चर्चा में क्यों?
जैविक विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity – CBD) के पक्षकारों के सम्मेलन का 17वाँ सत्र (COP17) 19 से 30 अक्टूबर 2026 तक आर्मेनिया की राजधानी येरेवन (Yerevan) में आयोजित किया गया।
इस सम्मेलन का प्रमुख विषय ‘प्रकृति के लिए कार्रवाई’ (Taking Action for Nature) था।
सम्मेलन में वर्ष 2030 तक वैश्विक जैव विविधता संरक्षण लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए ‘येरेवन पाथवे’ (Yerevan Pathway) को अपनाया गया।
COP17 की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि इसमें वर्ष 2022 में अपनाए गए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे (Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework – KMGBF) के कार्यान्वयन में हुई सामूहिक प्रगति की पहली वैश्विक समीक्षा की गई।
इस समीक्षा के आधार पर देशों ने जैव विविधता संरक्षण में मौजूद कमियों की पहचान की तथा वर्ष 2030 तक निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदमों पर सहमति व्यक्त की।
COP17 सम्मेलन 2026 के प्रमुख तथ्य
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सम्मेलन: जैविक विविधता अभिसमय के पक्षकारों का 17वाँ सम्मेलन (CBD COP17)
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आयोजन अवधि: 19–30 अक्टूबर 2026
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आयोजन स्थल: येरेवन, आर्मेनिया
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प्रमुख विषय: प्रकृति के लिए कार्रवाई (Taking Action for Nature)
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मुख्य परिणाम: येरेवन पाथवे (Yerevan Pathway)
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प्रमुख उद्देश्य: वैश्विक जैव विविधता संरक्षण लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों में तेजी लाना।
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संबंधित वैश्विक ढाँचा: कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा (KMGBF)
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लक्ष्य वर्ष: 2030
इस सम्मेलन के साथ दो अन्य महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठकों का भी आयोजन किया गया।
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कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल के पक्षकारों की 12वीं बैठक (CP-MOP-12)।
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नागोया प्रोटोकॉल के पक्षकारों की छठी बैठक (NP-MOP-6)।
इन बैठकों में जैव सुरक्षा, आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग और उनसे प्राप्त लाभों के न्यायसंगत बँटवारे से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
येरेवन पाथवे (Yerevan Pathway) क्या है?
येरेवन पाथवे एक साझा वैश्विक कार्ययोजना है, जिसे COP17 में कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे के कार्यान्वयन की पहली वैश्विक समीक्षा के निष्कर्षों के आधार पर अपनाया गया।
इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक जैव विविधता संरक्षण के निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को तेज करना तथा विभिन्न देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
इसमें उन प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहाँ मौजूदा प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने और अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
येरेवन पाथवे की प्रमुख प्राथमिकताएँ निम्नलिखित हैं:
1. पर्यावरण के लिए हानिकारक सब्सिडी और प्रोत्साहनों में सुधार
देशों से ऐसी सब्सिडी और आर्थिक प्रोत्साहनों की समीक्षा करने का आह्वान किया गया है, जो जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाते हैं।
इसका उद्देश्य आर्थिक नीतियों को पर्यावरण संरक्षण के अनुकूल बनाना है।
2. विकासशील देशों को वित्तीय सहायता बढ़ाना
विकासशील देशों को जैव विविधता संरक्षण योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
3. वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग
जैव विविधता संरक्षण के लिए अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक जानकारी तथा विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई है।
4. राष्ट्रीय बजट और आर्थिक नीतियों का समन्वय
देशों को अपने राष्ट्रीय बजट, विकास योजनाओं तथा आर्थिक निर्णयों को कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे के अनुरूप बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
5. निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था को मजबूत करना
जैव विविधता संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों की प्रगति की नियमित निगरानी, रिपोर्टिंग तथा समीक्षा करने पर विशेष जोर दिया गया है।
6. वर्ष 2030 तक लक्ष्यों की प्राप्ति
येरेवन पाथवे के माध्यम से देशों को जैव विविधता संरक्षण संबंधी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को ठोस राष्ट्रीय नीतियों और व्यावहारिक कार्यक्रमों में बदलने के लिए दिशा प्रदान की गई है।
COP17 सम्मेलन के अन्य प्रमुख निर्णय
COP17 में जैव विविधता संरक्षण से संबंधित लगभग 50 महत्वपूर्ण निर्णय अपनाए गए।
