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भारत के राष्ट्रीय फार्मूलरी (NFI) के 7वें संस्करण का शुभारंभ

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया (National Formulary of India—NFI) के 7वें संस्करण का शुभारंभ किया। इसका शुभारंभ 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय फार्माकोपिया आयोग (Indian Pharmacopoeia Commission—IPC) द्वारा आयोजित छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के कार्यक्रम के दौरान किया गया।

NFI का नया संस्करण चिकित्सकों, फार्मासिस्टों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों को दवाओं के उचित, तर्कसंगत और साक्ष्य-आधारित उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ मार्गदर्शिका उपलब्ध कराता है।

राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह

भारत में छठा राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 17 से 23 सितंबर 2026 तक मनाया जा रहा है।

इस वर्ष की थीम है—

“फार्माकोविजिलेंस के माध्यम से दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक कदम”

फार्माकोविजिलेंस का मुख्य उद्देश्य दवाओं के उपयोग से होने वाली प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं (Adverse Drug Reactions—ADRs) की पहचान, निगरानी, मूल्यांकन और रोकथाम करना है। इससे दवाओं की सुरक्षा और मरीजों के उपचार के परिणामों में सुधार करने में मदद मिलती है।

राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया क्या है?

राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया (NFI) स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए दवाओं के निर्धारण (Prescribing), वितरण (Dispensing) और प्रशासन (Administration) से संबंधित एक प्रामाणिक मार्गदर्शिका है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवाओं का उपयोग वैज्ञानिक प्रमाणों, चिकित्सकीय आवश्यकता और मरीज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाए।

NFI चिकित्सकों और फार्मासिस्टों को विभिन्न दवाओं के उचित उपयोग से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान करता है। यह देश में राष्ट्रीय औषधि नीतियों के निर्माण के लिए भी उपयोगी दस्तावेज है।

NFI का इतिहास

राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया का पहला संस्करण वर्ष 1960 में प्रकाशित किया गया था।

बाद में बदलती चिकित्सा आवश्यकताओं, नई दवाओं, उपचार पद्धतियों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनुरूप इसमें समय-समय पर संशोधन और नए संस्करण जारी किए गए।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग द्वारा NFI का प्रकाशन 2009 से समय-समय पर किया जाता रहा है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य पेशेवरों को दवाओं के तर्कसंगत उपयोग के लिए अद्यतन और विश्वसनीय मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।

NFI 2026 की प्रमुख विशेषताएँ

राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया का 7वां संस्करण यानी NFI 2026 पहले की तुलना में अधिक व्यापक बनाया गया है। इसमें—

  • 34 अध्याय शामिल हैं।
  • 20 परिशिष्ट (Appendices) दिए गए हैं।
  • कुल 653 दवाओं को शामिल किया गया है।
  • इनमें 42 फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन (Fixed-Dose Combinations—FDCs) शामिल हैं।
  • इसके अतिरिक्त 30 इम्यूनोलॉजिकल्स (Immunologicals) को भी शामिल किया गया है।

इस संस्करण में दवाओं से संबंधित मोनोग्राफ को भी संशोधित किया गया है।

राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची से समन्वय

NFI 2026 में दवाओं के मोनोग्राफ को राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (National List of Essential Medicines—NLEM) और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनुरूप संशोधित किया गया है।

इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि स्वास्थ्य पेशेवरों को देश की प्राथमिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं और सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनुरूप दवाओं के उपयोग की जानकारी प्राप्त हो।

दवाओं के तर्कसंगत उपयोग में भूमिका

दवाओं का तर्कसंगत उपयोग स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका अर्थ है कि मरीज को उसकी चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार उचित दवा, उचित मात्रा, उचित अवधि और उचित तरीके से दी जाए।

NFI स्वास्थ्य पेशेवरों को इस प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान करता है। इससे अनावश्यक दवा उपयोग, गलत दवा चयन और दवाओं के अनुचित सेवन से जुड़े जोखिमों को कम करने में सहायता मिल सकती है।

विशेष रूप से एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के अनुचित उपयोग को कम करने और दवा सुरक्षा को बढ़ावा देने में ऐसी मानकीकृत मार्गदर्शिकाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

वैज्ञानिक मानकों और चिकित्सकीय व्यवहार के बीच सेतु

NFI को वैज्ञानिक मानकों और क्लिनिकल प्रैक्टिस के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में देखा जाता है।

इसमें उपलब्ध जानकारी स्वास्थ्य पेशेवरों को उपचार के दौरान अधिक सूचित और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता करती है। इससे दवाओं के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग को बढ़ावा मिलता है।

डिजिटल रूप में भी उपलब्ध

NFI 2026 केवल मुद्रित संस्करण तक सीमित नहीं है। इसे डिजिटल रूप में भी उपलब्ध कराया गया है।

डिजिटल संस्करण में दवाओं से संबंधित जानकारी के साथ-साथ विभिन्न महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संसाधनों के लिंक भी उपलब्ध हैं। इनमें—

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम
  • टीकाकरण कार्यक्रम एवं अनुसूचियां
  • प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (जन औषधि)
  • अप्रयुक्त या एक्सपायर्ड दवाओं के सुरक्षित निपटान से संबंधित जानकारी
  • अन्य आधिकारिक नियामक संसाधन

शामिल हैं।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग की भूमिका

भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) भारत में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से संबंधित मानकों के विकास और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

IPC द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय फार्मूलरी स्वास्थ्य पेशेवरों को दवाओं के उचित उपयोग के लिए मानकीकृत जानकारी उपलब्ध कराती है। वहीं फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों के माध्यम से दवाओं से जुड़ी प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की निगरानी को भी बढ़ावा दिया जाता है।

7वें संस्करण का महत्व

NFI के 7वें संस्करण का शुभारंभ भारत में सुरक्षित और तर्कसंगत दवा उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

NFI 2026 में बड़ी संख्या में दवाओं, फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन और इम्यूनोलॉजिकल्स को शामिल करने के साथ-साथ इन्हें राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची और स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनुरूप अद्यतन किया गया है।

इससे डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों को उपचार संबंधी निर्णय लेते समय विश्वसनीय, अद्यतन और साक्ष्य-आधारित संदर्भ उपलब्ध होगा। साथ ही, इसका डिजिटल स्वरूप स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तक पहुंच को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायता करेगा।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • NFI का पूरा नाम: National Formulary of India
  • हिंदी नाम: राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया
  • 7वां संस्करण: NFI 2026
  • शुभारंभ: 21 सितंबर 2026
  • शुभारंभकर्ता: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल
  • आयोजक: भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC)
  • पहला NFI संस्करण: 1960
  • NFI का प्रकाशन: भारतीय फार्माकोपिया आयोग द्वारा
  • NFI 2026 में अध्याय: 34
  • परिशिष्ट: 20
  • कुल दवाएं: 653
  • फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन: 42
  • इम्यूनोलॉजिकल्स: 30
  • छठा राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह: 17–23 सितंबर 2026
  • थीम: “फार्माकोविजिलेंस के माध्यम से दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक कदम”