संयुक्त राष्ट्र दिवस (United Nations Day)
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संयुक्त राष्ट्र (United Nations—UN) ने 24 अक्टूबर को अपनी 81वीं वर्षगाँठ मनाई।
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प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के लागू होने की वर्षगाँठ का प्रतीक है।
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संयुक्त राष्ट्र चार्टर को इसके हस्ताक्षरकर्ता देशों के बहुमत, जिसमें सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य भी शामिल थे, द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया।
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वर्ष 1948 से प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जा रहा है।
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संयुक्त राष्ट्र विश्व का सबसे सार्वभौमिक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी पहुँच वैश्विक स्तर पर है।
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वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र अनेक नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए संगठन स्वयं को अधिक प्रभावी बनाने और अपनी कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने के उपायों पर काम कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की पृष्ठभूमि (Genesis of the UN)
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वर्ष 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध अपने अंतिम चरण में था। अनेक देश युद्ध के कारण तबाह हो चुके थे और पूरी दुनिया शांति की आकांक्षा कर रही थी।
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25 अप्रैल से 26 जून, 1945 तक 50 देशों के प्रतिनिधि अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन फ्रांसिस्को शहर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगठन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (United Nations Conference on International Organisation) में एकत्र हुए।
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अगले दो महीनों के दौरान इन प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का मसौदा तैयार किया और उस पर हस्ताक्षर किए। इसी चार्टर के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र नामक एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
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इस संगठन की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य भविष्य में द्वितीय विश्व युद्ध जैसी विनाशकारी घटना की पुनरावृत्ति को रोकना और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना था।
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संयुक्त राष्ट्र चार्टर संगठन का संस्थापक दस्तावेज है।
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इस चार्टर पर 26 जून, 1945 को हस्ताक्षर किए गए और यह 24 अक्टूबर, 1945 को लागू हुआ। इसी दिन संयुक्त राष्ट्र आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया।
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भारत संयुक्त राष्ट्र के 51 मूल संस्थापक सदस्यों में से एक है।
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वर्ष 1945 में स्थापना के बाद से संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य और कार्य उसके संस्थापक चार्टर में निहित सिद्धांतों एवं उद्देश्यों द्वारा निर्देशित होते रहे हैं।
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संयुक्त राष्ट्र चार्टर में अब तक तीन बार संशोधन किए गए हैं—वर्ष 1963, 1965 और 1973 में।
संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंग (Main Organs of the UN)
संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंग हैं। इनमें से पाँच अंग—महासभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक एवं सामाजिक परिषद, न्यास परिषद और सचिवालय—न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हैं। छठा अंग, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, नीदरलैंड के हेग शहर में स्थित है।
इन सभी अंगों की स्थापना वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत की गई थी।
संयुक्त राष्ट्र न तो एक सर्वोच्च राज्य है और न ही विभिन्न सरकारों की कोई विश्व सरकार। इसका अपना कोई सैन्य बल नहीं है और न ही यह कर लगाता है। अपने निर्णयों को लागू करवाने के लिए यह सदस्य देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त, अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए यह सदस्य देशों से प्राप्त वित्तीय योगदान पर निर्भर रहता है।
1. महासभा (General Assembly)
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महासभा संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख विचार-विमर्शकारी, नीति-निर्धारणकारी और प्रतिनिधित्वकारी अंग है।
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संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों को महासभा में प्रतिनिधित्व प्राप्त है। इस कारण यह संयुक्त राष्ट्र का एकमात्र ऐसा प्रमुख अंग है, जिसमें सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है।
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प्रत्येक वर्ष सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश न्यूयॉर्क स्थित महासभा कक्ष में वार्षिक सत्र और सामान्य चर्चा के लिए एकत्र होते हैं। इस बैठक में अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्ष एवं शासनाध्यक्ष भी भाग लेते हैं और अपने विचार प्रस्तुत करते हैं।
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शांति एवं सुरक्षा, नए सदस्यों के प्रवेश तथा बजट संबंधी मामलों जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है।
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अन्य विषयों पर निर्णय साधारण बहुमत से लिए जाते हैं।
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महासभा प्रत्येक वर्ष अपने अध्यक्ष का चुनाव करती है। अध्यक्ष का कार्यकाल एक वर्ष का होता है।
2. सुरक्षा परिषद (Security Council)
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सुरक्षा परिषद का प्रमुख दायित्व अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना है।
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इसकी सदस्यता संरचना में वर्ष 1945 के बाद से स्थायी सदस्यों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
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सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं:
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पाँच स्थायी सदस्य: अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस।
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दस अस्थायी सदस्य: इनका चुनाव विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है। इन्हें वीटो शक्ति प्राप्त नहीं होती।
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पाँच स्थायी सदस्यों को वीटो शक्ति प्राप्त है, जिसके माध्यम से वे कुछ महत्त्वपूर्ण प्रस्तावों को पारित होने से रोक सकते हैं।
