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ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के हमलों से प्रभावित परमाणु स्थलों के निरीक्षण के लिए IAEA को प्रवेश देने से किया इनकार

International 📅 October 30, 2026
– अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency — IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने 27 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सूचित किया कि इज़राइल और अमेरिका के सैन्य हमलों के कारण निरीक्षकों की पहुँच बाधित होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद भी एजेंसी यह पुष्टि नहीं कर सकती कि ईरान की निगरानी के अधीन परमाणु सामग्री का कोई हिस्सा कहीं और स्थानांतरित नहीं किया गया है।

– सितंबर में IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने परमाणु सुरक्षा उपायों (Nuclear Safeguards) से संबंधित दायित्वों का लगातार पालन न करने के कारण ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समक्ष संदर्भित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया।

– पिछले दो दशकों में यह पहली बार था, जब IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने किसी मामले को इस प्रकार सुरक्षा परिषद के समक्ष भेजा।

IAEA द्वारा उठाई गई प्रमुख चिंताएँ

– जून 2025 में इज़राइल के हवाई हमलों तथा 2026 की शुरुआत में इज़राइल और अमेरिका के संयुक्त हमलों से प्रभावित परमाणु स्थलों पर IAEA के निरीक्षक अब तक वापस नहीं लौट सके हैं।

– संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी को इन स्थलों की मरम्मत या पुनर्निर्माण से संबंधित कोई संकेत नहीं मिला है।

– IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने कहा कि इस स्थिति को सुधारा जा सकता है और ऐसा करना आवश्यक है।

– नियमित निरीक्षण अभी तक दोबारा शुरू नहीं हुए हैं। ईरान ने अपनी निगरानी के अधीन परमाणु सुविधाओं में पहले घोषित परमाणु सामग्री का सत्यापन करने के लिए आवश्यक जानकारी और पहुँच भी उपलब्ध नहीं कराई है। इसमें वे सुविधाएँ भी शामिल हैं, जो हमलों से प्रभावित हुई थीं और वे भी, जो प्रभावित नहीं हुई थीं।

– विशेष चिंता का विषय ईरान द्वारा घोषित 440 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium — HEU) का भंडार है।

– IAEA, इस्फ़हान ईंधन संवर्धन संयंत्र (Isfahan Fuel Enrichment Plant) तक पहुँच की भी माँग कर रहा है। ईरान ने जून 2025 के हमलों से ठीक पहले इस संयंत्र की घोषणा की थी।

– परमाणु सुरक्षा उपायों के अंतर्गत संयंत्र की स्थिति का सत्यापन करने और यह पता लगाने के लिए कि वहाँ परमाणु सामग्री मौजूद है या नहीं, IAEA निरीक्षकों की पहुँच आवश्यक है।

– बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Bushehr Nuclear Power Plant — BNPP) एकमात्र ऐसा अपवाद है, जहाँ IAEA के निरीक्षक वर्तमान में सत्यापन संबंधी गतिविधियाँ कर रहे हैं।

– बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के संदर्भ में, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (Atomic Energy Organisation of Iran — AEOI) ने IAEA के साथ रचनात्मक सहयोग किया है। इसका उद्देश्य प्रयुक्त परमाणु ईंधन (Spent Fuel) को एक नए शुष्क भंडारण केंद्र में स्थानांतरित करने से पहले उसके सत्यापन के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

– प्रयुक्त परमाणु ईंधन का यह स्थानांतरण अगले वर्ष की शुरुआत में होने की संभावना है।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की भूमिका क्या है?

– अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को संयुक्त राष्ट्र परिवार में व्यापक रूप से ‘शांति और विकास के लिए परमाणु ऊर्जा’ (Atoms for Peace and Development) संगठन के रूप में जाना जाता है।

– IAEA परमाणु क्षेत्र में वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग के लिए विश्व का प्रमुख अंतर-सरकारी मंच है।

– यह एजेंसी अपने सदस्य देशों और विश्वभर के विभिन्न साझेदारों के साथ मिलकर परमाणु प्रौद्योगिकी के सुरक्षित, संरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देती है। इसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में योगदान दिया जाता है।

– स्थापना: IAEA की स्थापना वर्ष 1957 में परमाणु प्रौद्योगिकी की खोजों और उसके विभिन्न उपयोगों से उत्पन्न आशंकाओं तथा अपेक्षाओं के जवाब में की गई थी।

– स्थापना की पृष्ठभूमि: अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर ने 8 दिसंबर, 1953 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘Atoms for Peace’ नामक ऐतिहासिक संबोधन दिया था। इसी पहल ने IAEA की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।

– आधिकारिक स्थापना: 29 जुलाई, 1957 को राष्ट्रपति आइजनहावर द्वारा IAEA के संविधि (Statute) की अमेरिकी पुष्टि किए जाने के साथ एजेंसी का आधिकारिक अस्तित्व शुरू हुआ।

– मुख्यालय: अक्टूबर 1957 में प्रथम आम सम्मेलन (First General Conference) के प्रतिनिधियों ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में IAEA का मुख्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया।

– सदस्य देश: IAEA के कुल 182 सदस्य देश हैं।

– भारत की सदस्यता: भारत IAEA का संस्थापक सदस्य है।

– क्षेत्रीय कार्यालय: IAEA के दो क्षेत्रीय कार्यालय टोरंटो (कनाडा) और टोक्यो (जापान) में स्थित हैं।

– संपर्क कार्यालय: इसके दो संपर्क कार्यालय न्यूयॉर्क (अमेरिका) और जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में हैं।

– प्रयोगशालाएँ: एजेंसी की परमाणु प्रौद्योगिकी से संबंधित विशेष प्रयोगशालाएँ वियना, साइबर्सडॉर्फ और मोनाको में स्थित हैं।

IAEA के प्रमुख नीति-निर्धारक निकाय

IAEA के नीति-निर्धारक निकाय एजेंसी के कार्यक्रमों और बजट से संबंधित निर्णय लेते हैं। इनमें दो प्रमुख निकाय शामिल हैं:

1. आम सम्मेलन (General Conference)

  • इसमें IAEA के सभी सदस्य देश शामिल होते हैं।

  • इसका आयोजन प्रत्येक वर्ष सामान्यतः सितंबर में वियना स्थित मुख्यालय में किया जाता है।

2. बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Board of Governors)

  • इसमें 35 सदस्य होते हैं।

  • यह बोर्ड सामान्यतः वर्ष में पाँच बार बैठक करता है—मार्च और जून में एक-एक बार, सितंबर में दो बार तथा नवंबर में एक बार।

  • सितंबर की दोनों बैठकें आम सम्मेलन से पहले और उसके बाद आयोजित की जाती हैं।

– भारत की वर्तमान सदस्यता: भारत वर्ष 2026–2027 की अवधि के लिए IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का सदस्य है।

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