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महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹2,814 करोड़ की योजना को मंजूरी दी

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए ‘महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संवर्धन हेतु पूंजीगत व्यय सहायता योजना’ (Capex Support Scheme to Promote Critical Mineral Processing) को मंजूरी दी है।

इस योजना के लिए ₹2,814 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है। योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्षों की अवधि के लिए लागू किया जाएगा।

इसका प्रमुख उद्देश्य भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित करना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे रणनीतिक उद्योगों को आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध कराना है।

इस योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से लिथियम (Lithium) और निकल (Nickel) के प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निकल के उत्पादन के दौरान कोबाल्ट (Cobalt) की उप-उत्पाद के रूप में प्राप्ति की भी संभावना है।

महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) क्या हैं?

महत्वपूर्ण खनिज ऐसे खनिज, धातुएँ और अधातुएँ हैं, जो किसी देश के आर्थिक विकास, औद्योगिक उत्पादन, आधुनिक प्रौद्योगिकी तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं, लेकिन जिनकी आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है।

किसी खनिज को महत्वपूर्ण घोषित करने के लिए मुख्यतः दो कारकों को ध्यान में रखा जाता है:

  1. आपूर्ति जोखिम (Supply Risk): संबंधित खनिज की उपलब्धता या आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने की संभावना।

  2. आर्थिक महत्व (Economic Importance): खनिज की आपूर्ति बाधित होने से अर्थव्यवस्था, उद्योग और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाला संभावित प्रभाव।

महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति भूवैज्ञानिक दुर्लभता, भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार नीतियों, निर्यात प्रतिबंधों तथा सीमित उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता के कारण प्रभावित हो सकती है।

किसी खनिज का खनन अथवा प्रसंस्करण कुछ ही देशों या भौगोलिक क्षेत्रों में केंद्रित होने से वैश्विक आपूर्ति शृंखला अधिक संवेदनशील हो जाती है।

महत्वपूर्ण खनिजों के प्रमुख उदाहरण

महत्वपूर्ण खनिजों में लिथियम, निकल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, टाइटेनियम, दुर्लभ मृदा तत्व तथा प्लैटिनम समूह की धातुएँ शामिल हो सकती हैं।

इनका उपयोग आधुनिक औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों में किया जाता है।

महत्वपूर्ण खनिज

प्रमुख उपयोग

लिथियम (Lithium)

इलेक्ट्रिक वाहन और रिचार्जेबल बैटरियाँ

निकल (Nickel)

बैटरियाँ, स्टेनलेस स्टील और विशेष मिश्रधातुएँ

कोबाल्ट (Cobalt)

बैटरी निर्माण और उच्च प्रदर्शन वाली मिश्रधातुएँ

ग्रेफाइट (Graphite)

लिथियम-आयन बैटरियों के एनोड

टाइटेनियम (Titanium)

एयरोस्पेस, रक्षा और विशेष मिश्रधातुएँ

दुर्लभ मृदा तत्व (REEs)

स्थायी चुंबक, इलेक्ट्रिक मोटर और पवन टरबाइन

प्लैटिनम समूह की धातुएँ

उत्प्रेरक, हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी और औद्योगिक उपकरण

महत्वपूर्ण खनिज मोबाइल फोन, कंप्यूटर, फाइबर-ऑप्टिक केबल, अर्धचालक (Semiconductors) और कुछ बैंक नोटों में प्रयुक्त सुरक्षा संबंधी सामग्री के निर्माण में भी उपयोगी हैं।

इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा उपकरण, पवन टरबाइन और ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ भी विभिन्न महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भर करती हैं।

महत्वपूर्ण खनिजों का रणनीतिक महत्व

महत्वपूर्ण खनिज आधुनिक अर्थव्यवस्था के विकास और स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

1. आर्थिक विकास

महत्वपूर्ण खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन निर्माण, इस्पात, दूरसंचार और अन्य उन्नत विनिर्माण उद्योगों में किया जाता है।

