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विश्व में 6.3 अरब लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं, फिर भी डिजिटल विभाजन बरकरार: ITU रिपोर्ट 2026

अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International Telecommunication Union – ITU) द्वारा जारी ‘फैक्ट्स एंड फिगर्स 2026’ (Facts and Figures 2026) रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में विश्वभर में लगभग 6.3 अरब (630 करोड़) लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं।

यह विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 76 प्रतिशत है।

वर्ष 2025 में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 6.1 अरब (610 करोड़) थी, जो विश्व की कुल जनसंख्या का 74 प्रतिशत थी।

इस प्रकार वर्ष 2025 से 2026 के बीच वैश्विक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में लगभग 20 करोड़ की वृद्धि हुई है।

हालाँकि विश्व की तीन-चौथाई से अधिक आबादी तक इंटरनेट की पहुँच एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन लगभग 2 अरब (200 करोड़) लोग अब भी इंटरनेट की सुविधाओं से वंचित हैं।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इंटरनेट की पहुँच बढ़ने के बावजूद लैंगिक, आयु, शहरी-ग्रामीण तथा आर्थिक आधार पर डिजिटल असमानताएँ बनी हुई हैं।

इसके अतिरिक्त विकसित और विकासशील देशों के बीच इंटरनेट की उपलब्धता, गुणवत्ता, लागत और उपयोग में भी व्यापक अंतर पाया गया है।

ITU की ‘फैक्ट्स एंड फिगर्स 2026’ रिपोर्ट क्या है?

‘फैक्ट्स एंड फिगर्स’ अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ द्वारा प्रकाशित एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट है, जिसमें वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) से संबंधित आँकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं।

यह रिपोर्ट विश्वभर में इंटरनेट उपयोग, मोबाइल फोन स्वामित्व, मोबाइल नेटवर्क कवरेज, डिजिटल सेवाओं की लागत और इंटरनेट उपयोग में मौजूद असमानताओं का आकलन करती है।

इसका प्रमुख उद्देश्य डिजिटल विकास की प्रगति की निगरानी करना तथा उन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहाँ डिजिटल अवसंरचना और सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता है।

विश्व में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या

वर्ष 2026 में वैश्विक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़कर 6.3 अरब हो गई है।

वर्ष

इंटरनेट उपयोगकर्ता

विश्व जनसंख्या में हिस्सा

2025

6.1 अरब

74%

2026

6.3 अरब

76%

इस वृद्धि से स्पष्ट होता है कि विश्वभर में डिजिटल सेवाओं की पहुँच लगातार बढ़ रही है।

हालाँकि लगभग 24 प्रतिशत वैश्विक आबादी अभी भी इंटरनेट से जुड़ी नहीं है।

इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के अनुपात में वृद्धि

वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का अनुपात 2 प्रतिशत अंक बढ़ा है।

यह डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में सकारात्मक प्रगति को दर्शाता है।

डिजिटल विभाजन (Digital Divide) क्या है?

डिजिटल विभाजन से आशय विभिन्न व्यक्तियों, समुदायों, क्षेत्रों और देशों के बीच डिजिटल प्रौद्योगिकियों तथा इंटरनेट तक पहुँच और उनके प्रभावी उपयोग में मौजूद असमानता से है।

यह असमानता केवल इंटरनेट की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटरनेट की गति, गुणवत्ता, लागत, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता से भी संबंधित है।

उदाहरण के लिए, किसी शहरी क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति के पास उच्च गति वाला 5G इंटरनेट उपलब्ध हो सकता है, जबकि ग्रामीण या दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति को इंटरनेट की सीमित या अस्थिर सुविधा मिलती है।

इसी प्रकार उच्च आय वाले देशों में डिजिटल सेवाएँ अपेक्षाकृत अधिक सुलभ हो सकती हैं, जबकि निम्न आय वाले देशों में इंटरनेट की लागत और नेटवर्क अवसंरचना बड़ी चुनौती हो सकती है।

डिजिटल विभाजन के प्रमुख प्रकार

1. लैंगिक डिजिटल विभाजन (Gender Digital Divide)

पुरुषों और महिलाओं के बीच इंटरनेट तथा डिजिटल तकनीकों के उपयोग में अंतर।

2. आयु आधारित डिजिटल विभाजन (Age-based Digital Divide)

