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पश्चिमी सहारा में संयुक्त राष्ट्र का 35 वर्ष पुराना शांति मिशन MINURSO समाप्त

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) का पश्चिमी सहारा में जनमत संग्रह के लिए स्थापित शांति मिशन MINURSO (United Nations Mission for the Referendum in Western Sahara) 35 वर्षों के बाद 1 नवंबर 2026 से अपना परिचालन बंद करने की प्रक्रिया में प्रवेश कर गया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा मिशन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाने के कारण इसका अधिदेश (Mandate) 31 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि को समाप्त हो गया।

अमेरिका द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को रूस ने वीटो (Veto) कर दिया, जबकि रूस द्वारा प्रस्तुत वैकल्पिक प्रस्ताव को पारित करने के लिए आवश्यक न्यूनतम नौ मत प्राप्त नहीं हो सके।

यह मिशन वर्ष 1991 में मोरक्को (Morocco) और पोलिसारियो फ्रंट (Frente Polisario) के बीच युद्धविराम की निगरानी तथा पश्चिमी सहारा के भविष्य को लेकर जनमत संग्रह आयोजित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।

MINURSO के समाप्त होने के बावजूद पश्चिमी सहारा की राजनीतिक स्थिति और संप्रभुता से संबंधित विवाद अभी भी अनसुलझा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (António Guterres) ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र इस विवाद के शांतिपूर्ण, स्थायी और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए प्रयास जारी रखेगा।

 

MINURSO मिशन के प्रमुख तथ्य

  • पूरा नाम: United Nations Mission for the Referendum in Western Sahara

  • हिंदी नाम: पश्चिमी सहारा में जनमत संग्रह के लिए संयुक्त राष्ट्र मिशन

  • संक्षिप्त नाम: MINURSO

  • स्थापना: 29 अप्रैल 1991

  • स्थापना का आधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 690 (1991)

  • तैनाती की शुरुआत: सितंबर 1991

  • कार्यकाल समाप्त: 31 अक्टूबर 2026

  • परिचालन समाप्ति की प्रक्रिया: 1 नवंबर 2026 से

  • कुल अवधि: लगभग 35 वर्ष

  • मुख्यालय: लायून (Laayoune), पश्चिमी सहारा

  • मुख्य उद्देश्य: युद्धविराम की निगरानी तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह का आयोजन

पश्चिमी सहारा (Western Sahara) कहाँ स्थित है?

पश्चिमी सहारा (Western Sahara) अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग में अटलांटिक महासागर के तट पर स्थित एक विवादित क्षेत्र है।

यह मुख्यतः मरुस्थलीय भूभाग है और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

पश्चिमी सहारा की भौगोलिक स्थिति:

  • उत्तर: मोरक्को

  • उत्तर-पूर्व: अल्जीरिया

  • पूर्व और दक्षिण: मॉरिटानिया

  • पश्चिमी सहारा का क्षेत्रफल लगभग 2.66 लाख वर्ग किलोमीटर है।

यह क्षेत्र विशेष रूप से फॉस्फेट जैसे खनिज संसाधनों तथा अटलांटिक महासागर में समृद्ध मत्स्य संसाधनों के लिए जाना जाता है।

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1963 से पश्चिमी सहारा को गैर-स्वशासी क्षेत्रों (Non-Self-Governing Territories) की सूची में शामिल किया हुआ है।

यह वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र की इस सूची में शामिल अफ्रीका का एकमात्र शेष क्षेत्र है।

पश्चिमी सहारा विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पश्चिमी सहारा विवाद की उत्पत्ति औपनिवेशिक शासन के अंत और क्षेत्र पर संप्रभुता के परस्पर विरोधी दावों से जुड़ी हुई है।

1. स्पेन का औपनिवेशिक शासन

पश्चिमी सहारा लंबे समय तक स्पेन के औपनिवेशिक प्रशासन के अधीन रहा।

वर्ष 1963 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे गैर-स्वशासी क्षेत्रों की सूची में शामिल किया।

इसके बाद इस क्षेत्र में उपनिवेशवाद की समाप्ति और आत्मनिर्णय के अधिकार की माँग बढ़ने लगी।

2. मोरक्को और मॉरिटानिया के दावे

औपनिवेशिक शासन समाप्त होने की प्रक्रिया के दौरान मोरक्को और मॉरिटानिया दोनों ने पश्चिमी सहारा पर अपने क्षेत्रीय दावे प्रस्तुत किए।