इन निर्णयों में विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्रों, वन्यजीवों, तकनीकी सहयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित विषय शामिल थे।
प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
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संरक्षित क्षेत्रों और वनों का संरक्षण।
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वन्यजीव प्रबंधन।
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आक्रामक विदेशी प्रजातियों (Invasive Alien Species) का नियंत्रण।
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समुद्री और तटीय जैव विविधता का संरक्षण।
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कृत्रिम जीव विज्ञान (Synthetic Biology)।
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जैव विविधता की वैज्ञानिक निगरानी।
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पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी।
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जैव विविधता संरक्षण के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता।
इन निर्णयों का उद्देश्य वैश्विक जैव विविधता संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाना है।
‘सेवन दिशानिर्देश’ (Sevan Guidelines) को मंजूरी
COP17 की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जैविक विविधता अभिसमय के अनुच्छेद 8(j) से संबंधित नए स्थायी सहायक निकाय के संचालन के नियमों पर सहमति थी।
इन नियमों को ‘सेवन दिशानिर्देश’ (Sevan Guidelines) नाम दिया गया।
ये दिशानिर्देश जैव विविधता संरक्षण संबंधी वैश्विक नीतियों के निर्माण में मूलवासी लोगों और स्थानीय समुदायों की भूमिका को मजबूत करने से संबंधित हैं।
अनुच्छेद 8(j) जैव विविधता के संरक्षण एवं सतत उपयोग से संबंधित मूलवासी और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, नवाचारों तथा प्रथाओं का सम्मान और संरक्षण करने पर जोर देता है।
सेवन दिशानिर्देशों का प्रमुख उद्देश्य ऐसे समुदायों को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता नीति निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक प्रभावी भागीदारी प्रदान करना है।
जैव विविधता संरक्षण के लिए लगभग 2 अरब डॉलर की नई वित्तीय प्रतिबद्धताएँ
COP17 सम्मेलन के दौरान जैव विविधता संरक्षण के लिए लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर की नई वित्तीय प्रतिबद्धताओं की घोषणा की गई।
इनका उद्देश्य प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण, संकटग्रस्त प्रजातियों की पुनर्बहाली तथा विकासशील देशों में जैव विविधता संबंधी कार्यक्रमों को सहायता प्रदान करना है।
प्रमुख वित्तीय घोषणाएँ निम्नलिखित थीं:
1. वैश्विक पर्यावरण सुविधा (Global Environment Facility – GEF)
वैश्विक पर्यावरण सुविधा की नवीनतम पुनःपूर्ति प्रक्रिया और संबंधित वित्तीय व्यवस्थाओं के अंतर्गत लगभग 560 मिलियन अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धताओं की घोषणा की गई।
2. प्रजाति पुनर्बहाली गठबंधन (Species Recovery Alliance)
इस पहल के माध्यम से 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय प्रतिबद्धता की घोषणा की गई।
इसका उद्देश्य संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण तथा पुनर्बहाली को समर्थन देना है।
3. वैल्यू नेचर फंड (Value Nature Fund)
इस कोष के लिए लगभग 330 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय प्रतिबद्धता की घोषणा की गई।
इसका प्रमुख उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण के लिए निजी क्षेत्र की पूँजी और निवेश को आकर्षित करना है।
4. एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank – ADB) की पहल
एशियाई विकास बैंक ने जैव विविधता संरक्षण के लिए एक नए जैव विविधता बॉन्ड (Biodiversity Bond) और निवेश प्रोत्साहन मंच (Investment Incubator) की शुरुआत की।
इन पहलों का उद्देश्य प्रकृति संरक्षण से संबंधित परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देना है।
जैव विविधता निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर
सम्मेलन में जैव विविधता संरक्षण की प्रगति का आकलन करने के लिए नए संकेतकों और निगरानी व्यवस्थाओं के विकास पर भी जोर दिया गया।
इन संकेतकों का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि विभिन्न देश जैव विविधता संरक्षण के लिए घोषित लक्ष्यों की दिशा में कितनी प्रगति कर रहे हैं।
इसके अंतर्गत राष्ट्रीय रिपोर्टिंग, वैज्ञानिक आँकड़ों के संग्रह, नीतियों के मूल्यांकन और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
अगला जैव विविधता सम्मेलन COP18
जैविक विविधता अभिसमय के पक्षकारों का अगला सम्मेलन COP18 इक्वाडोर (Ecuador) में आयोजित किया जाएगा।
यह सम्मेलन वर्ष 2030 तक निर्धारित वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों की प्राप्ति से लगभग दो वर्ष पहले आयोजित होगा।
इसलिए COP18 में विभिन्न देशों द्वारा किए गए प्रयासों और उनके वास्तविक परिणामों का आकलन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा।
जैविक विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity – CBD) क्या है?