युवाओं और अन्य आयु वर्गों के बीच इंटरनेट उपयोग में असमानता।

3. शहरी-ग्रामीण डिजिटल विभाजन (Urban-Rural Digital Divide)

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच इंटरनेट उपलब्धता तथा डिजिटल अवसंरचना में अंतर।

4. आर्थिक डिजिटल विभाजन (Economic Digital Divide)

उच्च आय और निम्न आय वाले देशों तथा समुदायों के बीच डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता और वहनीयता में असमानता।

5. तकनीकी डिजिटल विभाजन (Technological Digital Divide)

उन्नत 5G नेटवर्क, उच्च गति वाले ब्रॉडबैंड और अन्य डिजिटल तकनीकों तक पहुँच में अंतर।

डिजिटल विभाजन समाप्त करना क्यों आवश्यक है?

आज इंटरनेट शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं तक पहुँच का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

इंटरनेट से वंचित रहने के कारण व्यक्ति अनेक सामाजिक और आर्थिक अवसरों से दूर रह सकते हैं।

विशेष रूप से ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल रोजगार, ई-कॉमर्स और डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुँच प्रभावित हो सकती है।

इसलिए ITU ने सभी लोगों के लिए सार्वभौमिक और सार्थक डिजिटल कनेक्टिविटी (Universal and Meaningful Connectivity) सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

सार्वभौमिक और सार्थक कनेक्टिविटी (Universal and Meaningful Connectivity) क्या है?

सार्वभौमिक और सार्थक कनेक्टिविटी का अर्थ ऐसी स्थिति से है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी आवश्यकता के अनुसार इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का प्रभावी उपयोग कर सके।

इसके लिए केवल इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है।

इंटरनेट की गति, गुणवत्ता, विश्वसनीयता, सुरक्षा, लागत और डिजिटल कौशल भी महत्वपूर्ण हैं।

इस अवधारणा के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को उचित मूल्य पर, आवश्यक समय और स्थान पर, गुणवत्तापूर्ण इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है।

ITU रिपोर्ट 2026 के प्रमुख निष्कर्ष

1. इंटरनेट उपयोग में लैंगिक असमानता (Gender Divide)

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर पुरुषों और महिलाओं के इंटरनेट उपयोग में अंतर बना हुआ है।

  • पुरुष इंटरनेट उपयोगकर्ता – 79 प्रतिशत।

  • महिला इंटरनेट उपयोगकर्ता – 74 प्रतिशत।

  • महिला-पुरुष इंटरनेट उपयोग अनुपात – 0.94।

इसका अर्थ है कि इंटरनेट उपयोग करने वाले पुरुषों के अनुपात की तुलना में महिलाओं का अनुपात अभी भी कम है।

हालाँकि महिला-पुरुष अनुपात में वृद्धि डिजिटल लैंगिक अंतर के कम होने का संकेत देती है।

पुरुषों और महिलाओं के इंटरनेट उपयोग में 5 प्रतिशत अंकों का अंतर है।

2. आयु आधारित डिजिटल विभाजन (Age Divide)

रिपोर्ट के अनुसार, युवा आबादी में इंटरनेट का उपयोग अन्य आयु वर्गों की तुलना में अधिक है।

वैश्विक स्तर पर 15 से 24 वर्ष की आयु के 86 प्रतिशत युवा इंटरनेट का उपयोग करते हैं।

इसके विपरीत, शेष आयु समूहों में इंटरनेट उपयोग का अनुपात 74 प्रतिशत है।

युवा आबादी और अन्य आयु समूहों के इंटरनेट उपयोग में 12 प्रतिशत अंकों का अंतर है।

यह अंतर युवाओं में डिजिटल तकनीकों के अधिक उपयोग को दर्शाता है।

3. शहरी-ग्रामीण डिजिटल विभाजन (Urban-Rural Divide)

रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच डिजिटल असमानता अभी भी महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।

वैश्विक स्तर पर शहरी क्षेत्रों में रहने वाले 82 प्रतिशत लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं।

इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट उपयोग का अनुपात 63 प्रतिशत है।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के इंटरनेट उपयोग में 19 प्रतिशत अंकों का अंतर है।

हालाँकि यह अंतर पहले की तुलना में कम हुआ है, लेकिन ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी अब भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

4. मोबाइल फोन स्वामित्व (Mobile Phone Ownership)

