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अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (IBCA) नए मुख्यालय में स्थानांतरित

India & World 📅 October 19, 2026

नई दिल्ली में IBCA के नए कार्यालय का उद्घाटन

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के 55, लोदी एस्टेट में अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (International Big Cat Alliance—IBCA) के नए कार्यालय परिसर का उद्घाटन किया।

इस नए कार्यालय का उद्देश्य गठबंधन की गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करना तथा दुनिया भर में बड़ी जंगली बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है। IBCA विभिन्न देशों, वैज्ञानिक संस्थानों, संरक्षण संगठनों और अन्य हितधारकों को एक साझा मंच प्रदान करता है, ताकि लुप्तप्राय और संकटग्रस्त बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (IBCA) क्या है?

अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन एक बहुदेशीय और बहु-एजेंसी पहल है, जिसका उद्देश्य दुनिया की सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों का संरक्षण करना है। इस गठबंधन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अप्रैल 2023 को ‘प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम’ के दौरान की थी।

इसके बाद 29 फरवरी 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में मुख्यालय के साथ IBCA की स्थापना को मंजूरी दी।

इस गठबंधन का उद्देश्य केवल वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के व्यापक प्रयासों में भी योगदान देता है।

IBCA के अंतर्गत संरक्षित की जाने वाली सात बड़ी बिल्ली प्रजातियाँ

IBCA का प्रमुख उद्देश्य दुनिया की सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

इन सात प्रजातियों में शामिल हैं:

  1. बाघ (Tiger): एशिया में पाया जाने वाला एक प्रमुख शिकारी जीव, जो वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  2. शेर (Lion): मुख्य रूप से अफ्रीका में पाया जाता है। एशियाई शेर की एक महत्वपूर्ण आबादी भारत के गुजरात स्थित गिर क्षेत्र में पाई जाती है।

  3. तेंदुआ (Leopard): विभिन्न प्रकार के वन, पहाड़ी और अन्य प्राकृतिक आवासों में रहने वाली अनुकूलन क्षमता से युक्त बड़ी बिल्ली प्रजाति।

  4. हिम तेंदुआ (Snow Leopard): मध्य और दक्षिण एशिया के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला दुर्लभ शिकारी जीव।

  5. चीता (Cheetah): अपनी तेज गति के लिए प्रसिद्ध शिकारी जीव, जिसका संरक्षण प्राकृतिक आवासों और उपयुक्त शिकार प्रजातियों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

  6. जगुआर (Jaguar): मुख्य रूप से मध्य और दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला शक्तिशाली शिकारी जीव।

  7. प्यूमा (Puma): अमेरिका महाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाने वाला बड़ा मांसाहारी जीव, जिसे कूगर या माउंटेन लायन भी कहा जाता है।

इन प्रजातियों का संरक्षण खाद्य शृंखला, जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

IBCA की स्थापना और संस्थागत संरचना

IBCA की स्थापना भारत सरकार द्वारा की गई है। इसकी स्थापना में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority—NTCA) ने नोडल संगठन के रूप में भूमिका निभाई है।

यह गठबंधन विभिन्न देशों और संस्थाओं को एक साथ लाता है। इसमें बड़ी बिल्ली प्रजातियों के प्राकृतिक आवास वाले देश, इन प्रजातियों के प्राकृतिक आवास से बाहर स्थित लेकिन संरक्षण में रुचि रखने वाले देश, संरक्षण साझेदार, वैज्ञानिक संस्थान, अनुसंधान संगठन और संरक्षण के लिए सहयोग देने वाले व्यावसायिक समूह शामिल हैं।

गठबंधन का उद्देश्य अलग-अलग देशों में उपलब्ध संरक्षण संबंधी अनुभवों, वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करके वैश्विक स्तर पर संरक्षण प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाना है।

IBCA के सदस्य देश और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी

दिए गए विवरण के अनुसार, भारत सहित दुनिया के 29 देश IBCA के सदस्य बन चुके हैं। इसके अतिरिक्त, पाँच देशों ने पर्यवेक्षक (Observer) का दर्जा स्वीकार किया है और 11 अन्य देशों ने गठबंधन का सदस्य बनने पर सहमति व्यक्त की है।