जैविक विविधता अभिसमय (CBD) एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी समझौता है, जिसका उद्देश्य विश्व की जैव विविधता का संरक्षण करना, जैविक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना तथा आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों का न्यायसंगत वितरण करना है।
मानवीय गतिविधियों, वनों की कटाई, प्रदूषण, प्राकृतिक आवासों के विनाश और जलवायु परिवर्तन के कारण विश्व की अनेक वनस्पति एवं जीव प्रजातियाँ संकट का सामना कर रही हैं।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए जैविक विविधता अभिसमय वैश्विक स्तर पर सहयोग का कानूनी और संस्थागत ढाँचा उपलब्ध कराता है।
जैविक विविधता अभिसमय के प्रमुख तथ्य:
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अभिसमय का अंगीकरण: 22 मई 1992, नैरोबी (केन्या)।
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हस्ताक्षर के लिए खोला गया: 5 जून 1992, रियो पृथ्वी सम्मेलन, ब्राजील।
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प्रभावी होने की तिथि: 29 दिसंबर 1993।
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कुल पक्षकार: 196 (195 देश और यूरोपीय संघ)।
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सचिवालय: मॉन्ट्रियल, कनाडा।
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प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्था: पक्षकारों का सम्मेलन (Conference of the Parties – COP)।
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सम्मेलन की सामान्य आवृत्ति: प्रत्येक दो वर्ष।
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विशेष तथ्य: संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस अभिसमय का अनुसमर्थन नहीं किया है।
जैविक विविधता अभिसमय के तीन प्रमुख उद्देश्य
जैविक विविधता अभिसमय के तीन मुख्य उद्देश्य हैं।
1. जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of Biological Diversity)
पृथ्वी पर पाई जाने वाली विभिन्न जीव-जंतुओं, वनस्पतियों, सूक्ष्मजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण करना।
2. जैव विविधता के घटकों का सतत उपयोग (Sustainable Use of Its Components)
जैविक संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करना कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी हों तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी ये संसाधन सुरक्षित रहें।
3. आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त लाभों का न्यायसंगत वितरण (Fair and Equitable Benefit Sharing)
आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी लाभों का उचित एवं समान वितरण सुनिश्चित करना।
जैविक विविधता अभिसमय का कार्यक्षेत्र
CBD जैव विविधता के तीन प्रमुख स्तरों को शामिल करता है।
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आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के विभिन्न जीवों में पाई जाने वाली आनुवंशिक भिन्नता।
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प्रजातीय विविधता (Species Diversity): किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न जीव एवं वनस्पति प्रजातियों की विविधता।
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पारिस्थितिकी तंत्र विविधता (Ecosystem Diversity): वन, घास के मैदान, आर्द्रभूमि, मरुस्थल, महासागर और अन्य पारिस्थितिकी तंत्रों की विविधता।
इसके अतिरिक्त अभिसमय जैव प्रौद्योगिकी, कृषि, शिक्षा, विज्ञान, व्यापार, संस्कृति और सतत विकास से जुड़े मुद्दों को भी शामिल करता है।
जैविक विविधता अभिसमय का सचिवालय (CBD Secretariat)
जैविक विविधता अभिसमय का सचिवालय कनाडा के मॉन्ट्रियल में स्थित है।
इसका मुख्य कार्य सदस्य देशों को अभिसमय के प्रावधानों और कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करना है।
सचिवालय के प्रमुख कार्य हैं:
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सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करना।
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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और बैठकों का आयोजन करना।
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अभिसमय से संबंधित दस्तावेज और रिपोर्ट तैयार करना।
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जैव विविधता संरक्षण संबंधी जानकारी का संग्रह और प्रसार करना।
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अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाना।
सचिवालय का प्रमुख कार्यकारी सचिव (Executive Secretary) होता है।
कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल (Cartagena Protocol on Biosafety)
कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल, जैविक विविधता अभिसमय का एक पूरक अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
इसे 29 जनवरी 2000 को अपनाया गया था।
यह प्रोटोकॉल आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी से विकसित जीवित परिवर्तित जीवों (Living Modified Organisms – LMOs) के सुरक्षित उपयोग, परिवहन और प्रबंधन से संबंधित है।
इसका प्रमुख उद्देश्य ऐसे जीवों से जैव विविधता पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभावों को रोकना तथा मानव स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखना है।
प्रमुख उद्देश्य:
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जीवित परिवर्तित जीवों का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना।
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सीमा-पार परिवहन में जैव सुरक्षा मानकों का पालन करना।
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जैव विविधता पर संभावित प्रतिकूल प्रभावों को कम करना।
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आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग में सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना।
नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol)
नागोया प्रोटोकॉल जैविक विविधता अभिसमय का एक अन्य महत्वपूर्ण पूरक समझौता है।