ITU रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर में 10 वर्ष और उससे अधिक आयु की लगभग 84 प्रतिशत आबादी के पास मोबाइल फोन है।

हालाँकि मोबाइल फोन स्वामित्व में विभिन्न आय समूहों के देशों के बीच व्यापक अंतर पाया गया है।

  • वैश्विक स्तर पर मोबाइल फोन स्वामित्व – 84 प्रतिशत।

  • उच्च आय वाले देशों में – 95 प्रतिशत से अधिक।

  • निम्न आय वाले देशों में – 57 प्रतिशत।

यह अंतर मोबाइल उपकरणों की कीमत, आर्थिक क्षमता और डिजिटल अवसंरचना से संबंधित चुनौतियों को दर्शाता है।

5. मोबाइल नेटवर्क कवरेज (Mobile Network Coverage)

वैश्विक स्तर पर लगभग 97 प्रतिशत आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है, जहाँ कम-से-कम 3G नेटवर्क उपलब्ध है।

हालाँकि उन्नत नेटवर्क तकनीकों, विशेष रूप से 5G, की पहुँच में विभिन्न देशों के बीच बड़ी असमानता बनी हुई है।

5G नेटवर्क कवरेज से संबंधित प्रमुख आँकड़े:

  • वैश्विक 5G कवरेज – 59 प्रतिशत।

  • उच्च आय वाले देशों में 5G कवरेज – 86 प्रतिशत।

  • निम्न आय वाले देशों में 5G कवरेज – 4 प्रतिशत।

उच्च आय और निम्न आय वाले देशों के बीच 5G कवरेज में 82 प्रतिशत अंकों का अंतर है।

यह डिजिटल तकनीक की गुणवत्ता और उपलब्धता में वैश्विक असमानता को दर्शाता है।

6. मोबाइल ब्रॉडबैंड डेटा उपयोग (Mobile Broadband Data Usage)

रिपोर्ट में मोबाइल ब्रॉडबैंड डेटा उपयोग के मामले में भी महत्वपूर्ण अंतर दर्ज किया गया है।

उच्च आय वाले देशों में प्रति मोबाइल ब्रॉडबैंड सदस्यता औसत मासिक डेटा उपयोग लगभग 20 GB है।

इसके विपरीत, निम्न आय वाले देशों में यह औसतन 3.4 GB प्रति माह है।

उच्च आय वाले देशों में मासिक मोबाइल ब्रॉडबैंड डेटा उपयोग निम्न आय वाले देशों की तुलना में लगभग छह गुना अधिक है।

7. इंटरनेट सेवाओं की वहनीयता (Affordability)

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर इंटरनेट सेवाओं की लागत में कमी आई है।

डेटा-ओनली मोबाइल ब्रॉडबैंड बास्केट (Data-only Mobile Broadband Basket) की वैश्विक माध्यिका कीमत घटकर प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI per capita) के 1.2 प्रतिशत के बराबर रह गई है।

इसी प्रकार फिक्स्ड ब्रॉडबैंड बास्केट की वैश्विक माध्यिका कीमत घटकर प्रति व्यक्ति GNI के 2.3 प्रतिशत के बराबर हो गई है।

प्रमुख आँकड़े:

ब्रॉडबैंड सेवा

प्रति व्यक्ति GNI के अनुपात में वैश्विक माध्यिका कीमत

डेटा-ओनली मोबाइल ब्रॉडबैंड

1.2%

फिक्स्ड ब्रॉडबैंड

2.3%

इन आँकड़ों से इंटरनेट सेवाओं की लागत में सुधार का संकेत मिलता है।

हालाँकि निम्न आय वाले देशों और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के लिए डिजिटल सेवाओं की वहनीयता अब भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International Telecommunication Union – ITU) क्या है?

अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी (Specialized Agency) है, जो सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technologies – ICTs) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समन्वय का कार्य करती है।

इसका प्रमुख उद्देश्य विश्वभर में दूरसंचार सेवाओं के विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार और संचार प्रणालियों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों को बढ़ावा देना है।

ITU विश्व के सबसे पुराने अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक है।

ITU की स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ की स्थापना 17 मई 1865 को पेरिस, फ्रांस में हुई थी।

स्थापना के समय इसका नाम अंतरराष्ट्रीय तार संघ (International Telegraph Union) था।

प्रारंभ में इसका प्रमुख उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच तार संचार (Telegraph Communication) से संबंधित नियमों और तकनीकी व्यवस्थाओं का समन्वय करना था।

समय के साथ दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के विकास के कारण इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ।

ITU के विकास से संबंधित प्रमुख घटनाएँ:

  • 1865: पेरिस में अंतरराष्ट्रीय तार संघ की स्थापना।

  • 1932: संगठन का नाम बदलकर अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) किया गया।

  • 1947: ITU संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट एजेंसी बना।

  • वर्तमान मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड।

ITU को संयुक्त राष्ट्र परिवार की सबसे पुरानी एजेंसी माना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के प्रमुख कार्य

1. रेडियो स्पेक्ट्रम का अंतरराष्ट्रीय समन्वय

ITU विश्वभर में रेडियो आवृत्ति स्पेक्ट्रम के समन्वित उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों और व्यवस्थाओं को विकसित करता है।

इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की संचार प्रणालियों के बीच हस्तक्षेप को कम करना और स्पेक्ट्रम के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना है।

2. उपग्रह कक्षीय संसाधनों का समन्वय

ITU उपग्रहों की कक्षीय स्थितियों और संबंधित रेडियो आवृत्तियों के अंतरराष्ट्रीय समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इससे उपग्रह संचार सेवाओं के व्यवस्थित संचालन में सहायता मिलती है।

3. दूरसंचार मानकों का विकास

ITU विभिन्न संचार प्रणालियों के बीच तकनीकी अनुकूलता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित करता है।

ये मानक इंटरनेट, ब्रॉडबैंड, वायरलेस संचार और अन्य दूरसंचार सेवाओं के विकास में सहायक होते हैं।

4. विकासशील देशों में डिजिटल अवसंरचना को प्रोत्साहन

ITU विकासशील और अल्पविकसित देशों में दूरसंचार अवसंरचना तथा डिजिटल सेवाओं के विस्तार के लिए सहयोग प्रदान करता है।

5. डिजिटल विभाजन को कम करना

ITU का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विभिन्न देशों, समुदायों और सामाजिक समूहों के बीच डिजिटल प्रौद्योगिकियों की उपलब्धता में मौजूद असमानताओं को कम करना है।

6. अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार सहयोग को बढ़ावा

ITU सदस्य देशों, निजी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और अन्य संगठनों के बीच तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित करता है।

7. आधुनिक संचार प्रौद्योगिकियों के विकास में सहयोग

ITU निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानकीकरण में भूमिका निभाता है:

  • ब्रॉडबैंड और मोबाइल नेटवर्क।

  • वायरलेस संचार प्रौद्योगिकियाँ।

  • वैमानिकी एवं समुद्री संचार।

  • रेडियो खगोल विज्ञान।

  • उपग्रह आधारित पृथ्वी अवलोकन।

  • समुद्री एवं पर्यावरणीय निगरानी से संबंधित संचार।

  • इंटरनेट एवं प्रसारण प्रौद्योगिकियाँ।

ITU की सदस्यता

प्रदान की गई रिपोर्ट के अनुसार, ITU की वैश्विक सदस्यता में 194 सदस्य देश शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त लगभग 1,000 कंपनियाँ, विश्वविद्यालय, अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय संगठन भी इसकी गतिविधियों में भाग लेते हैं।

यह व्यापक सदस्यता दूरसंचार और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाती है।

ITU और सतत विकास लक्ष्य (SDGs)

डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विशेष रूप से इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता निम्नलिखित लक्ष्यों से संबंधित है।

SDG 4 – गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन पाठ्यक्रम और शैक्षिक संसाधनों तक पहुँच बढ़ाना।

SDG 5 – लैंगिक समानता: महिलाओं और पुरुषों के बीच डिजिटल सेवाओं के उपयोग में असमानता कम करना।

SDG 8 – सम्मानजनक कार्य और आर्थिक वृद्धि: डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऑनलाइन रोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना।

SDG 9 – उद्योग, नवाचार और अवसंरचना: दूरसंचार एवं डिजिटल अवसंरचना का विस्तार करना।

SDG 10 – असमानताओं में कमी: विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों के बीच डिजिटल विभाजन को कम करना।

SDG 17 – लक्ष्यों के लिए साझेदारी: डिजिटल विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।

