान यूरेशियाई क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर रहा।

  • वर्ष 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने।

  • भारत एससीओ के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में रुचि रखता है।

  • भारत विशेष रूप से एससीओ की क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) के साथ सहयोग को महत्त्व देता है। यह संरचना सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • एससीओ भारत को मध्य एशिया और अन्य यूरेशियाई देशों के साथ संपर्क, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा तथा सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

बैठक का महत्त्व

दुशांबे में आयोजित एससीओ की शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक ने सदस्य देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

बैठक में परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवाचार और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संपर्क मजबूत करने, निवेश के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने में सहायता मिल सकती है।

भारत के लिए एससीओ का महत्त्व सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है। यह संगठन मध्य एशिया के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, आतंकवाद से निपटने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए भी एक महत्त्वपूर्ण मंच है।

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