IBCA का सदस्यता ढाँचा उन देशों के लिए भी सहयोग के अवसर उपलब्ध कराता है, जहाँ ये बड़ी बिल्ली प्रजातियाँ प्राकृतिक रूप से नहीं पाई जातीं, लेकिन वे इनके संरक्षण में योगदान देना चाहते हैं।

इस तरह गठबंधन संरक्षण को किसी एक देश की जिम्मेदारी मानने के बजाय साझा वैश्विक दायित्व के रूप में देखता है।

IBCA के प्रमुख उद्देश्य और कार्य

1. अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना

IBCA का प्रमुख उद्देश्य बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े देशों, संगठनों और विशेषज्ञों के बीच सहयोग तथा समन्वय को मजबूत करना है।

अलग-अलग देशों में अपनाई गई सफल संरक्षण पद्धतियों को साझा करके वन्यजीवों की सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों का बेहतर समाधान खोजा जा सकता है।

2. संरक्षण की सर्वोत्तम पद्धतियों का प्रसार

गठबंधन का उद्देश्य बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण में अपनाई जाने वाली प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पद्धतियों का प्रसार करना है।

इससे सदस्य देशों को वन्यजीव निगरानी, प्राकृतिक आवास प्रबंधन, अवैध शिकार की रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने जैसे क्षेत्रों में उपयोगी जानकारी प्राप्त हो सकती है।

3. तकनीकी ज्ञान का साझा भंडार विकसित करना

IBCA एक साझा मंच और केंद्रीय तकनीकी ज्ञान भंडार विकसित करने की परिकल्पना करता है। इसके माध्यम से संरक्षण से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी, अनुसंधान निष्कर्ष और विशेषज्ञता विभिन्न देशों के बीच साझा की जा सकती है।

इससे उन देशों को भी लाभ मिल सकता है, जहाँ बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए संसाधन या तकनीकी विशेषज्ञता सीमित हैं।

4. वित्तीय संसाधनों और संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना

बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन, प्रशिक्षित कर्मचारी, आधुनिक तकनीक और दीर्घकालिक योजनाएँ आवश्यक हैं।

IBCA का उद्देश्य संरक्षण के लिए वित्तीय सहायता जुटाने और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना है। इससे संरक्षण कार्यक्रमों को अधिक स्थिरता और व्यापकता मिल सकती है।

5. प्रजाति-विशिष्ट संरक्षण पहलों को मजबूत करना

दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में कुछ बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए पहले से ही विशेष कार्यक्रम, अंतरसरकारी मंच और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क कार्यरत हैं।

IBCA का उद्देश्य इन मौजूदा पहलों के साथ तालमेल स्थापित करना और उनके प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाना है, न कि आवश्यक रूप से उनका स्थान लेना।

6. जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा

बड़ी बिल्ली प्रजातियाँ अपने प्राकृतिक आवासों में शीर्ष शिकारी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनकी उपस्थिति शिकार प्रजातियों की आबादी और व्यापक पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है।

इनका संरक्षण प्राकृतिक आवासों, वन्यजीव गलियारों और अन्य जीव-जंतुओं की सुरक्षा में भी सहायक हो सकता है।

7. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में योगदान

वनों और प्राकृतिक आवासों का संरक्षण जैव विविधता बनाए रखने के साथ-साथ पारिस्थितिक तंत्रों की जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन क्षमता को मजबूत कर सकता है।

IBCA का व्यापक दृष्टिकोण वन्यजीव संरक्षण को पारिस्थितिक सुरक्षा और भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के प्रयासों से जोड़ता है।

IBCA का वैश्विक महत्व

अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत की एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहल है। यह बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण को साझा वैश्विक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाता है।

इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि इन प्रजातियों के सामने प्राकृतिक आवासों का विनाश, अवैध शिकार, शिकार प्रजातियों की कमी और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी अनेक चुनौतियाँ हैं। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर के प्रयास पर्याप्त नहीं होते; कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी आवश्यक होता है।

IBCA के माध्यम से भारत विभिन्न देशों और संरक्षण संस्थाओं के साथ वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता और सफल संरक्षण पद्धतियों को साझा करने के अवसर विकसित कर सकता है। इससे बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा को भी बढ़ावा मिल सकता है।