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भारत और पोलैंड ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने पर सहमति जताई

– पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 21 से 23 अक्टूबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा की।

– इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पोलिश समकक्ष डोनाल्ड टस्क ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक महत्त्व के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

बैठक के प्रमुख बिंदु

– अगस्त 2024 में भारत और पोलैंड के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक बढ़ाया गया था। साथ ही, वर्ष 2024-2028 के लिए भारत-पोलैंड कार्ययोजना (Action Plan) को अपनाया गया था।

– दोनों नेताओं ने कार्ययोजना की मध्यावधि समीक्षा का समर्थन किया।

– दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया।

– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोलिश कंपनियों को भारत में अपने निवेश और व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत के विशाल बाजार, कुशल कार्यबल तथा तेजी से विकसित हो रहे विनिर्माण और नवाचार तंत्र से लाभ उठाने पर जोर दिया।

– भारत ने आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure — CDRI) में शामिल होने की पोलैंड की घोषणा का स्वागत किया।

– दोनों नेताओं ने रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए रक्षा उद्योग संवाद (Defence Industry Dialogue) शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग का ढाँचा विकसित करना है। इसमें दोनों देशों की कंपनियों के बीच प्रत्यक्ष सहयोग तथा आपसी सहमति के आधार पर प्रौद्योगिकी साझेदारी, संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और अन्य औद्योगिक सहयोग के अवसर शामिल होंगे।

– दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (Comprehensive Convention on International Terrorism — CCIT) को शीघ्र अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आतंकवाद-रोधी मुद्दों पर संवाद करने पर भी सहमति जताई।

भारत-पोलैंड संबंध

– भारत और पोलैंड के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। इन संबंधों की विशेषता उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क और सक्रिय आर्थिक सहयोग है।

– दोनों देशों के बीच वर्ष 1954 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए। इसके बाद वर्ष 1957 में वारसॉ में भारतीय दूतावास खोला गया।

– दोनों देशों ने कठोर मुद्रा आधारित व्यापार व्यवस्था अपनाई। समय के साथ दोनों अर्थव्यवस्थाओं के विस्तार के साथ उनके बीच व्यापार का स्तर भी बढ़ता गया।

– वर्तमान सदी में भारत और पोलैंड के बीच राजनीतिक संबंध और मजबूत हुए हैं। विशेष रूप से, वर्ष 2004 में पोलैंड के यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने के बाद वह मध्य यूरोप में भारत का एक प्रमुख आर्थिक साझेदार बन गया।

– भारत और पोलैंड के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2013 में 1.95 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2025 में 6.36 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।

भारत और पोलैंड के बीच प्रमुख व्यापारिक वस्तुएँ

भारत से पोलैंड को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुएँ:

  • वस्त्र एवं कपड़ा उत्पाद

  • आधार धातुएँ और उनसे निर्मित वस्तुएँ

  • रासायनिक उद्योग के उत्पाद

  • मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरण

  • विद्युत एवं इलेक्ट्रो-तकनीकी उपकरण

  • जूते एवं फुटवियर

  • परिवहन उपकरण

  • रबर एवं रबर से निर्मित सामग्री

  • पत्थर से बनी वस्तुएँ, सिरेमिक उत्पाद और काँच

पोलैंड से भारत में आयात की जाने वाली प्रमुख वस्तुएँ:

  • मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरण

  • विद्युत एवं इलेक्ट्रो-तकनीकी उपकरण

  • खनिज उत्पाद

  • रासायनिक उद्योग के उत्पाद

  • प्रकाशीय एवं फोटोग्राफिक उपकरण

  • मापन एवं जाँच संबंधी उपकरण

भारत का पोलैंड में निवेश

– पोलैंड में भारतीय निवेश में पिछले वर्षों के दौरान लगातार वृद्धि हुई है। यह निवेश अब 3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

– भारतीय कंपनियाँ पोलैंड के आर्थिक विकास में भागीदार हैं और उन्होंने वहाँ बड़ी संख्या में स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।

– विशेष रूप से, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनियों ने पोलैंड में निवेश करके दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत किया है।

पोलैंड में भारतीय अध्ययन और संस्कृत का महत्त्व

– पोलैंड में भारतविद्या (Indology) के अध्ययन की एक समृद्ध परंपरा रही है। पोलिश विद्वानों ने 19वीं शताब्दी में ही संस्कृत ग्रंथों का पोलिश भाषा में अनुवाद करना शुरू कर दिया था।

– पोलैंड के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक, क्राको स्थित जागियेलोनियन विश्वविद्यालय (Jagiellonian University) में वर्ष 1860-61 के दौरान संस्कृत का अध्ययन किया जाता था। वर्ष 1893 में वहाँ संस्कृत अध्ययन के लिए एक विशेष पीठ की स्थापना की गई।

– वारसॉ विश्वविद्यालय के प्राच्य अध्ययन संस्थान (Oriental Institute) में वर्ष 1932 में स्थापित भारतविद्या विभाग मध्य यूरोप में भारतीय अध्ययन का सबसे बड़ा केंद्र है।

पोलैंड में जाम साहेब दिग्विजयसिंहजी की स्मृति

– अक्टूबर 2014 में पोलैंड की राजधानी वारसॉ के ओखोटा जिले में स्थित स्क्वायर ऑफ द गुड महाराजा (Square of the Good Maharaja) में नवानगर के जाम साहेब दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जाडेजा की स्मृति में एक स्मारक का अनावरण किया गया।

– पोलैंड के आठ प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों का नाम जाम साहेब के नाम पर रखा गया है। पोलैंड में उन्हें ‘गुड महाराजा’ (Good Maharaja) के नाम से जाना जाता है।

– द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, 1940 के दशक में, जाम साहेब ने युद्ध की विभीषिका से बचकर आए 1,000 से अधिक पोलिश शरणार्थियों, जिनमें मुख्य रूप से बच्चे शामिल थे, को आश्रय दिया था।

– पोलैंड में जीवित बचे इन बच्चों ने पोलिश लोगों का एक संगठन बनाया, जिसकी बैठक प्रतिवर्ष पोलैंड के किसी प्रमुख शहर में आयोजित की जाती है।

– नवंबर 2017 में वारसॉ में मोंटे कैसिनो युद्ध स्मारक के पास वालिवाडे-कोल्हापुर शिविर (Valivade-Kolhapur Camp) की स्मृति में एक अन्य पट्टिका का भी अनावरण किया गया।

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