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23 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस

• संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा प्रत्येक वर्ष 23 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस (International Day of the Snow Leopard) मनाया जाता है।

• इस दिवस का उद्देश्य हिम तेंदुए के संरक्षण के प्रयासों के लिए अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है, क्योंकि हिम तेंदुआ समग्र पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हिम तेंदुए के बारे में प्रमुख तथ्य

• हिम तेंदुआ (Panthera uncia) एशिया के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वन्यजीव है।

• यह अफगानिस्तान, भूटान, चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मंगोलिया, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान सहित कई पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है।

• हिम तेंदुआ सामान्यतः एकाकी जीवन बिताता है और अत्यंत रहस्यमय तथा कम दिखाई देने वाला जीव है।

• स्थानीय लोग इसे अक्सर “पहाड़ों का भूत (Ghost of the Mountains)” कहते हैं, क्योंकि इसे देख पाना बेहद कठिन होता है।

• हिम तेंदुआ मुख्य रूप से सुबह और शाम के समय सबसे अधिक सक्रिय रहता है।

• हिम तेंदुए आमतौर पर मनुष्यों के प्रति आक्रामक नहीं होते हैं।

• इसके शरीर पर सफेद-धूसर रंग के धब्बेदार बाल होते हैं, जो ठंडे मौसम में शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं।

• हिम तेंदुआ हिमालय में खाद्य श्रृंखला के शीर्ष (Apex) पर स्थित है। यह प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इसे “अम्ब्रेला प्रजाति (Umbrella Species)” भी माना जाता है।

संरक्षण स्थिति

• हिम तेंदुए को वर्ष 1975 से CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) के परिशिष्ट-I (Appendix I) में सूचीबद्ध किया गया है।

• वर्ष 1986 से इसे Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals (CMS) के परिशिष्ट-I में भी शामिल किया गया है।

• IUCN की रेड लिस्ट में वर्ष 2017 में हिम तेंदुए को “सुभेद्य (Vulnerable)” श्रेणी में रखा गया था।

• इसे मध्यम अवधि में जंगलों में विलुप्त होने के उच्च जोखिम का सामना करने वाली प्रजाति माना जाता है।

हिम तेंदुए के लिए प्रमुख खतरे

• आवास का नुकसान और विखंडन
• शिकार की उपलब्धता में कमी
• अवैध वन्यजीव व्यापार
• अवैध शिकार और तस्करी
• जलवायु परिवर्तन

• हिम तेंदुए का संरक्षण सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा (2030 Agenda for Sustainable Development) के कार्यान्वयन में भी योगदान देता है। इसमें विशेष रूप से SDG-6 (जल एवं स्वच्छता), SDG-13 (जलवायु कार्रवाई) और SDG-15 (स्थलीय पारिस्थितिकी/जैव विविधता) महत्वपूर्ण हैं।

भारत में हिम तेंदुए के संरक्षण के प्रयास

• भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India—WII) ने सभी हिम तेंदुआ-क्षेत्र वाले राज्यों और दो संरक्षण साझेदारों—नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन, मैसूर और WWF-India—के सहयोग से वर्ष 2019 से 2023 के बीच भारत में पहली बार “Snow Leopard Population Assessment in India (SPAI)” किया।

• भारत में अनुमानतः 718 हिम तेंदुए हैं। इनमें सबसे अधिक 477 हिम तेंदुए लद्दाख में पाए गए हैं।

• भारत ने हिम तेंदुए के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

• हिम तेंदुए के आवास का लगभग 34% क्षेत्र कानूनी संरक्षण के अंतर्गत है और 35,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को लैंडस्केप-स्तरीय संरक्षण के लिए निर्धारित किया गया है।

• भारत ने केवल संरक्षित क्षेत्रों पर निर्भर रहने के बजाय सहभागितापूर्ण और लैंडस्केप-आधारित संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाया है।

• यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हिम तेंदुए द्वारा उपयोग किए जाने वाले लगभग 70% भू-भाग अभी भी संरक्षित क्षेत्रों के बाहर है और वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करता है।

• प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड (Project Snow Leopard) और Global Snow Leopard & Ecosystem Protection Programme (GSLEP) जैसी पहलों ने इस संरक्षण दृष्टिकोण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये पहल सामूहिक रूप से भारत में हिम तेंदुए के लगभग आधे क्षेत्र को कवर करती हैं।

• पिछले एक दशक में भारत ने केवल संरक्षित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय सहयोगात्मक लैंडस्केप प्रबंधन (Collaborative Landscape Management) की ओर महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA)

• भारत ने वर्ष 2023 में International Big Cat Alliance (IBCA) की शुरुआत की।

• इसका उद्देश्य दुनिया की सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण को बढ़ावा देना है:

  1. बाघ (Tiger)

  2. शेर (Lion)

  3. तेंदुआ (Leopard)

  4. हिम तेंदुआ (Snow Leopard)

  5. चीता (Cheetah)

  6. जगुआर (Jaguar)

  7. प्यूमा (Puma)

 
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