चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर में पत्रकारों की हत्या के मामलों में दंडमुक्ति (Impunity) की समस्या गंभीर होती जा रही है।
‘पत्रकारों की सुरक्षा और दंडमुक्ति के खतरे पर महानिदेशक की रिपोर्ट’ (Director-General’s Report on the Safety of Journalists and the Danger of Impunity) के अनुसार, वर्ष 2006 से 2025 के बीच विश्वभर में 1,600 से अधिक पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें से लगभग प्रत्येक सात मामलों में से छह न्यायिक रूप से अनसुलझे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पत्रकारों की हत्या के मामलों में दंडमुक्ति की दर वर्ष 2024–2025 के दौरान बढ़कर 86 प्रतिशत हो गई, जो पिछले दो वर्षीय अवधि में 85 प्रतिशत थी।
यह पिछले एक दशक से अधिक समय में दंडमुक्ति की दर में पहली वृद्धि है।
इसके अतिरिक्त रिपोर्ट में संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन (Drones) के बढ़ते उपयोग को एक नए और गंभीर खतरे के रूप में चिह्नित किया गया है।
यह रिपोर्ट 2 नवंबर को मनाए जाने वाले ‘पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों के लिए दंडमुक्ति समाप्त करने का अंतरराष्ट्रीय दिवस’ (International Day to End Impunity for Crimes against Journalists) के अवसर पर प्रकाशित की जाती है।
रिपोर्ट के अन्य महत्वपूर्ण निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:
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वर्ष 2006 से 2025 के बीच विश्वभर में 1,600 से अधिक पत्रकारों की हत्या हुई।
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वर्ष 2024–2025 में पत्रकारों की हत्या के 189 मामले दर्ज किए गए।
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यह संख्या पिछले दो वर्षीय कालखंड की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है।
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मारे गए पत्रकारों में से 127 की मृत्यु संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में हुई।
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ड्रोन हमलों में 50 पत्रकारों की मृत्यु हुई।
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वर्ष 2024–2025 में कुल 14 महिला पत्रकारों की हत्या हुई।
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इनमें से लगभग 93 प्रतिशत महिला पत्रकार संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मारी गईं।
पत्रकारों की हत्या के मामलों में दंडमुक्ति (Impunity) क्या है?
दंडमुक्ति का अर्थ ऐसी स्थिति से है, जिसमें किसी अपराध के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को प्रभावी कानूनी कार्रवाई या दंड का सामना नहीं करना पड़ता।
पत्रकारों की हत्या के संदर्भ में दंडमुक्ति तब उत्पन्न होती है, जब अपराध की उचित जाँच नहीं हो पाती, दोषियों की पहचान नहीं होती अथवा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपराधियों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता।
यूनेस्को की रिपोर्ट में पत्रकारों की हत्या के लगभग 86 प्रतिशत मामलों के न्यायिक रूप से अनसुलझे रहने पर चिंता व्यक्त की गई है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक मामले में कोई जाँच नहीं हुई, बल्कि संबंधित मामलों में न्यायिक समाधान प्राप्त नहीं हुआ है।
पत्रकारों की हत्या के मामलों में दंडमुक्ति क्यों बढ़ रही है?
रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकारों की हत्या के मामलों में दंडमुक्ति बढ़ने के पीछे अनेक कारण हो सकते हैं।
1. सशस्त्र संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता
- युद्ध और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक संस्थाओं की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
- इससे पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों की प्रभावी जाँच करना कठिन हो जाता है।
2. न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी
- कमजोर जाँच प्रणाली, अपर्याप्त संसाधन और न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण अपराधियों को जवाबदेह ठहराने में बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
3. पत्रकारों को धमकियाँ और हिंसा
- भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और संगठित अपराध जैसे संवेदनशील विषयों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़ सकता है।
4. संघर्ष क्षेत्रों में साक्ष्य एकत्र करने की कठिनाई
- युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में अपराध स्थल तक पहुँच, गवाहों की सुरक्षा और साक्ष्यों के संरक्षण में गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
5. प्रभावी जवाबदेही का अभाव
- जब पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में दोषियों को दंड नहीं मिलता, तो इससे भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति का जोखिम बढ़ सकता है।
दंडमुक्ति का लोकतंत्र और समाज पर प्रभाव
यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में दंडमुक्ति केवल मीडिया जगत की समस्या नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।
1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव
- पत्रकारों पर हिंसा और हमलों के कारण स्वतंत्र पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है।
2. मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने का जोखिम
- पत्रकार अक्सर मानवाधिकार उल्लंघन, भ्रष्टाचार और अपराध से संबंधित घटनाओं को सार्वजनिक करते हैं।
- उनके विरुद्ध हिंसा से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
3. लोकतांत्रिक जवाबदेही में कमी
- स्वतंत्र मीडिया लोकतांत्रिक संस्थाओं और सार्वजनिक पदाधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- पत्रकारों की सुरक्षा कमजोर होने से यह भूमिका प्रभावित हो सकती है।
4. समाज में भय का वातावरण
- पत्रकारों पर हमले अन्य मीडिया कर्मियों को भी संवेदनशील विषयों पर रिपोर्टिंग करने से हतोत्साहित कर सकते हैं।
वर्ष 2024–2025 में पत्रकारों की हत्या के मामलों में 20 प्रतिशत वृद्धि
- यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान विश्वभर में कुल 189 पत्रकारों की हत्या हुई।
- यह संख्या इससे पहले की दो वर्षीय अवधि की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है।
- इस वृद्धि से स्पष्ट होता है कि अनेक देशों में पत्रकारों की सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ गंभीर बनी हुई हैं।
- विशेष रूप से सशस्त्र संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकारों को अत्यधिक जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकारों की स्थिति
- रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024–2025 के दौरान मारे गए 189 पत्रकारों में से 127 की मृत्यु संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में हुई।
- यह कुल मृत पत्रकारों की संख्या का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है।
इससे पता चलता है कि युद्ध और सशस्त्र संघर्ष पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में शामिल हैं।
- संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकारों को निम्नलिखित जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है:
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हवाई हमले और ड्रोन हमले।
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गोलीबारी और विस्फोट।
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अपहरण और अवैध हिरासत।
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रिपोर्टिंग के दौरान जानबूझकर निशाना बनाए जाने का खतरा।
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चिकित्सा और आपातकालीन सहायता की सीमित उपलब्धता।
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सुरक्षित संचार और परिवहन सुविधाओं का अभाव।
पत्रकारों की हत्या के मामलों का क्षेत्रवार विवरण
- यूनेस्को की रिपोर्ट में वर्ष 2024–2025 के दौरान पत्रकारों की हत्या के सत्यापित मामलों का क्षेत्रवार विवरण प्रस्तुत किया गया है।
- 2024 और 2025 में कुल 189 पत्रकारों की हत्या हुई, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। इनमें से दो-तिहाई से अधिक पत्रकार – यानी 127 पत्रकार – संघर्ष वाले इलाकों (कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन) में मारे गए।
- सबसे ज़्यादा मामले अरब देशों (97) में दर्ज किए गए। इसके बाद लैटिन अमेरिका और कैरेबियन (37), एशिया-प्रशांत (34), मध्य और पूर्वी यूरोप (14), अफ्रीका (6) और पश्चिमी यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका (1) का स्थान रहा।
यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 दोनों में फिलिस्तीन राज्य (State of Palestine) में पत्रकारों की हत्या के सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए।