हालाँकि, इन दावों का पोलिसारियो फ्रंट ने विरोध किया, जो पश्चिमी सहारा की स्वतंत्रता की माँग कर रहा था।

3. वर्ष 1975 का मैड्रिड समझौता (Madrid Accords)

वर्ष 1975 में मैड्रिड समझौते के अंतर्गत स्पेन ने पश्चिमी सहारा से संबंधित प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ मोरक्को और मॉरिटानिया को सौंपने की व्यवस्था की।

इसके बाद इस क्षेत्र में सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गया।

एक ओर पोलिसारियो फ्रंट था, जबकि दूसरी ओर मोरक्को और मॉरिटानिया थे।

4. वर्ष 1976 में स्पेनिश प्रशासन का अंत

वर्ष 1976 में पश्चिमी सहारा पर स्पेन का औपनिवेशिक प्रशासन औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।

हालाँकि, इसके बाद भी क्षेत्र की अंतिम राजनीतिक स्थिति और संप्रभुता का प्रश्न अनसुलझा बना रहा।

5. वर्ष 1979 में मॉरिटानिया की वापसी

वर्ष 1979 में मॉरिटानिया ने पोलिसारियो फ्रंट के साथ एक समझौता करके पश्चिमी सहारा के अपने हिस्से पर दावा छोड़ दिया।

इसके बाद मोरक्को ने उन क्षेत्रों का प्रशासन भी अपने नियंत्रण में ले लिया, जिनसे मॉरिटानिया पीछे हट गया था।

6. लंबे समय तक सशस्त्र संघर्ष

मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट के बीच संघर्ष 15 वर्षों से अधिक समय तक जारी रहा।

इस संघर्ष में दोनों पक्षों के हजारों लोगों की मृत्यु हुई। दिए गए विवरण के अनुसार मृतकों की संख्या 16,000 से अधिक थी।

7. सितंबर 1991 का युद्धविराम

संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से सितंबर 1991 में युद्धविराम लागू हुआ।

इसी प्रक्रिया के अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिमी सहारा में MINURSO शांति मिशन की तैनाती की।

पोलिसारियो फ्रंट (Frente Polisario) क्या है?

पोलिसारियो फ्रंट पश्चिमी सहारा की स्वतंत्रता की माँग करने वाला एक राजनीतिक एवं सशस्त्र आंदोलन है।

इसका पूरा नाम Frente Popular para la Liberación de Saguia el-Hamra y de Río de Oro है।

हिंदी में इसका अर्थ सागुइया अल-हमरा और रियो डी ओरो की मुक्ति के लिए जन मोर्चा है।

इस संगठन की स्थापना वर्ष 1973 में हुई थी।

पोलिसारियो फ्रंट पश्चिमी सहारा के मूल निवासी सहरावी (Sahrawi) लोगों के आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता का समर्थन करता है।

यह पश्चिमी सहारा को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की माँग करता रहा है।

दूसरी ओर, मोरक्को पश्चिमी सहारा को अपनी संप्रभुता के अंतर्गत मानता है तथा क्षेत्र के लिए स्वायत्तता आधारित राजनीतिक समाधान का समर्थन करता है।

MINURSO मिशन की स्थापना कैसे हुई?

वर्ष 1985 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अफ्रीकी एकता संगठन (Organisation of African Unity – OAU) के सहयोग से पश्चिमी सहारा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयास शुरू किए।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप एक समझौता प्रस्ताव (Settlement Proposals) तैयार किया गया।

अगस्त 1988 में मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

इसके बाद वर्ष 1990 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने महासचिव की उस रिपोर्ट को मंजूरी दी, जिसमें समझौता प्रस्ताव तथा उसे लागू करने की योजना प्रस्तुत की गई थी।

अंततः 29 अप्रैल 1991 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव संख्या 690 (1991) पारित करके MINURSO मिशन की स्थापना की।

इस मिशन का उद्देश्य पश्चिमी सहारा में शांति स्थापित करना तथा वहाँ की जनता को अपने राजनीतिक भविष्य का निर्धारण करने का अवसर प्रदान करना था।

MINURSO मिशन के प्रमुख उद्देश्य

समझौता प्रस्तावों के अनुसार MINURSO को विभिन्न जिम्मेदारियाँ सौंपी गई थीं।

1. युद्धविराम की निगरानी

मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट के बीच युद्धविराम का पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी करना।

2. युद्धबंदियों के आदान-प्रदान की निगरानी

दोनों पक्षों के युद्धबंदियों के आदान-प्रदान से संबंधित व्यवस्थाओं में सहयोग करना।

