– यह पुरस्कार ICC के कार्यों को मान्यता देता है, जिनमें जाँच, अभियोजन, मुकदमों की सुनवाई तथा गिरफ्तारी वारंट जारी करना या उन्हें अधिकृत करना शामिल है।
– यह पुरस्कार ऐसे समय में दिया गया है, जब कुछ ही दिन पहले ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के विरुद्ध व्यापक नए प्रतिबंधों की घोषणा की थी।
– नीदरलैंड के हेग स्थित ICC लंबे समय से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर रहा है। वर्ष 2024 में न्यायालय द्वारा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद न्यायालय के खिलाफ अमेरिकी प्रशासन का अभियान और तेज हो गया।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court—ICC)
– अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय एक स्वतंत्र न्यायिक निकाय है, जिसे नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध और युद्ध अपराध के आरोपों का सामना करने वाले व्यक्तियों के मामलों में अधिकारिता प्राप्त है।
– ICC का मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में स्थित है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1998 में अपनाई गई रोम संविधि (Rome Statute) के अंतर्गत कार्य करता है।
– रोम संविधि वर्ष 2002 में 60 देशों द्वारा अनुसमर्थन किए जाने के बाद लागू हुई।
– रोम संविधि न्यायालय में पीड़ितों के प्रतिनिधित्व के लिए नए मानक निर्धारित करती है। इसके अतिरिक्त, यह निष्पक्ष सुनवाई तथा अभियुक्तों के बचाव के अधिकारों को सुनिश्चित करने पर भी जोर देती है।
– न्यायालय का उद्देश्य रोम संविधि में परिभाषित अपराधों से सभी लोगों की रक्षा के लिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है।
– वर्तमान में ICC की रोम संविधि के 125 देश पक्षकार (State Parties) हैं।
– भारत ने रोम संविधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और वह ICC का सदस्य नहीं है।
विचार की स्वतंत्रता के लिए सखारोव पुरस्कार (Sakharov Prize for Freedom of Thought)
– सोवियत संघ के असंतुष्ट विचारक आंद्रेई सखारोव के नाम पर स्थापित यह पुरस्कार वर्ष 1988 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करने वाले व्यक्तियों या समूहों को सम्मानित करना है।
– वर्ष 1988 में पहली बार यह पुरस्कार नेल्सन मंडेला और अनातोली मार्चेंको को प्रदान किया गया था।
– सखारोव पुरस्कार मानवाधिकारों के क्षेत्र में यूरोपीय संघ द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। इसके माध्यम से विचार की स्वतंत्रता की रक्षा में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों, समूहों और संगठनों को सम्मानित किया जाता है।
– यूरोपीय संसद के प्रत्येक राजनीतिक समूह को पुरस्कार के लिए उम्मीदवार नामित करने का अधिकार है। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय संसद के व्यक्तिगत सदस्य (MEPs) भी उम्मीदवारों को नामित कर सकते हैं। प्रत्येक उम्मीदवार के लिए कम-से-कम 40 MEPs का समर्थन आवश्यक होता है।
– नामांकित उम्मीदवारों को विदेश मामलों की समिति, विकास समिति और मानवाधिकार उपसमिति की संयुक्त बैठक में प्रस्तुत किया जाता है। इसके बाद संबंधित पूर्ण समितियों के सदस्य मतदान करके तीन उम्मीदवारों की संक्षिप्त सूची तैयार करते हैं।
– सखारोव पुरस्कार के अंतिम विजेता का चयन राष्ट्रपतियों का सम्मेलन (Conference of Presidents) करता है। यह यूरोपीय संसद का एक निकाय है, जिसका नेतृत्व संसद के अध्यक्ष करते हैं और जिसमें संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी राजनीतिक समूहों के नेता शामिल होते हैं।
– इस चयन प्रक्रिया के कारण पुरस्कार विजेताओं का चयन पूरे यूरोपीय संसद के स्तर पर किया जाता है।
– यूरोपीय संसद प्रत्येक वर्ष के अंत में फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में आयोजित औपचारिक पूर्ण अधिवेशन के दौरान सखारोव पुरस्कार प्रदान करती है।
आंद्रेई सखारोव कौन थे?
– आंद्रेई सखारोव (1921–1989) रूस के प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी और मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्हें प्रारंभ में सोवियत हाइड्रोजन बम के विकास में योगदान के कारण “सोवियत हाइड्रोजन बम का जनक” कहा गया।
– सखारोव ने कम उम्र में ही सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर दी थी। उन्होंने वर्ष 1945 में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
– वर्ष 1948 से उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता इगोर टैम के मार्गदर्शन में सोवियत हाइड्रोजन बम के विकास पर कार्य किया। सखारोव का मानना था कि परमाणु हथियारों पर अमेरिकी एकाधिकार समाप्त करना महत्त्वपूर्ण था।
– हालाँकि, वर्ष 1950 के दशक के उत्तरार्ध से उन्होंने हथियारों की होड़ के गंभीर परिणामों के प्रति चेतावनी देना शुरू कर दिया। वर्ष 1960 और 1970 के दशकों में उन्होंने सोवियत समाज की व्यवस्था की तीखी आलोचना की, क्योंकि उनके विचार में यह व्यवस्था मौलिक मानवाधिकारों से दूर जा रही थी।
– उनके प्रयासों को आंशिक सफलता तब मिली, जब वर्ष 1963 में परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
– वर्ष 1970 में उन्होंने मानवाधिकारों और राजनीतिक मुकदमों के पीड़ितों की रक्षा के लिए एक समिति की स्थापना की।
– सरकार के बढ़ते दबाव के बावजूद सखारोव ने न केवल अपने देश के असंतुष्ट विचारकों की रिहाई के लिए प्रयास किए, बल्कि वे सोवियत शासन के सबसे साहसी आलोचकों में भी शामिल हो गए। उन्होंने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक बनकर अपनी पहचान बनाई।
– वर्ष 1975 में आंद्रेई सखारोव को नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उन्हें सत्ता के दुरुपयोग के विरोध और मानवाधिकारों की रक्षा में उनके योगदान के लिए दिया गया था।
– सोवियत संघ के नेताओं ने इस निर्णय पर कड़ी नाराजगी जताई और सखारोव को पुरस्कार ग्रहण करने के लिए ओस्लो जाने की अनुमति नहीं दी। उनकी पत्नी येलेना बोनर ने उनकी ओर से पुरस्कार स्वीकार किया।
– इसके बाद सखारोव से उनकी सभी सोवियत मानद उपाधियाँ छीन ली गईं। कई वर्षों तक उन्हें और उनकी पत्नी को गोर्की शहर में कड़ी निगरानी में रखा गया।
– वर्ष 1985 में मिखाइल गोर्बाचेव के सत्ता में आने के बाद ही सखारोव और उनकी पत्नी को मॉस्को लौटने की अनुमति मिली।
– आंद्रेई सखारोव का निधन वर्ष 1989 में 68 वर्ष की आयु में हुआ।