डिजिटल विभाजन को कम करने के लिए आवश्यक उपाय

वैश्विक स्तर पर सार्वभौमिक डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित प्रयास महत्वपूर्ण हैं:

  1. ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट अवसंरचना का विस्तार।

  2. किफायती मोबाइल और ब्रॉडबैंड सेवाओं की उपलब्धता।

  3. महिलाओं और वंचित समुदायों के बीच डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा।

  4. निम्न आय वाले देशों में उन्नत दूरसंचार तकनीकों का विकास।

  5. डिजिटल उपकरणों की लागत को कम करना।

  6. उच्च गति वाले इंटरनेट और बेहतर नेटवर्क गुणवत्ता को प्रोत्साहित करना।

  7. डिजिटल सुरक्षा, गोपनीयता और समावेशी तकनीकी विकास पर ध्यान देना।

भारत के लिए ITU रिपोर्ट का महत्व

भारत विश्व के प्रमुख डिजिटल बाजारों में शामिल है। इसलिए वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी से संबंधित ITU की रिपोर्ट भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है।

1. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम

डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत डिजिटल अवसंरचना, डिजिटल सेवाओं और डिजिटल साक्षरता के विस्तार पर जोर दिया जाता है।

2. भारतनेट परियोजना

भारतनेट का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार करना है।

3. 5G सेवाओं का विस्तार

भारत में 5G सेवाओं का विस्तार उच्च गति वाले इंटरनेट तथा आधुनिक डिजिटल अनुप्रयोगों के विकास को प्रोत्साहित करता है।

4. डिजिटल शिक्षा और रोजगार

इंटरनेट की बेहतर उपलब्धता ऑनलाइन शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है।

5. डिजिटल समावेशन

ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक डिजिटल सेवाओं की पहुँच बढ़ाना समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ की ‘फैक्ट्स एंड फिगर्स 2026’ रिपोर्ट दर्शाती है कि विश्व डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है।

वर्ष 2026 में लगभग 6.3 अरब लोगों का इंटरनेट से जुड़ना वैश्विक डिजिटल विकास की एक प्रमुख उपलब्धि है।

इसके बावजूद लगभग 2 अरब लोगों का इंटरनेट से वंचित रहना तथा लिंग, आयु, स्थान और आय के आधार पर डिजिटल असमानताओं का बने रहना गंभीर चुनौती है।

विशेष रूप से उच्च आय वाले देशों में 86 प्रतिशत और निम्न आय वाले देशों में केवल 4 प्रतिशत 5G कवरेज डिजिटल विकास के असमान स्वरूप को दर्शाता है।

इसलिए भविष्य की डिजिटल नीतियों में केवल इंटरनेट पहुँच बढ़ाने के बजाय किफायती, गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और समावेशी डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

महत्वपूर्ण बिंदु

विवरण

रिपोर्ट का नाम

Facts and Figures 2026

रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था

ITU

विश्व में इंटरनेट उपयोगकर्ता

6.3 अरब

इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का अनुपात

76%

इंटरनेट से वंचित जनसंख्या

लगभग 2 अरब

पुरुष इंटरनेट उपयोगकर्ता

79%

महिला इंटरनेट उपयोगकर्ता

74%

महिला-पुरुष इंटरनेट उपयोग अनुपात

0.94

15–24 वर्ष के इंटरनेट उपयोगकर्ता

86%

शहरी इंटरनेट उपयोगकर्ता

82%

ग्रामीण इंटरनेट उपयोगकर्ता

63%

वैश्विक मोबाइल फोन स्वामित्व (10+ आयु)

84%

कम-से-कम 3G नेटवर्क कवरेज

97%

वैश्विक 5G कवरेज

59%

उच्च आय वाले देशों में 5G कवरेज

86%

निम्न आय वाले देशों में 5G कवरेज

4%

उच्च आय वाले देशों में मासिक मोबाइल डेटा उपयोग

20 GB प्रति सदस्यता

निम्न आय वाले देशों में मासिक मोबाइल डेटा उपयोग

3.4 GB प्रति सदस्यता

ITU की स्थापना

17 मई 1865

स्थापना स्थल

पेरिस, फ्रांस

प्रारंभिक नाम

International Telegraph Union

वर्तमान नाम अपनाया

1932

संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट एजेंसी बना

1947

मुख्यालय

जिनेवा, स्विट्जरलैंड

ITU के सदस्य देश

194

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