3. शरणार्थियों की स्वदेश वापसी

संघर्ष के कारण विस्थापित हुए लोगों और शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी में सहायता करना।

4. स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह का आयोजन

पश्चिमी सहारा के लोगों को जनमत संग्रह के माध्यम से दो विकल्पों में से चयन करने का अवसर प्रदान करना:

  • स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित होना।

  • मोरक्को के साथ एकीकरण करना।

5. क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखना

मिशन को दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने तथा क्षेत्र में शांति बनाए रखने में सहयोग करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

हालाँकि, मिशन के 35 वर्षों के कार्यकाल के दौरान प्रस्तावित जनमत संग्रह आयोजित नहीं किया जा सका।

जनमत संग्रह आयोजित क्यों नहीं हो सका?

पश्चिमी सहारा में प्रस्तावित जनमत संग्रह के आयोजन में अनेक राजनीतिक और प्रशासनिक बाधाएँ सामने आईं।

विशेष रूप से जनमत संग्रह में मतदान करने के पात्र लोगों की पहचान तथा क्षेत्र की अंतिम राजनीतिक स्थिति को लेकर मतभेद बने रहे।

मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट के बीच समाधान के स्वरूप को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

लगभग सात वर्षों के कूटनीतिक विचार-विमर्श के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तुत एक संशोधित समझौता योजना को वर्ष 2004 में एक पक्ष ने अस्वीकार कर दिया।

वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दोनों पक्षों से ऐसा न्यायसंगत, स्थायी और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य राजनीतिक समाधान खोजने का आह्वान किया, जिससे पश्चिमी सहारा के लोगों का आत्मनिर्णय का अधिकार सुनिश्चित हो सके।

वर्ष 2020 में युद्धविराम समाप्त होने की घोषणा

सितंबर 1991 में लागू युद्धविराम सामान्यतः नवंबर 2020 तक प्रभावी रहा।

नवंबर 2020 में पोलिसारियो फ्रंट ने युद्धविराम से हटने की घोषणा कर दी।

संगठन ने अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सशस्त्र संघर्ष दोबारा शुरू करने की घोषणा की।

इसके साथ ही उसने अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कूटनीतिक तथा कानूनी प्रयास जारी रखने की बात भी कही।

इस घटनाक्रम के बाद पश्चिमी सहारा की सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई।

इसके बावजूद MINURSO ने उपलब्ध परिस्थितियों में स्थिति की निगरानी, घटनाओं की जाँच तथा तनाव कम करने से संबंधित अपनी गतिविधियाँ जारी रखीं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में MINURSO का कार्यकाल क्यों नहीं बढ़ सका?

30 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में MINURSO का कार्यकाल बढ़ाने के लिए दो अलग-अलग प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए।

1. अमेरिका द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव

अमेरिका ने मिशन का कार्यकाल 31 अक्टूबर 2027 तक बढ़ाने तथा 1 नवंबर 2026 से इसका नाम बदलकर संयुक्त राष्ट्र पश्चिमी सहारा मिशन (MINUSO) करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

प्रस्ताव में मोरक्को की संप्रभुता के अंतर्गत स्वायत्तता को राजनीतिक समाधान के आधार के रूप में महत्व दिया गया था।

सुरक्षा परिषद में मतदान के दौरान:

  • प्रस्ताव के पक्ष में 11 मत पड़े।

  • रूस ने वीटो का प्रयोग किया।

  • चीन, पाकिस्तान और सोमालिया मतदान से अनुपस्थित नहीं, बल्कि तटस्थ (Abstain) रहे।

रूस के वीटो के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।

2. रूस द्वारा प्रस्तुत वैकल्पिक प्रस्ताव

रूस ने MINURSO के मौजूदा स्वरूप को बनाए रखते हुए इसके कार्यकाल को एक वर्ष बढ़ाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस प्रस्ताव पर:

  • पक्ष में 3 मत पड़े।

  • विपक्ष में 1 मत पड़ा।

  • 11 सदस्य मतदान से तटस्थ रहे।

प्रस्ताव को पारित करने के लिए आवश्यक न्यूनतम नौ सकारात्मक मत प्राप्त नहीं हुए।

इस प्रकार दोनों प्रस्ताव असफल रहे और MINURSO का अधिदेश 31 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो गया।

 

MINURSO मिशन की प्रमुख उपलब्धियाँ

यद्यपि MINURSO अपने प्रमुख उद्देश्य, अर्थात पश्चिमी सहारा में जनमत संग्रह आयोजित करने में सफल नहीं हो सका, फिर भी इसने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1. युद्धविराम की निगरानी