इनकी पर्याप्त उपलब्धता औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों की निरंतरता के लिए आवश्यक है।

2. राष्ट्रीय सुरक्षा

रक्षा उपकरणों, आधुनिक संचार प्रणालियों, सैन्य वाहनों तथा एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी में अनेक महत्वपूर्ण खनिजों का उपयोग किया जाता है।

इनकी आपूर्ति में बाधा राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक उद्योगों को प्रभावित कर सकती है।

3. स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी

इलेक्ट्रिक वाहन, रिचार्जेबल बैटरियाँ, पवन टरबाइन और अन्य निम्न-उत्सर्जन प्रौद्योगिकियों के निर्माण में महत्वपूर्ण खनिज आवश्यक हैं।

4. शुद्ध-शून्य उत्सर्जन अर्थव्यवस्था (Net-Zero Economy)

भविष्य की कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण खनिजों की माँग बढ़ने की संभावना है।

ऊर्जा संक्रमण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयास इन खनिजों की उपलब्धता पर निर्भर होंगे।

5. आपूर्ति शृंखला सुरक्षा

महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन और प्रसंस्करण में कुछ देशों का प्रभुत्व होने से अन्य देशों की आयात निर्भरता बढ़ सकती है।

इसलिए घरेलू उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता विकसित करना आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान के मानदंड

महत्वपूर्ण खनिजों की कोई एक सार्वभौमिक सूची नहीं है। विभिन्न देश अपनी आर्थिक, औद्योगिक और रणनीतिक आवश्यकताओं के आधार पर खनिजों की पहचान करते हैं।

प्रमुख निर्धारक कारक निम्नलिखित हैं:

  • देश के आर्थिक विकास का स्तर।

  • घरेलू उद्योगों की आवश्यकताएँ।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताएँ।

  • आधुनिक तकनीकी आवश्यकताएँ।

  • वैश्विक बाजार की स्थिति।

  • प्राकृतिक खनिज संसाधनों की उपलब्धता।

  • खनिजों की आपूर्ति में संभावित बाधाएँ।

  • आयात पर निर्भरता और भू-राजनीतिक जोखिम।

अधिकांश देशों में किसी खनिज की महत्वपूर्णता का आकलन उसकी आपूर्ति में जोखिम और आपूर्ति बाधित होने के संभावित आर्थिक प्रभाव के आधार पर किया जाता है।

भारत में महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण की वर्तमान चुनौतियाँ

भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण की क्षमता अभी सीमित है।

विशेष रूप से लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे खनिजों से संबंधित परिष्कृत मध्यवर्ती उत्पादों (Refined Intermediates) तथा उच्च शुद्धता वाली सामग्रियों के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

इस निर्भरता के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं।

1. सीमित घरेलू प्रसंस्करण अवसंरचना

भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के परिष्करण और प्रसंस्करण के लिए पर्याप्त औद्योगिक सुविधाएँ अभी विकसित नहीं हुई हैं।

2. उच्च पूंजीगत निवेश

व्यावसायिक स्तर पर खनिज प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने के लिए अत्यधिक पूंजीगत निवेश की आवश्यकता होती है।

3. आधुनिक तकनीक की सीमित उपलब्धता

उच्च शुद्धता वाले खनिज यौगिकों के उत्पादन के लिए उन्नत तकनीक, विशेष उपकरण और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

4. कच्चे माल की उपलब्धता

खनिज अयस्कों तथा मध्यवर्ती उत्पादों की पर्याप्त और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

5. वैश्विक आपूर्ति का भौगोलिक संकेंद्रण

महत्वपूर्ण खनिजों का प्रसंस्करण विश्व के कुछ सीमित क्षेत्रों में केंद्रित है।

इससे भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण आपूर्ति बाधित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण योजना की आवश्यकता

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन, ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों के विस्तार के साथ महत्वपूर्ण खनिजों की माँग बढ़ रही है।