यह आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच तथा उनके उपयोग से प्राप्त लाभों के उचित और न्यायसंगत वितरण से संबंधित है।
इसे वर्ष 2010 में जापान के नागोया में अपनाया गया तथा यह 12 अक्टूबर 2014 को प्रभावी हुआ।
इसका प्रमुख उद्देश्य आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों का उचित वितरण सुनिश्चित करना है।
इसके अंतर्गत स्थानीय समुदायों और मूलवासी लोगों के पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से प्राप्त लाभों के न्यायसंगत वितरण पर भी ध्यान दिया जाता है।
कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा (KMGBF)
कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे को दिसंबर 2022 में कनाडा के मॉन्ट्रियल में आयोजित CBD के 15वें पक्षकार सम्मेलन (COP15) में अपनाया गया था।
इसने जैव विविधता के लिए वर्ष 2011–2020 की रणनीतिक योजना और उसके आइची जैव विविधता लक्ष्यों (Aichi Biodiversity Targets) का स्थान लिया।
इस ढाँचे का प्रमुख उद्देश्य वर्ष 2030 तक जैव विविधता की हानि को रोकना तथा उसकी पुनर्बहाली सुनिश्चित करना है।
4
लक्ष्य वर्ष 2050
23
लक्ष्य वर्ष 2030
इसके प्रमुख लक्ष्य निम्नलिखित हैं:
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वर्ष 2030 तक विश्व के कम-से-कम 30% स्थलीय, अंतर्देशीय जल, तटीय और समुद्री क्षेत्रों का प्रभावी संरक्षण एवं प्रबंधन।
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क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों के कम-से-कम 30% क्षेत्र को प्रभावी पुनर्बहाली के अंतर्गत लाना।
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जैव विविधता को नुकसान पहुँचाने वाली सरकारी सब्सिडी में प्रतिवर्ष कम-से-कम 500 अरब अमेरिकी डॉलर की कमी करना।
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खाद्य अपव्यय को आधा करना।
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संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण तथा उनके विलुप्त होने के जोखिम को कम करना।
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जैव विविधता संरक्षण के लिए वित्तीय संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना।
इस ढाँचे की दीर्घकालिक परिकल्पना वर्ष 2050 तक प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके जीवनयापन करना (Living in Harmony with Nature) है।
COP17 और येरेवन पाथवे का वैश्विक महत्व
COP17 का महत्व इसलिए विशेष है क्योंकि यह कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे के अंगीकरण के बाद सामूहिक प्रगति का पहला वैश्विक मूल्यांकन था।
इस समीक्षा ने स्पष्ट किया कि केवल अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों और प्रतिबद्धताओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए ठोस नीतिगत, वित्तीय और संस्थागत प्रयास आवश्यक हैं।
येरेवन पाथवे के माध्यम से देशों ने वर्ष 2030 तक जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों में तेजी लाने, विकासशील देशों को सहायता प्रदान करने और राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों में प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
निष्कर्ष
आर्मेनिया के येरेवन में आयोजित CBD COP17 सम्मेलन वैश्विक जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सम्मेलन में अपनाया गया येरेवन पाथवे वर्ष 2030 तक निर्धारित 23 वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
इसके अतिरिक्त सेवन दिशानिर्देशों, नई वित्तीय प्रतिबद्धताओं, वैज्ञानिक सहयोग और निगरानी व्यवस्थाओं को मजबूत करने से अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता संरक्षण प्रयासों को नई गति मिलने की संभावना है।
इस सम्मेलन की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभिन्न देश अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को राष्ट्रीय नीतियों, पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और प्रकृति संरक्षण के मापनीय परिणामों में किस सीमा तक परिवर्तित कर पाते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
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महत्वपूर्ण बिंदु |
विवरण |
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सम्मेलन |
CBD COP17 |
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आयोजन अवधि |
19–30 अक्टूबर 2026 |
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आयोजन स्थल |
येरेवन, आर्मेनिया |
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प्रमुख परिणाम |
येरेवन पाथवे |
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सम्मेलन का विषय |
Taking Action for Nature |
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अगले सम्मेलन COP18 का आयोजन |
इक्वाडोर |
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CBD का अंगीकरण |
22 मई 1992 |
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CBD प्रभावी हुआ |
29 दिसंबर 1993 |
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CBD के कुल पक्षकार |
196 |
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CBD सचिवालय |
मॉन्ट्रियल, कनाडा |
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कार्टाजेना प्रोटोकॉल अपनाया गया |
29 जनवरी 2000 |
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नागोया प्रोटोकॉल प्रभावी हुआ |
12 अक्टूबर 2014 |
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KMGBF अपनाया गया |
दिसंबर 2022, COP15 |
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KMGBF के वर्ष 2050 के लक्ष्य |
4 |
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KMGBF के वर्ष 2030 के लक्ष्य |
23 |
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अनुच्छेद 8(j) से संबंधित दिशानिर्देश |
सेवन दिशानिर्देश |
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जैव विविधता संरक्षण हेतु नई वित्तीय प्रतिबद्धताएँ |
लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर |
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CBD के तीन उद्देश्य |
संरक्षण, सतत उपयोग तथा लाभों का न्यायसंगत वितरण |