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हानि और क्षति से निपटने के लिए कोष (FRLD) क्या है?

– हानि और क्षति से निपटने के लिए कोष (Fund for Responding to Loss and Damage — FRLD) के बोर्ड ने नेपाल के लिए अपनी उपलब्ध वित्तीय प्रतिबद्धता सीमा में से 2.16 करोड़ अमेरिकी डॉलर (21.6 मिलियन डॉलर) की राशि अस्थायी रूप से निर्धारित की है।

– यह निर्णय 22 अक्टूबर को आयोजित बोर्ड की पहली विशेष आपात बैठक (Extraordinary Meeting) के दौरान लिया गया।

– FRLD के बोर्ड में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) और वर्ष 2015 के पेरिस समझौते के पक्षकार देशों के 26 सदस्य शामिल हैं।

– 26 अगस्त को जलवायु परिवर्तन से प्रेरित बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के कारण नेपाल में बड़े पैमाने पर मलबे का प्रवाह और निचले क्षेत्रों में भीषण बाढ़ आई। इससे भोटे कोशी-त्रिशूली-नारायणी नदी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस आपदा में कई लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य लोग लापता हो गए।

FRLD क्या है?

– जलवायु परिवर्तन का प्रभाव विकासशील देशों पर असमान रूप से अधिक पड़ता है। इसके कारण इन देशों को भारी आर्थिक और गैर-आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इससे विकास की प्रगति बाधित होती है, गरीबी बढ़ती है, लोगों को विस्थापित होना पड़ता है और आजीविका के साधन अस्थिर हो जाते हैं।

– हानि और क्षति से निपटने के लिए कोष (FRLD) की स्थापना संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) के पक्षकारों के सम्मेलन (COP) तथा पेरिस समझौते के पक्षकारों की बैठक के रूप में कार्य करने वाले सम्मेलन (CMA) द्वारा की गई।

– इस कोष का प्रमुख उद्देश्य उन विकासशील देशों की सहायता करना है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। इसके अंतर्गत चरम मौसमी घटनाओं तथा धीरे-धीरे घटित होने वाली जलवायु संबंधी घटनाओं से होने वाली आर्थिक और गैर-आर्थिक हानि एवं क्षति से निपटने में सहायता प्रदान की जाती है।

– वर्ष 2022 में मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित COP27 के दौरान एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन से होने वाली हानि और क्षति से निपटने के लिए एक विशेष कोष स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

– इसके बाद कोष की संरचना, कार्यप्रणाली और रूपरेखा तैयार करने में सहायता के लिए एक संक्रमणकालीन समिति (Transitional Committee) का गठन किया गया।

– वर्ष 2023 में संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में आयोजित COP28 के दौरान COP और CMA ने इस कोष को औपचारिक रूप से परिचालित करने का निर्णय लिया। इसे वित्तीय तंत्र के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई।

FRLD के प्रमुख उद्देश्य एवं कार्य

– संवेदनशील समुदायों को सहायता: विकासशील देशों के उन समुदायों की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करना, जो जलवायु परिवर्तन के अपरिवर्तनीय प्रभावों का सामना कर रहे हैं।

– पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय सहायता: जलवायु संबंधी आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई, पुनर्वास और पुनर्निर्माण से जुड़ी पहलों को वित्तीय सहायता प्रदान करना, ताकि प्रभावित समुदाय फिर से अपने जीवन और आजीविका को व्यवस्थित कर सकें।

– अनुकूलन क्षमता को मजबूत करना: प्रभावित समुदायों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुरूप स्वयं को ढालने तथा भविष्य के जोखिमों का सामना करने में सक्षम बनाना।

– देश-आधारित समाधान को बढ़ावा देना: यह सुनिश्चित करना कि वित्तीय सहायता से संबंधित योजनाएँ संबंधित देशों के नेतृत्व में और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार की जाएँ। इन योजनाओं में देशों की प्राथमिकताओं, परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है।

FRLD का प्रशासन एवं संस्थागत व्यवस्था

– वर्ष 2023 में इस कोष के संचालन और प्रशासन के लिए 26 सदस्यीय बोर्ड का गठन किया गया।

– वर्ष 2024 में फिलीपींस को बोर्ड के मेजबान देश के रूप में चुना गया।

– विश्व बैंक को इस कोष के सचिवालय (Secretariat) की मेजबानी करने तथा कोष के न्यासी (Trustee) के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

– इस प्रकार, FRLD का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से प्रभावित विकासशील देशों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें जलवायु संबंधी आपदाओं से हुई हानि एवं क्षति के बाद पुनर्निर्माण तथा पुनर्बहाली में सहायता देना है।

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