मिशन ने वर्ष 1991 से 2020 तक युद्धविराम के पालन की निगरानी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2. तनाव कम करने में सहयोग

संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों ने संघर्ष से संबंधित घटनाओं की निगरानी, जाँच और रिपोर्टिंग की तथा दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के प्रयास किए।

3. मानवीय सहायता

मिशन ने प्राकृतिक आपदाओं के समय मानवीय सहायता उपलब्ध कराने तथा अनियमित प्रवासियों की सहायता करने में भी योगदान दिया।

4. राजनीतिक समाधान के लिए अनुकूल वातावरण

मिशन ने विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के उद्देश्य से संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल परिस्थितियाँ बनाए रखने में सहायता की।

5. शांति सैनिकों का योगदान

मिशन के 35 वर्षों के कार्यकाल में कुल 20 MINURSO कर्मियों की मृत्यु हुई।

मिशन समाप्त होने के समय MINURSO की स्थिति

अपना अधिदेश समाप्त होने के समय MINURSO का मुख्यालय पश्चिमी सहारा के लायून (Laayoune) में स्थित था।

मिशन की प्रमुख व्यवस्थाएँ निम्नलिखित थीं:

  • मुख्यालय: लायून, पश्चिमी सहारा।

  • कुल क्षेत्रीय निगरानी केंद्र: 9

  • रक्षात्मक अवरोध (Berm) के पश्चिम में: 4 केंद्र।

  • रक्षात्मक अवरोध के पूर्व में: 5 केंद्र।

  • संपर्क कार्यालय: तिंदूफ (Tindouf), अल्जीरिया।

  • कुल कर्मचारी: लगभग 200 नागरिक कर्मचारी, सैन्य पर्यवेक्षक और स्टाफ अधिकारी।

  • प्रतिनिधित्व: 35 से अधिक देशों के कर्मी।

  • अन्य क्षमता: बारूदी सुरंगों से संबंधित कार्रवाई (Mine Action) की विशेष व्यवस्था।

मिशन के इन संसाधनों का उपयोग क्षेत्र की निगरानी, सुरक्षा स्थिति का आकलन तथा संबंधित पक्षों के बीच तनाव कम करने में किया जाता था।

पश्चिमी सहारा में बर्म (Berm) क्या है?

बर्म पश्चिमी सहारा में निर्मित एक लंबी रक्षात्मक अवरोधक संरचना है, जिसका निर्माण मोरक्को द्वारा किया गया था।

इसमें रेत की दीवारें, रक्षात्मक संरचनाएँ और विभिन्न सुरक्षा व्यवस्थाएँ शामिल हैं।

यह अवरोध पश्चिमी सहारा के मोरक्को-नियंत्रित क्षेत्रों और पोलिसारियो फ्रंट से संबंधित क्षेत्रों के बीच विभाजन रेखा के रूप में कार्य करता है।

इस क्षेत्र में बारूदी सुरंगों और युद्ध से संबंधित विस्फोटक अवशेषों की मौजूदगी भी सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

MINURSO मिशन की समाप्ति के बाद क्या होगा?

MINURSO के शांति स्थापना संबंधी परिचालन समाप्त होने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिमी सहारा विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपने प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के व्यक्तिगत दूत स्टाफन डी मिस्तुरा (Staffan de Mistura) के माध्यम से राजनीतिक संवाद और कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे।

महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी संबंधित पक्षों से पश्चिमी सहारा के लोगों के अधिकारों का सम्मान करने तथा उन्हें बढ़ावा देने की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र ने यह भी स्पष्ट किया कि MINURSO मिशन की समाप्ति से पश्चिमी सहारा के लोगों का आत्मनिर्णय का अधिकार समाप्त नहीं होता।

हालाँकि, मिशन की समाप्ति से क्षेत्र में सुरक्षा निगरानी, तनाव नियंत्रण और राजनीतिक स्थिरता से जुड़ी नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

पश्चिमी सहारा विवाद में मोरक्को और अल्जीरिया की भूमिका

पश्चिमी सहारा विवाद का प्रभाव केवल मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तरी अफ्रीका की क्षेत्रीय राजनीति को भी प्रभावित करता है।

मोरक्को की स्थिति

मोरक्को पश्चिमी सहारा को अपनी संप्रभुता के अंतर्गत मानता है।

वह क्षेत्र के लिए स्वायत्तता आधारित समाधान का समर्थन करता है।

पश्चिमी सहारा को अपनी पूर्ण संप्रभुता के अंतर्गत लाना लंबे समय से मोरक्को की विदेश नीति का एक प्रमुख उद्देश्य रहा है।

