यह युद्धपोत तटीय जलक्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए तैयार किया गया है। यह समुद्री गश्ती विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य युद्धपोतों के साथ मिलकर काम कर सकता है। इससे भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को मजबूती मिलेगी।
‘मंगरोल’ नाम क्यों रखा गया?
गुजरात के तटीय क्षेत्र से जुड़ा नाम
‘मंगरोल’ नाम गुजरात के सूरत जिले में स्थित तटीय नगर मंगरोल से लिया गया है। इस क्षेत्र का ऐतिहासिक समुद्री और सामरिक महत्व रहा है।
भारतीय नौसेना में युद्धपोतों के नामकरण की परंपरा के अंतर्गत इस जहाज को पूर्ववर्ती माइनस्वीपर (Minesweeper) ‘मंगरोल’ का नाम दिया गया है। पुराने मंगरोल युद्धपोत को वर्ष 2004 में नौसेना की सेवा से हटा दिया गया था।
इस प्रकार, नए युद्धपोत का नामकरण भारतीय नौसेना के पुराने जहाजों की विरासत और उनकी ऐतिहासिक पहचान को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
माहे श्रेणी के पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की प्रमुख विशेषताएँ
निर्माण परियोजना और अनुबंध
रक्षा मंत्रालय और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के बीच 30 अप्रैल 2019 को आठ पनडुब्बी रोधी उथले जल क्षेत्र युद्धपोतों के निर्माण के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे।
इन युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है। इस श्रेणी का पहला युद्धपोत INS माहे है।
माहे श्रेणी के अन्य युद्धपोत
माहे श्रेणी के युद्धपोत भारतीय तट के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बंदरगाहों और तटीय स्थानों के नाम पर रखे गए हैं। इनका उद्देश्य पुराने माइनस्वीपर युद्धपोतों की विरासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ तटीय क्षेत्रों में नौसेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करना है।
इस श्रेणी से संबंधित प्रमुख तथ्य निम्नलिखित हैं:
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INS माहे: इस श्रेणी का पहला युद्धपोत है।
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मालवन: इसे 31 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। यह माहे श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है और इसे 22 जुलाई को सेवा में शामिल किया गया।
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मंगरोल: इस श्रेणी का तीसरा युद्धपोत है, जिसे 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में सेवा में शामिल किया गया।
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अन्य युद्धपोत: मालपे, मुल्की, मगदला और मछलीपट्टनम भी इस श्रेणी के नामों में शामिल हैं।
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आठवाँ युद्धपोत: इस श्रेणी के आठवें और अंतिम युद्धपोत का कील-स्थापन (Keel Laying) 29 मई 2025 को किया गया था।
INS मंगरोल की प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ
पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता
INS मंगरोल को विशेष रूप से तटीय जलक्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनके विरुद्ध अभियान चलाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह उथले समुद्री क्षेत्रों में निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए उपयोगी है।
इस युद्धपोत का डिजाइन और निर्माण Det Norske Veritas (DNV) के वर्गीकरण नियमों के अनुरूप किया गया है।
यह युद्धपोत निम्नलिखित कार्यों में सक्षम है:
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पानी के भीतर निगरानी करना।
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खोज एवं बचाव अभियान चलाना।
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कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान (Low Intensity Maritime Operations—LIMO) संचालित करना।
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पनडुब्बी रोधी अभियान चलाना।
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समुद्री बारूदी सुरंगों से संबंधित युद्धक कार्यों में भाग लेना।
आधुनिक हथियार और सेंसर प्रणाली
INS मंगरोल को आधुनिक हथियारों और सेंसर प्रणालियों से सुसज्जित किया गया है, जिससे यह समुद्र के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम होता है।
इसके प्रमुख उपकरणों में शामिल हैं:
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अभय हल-माउंटेड सोनार (Abhay Hull-Mounted Sonar): पानी के भीतर मौजूद वस्तुओं और पनडुब्बियों का पता लगाने में सहायता करता है।
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हल्के टॉरपीडो (Lightweight Torpedoes): पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले हथियार।
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स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर: पनडुब्बियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए विकसित प्रणाली।
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मारीच उन्नत टॉरपीडो डिकॉय प्रणाली (Maareech Advanced Torpedo Decoy System): दुश्मन के टॉरपीडो से बचाव में सहायता करने वाली प्रणाली।
उथले जलक्षेत्र में संचालन क्षमता
इस युद्धपोत में तीन डीजल इंजन लगाए गए हैं और यह वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली (Waterjet Propulsion System) से संचालित होता है।
वॉटरजेट प्रणोदन के कारण जहाज को उथले जलक्षेत्रों में बेहतर गतिशीलता और दिशा बदलने की क्षमता मिलती है। यह विशेषता तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के दौरान उपयोगी होती है।
स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत
INS मंगरोल में लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह भारत में युद्धपोतों के डिजाइन, निर्माण और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़ती घरेलू क्षमता को दर्शाता है।
स्वदेशी सामग्री के अधिक उपयोग से भारतीय रक्षा उद्योग, जहाज निर्माण क्षेत्र और संबंधित तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, इससे देश की समुद्री सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए घरेलू स्तर पर युद्धपोतों के निर्माण की क्षमता मजबूत होती है।
इस प्रकार, INS मंगरोल का भारतीय नौसेना में शामिल होना तटीय रक्षा, पनडुब्बी रोधी अभियानों और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है।