Skip to content

रियाद हवाई अड्डे पर हूती मिसाइल हमला, 13 लोगों की मौत

International 📅 October 19, 2026

11 अक्टूबर को सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए मिसाइल हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। इस हमले में 300 से अधिक लोग घायल हुए।

रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (King Khalid International Airport) को निशाना बनाकर किया गया यह हमला, हवाई अड्डे पर हुए कई हमलों की नवीनतम घटना थी। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी ली।

क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय दूतावास ने सऊदी अरब में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों को सतर्क और सावधान रहने, आवश्यकता पड़ने पर घरों के अंदर रहने तथा स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी।

यह हमला सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच हुआ। हाल के सप्ताहों में हूती विद्रोहियों ने ड्रोन और मिसाइलों के माध्यम से सीमा क्षेत्रों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और नागरिक बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष का क्षेत्रीय प्रभाव

लाल सागर के तट पर हूती विद्रोहियों की बढ़त

सितंबर 2026 में हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट पर आगे बढ़ते हुए मोखा बंदरगाह (Port of Mokha) और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित कुछ द्वीपों पर कब्जा कर लिया।

अक्टूबर की शुरुआत में यमन की सरकारी सेनाओं ने हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस लेने के लिए जवाबी सैन्य अभियान शुरू किया। इस अभियान को सऊदी अरब के नेतृत्व में किए गए हवाई हमलों का समर्थन प्राप्त था। इसका उद्देश्य राजधानी सना (Sana’a) सहित हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर फिर से नियंत्रण स्थापित करना था।

इसके जवाब में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है। यह यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस क्षेत्र में संघर्ष को अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के क्षेत्रीय प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। फारस की खाड़ी में स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे लाल सागर के समुद्री मार्ग का महत्व और बढ़ गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की गतिविधियों के कारण सऊदी अरब के लिए लाल सागर के रास्ते तेल का निर्यात करना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

सऊदी अधिकारियों और यमन की सरकार का कहना है कि उन्होंने लाल सागर के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर फिर से नियंत्रण स्थापित कर लिया है। हालाँकि, हूती विद्रोहियों ने इस दावे को खारिज किया है।

लाल सागर संकट (Red Sea Crisis)

लाल सागर और अदन की खाड़ी का महत्व

लाल सागर और अदन की खाड़ी दुनिया के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हैं। ये मार्ग यूरोप और एशिया को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लाल सागर स्वेज नहर (Suez Canal) से शुरू होकर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से अदन की खाड़ी से जुड़ता है। इस मार्ग से होकर बड़ी मात्रा में व्यापारिक जहाज, ऊर्जा संसाधन और अन्य वस्तुएँ परिवहन की जाती हैं।

इस समुद्री मार्ग का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्रीय आर्थिक विकास, बंदरगाहों के विस्तार और समुद्री वाणिज्य के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

समुद्री सुरक्षा के सामने चुनौतियाँ

लाल सागर क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के सामने गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं।

इन परिस्थितियों के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है और बंदरगाहों तथा समुद्री बुनियादी ढाँचे में निवेश की संभावनाएँ भी सीमित हो सकती हैं।

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य यमन, जिबूती और इरिट्रिया के निकट स्थित है। इस क्षेत्र में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के विरुद्ध समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है।

वैश्विक तेल आपूर्ति पर प्रभाव

बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

ऐतिहासिक रूप से, समुद्री मार्ग से होने वाले वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरता रहा है। वहीं, विश्व की तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ऐतिहासिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता रहा है।

इन क्षेत्रों में संघर्ष और समुद्री परिवहन में व्यवधान के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। तेल की कीमतें बढ़ने से परिवहन, उत्पादन और अन्य आर्थिक गतिविधियों की लागत भी बढ़ सकती है।

इस प्रकार, लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों में जारी संघर्ष का प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।