छह राज्यों में राज्यपालों की नई नियुक्तियाँ
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति की। इन नियुक्तियों के तहत केरलम, तमिलनाडु, सिक्किम, कर्नाटक, उत्तराखंड और ओडिशा के राज्यपालों में बदलाव किया गया।
केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उन्होंने 2 जनवरी 2025 को केरलम के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। इसके अतिरिक्त, वे 12 मार्च 2026 से तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे।
सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरलम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं दुष्यंत गौतम, सुधा यादव, ढाल सिंह बिसेन और ब्रजमोहन राम को क्रमशः सिक्किम, कर्नाटक, उत्तराखंड और ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
छह राज्यों में नियुक्त किए गए राज्यपाल
| राज्य | नवनियुक्त राज्यपाल |
|---|---|
| तमिलनाडु | राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर |
| केरलम | ओम प्रकाश माथुर |
| सिक्किम | दुष्यंत गौतम |
| कर्नाटक | सुधा यादव |
| उत्तराखंड | ढाल सिंह बिसेन |
| ओडिशा | ब्रजमोहन राम |
राज्यपाल की भूमिका और संवैधानिक स्थिति
राज्यपाल का पद और महत्व
राज्यपाल किसी राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। केंद्र में राष्ट्रपति की तरह राज्य में राज्यपाल का पद संवैधानिक प्रमुख का पद है। राज्य की कार्यपालिका की शक्तियाँ राज्यपाल में निहित होती हैं, लेकिन सामान्यतः उनका प्रयोग मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की सहायता एवं सलाह के अनुसार किया जाता है।
राज्यपाल की भूमिका केवल औपचारिक नहीं है। वह राज्य में संवैधानिक व्यवस्था के संरक्षण, शासन की निरंतरता और केंद्र तथा राज्य के बीच संवैधानिक संपर्क बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राज्यपाल को मंत्रिपरिषद से परामर्श प्राप्त करने, आवश्यक मामलों में चेतावनी देने और प्रोत्साहित करने की भूमिका से भी जोड़ा जाता है। इस संदर्भ में राज्यपाल को मंत्रिपरिषद का ‘मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ कहा जाता है।
अनुच्छेद 153: प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान करता है।
हालाँकि, सातवें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 के माध्यम से इसमें बदलाव किया गया। इसके बाद एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक और संवैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार राज्यपाल के पद की व्यवस्था करना है।
अनुच्छेद 154: राज्य की कार्यपालिका शक्ति
संविधान के अनुच्छेद 154 के अनुसार, राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है। राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से संविधान के प्रावधानों के अनुरूप करता है।
व्यवहार में, संसदीय शासन प्रणाली के अंतर्गत राज्य की निर्वाचित सरकार और मंत्रिपरिषद शासन का संचालन करती हैं तथा राज्यपाल सामान्यतः उनकी संवैधानिक सलाह के अनुसार कार्य करता है।
अनुच्छेद 155: राज्यपाल की नियुक्ति
अनुच्छेद 155 के अनुसार, राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनके हस्ताक्षर और मुहर सहित जारी वारंट के माध्यम से की जाती है।
इस प्रकार, राज्यपाल का पद प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से नहीं भरा जाता, बल्कि राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति की जाती है।
अनुच्छेद 156: राज्यपाल का कार्यकाल
अनुच्छेद 156 के अनुसार, राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। सामान्यतः राज्यपाल का कार्यकाल पद ग्रहण करने की तारीख से पाँच वर्ष का होता है।
हालाँकि, पाँच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने से पहले भी राज्यपाल पद छोड़ सकता है या राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
राज्यपाल राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षरयुक्त पत्र के माध्यम से त्यागपत्र भी दे सकता है।
राज्यपाल बनने की योग्यताएँ
राज्यपाल के पद पर नियुक्त होने के लिए संविधान में दो प्रमुख योग्यताएँ निर्धारित की गई हैं:
-
व्यक्ति भारत का नागरिक होना चाहिए।
-
उसकी आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए।
इन योग्यताओं के अतिरिक्त, संविधान के अनुच्छेद 158 में राज्यपाल के पद से संबंधित कुछ शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।
अनुच्छेद 158: राज्यपाल के पद की शर्तें
अनुच्छेद 158 के अनुसार, राज्यपाल संसद या किसी राज्य के विधानमंडल का सदस्य नहीं हो सकता। यदि कोई सांसद या विधायक राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, तो पद ग्रहण करने की तारीख से उसकी संबंधित सदस्यता समाप्त मानी जाती है।
राज्यपाल कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं कर सकता। उसे अपने आधिकारिक आवास का निःशुल्क उपयोग करने का अधिकार होता है तथा संसद द्वारा कानून के माध्यम से निर्धारित वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएँ प्राप्त होती हैं।
इन प्रावधानों का उद्देश्य राज्यपाल के पद की गरिमा, स्वतंत्रता और संवैधानिक निष्पक्षता बनाए रखना है।
अनुच्छेद 164: मुख्यमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति
संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार, मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है। अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल द्वारा की जाती है।
संसदीय शासन व्यवस्था में सामान्यतः राज्यपाल उस व्यक्ति को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है, जो विधानसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त करने की स्थिति में हो।
मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद राज्य के प्रशासन का संचालन करते हैं तथा सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
अनुच्छेद 165: राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति
अनुच्छेद 165 के अनुसार, राज्यपाल राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति करता है।
महाधिवक्ता राज्य सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है। वह राज्य सरकार को कानूनी मामलों में सलाह देता है और राज्यपाल द्वारा सौंपे गए कानूनी कर्तव्यों का निर्वहन करता है।
अनुच्छेद 174: विधानसभा का सत्र बुलाना, सत्रावसान और विघटन
संविधान का अनुच्छेद 174 राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र बुलाने, सत्रावसान करने और विधानसभा को भंग करने से संबंधित शक्तियाँ प्रदान करता है।
अनुच्छेद 174(1) के अनुसार, राज्यपाल समय-समय पर विधानमंडल के सदन या सदनों को बैठक के लिए बुलाता है। दो सत्रों की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
सामान्यतः राज्यपाल इन शक्तियों का प्रयोग राज्य की मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार करता है, हालाँकि कुछ विशेष संवैधानिक परिस्थितियों में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारतीय संघीय व्यवस्था में राज्यपाल का महत्व
राज्यपाल भारतीय संघीय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। वह राज्य की संवैधानिक व्यवस्था के संचालन, निर्वाचित सरकार के गठन और केंद्र तथा राज्य के बीच संस्थागत संपर्क बनाए रखने में भूमिका निभाता है।
राज्यपाल की नियुक्ति, कार्यकाल और शक्तियों से संबंधित प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं कि राज्य का प्रशासन संविधान के अनुरूप संचालित हो। साथ ही, राज्यपाल की भूमिका को समझने के लिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भारत में वास्तविक कार्यपालिका संबंधी निर्णय सामान्यतः मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद द्वारा लिए जाते हैं, जबकि राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करता है।