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अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र दिवस 2026: 3 नवंबर को मनाया गया

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) द्वारा प्रतिवर्ष 3 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र दिवस (International Day for Biosphere Reserves) मनाया जाता है।

इस दिवस का उद्देश्य जैव विविधता के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा पर्यावरण और मानव समाज के बीच संतुलन बनाए रखने में जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क (World Network of Biosphere Reserves – WNBR) में वर्तमान में 145 देशों के 797 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।

ये क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहित करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र दिवस का महत्व

अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र दिवस प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण तथा सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

यह दिवस इस बात पर विशेष जोर देता है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उचित प्रबंधन के माध्यम से दोनों लक्ष्यों को एक साथ प्राप्त किया जा सकता है।

इस दिवस के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  1. जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

  2. प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित करना।

  3. जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की भूमिका को उजागर करना।

  4. स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना।

  5. पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करना।

  6. मानव गतिविधियों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच संतुलन स्थापित करना।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) क्या हैं?

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र ऐसे विशेष भौगोलिक क्षेत्र होते हैं, जहाँ जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और स्थानीय समुदायों के विकास को बढ़ावा दिया जाता है।

यूनेस्को के अनुसार, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र सतत विकास के लिए सीखने के स्थल (Learning Places for Sustainable Development) हैं।

इन क्षेत्रों में प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों और मानव समाज के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों के स्थानीय समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इनमें स्थलीय (Terrestrial), समुद्री (Marine) और तटीय (Coastal) पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हो सकते हैं।

इनका उद्देश्य जैव विविधता के संरक्षण और उसके सतत उपयोग के बीच संतुलन स्थापित करना है।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की प्रमुख विशेषताएँ

1. जैव विविधता का संरक्षण

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र विभिन्न प्रकार के पौधों, वन्यजीवों, पारिस्थितिकी तंत्रों और आनुवंशिक विविधता के संरक्षण में सहायता करते हैं।

2. सतत विकास को प्रोत्साहन

इन क्षेत्रों में ऐसी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है, जो पर्यावरण के अनुकूल हों तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान दें।

3. स्थानीय समुदायों की भागीदारी

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की योजना और प्रबंधन में स्थानीय समुदायों तथा संबंधित हितधारकों को शामिल किया जाता है।

4. वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी

ये क्षेत्र पर्यावरणीय परिवर्तन, जैव विविधता और मानव गतिविधियों के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्र के रूप में कार्य करते हैं।

5. राष्ट्रीय संप्रभुता के अंतर्गत संचालन

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों को संबंधित देशों की सरकारों द्वारा नामांकित किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने के बावजूद ये क्षेत्र संबंधित देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत ही रहते हैं।

6. वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान

ये क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर समाधान विकसित करते हैं।

विश्व में जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की स्थिति

यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क के अंतर्गत विभिन्न देशों के महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी क्षेत्रों को मान्यता प्रदान की जाती है।

प्रमुख तथ्य:

  • विश्व के पहले जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों को वर्ष 1976 में मान्यता प्रदान की गई थी।

  • यूनेस्को के नेटवर्क में 145 देशों के 797 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।

  • ये क्षेत्र अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महाद्वीपों में स्थित हैं।

  • इनका कुल क्षेत्रफल लगभग 75 लाख वर्ग किलोमीटर है।

  • ये पृथ्वी के स्थलीय क्षेत्रफल के 5 प्रतिशत से अधिक भाग से संबंधित हैं।

  • इन क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 30 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है।

विश्व का सबसे बड़ा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, माता अटलांटिका जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Mata Atlântica Biosphere Reserve) विश्व का सबसे बड़ा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है।

यह ब्राजील में स्थित है।

इसका क्षेत्रफल 88,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक बताया गया है।

यह क्षेत्र अटलांटिक वन पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

यहाँ अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ, वन्यजीव और स्थानिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों को मान्यता कौन प्रदान करता है?

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों को यूनेस्को के मानव एवं जैवमंडल कार्यक्रम (Man and the Biosphere Programme – MAB) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान की जाती है।

इसके लिए संबंधित देश की सरकार प्रस्तावित क्षेत्र का नामांकन प्रस्तुत करती है।

इसके बाद MAB अंतरराष्ट्रीय समन्वय परिषद (MAB International Coordinating Council – MAB ICC) द्वारा नामांकन का मूल्यांकन किया जाता है।

परिषद के निर्णय के आधार पर यूनेस्को के महानिदेशक द्वारा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान की जाती है।

मान्यता प्राप्त क्षेत्र संबंधित देश के अधिकार क्षेत्र में ही बना रहता है।

मानव एवं जैवमंडल कार्यक्रम (Man and the Biosphere Programme – MAB)

मानव एवं जैवमंडल कार्यक्रम यूनेस्को का एक अंतर-सरकारी वैज्ञानिक कार्यक्रम है।

इसकी शुरुआत वर्ष 1971 में की गई थी।

इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य मानव और पर्यावरण के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक आधार विकसित करना है।

इसके अंतर्गत जैव विविधता संरक्षण, सतत विकास, पर्यावरणीय अनुसंधान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाता है।