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वर्ष 2024: 30 पत्रकारों की हत्या
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वर्ष 2025: 32 पत्रकारों की हत्या
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दो वर्षों में कुल: 62 पत्रकारों की हत्या
ये आँकड़े संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मीडिया कर्मियों के सामने मौजूद गंभीर सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाते हैं।
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ड्रोन एक नया खतरा
- यूनेस्को की रिपोर्ट में मानव रहित हवाई वाहनों (Unmanned Aerial Vehicles – UAVs), जिन्हें सामान्यतः ड्रोन कहा जाता है, के बढ़ते उपयोग को पत्रकारों के लिए एक गंभीर उभरते खतरे के रूप में चिह्नित किया गया है।
- आधुनिक युद्धों में निगरानी और सैन्य हमलों के लिए ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
- रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024–2025 के दौरान संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मारे गए 127 पत्रकारों में से 50 की मृत्यु ड्रोन हमलों में हुई।
- यह संघर्ष क्षेत्रों में मारे गए पत्रकारों की कुल संख्या का लगभग 40 प्रतिशत है।
ड्रोन हमलों से संबंधित प्रमुख चिंताएँ:
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पत्रकारों के कार्यस्थलों और रिपोर्टिंग केंद्रों की सुरक्षा।
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संघर्ष क्षेत्रों में पत्रकारों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
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हवाई हमलों के दौरान नागरिकों और मीडिया कर्मियों की सुरक्षा।
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हमलों की स्वतंत्र जाँच तथा जिम्मेदारी निर्धारित करना।
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अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन सुनिश्चित करना।
एक ही हमले में कई पत्रकारों की हत्या की घटनाएँ
- यूनेस्को ने वर्ष 2024–2025 के दौरान ऐसी सात घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया, जिनमें एक ही हमले में कई पत्रकारों को निशाना बनाया गया और उनकी मृत्यु हुई।
- इन घटनाओं में मीडिया संस्थानों के कार्यस्थलों तथा अस्थायी रिपोर्टिंग केंद्रों पर हुए हमले भी शामिल थे।
- ऐसी घटनाएँ संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकारों की सामूहिक सुरक्षा से संबंधित गंभीर चिंताओं को उजागर करती हैं।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा से संबंधित प्रमुख निष्कर्ष
- यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024–2025 के दौरान कुल 14 महिला पत्रकारों की हत्या हुई।
- इनमें से लगभग 93 प्रतिशत महिला पत्रकारों की मृत्यु संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में हुई।
- यद्यपि मारे गए पत्रकारों की कुल संख्या में महिला पत्रकारों का अनुपात अपेक्षाकृत कम था, लेकिन उन्हें विशेष प्रकार की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
महिला पत्रकारों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
- ऑनलाइन उत्पीड़न – महिला पत्रकारों को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों पर धमकियों, अपमानजनक टिप्पणियों और लक्षित उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।
- ऑफलाइन हिंसा और उत्पीड़न – रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों को शारीरिक हिंसा, धमकियों और लैंगिक उत्पीड़न जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
- संघर्ष क्षेत्रों में जोखिम – युद्ध और सशस्त्र संघर्ष वाले क्षेत्रों में महिला पत्रकारों को अन्य सुरक्षा जोखिमों के साथ लैंगिक हिंसा और उत्पीड़न के खतरे भी हो सकते हैं।
- स्वतंत्र पत्रकारिता पर प्रभाव – लगातार धमकियाँ और उत्पीड़न महिला पत्रकारों की स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों के लिए दंडमुक्ति समाप्त करने का अंतरराष्ट्रीय दिवस
- प्रतिवर्ष 2 नवंबर को पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों के लिए दंडमुक्ति समाप्त करने का अंतरराष्ट्रीय दिवस (International Day to End Impunity for Crimes against Journalists) मनाया जाता है।
- इस दिवस का उद्देश्य पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा, हत्या और अन्य अपराधों के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा दंडमुक्ति की समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2013 में प्रस्ताव 68/163 के माध्यम से इस दिवस को घोषित किया था।
इस दिवस के प्रमुख उद्देश्य हैं:
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पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों की प्रभावी जाँच को प्रोत्साहित करना।
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दोषियों को न्याय के दायरे में लाने के लिए जवाबदेही बढ़ाना।
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पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सरकारों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करना।
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स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता की रक्षा करना।
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा सूचना तक पहुँच के अधिकार को मजबूत करना।
यूनेस्को की पत्रकार सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट क्या है?
