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भारत और लिकटेंस्टीन ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर सहमति जताई

India & World 📅 October 30, 2026

भारत और यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन (Liechtenstein) के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में एक महत्त्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलोइस (Prince Alois) के साथ बातचीत की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

प्रिंस एलोइस भारत की राजकीय यात्रा (State Visit) पर आए थे। उनके साथ हेरिडिटरी प्रिंसेस सोफी (Hereditary Princess Sophie) भी भारत आई थीं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूदा संबंधों को और अधिक व्यापक बनाना तथा आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग के नए अवसर तलाशना था।

भारत और लिकटेंस्टीन के बीच उच्चस्तरीय वार्ता

27 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलोइस के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बैठक में दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

दोनों नेताओं ने भारत और लिकटेंस्टीन के बीच पहले से मौजूद सहयोग की समीक्षा की तथा भविष्य में द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।

प्रिंस एलोइस की यह वर्ष 2026 में भारत की दूसरी यात्रा थी। इससे पहले वे फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit में शामिल होने के लिए भारत आए थे। इसके अतिरिक्त वे वर्ष 2010 और 2018 में भी भारत की यात्रा कर चुके हैं।

भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (India-EFTA) समझौता

भारत और लिकटेंस्टीन के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (European Free Trade Association – EFTA) की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

भारत और EFTA के बीच मार्च 2024 में व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते (Trade and Economic Partnership Agreement – TEPA) पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता अक्टूबर 2025 से लागू हुआ।

लिकटेंस्टीन इस संगठन का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रिंस एलोइस ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे भारत और EFTA देशों के बीच आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

इस समझौते का प्रमुख उद्देश्य व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।

भारत-EFTA व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) के प्रमुख लक्ष्य

भारत और EFTA के बीच हुए TEPA समझौते के अंतर्गत निवेश एवं रोजगार सृजन से संबंधित महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

  • निवेश लक्ष्य: अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाने का साझा उद्देश्य निर्धारित किया गया है।

  • रोजगार सृजन: EFTA देशों द्वारा भारत में लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों के सृजन को सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

  • आर्थिक सहयोग: दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को व्यापक बनाना।

  • औद्योगिक विकास: भारत में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करके औद्योगिक विकास को गति देना।

  • व्यापारिक अवसर: भारतीय और यूरोपीय कंपनियों के बीच व्यावसायिक सहयोग एवं बाजार तक पहुँच के अवसर बढ़ाना।

EFTA के सदस्य देश

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) चार देशों का एक अंतरसरकारी संगठन है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

इसके चार सदस्य देश निम्नलिखित हैं:

  1. आइसलैंड (Iceland)

  2. लिकटेंस्टीन (Liechtenstein)

  3. नॉर्वे (Norway)

  4. स्विट्जरलैंड (Switzerland)

भारत और EFTA के बीच TEPA समझौता इन चारों देशों के साथ भारत के आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है।

दोहरे कराधान से बचाव समझौता (Double Taxation Avoidance Agreement – DTAA)

भारत और लिकटेंस्टीन के नेताओं के बीच दोहरे कराधान से बचाव समझौते (DTAA) की संभावना पर भी चर्चा की गई।

DTAA एक ऐसा समझौता है, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या कंपनी की एक ही आय पर दो अलग-अलग देशों में दो बार कर लगाए जाने की स्थिति को कम करना या उससे बचाव करना है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई भारतीय कंपनी लिकटेंस्टीन में व्यापार करती है और वहाँ से आय अर्जित करती है, तो उस आय पर दोनों देशों में कराधान से संबंधित परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। DTAA ऐसी परिस्थितियों को व्यवस्थित करने में सहायता करता है।

इस प्रकार का समझौता दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार को प्रोत्साहित करने में सहायक हो सकता है। भारत और लिकटेंस्टीन के बीच इस विषय पर चर्चा द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।

लिकटेंस्टीन (Liechtenstein) के बारे में महत्त्वपूर्ण तथ्य

लिकटेंस्टीन यूरोप का एक छोटा लेकिन आर्थिक रूप से विकसित देश है। इसका आधिकारिक नाम प्रिंसिपैलिटी ऑफ लिकटेंस्टीन (Principality of Liechtenstein) है। यह आल्प्स पर्वत क्षेत्र में स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया के बीच स्थित है।

यह देश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पर्वतीय क्षेत्रों और शीतकालीन खेलों (Winter Sports) के लिए प्रसिद्ध है।