अल्जीरिया की स्थिति

अल्जीरिया पश्चिमी सहारा के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता है और पोलिसारियो फ्रंट का प्रमुख समर्थक रहा है।

अल्जीरिया मोरक्को की पूर्ण संप्रभुता के दावे का विरोध करता है।

इस कारण पश्चिमी सहारा विवाद मोरक्को और अल्जीरिया के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव का एक महत्वपूर्ण कारण बना हुआ है।

पोलिसारियो फ्रंट की स्थिति

पोलिसारियो फ्रंट पश्चिमी सहारा को सहरावी लोगों की मातृभूमि मानते हुए एक स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना की माँग करता है।

यह संगठन आत्मनिर्णय के अधिकार को पश्चिमी सहारा विवाद के समाधान का प्रमुख आधार मानता है।

पश्चिमी सहारा का आर्थिक और सामरिक महत्व

पश्चिमी सहारा प्राकृतिक संसाधनों और अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण आर्थिक तथा सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

1. खनिज संसाधन

पश्चिमी सहारा में फॉस्फेट के महत्वपूर्ण भंडार पाए जाते हैं।

फॉस्फेट उर्वरक उद्योग के लिए आवश्यक कच्चा माल है।

2. मत्स्य संसाधन

पश्चिमी सहारा के अटलांटिक तट के निकट समुद्री क्षेत्र मत्स्य संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

3. अटलांटिक महासागर तक पहुँच

इस क्षेत्र की लंबी अटलांटिक तटरेखा व्यापार, समुद्री संपर्क और सामरिक गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

4. क्षेत्रीय भू-राजनीतिक महत्व

पश्चिमी सहारा की स्थिति मोरक्को, अल्जीरिया और मॉरिटानिया सहित उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका की क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करती है।

निष्कर्ष

पश्चिमी सहारा में संयुक्त राष्ट्र के MINURSO शांति मिशन का 35 वर्षों के बाद समाप्त होना अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना प्रयासों से संबंधित एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

वर्ष 1991 में स्थापित इस मिशन ने लंबे समय तक युद्धविराम की निगरानी तथा क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में योगदान दिया, लेकिन पश्चिमी सहारा के भविष्य का निर्धारण करने के लिए प्रस्तावित जनमत संग्रह आयोजित नहीं किया जा सका।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका और रूस के प्रस्तावों पर सहमति नहीं बनने के कारण मिशन का अधिदेश समाप्त हो गया।

मिशन की समाप्ति के बावजूद पश्चिमी सहारा के लोगों का आत्मनिर्णय का अधिकार और क्षेत्र की अंतिम राजनीतिक स्थिति से संबंधित विवाद अनसुलझा बना हुआ है।

अब क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाएँ मुख्यतः संबंधित पक्षों के बीच कूटनीतिक संवाद और संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक प्रयासों पर निर्भर करेंगी।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

महत्वपूर्ण बिंदु

विवरण

मिशन का नाम

MINURSO

पूरा नाम

United Nations Mission for the Referendum in Western Sahara

स्थापना

29 अप्रैल 1991

संबंधित UNSC प्रस्ताव

690 (1991)

कार्यकाल समाप्त

31 अक्टूबर 2026

परिचालन समाप्ति की प्रक्रिया

1 नवंबर 2026 से

कुल अवधि

लगभग 35 वर्ष

मुख्यालय

लायून (Laayoune)

संबंधित विवाद

पश्चिमी सहारा विवाद

विवाद के प्रमुख पक्ष

मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट

युद्धविराम

सितंबर 1991

युद्धविराम से पोलिसारियो की वापसी की घोषणा

नवंबर 2020

पश्चिमी सहारा को गैर-स्वशासी क्षेत्र की सूची में शामिल किया गया

1963

स्पेनिश प्रशासन का अंत

1976

मैड्रिड समझौता

1975

मॉरिटानिया ने अपना दावा छोड़ा

1979

अमेरिकी प्रस्ताव को वीटो करने वाला देश

रूस

संयुक्त राष्ट्र महासचिव

एंटोनियो गुटेरेस

महासचिव के व्यक्तिगत दूत

स्टाफन डी मिस्तुरा

शांति मिशन में मृत कर्मियों की संख्या

20

पश्चिमी सहारा के प्रमुख संसाधन

फॉस्फेट और मत्स्य संसाधन

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