– यह सिफारिश संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा प्रकाशित ‘उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2026: द पॉइंट ऑफ रिटर्न’ (Emissions Gap Report 2026: The Point of Return) में की गई है।
– रिपोर्ट में 1.5°C की सीमा से तापमान वृद्धि के न्यूनतम संभावित अतिक्रमण वाले परिदृश्य का विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार, सदी के मध्य के आसपास वैश्विक तापमान में अधिकतम वृद्धि 1.7–1.8°C तक सीमित रखी जा सकती है और वर्ष 2100 तक तापमान वृद्धि को 1.5°C या उससे नीचे वापस लाने की लगभग 50% संभावना है।
– इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वर्ष 2025 के स्तर की तुलना में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में निम्नलिखित कटौती आवश्यक होगी:
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वर्ष 2030 तक 18%।
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वर्ष 2035 तक 45%।
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वर्ष 2040 तक 69%।
– इसके विपरीत, यदि राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions—NDCs) को पूरी तरह लागू किया जाता है, तो वर्ष 2025 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन में वर्ष 2030 तक केवल 5–8% और वर्ष 2035 तक 11–15% की कमी आने का अनुमान है।
अधिक गर्म होती पृथ्वी, अधिक गंभीर परिणाम
– रिपोर्ट के अनुसार, यदि वर्तमान नीतियाँ जारी रहती हैं, तो इस सदी के दौरान वैश्विक तापमान में वृद्धि 2.8°C तक पहुँच सकती है और इसके बाद भी बढ़ सकती है।
– पेरिस समझौते के अंतर्गत देशों को अपनी राष्ट्रीय जलवायु कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत करनी होती हैं। यदि सभी देश इन योजनाओं को पूरी तरह लागू कर दें और इसी प्रकार के प्रयास जारी रखें, तब भी तापमान वृद्धि लगभग 2.6°C तक सीमित रहने का अनुमान है।
– रिपोर्ट के अनुसार, ये अनुमान वर्ष 2025 में प्रस्तुत अनुमानों की तुलना में अधिक प्रतिकूल हैं। इसके प्रमुख कारणों में संयुक्त राज्य अमेरिका का जलवायु समझौते से बाहर निकलना तथा ऐतिहासिक उत्सर्जन के संशोधित अनुमान शामिल हैं।
– इस बीच, पिछली उत्सर्जन रिपोर्ट के बाद प्रस्तुत किए गए नए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (NDCs) से वैश्विक तापमान संबंधी अनुमानों में बहुत कम बदलाव आया है।
जलवायु संरक्षण के सफल प्रयासों को व्यापक स्तर पर लागू करने की आवश्यकता
– रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से निपटने की कार्रवाई में तेजी लाने के अवसर पहले से कहीं अधिक उपलब्ध हैं।
– पेरिस समझौते को अपनाए जाने के बाद से नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। कोयले और तेल से होने वाली कुल ऊर्जा आपूर्ति में वृद्धि पूर्वानुमानों की तुलना में धीमी रही है तथा अनेक क्षेत्रों में जलवायु नीतियों के कारण उत्सर्जन में कमी आई है।
– रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C या उससे नीचे वापस लाना संभव है। इसके समर्थन में ऐसे प्रमाण लगातार बढ़ रहे हैं कि दुनिया भर में लागू जलवायु नीतियों ने उत्सर्जन कम करने में प्रभावी भूमिका निभाई है।
– रिपोर्ट में विकसित और विकासशील देशों में जलवायु संबंधी नीतियों को लागू करने या मजबूत बनाने से जुड़े कई दर्जन संरचनात्मक बदलावों का उल्लेख किया गया है, जिनसे उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है।
– 220 से अधिक नीतिगत मूल्यांकनों से यह समझने में मदद मिली है कि कौन-से उपाय प्रभावी सिद्ध हुए हैं।
– मूल्यांकित नीतियों के अनुसार:
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विद्युत क्षेत्र: नीतिगत उपायों से उत्सर्जन में औसतन 9% की कमी आई।
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आर्थिक उपाय: कार्बन कैप-एंड-ट्रेड योजनाओं और कार्बन कर सहित आर्थिक साधनों से मूल्यांकन अवधि के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन में 5–13% तक की कमी दर्ज की गई।
– हालाँकि, ये सफलताएँ अभी भी कुछ विशिष्ट क्षेत्रों, देशों और समयावधियों तक सीमित हैं।
– तापमान वृद्धि को 1.5°C से न्यूनतम संभावित स्तर तक अधिक होने देने वाले परिदृश्य को प्राप्त करने के लिए इन सफल उपायों को अन्य क्षेत्रों और देशों में दोहराना, उनका विस्तार करना तथा उन्हें लंबे समय तक बनाए रखना आवश्यक है।
– रिपोर्ट में पहले वैश्विक स्टॉकटेक (Global Stocktake) के दौरान निर्धारित लक्ष्यों को तेजी से लागू करने का आह्वान किया गया है। यह प्रक्रिया वर्ष 2021 से 2023 तक पेरिस समझौते के लक्ष्यों की दिशा में सामूहिक प्रगति का आकलन करने के लिए आयोजित की गई थी।
प्रमुख जलवायु लक्ष्य
रिपोर्ट में निम्नलिखित उपायों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है:
1. नवीकरणीय ऊर्जा: वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता को तीन गुना करना तथा ऊर्जा दक्षता में सुधार की वार्षिक दर को दोगुना करना।
2. जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी: ऊर्जा प्रणालियों में कोयले, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों से दूर जाने की प्रक्रिया को तेज करना।
3. गैर-CO₂ उत्सर्जन में कमी: कार्बन डाइऑक्साइड के अतिरिक्त अन्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना।
4. वन संरक्षण: वनों की कटाई और वन क्षरण को रोकना तथा उन्हें पुनः बहाल करने के प्रयास करना।
– रिपोर्ट के अनुसार, इन अधिकांश लक्ष्यों की दिशा में अब तक हुई प्रगति अपर्याप्त है।
– दूसरा वैश्विक स्टॉकटेक नवंबर में तुर्किये के अंताल्या में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र के COP31 जलवायु सम्मेलन में शुरू होगा।
– इस प्रक्रिया के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए प्राथमिक कार्रवाई वाले क्षेत्रों की पुनः पुष्टि की जा सकती है, वर्ष 2035 और 2040 तक के लिए मात्रात्मक लक्ष्य निर्धारित किए जा सकते हैं तथा मौजूदा कार्ययोजनाओं को अधिक स्पष्ट और मापने योग्य बनाया जा सकता है।