- यूनेस्को द्वारा Director-General’s Report on the Safety of Journalists and the Danger of Impunity प्रत्येक दो वर्ष में प्रकाशित की जाती है।
- इस रिपोर्ट में विश्वभर में पत्रकारों की सुरक्षा की स्थिति, उनकी हत्या के मामलों और संबंधित न्यायिक प्रक्रियाओं की प्रगति का आकलन किया जाता है।
- रिपोर्ट का उद्देश्य पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में दंडमुक्ति की स्थिति को उजागर करना तथा सदस्य देशों को प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित करना है।
- यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पत्रकार सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित नीतियों के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पत्रकारों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून
- सशस्त्र संघर्षों के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law – IHL) से भी संबंधित है।
- सामान्यतः सशस्त्र संघर्षों में खतरनाक व्यावसायिक कार्यों में लगे पत्रकारों को नागरिक माना जाता है, बशर्ते वे ऐसी गतिविधियों में शामिल न हों जिनके कारण उनकी नागरिक सुरक्षा समाप्त हो जाए।
- इसलिए उन्हें नागरिकों के लिए निर्धारित सुरक्षा प्राप्त होती है।
संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान:
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जिनेवा अभिसमयों के अतिरिक्त प्रोटोकॉल-I का अनुच्छेद 79 सशस्त्र संघर्षों में पत्रकारों की सुरक्षा से संबंधित है।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1738 (2006) सशस्त्र संघर्षों में पत्रकारों की सुरक्षा पर केंद्रित है।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2222 (2015) पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर देता है।
- ये अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाएँ संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकारों की सुरक्षा तथा उनके विरुद्ध हिंसा की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय
पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में दंडमुक्ति समाप्त करने और उनकी सुरक्षा मजबूत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास आवश्यक हैं।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच – पत्रकारों की हत्या तथा उनके विरुद्ध हिंसा के मामलों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- न्यायिक जवाबदेही – अपराधों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को प्रभावी न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से जवाबदेह ठहराना आवश्यक है।
- संघर्ष क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था – युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण, संचार सुविधाएँ और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।
- महिला पत्रकारों की सुरक्षा – ऑनलाइन और ऑफलाइन उत्पीड़न से निपटने के लिए विशेष शिकायत निवारण और सुरक्षा व्यवस्थाओं को बढ़ावा देना आवश्यक है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग – संयुक्त राष्ट्र, राष्ट्रीय सरकारों, मीडिया संगठनों और नागरिक समाज के बीच सहयोग बढ़ाकर पत्रकारों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।
निष्कर्ष
- यूनेस्को की नवीनतम रिपोर्ट विश्वभर में पत्रकारों की सुरक्षा से संबंधित गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है।
- वर्ष 2006 से 2025 के बीच 1,600 से अधिक पत्रकारों की हत्या और लगभग 86 प्रतिशत मामलों के न्यायिक रूप से अनसुलझे रहने से स्पष्ट होता है कि पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में दंडमुक्ति एक बड़ी वैश्विक समस्या बनी हुई है।
- वर्ष 2024–2025 में पत्रकारों की हत्या के मामलों में वृद्धि तथा संघर्ष क्षेत्रों में ड्रोन हमलों से 50 पत्रकारों की मृत्यु ने इस समस्या को और अधिक गंभीर बना दिया है।
- पत्रकारों की सुरक्षा केवल मीडिया संस्थानों का विषय नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है।
- इसलिए पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों की निष्पक्ष जाँच, दोषियों की जवाबदेही और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
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महत्वपूर्ण बिंदु |
विवरण |
|---|---|
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रिपोर्ट जारी करने वाला संगठन |
UNESCO |
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रिपोर्ट का नाम |
Director-General’s Report on the Safety of Journalists and the Danger of Impunity |
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रिपोर्ट की आवृत्ति |
प्रत्येक दो वर्ष |
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संबंधित अंतरराष्ट्रीय दिवस |
2 नवंबर |
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अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा |
2013 |
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संबंधित UNGA प्रस्ताव |
68/163 |
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अध्ययन की अवधि |
2006–2025 |
|
इस अवधि में मारे गए पत्रकार |
1,600 से अधिक |
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दंडमुक्ति की दर (2024–2025) |
86% |
|
पिछली दो वर्षीय अवधि में दंडमुक्ति दर |
85% |
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वर्ष 2024–2025 में पत्रकारों की हत्या |
189 |
|
पिछले दो वर्षीय कालखंड की तुलना में वृद्धि |
लगभग 20% |
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संघर्ष क्षेत्रों में मारे गए पत्रकार |
127 |
|
ड्रोन हमलों में मारे गए पत्रकार |
50 |
|
सर्वाधिक हत्याओं वाला क्षेत्र |
अरब देश (97) |
|
फिलिस्तीन में वर्ष 2024 में हत्याएँ |
30 |
|
फिलिस्तीन में वर्ष 2025 में हत्याएँ |
32 |
|
मारी गई महिला पत्रकारों की संख्या |
14 |
|
संघर्ष क्षेत्रों में मारी गई महिला पत्रकारों का अनुपात |
लगभग 93% |
|
संबंधित UNSC प्रस्ताव |
1738 (2006) और 2222 (2015) |