इन उद्योगों के लिए आवश्यक उच्च शुद्धता वाले खनिज उत्पादों का घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण आयात पर निर्भरता बनी हुई है।

इस स्थिति में घरेलू प्रसंस्करण सुविधाओं का विकास आवश्यक हो जाता है।

इस योजना की आवश्यकता के प्रमुख कारण हैं:

  • महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करना।

  • घरेलू मूल्य संवर्धन (Value Addition) को बढ़ावा देना।

  • उच्च शुद्धता वाले खनिज उत्पादों का देश में निर्माण करना।

  • वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के जोखिम को कम करना।

  • इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी उद्योग के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना।

  • रक्षा एवं रणनीतिक उद्योगों की आपूर्ति सुरक्षा मजबूत करना।

  • खनिजों से अंतिम उत्पादों तक एक मजबूत घरेलू मूल्य शृंखला विकसित करना।

महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण योजना की प्रमुख विशेषताएँ

इस योजना के अंतर्गत देश में चार महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने के लिए पूंजीगत व्यय सहायता (Capital Expenditure Support) प्रदान की जाएगी।

1. कुल वित्तीय परिव्यय

योजना के लिए कुल ₹2,814 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है।

2. योजना की अवधि

यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्षों के लिए लागू होगी।

3. चार प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना

योजना के अंतर्गत कुल चार संयंत्रों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।

  • दो लिथियम प्रसंस्करण संयंत्र।

  • दो निकल प्रसंस्करण संयंत्र।

4. पूंजीगत सब्सिडी

पात्र निवेश का 30% पूंजीगत सब्सिडी के रूप में प्रदान किया जाएगा।

5. लिथियम प्रसंस्करण क्षमता

प्रत्येक लिथियम प्रसंस्करण संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 30 किलो टन (30,000 टन) होगी।

6. निकल प्रसंस्करण क्षमता

प्रत्येक निकल प्रसंस्करण संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 50 किलो टन (50,000 टन) होगी।

7. कोबाल्ट की प्राप्ति

निकल के प्रसंस्करण के दौरान कोबाल्ट को उप-उत्पाद (By-product) के रूप में प्राप्त करने का भी प्रावधान है।

 

प्रसंस्करण संयंत्रों के लिए वित्तीय सहायता

खनिज

संयंत्रों की संख्या

प्रत्येक संयंत्र की न्यूनतम क्षमता

प्रति लाभार्थी अधिकतम सहायता

लिथियम

2

30,000 टन

₹500 करोड़

निकल

2

50,000 टन

₹900 करोड़

दोनों प्रकार के संयंत्रों के लिए पात्र निवेश पर 30% पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। हालाँकि, प्रत्येक लाभार्थी को मिलने वाली सहायता निर्धारित अधिकतम सीमा के अधीन होगी।

लाभार्थियों का चयन कैसे किया जाएगा?

योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन दो चरणों की प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

प्रथम चरण: तकनीकी योग्यता का मूल्यांकन

इस चरण में आवेदकों की तकनीकी क्षमता और पात्रता का मूल्यांकन किया जाएगा।

केवल तकनीकी रूप से योग्य घोषित आवेदकों को अगले चरण में भाग लेने की अनुमति मिलेगी।

द्वितीय चरण: वित्तीय बोली प्रक्रिया

इस चरण में तकनीकी रूप से योग्य आवेदकों की वित्तीय बोलियों का मूल्यांकन किया जाएगा।

प्रत्येक खनिज के लिए दो लाभार्थियों का चयन न्यूनतम लागत मानदंड (Least-Cost Criterion) के आधार पर किया जाएगा।

इसका अर्थ है कि योजना के अंतर्गत सबसे कम पूंजीगत सहायता की माँग करने वाले पात्र बोलीदाताओं को चयन में प्राथमिकता मिलेगी।

वित्तीय प्रोत्साहन का वितरण

योजना के अंतर्गत स्वीकृत वित्तीय प्रोत्साहनों का वितरण तीन किस्तों (Tranches) में किया जाएगा।