लिकटेंस्टीन की भौगोलिक स्थिति

लिकटेंस्टीन मध्य यूरोप में स्थित एक स्थलरुद्ध (Landlocked) देश है। इसके पश्चिम में स्विट्जरलैंड और पूर्व में ऑस्ट्रिया स्थित है।

  • महाद्वीप: यूरोप

  • भौगोलिक क्षेत्र: आल्प्स पर्वतीय क्षेत्र

  • क्षेत्रफल: लगभग 160 वर्ग किलोमीटर

  • राजधानी: वाडुज (Vaduz)

  • जनसंख्या: लगभग 40,000

  • पड़ोसी देश: स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया

  • प्रमुख विशेषता: शीतकालीन खेल एवं पर्वतीय पर्यटन

क्षेत्रफल की दृष्टि से लिकटेंस्टीन यूरोप का चौथा सबसे छोटा और विश्व का छठा सबसे छोटा देश है।

विश्व के दोहरे स्थलरुद्ध देश (Double Landlocked Countries)

लिकटेंस्टीन विश्व के केवल दो दोहरे स्थलरुद्ध देशों में से एक है। दूसरा देश उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) है।

दोहरे स्थलरुद्ध देश का अर्थ ऐसे देश से है, जिसकी न तो स्वयं समुद्र तक सीधी पहुँच होती है और न ही उसके पड़ोसी देशों की समुद्र तक सीधी पहुँच होती है।

इसका अर्थ है कि समुद्र तक पहुँचने के लिए इन देशों को कम-से-कम दो देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ पार करनी पड़ती हैं।

इस प्रकार विश्व में केवल दो देश लिकटेंस्टीन और उज्बेकिस्तान इस श्रेणी में आते हैं।

लिकटेंस्टीन की शासन व्यवस्था

लिकटेंस्टीन एक संवैधानिक वंशानुगत राजतंत्र (Constitutional Hereditary Monarchy) है, जिसकी शासन व्यवस्था लोकतांत्रिक-संसदीय सिद्धांतों पर आधारित है।

इस देश में राजशाही और लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था दोनों का समन्वय देखने को मिलता है।

देश के शासन में राजकुमार, संसद और सरकार की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

लिकटेंस्टीन के राष्ट्राध्यक्ष

लिकटेंस्टीन के आधिकारिक राष्ट्राध्यक्ष प्रिंस हांस-आदम द्वितीय (Prince Hans-Adam II) हैं।

उन्होंने 13 नवंबर 1989 को शासन की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए रीजेंसी (Regency) संभाली थी।

15 अगस्त 2004 को प्रिंस हांस-आदम द्वितीय ने अपने उत्तराधिकारी प्रिंस एलोइस को उप-राष्ट्राध्यक्ष (Deputy Head of State) नियुक्त किया।

इस नियुक्ति के बाद प्रिंस एलोइस को राष्ट्राध्यक्ष की ओर से आधिकारिक कार्यों का निर्वहन करने का अधिकार प्राप्त हुआ।

लिकटेंस्टीन की सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था

लिकटेंस्टीन की सरकार देश की कार्यपालिका (Executive Authority) के रूप में कार्य करती है।

सरकार में कुल पाँच सदस्य होते हैं, जिनमें एक प्रधानमंत्री और चार मंत्री शामिल होते हैं।

सरकार के गठन की प्रक्रिया में संसद और शासक राजकुमार दोनों की भूमिका होती है।

  • संसद सरकार के पाँचों सदस्यों के नाम प्रस्तावित करती है।

  • इसके बाद शासक राजकुमार द्वारा उनकी नियुक्ति की जाती है।

  • सरकार का नेतृत्व प्रधानमंत्री करता है।

  • लिकटेंस्टीन की संसद और सरकार का विधायी कार्यकाल चार वर्ष का होता है।

इस प्रकार लिकटेंस्टीन की शासन व्यवस्था में राजशाही, संसदीय लोकतंत्र और कार्यपालिका के बीच शक्तियों का समन्वय स्थापित किया गया है।

भारत-लिकटेंस्टीन संबंधों का महत्त्व

भारत और लिकटेंस्टीन के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के लिए आयोजित यह उच्चस्तरीय बैठक आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है।

भारत के लिए लिकटेंस्टीन के साथ संबंधों को मजबूत करना इसलिए भी उपयोगी है, क्योंकि यह देश EFTA का सदस्य है और भारत-EFTA TEPA समझौते के क्रियान्वयन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

निवेश, रोजगार, व्यापार और कराधान से संबंधित सहयोग के माध्यम से दोनों देश अपनी आर्थिक साझेदारी को और व्यापक बना सकते हैं।

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