MAB कार्यक्रम के अंतर्गत ही विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क का संचालन किया जाता है।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों के तीन प्रमुख कार्य

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र तीन प्रमुख कार्यों को एकीकृत करते हैं।

1. संरक्षण कार्य (Conservation Function)

इसका उद्देश्य जैव विविधता और सांस्कृतिक विविधता का संरक्षण करना है।

इसके अंतर्गत प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों, वन्यजीवों, पौधों और आनुवंशिक संसाधनों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

2. विकास कार्य (Development Function)

इसका उद्देश्य सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

इसके अंतर्गत स्थानीय समुदायों की आजीविका, पर्यावरण-अनुकूल आर्थिक गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित किया जाता है।

3. सहयोगात्मक कार्य (Logistic Support Function)

इसका उद्देश्य अनुसंधान, पर्यावरणीय निगरानी, शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से संरक्षण तथा सतत विकास संबंधी गतिविधियों को सहयोग प्रदान करना है।

इस कार्य के अंतर्गत वैज्ञानिक अध्ययन और पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों के तीन प्रमुख क्षेत्र (Zones)

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों को उनके संरक्षण और विकास संबंधी उद्देश्यों के आधार पर तीन प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है।

तीन क्षेत्रों की अवधारणात्मक संरचना; वास्तविक सीमाएँ और आकार अलग-अलग हो सकते हैं।

1. कोर क्षेत्र (Core Area)

कोर क्षेत्र जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र का सबसे अधिक संरक्षित भाग होता है।

इसका प्रमुख उद्देश्य प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों, वन्यजीवों, वनस्पतियों और आनुवंशिक विविधता का संरक्षण करना है।

इस क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • जैव विविधता के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता।

  • प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों की सुरक्षा।

  • वन्यजीवों और संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण।

  • मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम रखना।

  • नियंत्रित वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी की अनुमति।

2. बफर क्षेत्र (Buffer Zone)

बफर क्षेत्र कोर क्षेत्र के चारों ओर या उससे सटा हुआ क्षेत्र होता है।

इसका उद्देश्य कोर क्षेत्र को बाहरी मानवीय गतिविधियों के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षित रखना है।

इस क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है।

प्रमुख गतिविधियाँ:

  • वैज्ञानिक अनुसंधान।

  • पर्यावरणीय निगरानी।

  • शिक्षा और प्रशिक्षण।

  • पारिस्थितिकी संरक्षण से संबंधित गतिविधियाँ।

  • नियंत्रित प्रकृति पर्यटन।

3. संक्रमण क्षेत्र (Transition Area)

संक्रमण क्षेत्र जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र का वह भाग होता है, जहाँ स्थानीय समुदायों द्वारा सतत आर्थिक और सामाजिक गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।

इस क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के साथ मानव विकास को भी महत्व दिया जाता है।

प्रमुख गतिविधियाँ:

  • सतत कृषि।

  • पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन।

  • स्थानीय आजीविका संबंधी गतिविधियाँ।

  • प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग।

  • सामुदायिक विकास कार्यक्रम।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों का वैज्ञानिक महत्व

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरणीय निगरानी के लिए महत्वपूर्ण स्थल हैं।

इन क्षेत्रों में जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी तंत्रों और मानव गतिविधियों के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।

यहाँ किए जाने वाले अनुसंधान से प्राप्त जानकारी पर्यावरण प्रबंधन और नीतिगत निर्णयों के निर्माण में सहायता करती है।

इसके अतिरिक्त ये क्षेत्र स्थानीय स्तर पर सतत विकास के नवीन उपायों का परीक्षण करने के लिए भी उपयोगी हैं।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे (Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework – KMGBF) के लक्ष्यों की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस ढाँचे को दिसंबर 2022 में कनाडा के मॉन्ट्रियल में आयोजित जैव विविधता सम्मेलन के COP15 में अपनाया गया था।

इसके अंतर्गत वर्ष 2030 तक जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्रों की पुनर्स्थापना से संबंधित महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

विशेष रूप से वर्ष 2030 तक पृथ्वी के कम-से-कम 30 प्रतिशत स्थलीय, अंतर्देशीय जलीय, समुद्री और तटीय क्षेत्रों के प्रभावी संरक्षण से संबंधित लक्ष्य महत्वपूर्ण है।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र इन लक्ष्यों की प्राप्ति में संरक्षण, अनुसंधान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के माध्यम से योगदान देते हैं।

भारत में जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

भारत अपनी भौगोलिक विविधता और समृद्ध जैव विविधता के कारण विश्व के महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी क्षेत्रों में शामिल है।

देश में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, उष्णकटिबंधीय वन, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र, मैंग्रोव वन और द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र पाए जाते हैं।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अनुसार, भारत में कुल 18 अधिसूचित जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं।

इनमें से 13 को यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में शामिल किया गया है।

यूनेस्को की विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र सूची में शामिल भारत के 13 क्षेत्र

क्रमांक

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

राज्य/केंद्रशासित प्रदेश

1

नीलगिरि (Nilgiri)

तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक

2

मन्नार की खाड़ी (Gulf of Mannar)

तमिलनाडु

3

सुंदरबन (Sundarbans)

पश्चिम बंगाल

4

नंदा देवी (Nanda Devi)

उत्तराखंड

5

नोकरेक (Nokrek)

मेघालय

6

पचमढ़ी (Pachmarhi)

मध्य प्रदेश

7

सिमिलिपाल (Similipal)

ओडिशा

8

अचानकमार-अमरकंटक (Achanakmar-Amarkantak)

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़

9

ग्रेट निकोबार (Great Nicobar)

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

10

अगस्त्यमाला (Agasthyamala)

केरल और तमिलनाडु

11

खांगचेंदजोंगा (Khangchendzonga)

सिक्किम

12

पन्ना (Panna)

मध्य प्रदेश

13

भारत का शीत मरुस्थल सांस्कृतिक परिदृश्य (Cold Desert Cultural Landscape of India)

हिमाचल प्रदेश

यूनेस्को की विश्व सूची में शामिल नहीं भारत के पाँच जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

भारत के निम्नलिखित पाँच अधिसूचित जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों को अभी तक यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में शामिल नहीं किया गया है।

क्रमांक

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

राज्य

1

मानस (Manas)

असम

2

डिब्रू-सैखोवा (Dibru-Saikhowa)

असम

3

देहांग-दिबांग (Dehang-Dibang)

अरुणाचल प्रदेश

4

कच्छ का महान रण (Great Rann of Kutch)

गुजरात

5

शेषाचलम (Seshachalam)

आंध्र प्रदेश

भारत के जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

1. नीलगिरि जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

  • नीलगिरि भारत का पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1986 में की गई थी।
  • यह तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में विस्तृत है।

2. मन्नार की खाड़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

  • यह तमिलनाडु में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है।
  • यह समुद्री जैव विविधता, प्रवाल भित्तियों और समुद्री घास के मैदानों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।

3. सुंदरबन जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

  • यह पश्चिम बंगाल में स्थित है और अपने विशाल मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्रसिद्ध है।
  • यह रॉयल बंगाल टाइगर का महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास भी है।

4. नंदा देवी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

  • यह उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित है।
  • यह उच्च हिमालयी जैव विविधता तथा पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

5. ग्रेट निकोबार जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

  • यह अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है।
  • यह उष्णकटिबंधीय वर्षावनों और द्वीपीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

6. खांगचेंदजोंगा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

  • यह सिक्किम में स्थित है।
  • यह हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र और उच्च पर्वतीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

7. पन्ना जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

  • यह मध्य प्रदेश में स्थित है।
  • यह बाघ संरक्षण और मध्य भारतीय वन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

8. शीत मरुस्थल सांस्कृतिक परिदृश्य

  • यह हिमाचल प्रदेश में स्थित है।
  • यह शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र, उच्च हिमालयी जैव विविधता और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों का पर्यावरणीय महत्व

1. संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण – जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र संकटग्रस्त और स्थानिक प्रजातियों के प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने में सहायता करते हैं।

2. जलवायु परिवर्तन से निपटने में योगदान – वनों और अन्य प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण कार्बन अवशोषण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक होता है।

3. पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखना – ये क्षेत्र विभिन्न प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों के बीच पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं।

4. स्थानीय समुदायों की आजीविका – जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों में सतत कृषि, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन और अन्य आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है।

5. पर्यावरणीय शिक्षा और अनुसंधान – ये क्षेत्र वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों का अध्ययन करने के अवसर प्रदान करते हैं।

निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र दिवस जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और पर्यावरणीय संतुलन के महत्व को रेखांकित करता है।

यूनेस्को के मानव एवं जैवमंडल कार्यक्रम के अंतर्गत जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र प्राकृतिक संरक्षण और स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

भारत के 18 अधिसूचित जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों में से 13 को यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में स्थान मिलना देश की समृद्ध पारिस्थितिक विरासत और जैव विविधता संरक्षण के महत्व को दर्शाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

महत्वपूर्ण बिंदु

विवरण

अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र दिवस

3 नवंबर

संबंधित संगठन

UNESCO

MAB कार्यक्रम की शुरुआत

1971

पहले जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों को मान्यता

1976

विश्व नेटवर्क में कुल जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

797

शामिल देशों की संख्या

145

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों का कुल क्षेत्रफल

लगभग 75 लाख वर्ग किमी

लाभान्वित जनसंख्या

लगभग 30 करोड़

भारत में कुल अधिसूचित जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

18

यूनेस्को की विश्व सूची में भारतीय क्षेत्र

13

यूनेस्को की विश्व सूची से बाहर भारतीय क्षेत्र

5

भारत का पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

नीलगिरि

नीलगिरि की स्थापना

1986

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के प्रमुख क्षेत्र

कोर, बफर और संक्रमण क्षेत्र

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के तीन कार्य

संरक्षण, विकास और सहयोगात्मक सहायता

संबंधित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम

Man and the Biosphere (MAB)

संबंधित वैश्विक जैव विविधता ढाँचा

Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework

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