ये किस्तें परियोजना के लिए निर्धारित उपलब्धियों या चरणबद्ध लक्ष्यों (Milestones) की प्राप्ति से जुड़ी होंगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य वित्तीय सहायता को संयंत्रों की स्थापना और उनके परिचालन से संबंधित वास्तविक प्रगति के अनुरूप प्रदान करना है।

योजना से लाभान्वित होने वाले प्रमुख क्षेत्र

1. इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग (Electric Mobility)

लिथियम, निकल और कोबाल्ट इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त कई प्रकार की बैटरियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

घरेलू प्रसंस्करण क्षमता बढ़ने से बैटरी निर्माण उद्योग को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।

2. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS)

बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का उपयोग बिजली को संग्रहित करने और आवश्यकता के समय उसकी आपूर्ति करने के लिए किया जाता है।

ये प्रणालियाँ सौर एवं पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के प्रभावी उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

3. इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग

महत्वपूर्ण खनिजों का उपयोग मोबाइल फोन, कंप्यूटर, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और विभिन्न तकनीकी उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।

4. रक्षा क्षेत्र

रक्षा उपकरणों, विशेष मिश्रधातुओं और उन्नत तकनीकी प्रणालियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की नियमित उपलब्धता आवश्यक है।

5. विशेष इस्पात उद्योग (Speciality Steel)

निकल जैसी धातुओं का उपयोग विशेष गुणवत्ता वाले इस्पात और मिश्रधातुओं के निर्माण में किया जाता है।

इनका उपयोग एयरोस्पेस, औद्योगिक मशीनरी और अन्य उच्च प्रदर्शन वाले उपकरणों में होता है।

योजना का संभावित प्रभाव

इस योजना से भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

इसके प्रमुख संभावित प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  • आयातित परिष्कृत खनिज उत्पादों पर निर्भरता में कमी।

  • घरेलू खनिज प्रसंस्करण उद्योग का विकास।

  • महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को मजबूती।

  • इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी उद्योग को प्रोत्साहन।

  • खनिज प्रसंस्करण में निजी निवेश और तकनीकी विकास को बढ़ावा।

  • रक्षा एवं अन्य रणनीतिक उद्योगों की सामग्री संबंधी आवश्यकताओं की बेहतर पूर्ति।

  • स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने से संबंधित लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता।

निष्कर्ष

महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए ₹2,814 करोड़ की पूंजीगत व्यय सहायता योजना भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू मूल्य शृंखला विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

योजना के अंतर्गत लिथियम और निकल के चार प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना तथा पात्र निवेश पर 30% पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।

इससे इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए घरेलू क्षमता विकसित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

महत्वपूर्ण बिंदु

विवरण

योजना का नाम

Capex Support Scheme to Promote Critical Mineral Processing

स्वीकृति

केंद्रीय मंत्रिमंडल, 4 नवंबर 2026

कुल वित्तीय परिव्यय

₹2,814 करोड़

अवधि

वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31

प्रस्तावित संयंत्र

4

लिथियम संयंत्र

2

निकल संयंत्र

2

पूंजीगत सब्सिडी

पात्र निवेश का 30%

लिथियम की न्यूनतम प्रसंस्करण क्षमता

30,000 टन प्रति संयंत्र

निकल की न्यूनतम प्रसंस्करण क्षमता

50,000 टन प्रति संयंत्र

लिथियम के लिए अधिकतम सहायता

₹500 करोड़ प्रति लाभार्थी

निकल के लिए अधिकतम सहायता

₹900 करोड़ प्रति लाभार्थी

लाभार्थियों का चयन

दो चरणों में

वित्तीय चयन का आधार

न्यूनतम पूंजीगत सहायता की माँग

प्रोत्साहन का वितरण

तीन किस्तों में

निकल प्रसंस्करण का संभावित उप-उत्पाद

कोबाल्ट

प्रमुख लाभार्थी क्षेत्र

इलेक्ट्रिक वाहन, BESS, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात

 
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