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संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश सुरक्षा परिषद के निर्णयों को स्वीकार करने और लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत बाध्य हैं।
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संयुक्त राष्ट्र के अन्य प्रमुख अंग सामान्यतः सदस्य देशों को सिफारिशें देते हैं, जबकि सुरक्षा परिषद को ऐसे निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है, जिन्हें सदस्य देशों को चार्टर के प्रावधानों के अनुसार लागू करना होता है।
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सुरक्षा परिषद यह निर्धारित करने में प्रमुख भूमिका निभाती है कि किसी स्थिति से शांति को खतरा है या आक्रामकता की कार्रवाई हुई है।
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यह विवाद में शामिल पक्षों से शांतिपूर्ण तरीकों से विवाद सुलझाने का आग्रह करती है तथा विवाद के समाधान के लिए उपयुक्त उपायों और शर्तों की सिफारिश करती है।
3. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council—ECOSOC)
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आर्थिक एवं सामाजिक परिषद संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख अंग है, जो आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर समन्वय, नीतियों की समीक्षा, नीतिगत संवाद तथा सिफारिशों का कार्य करता है।
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यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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यह आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली तथा उसकी विशिष्ट एजेंसियों की गतिविधियों के समन्वय के लिए केंद्रीय तंत्र के रूप में कार्य करती है।
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यह अपने अधीनस्थ निकायों और विशेषज्ञ निकायों के कार्यों की निगरानी भी करती है।
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आर्थिक एवं सामाजिक परिषद में 54 सदस्य होते हैं, जिनका चुनाव महासभा द्वारा किया जाता है। इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होता है और सदस्यों का चुनाव क्रमिक रूप से किया जाता है।
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यह सतत विकास से संबंधित विचार-विमर्श, चर्चा और नवीन विचारों के आदान-प्रदान के लिए संयुक्त राष्ट्र का एक प्रमुख मंच है।
4. न्यास परिषद (Trusteeship Council)
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न्यास परिषद की स्थापना वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत की गई थी।
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इसका उद्देश्य 11 न्यास क्षेत्रों (Trust Territories) पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी रखना था। इन क्षेत्रों को संयुक्त राष्ट्र के सात सदस्य देशों के प्रशासन के अधीन रखा गया था।
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परिषद का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इन क्षेत्रों को स्वशासन और स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए पर्याप्त सहायता एवं अवसर मिलें।
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वर्ष 1994 तक सभी न्यास क्षेत्र स्वशासन या स्वतंत्रता प्राप्त कर चुके थे।
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पलाऊ (Palau) अंतिम न्यास क्षेत्र था, जिसे अक्टूबर 1994 में स्वतंत्रता प्राप्त हुई।
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इसके बाद न्यास परिषद ने 1 नवंबर, 1994 को अपने नियमित कार्य स्थगित कर दिए।
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25 मई, 1994 को पारित एक प्रस्ताव के माध्यम से परिषद ने अपने कार्य-संचालन नियमों में संशोधन किया। इसके तहत वार्षिक बैठक आयोजित करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई।
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इसके बाद परिषद ने आवश्यकता पड़ने पर बैठक करने का निर्णय लिया। ऐसी बैठक परिषद के निर्णय, उसके अध्यक्ष के निर्णय अथवा उसके अधिकांश सदस्यों, महासभा या सुरक्षा परिषद के अनुरोध पर बुलाई जा सकती है।
5. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice—ICJ)
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अंतरराष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है।
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इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग शहर स्थित पीस पैलेस (Peace Palace) में है।
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यह संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में एकमात्र ऐसा अंग है, जिसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित नहीं है।
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इसका प्रमुख कार्य अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार देशों द्वारा प्रस्तुत कानूनी विवादों का निपटारा करना है।
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यह संयुक्त राष्ट्र के अधिकृत अंगों और विशिष्ट एजेंसियों द्वारा भेजे गए कानूनी प्रश्नों पर परामर्शात्मक राय भी देता है।
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अंतरराष्ट्रीय न्यायालय अपने विधान (Statute) के अनुसार कार्य करता है।
6. सचिवालय (Secretariat)
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सचिवालय में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और हजारों अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी शामिल होते हैं, जो संगठन के दैनिक कार्यों का संचालन करते हैं।
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ये कर्मचारी महासभा तथा संयुक्त राष्ट्र के अन्य प्रमुख अंगों द्वारा निर्धारित दायित्वों के अनुसार कार्य करते हैं।
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महासचिव (Secretary-General) संयुक्त राष्ट्र का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होता है।
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महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर महासभा द्वारा की जाती है। उसका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है और उसे दोबारा नियुक्त किया जा सकता है।
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महासचिव संयुक्त राष्ट्र के आदर्शों का प्रतीक होने के साथ-साथ विश्व के लोगों, विशेषकर गरीबों और कमजोर वर्गों के हितों के पक्षधर के रूप में भी कार्य करता है।
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संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों की भर्ती अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर की जाती है।
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ये कर्मचारी दुनिया भर में स्थित संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न कार्यालयों और शांति स्थापना अभियानों में अपनी सेवाएँ प्रदान करते हैं।