बैठक में भारतीय निर्यात के लिए स्विस बाजार तक पहुंच बढ़ाने तथा दोनों देशों के बीच निवेश को सुगम बनाने पर भी जोर दिया गया। इन समझौतों का उद्देश्य आर्थिक संबंधों को विस्तार देना, युवाओं के लिए पेशेवर अवसर बढ़ाना, परिवहन प्रौद्योगिकी में सहयोग विकसित करना और अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
भारत-स्विट्जरलैंड समझौतों के प्रमुख उद्देश्य
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों को मुख्य रूप से पांच क्षेत्रों में बांटा जा सकता है:
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प्रवासन एवं आवागमन: लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित और सुगम बनाना।
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युवा पेशेवरों का आदान-प्रदान: युवाओं को दूसरे देश में अस्थायी रोजगार और कौशल विकास के अवसर देना।
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परिवहन एवं सतत अवसंरचना: आधुनिक परिवहन प्रणालियों और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग।
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वैज्ञानिक अनुसंधान: भारतीय और स्विस वैज्ञानिकों तथा शोध संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग।
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नवाचार एवं उद्यमिता: स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्योग-अकादमिक साझेदारी को बढ़ावा देना।
1. प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी पर समझौता ज्ञापन (MMP)
प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी (Migration and Mobility Partnership—MMP) का उद्देश्य भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लोगों की आवाजाही से संबंधित सहयोग को मजबूत करना है। इसके अंतर्गत दोनों देशों के नागरिकों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार आवागमन, अध्ययन और अन्य पात्र गतिविधियों से जुड़े अवसरों को सुगम बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
इस समझौते के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:
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समान व्यवहार का सिद्धांत: प्रवासन और आवागमन संबंधी सहयोग में दोनों देशों के लागू कानूनों के अनुरूप समान व्यवहार को प्रोत्साहित करना।
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अनियमित प्रवासन पर रोक: अवैध या अनियमित प्रवासन को रोकने और उससे निपटने में सहयोग करना।
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मानव शोषण एवं तस्करी की रोकथाम: मानव तस्करी और शोषण से संबंधित मामलों में सहयोग बढ़ाना।
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बहु-प्रवेश वीजा: निर्धारित शर्तों के अधीन अधिकतम पांच वर्ष तक के बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान, जिसमें प्रत्येक यात्रा पर अधिकतम छह महीने तक ठहरने की व्यवस्था शामिल है।
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विद्यार्थियों के लिए सुविधा: पात्र विद्यार्थियों के लिए एक वर्ष के नवीकरणीय परमिट की व्यवस्था।
यह समझौता विद्यार्थियों, पेशेवरों और अन्य पात्र यात्रियों के लिए आवागमन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, वीजा और परमिट की वास्तविक पात्रता संबंधित नियमों और शर्तों के अधीन रहेगी।
2. युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान पर समझौता (YPS)
युवा पेशेवर योजना (Young Professionals Scheme—YPS) का उद्देश्य भारत और स्विट्जरलैंड के युवाओं को दूसरे देश में अस्थायी रोजगार के माध्यम से अपने पेशेवर कौशल और भाषा संबंधी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर देना है।
इस व्यवस्था के प्रमुख बिंदु हैं:
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पेशेवर अनुभव: युवाओं को अपने संबंधित कार्यक्षेत्र में दूसरे देश में काम करने का अवसर प्रदान करना।
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भाषा कौशल का विकास: विदेशी कार्य वातावरण में भाषा और संवाद कौशल को बेहतर बनाना।
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वार्षिक आदान-प्रदान: प्रारंभिक व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक देश से प्रतिवर्ष 300 व्यक्तियों का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
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संख्या में वृद्धि की संभावना: आवश्यकताओं और सहमति के अनुसार यह संख्या बढ़ाकर 500 तक की जा सकती है।
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सत्यापन की समय-सीमा: राष्ट्रीयता और निवास संबंधी स्थिति के सत्यापन के लिए 30 या 90 दिनों की समय-सीमा से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
इस योजना से युवा पेशेवरों को अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव प्राप्त करने, नए कौशल सीखने और दोनों देशों के कारोबारी तथा पेशेवर वातावरण को समझने में सहायता मिल सकती है।
3. परिवहन प्रौद्योगिकी, गतिशीलता प्रणालियों और अवसंरचना पर समझौता ज्ञापन
भारत और स्विट्जरलैंड ने परिवहन प्रौद्योगिकी, गतिशीलता प्रणालियों और बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन किया।
इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक और टिकाऊ अवसंरचना के माध्यम से परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
प्रमुख सहयोग क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
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इलेक्ट्रिक वाहन: इलेक्ट्रिक वाहनों और उनसे संबंधित तकनीकों के विकास में सहयोग।
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रोपवे प्रणाली: पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में परिवहन के वैकल्पिक साधनों को प्रोत्साहित करना।
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सुरंग निर्माण: सुरंगों की योजना, निर्माण और संबंधित तकनीकी विशेषज्ञता में सहयोग।
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सतत अवसंरचना: पर्यावरणीय प्रभाव कम करने वाली परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देना।
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चक्रीय अर्थव्यवस्था: संसाधनों के पुनः उपयोग, अपशिष्ट में कमी और संसाधन दक्षता पर आधारित व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करना।
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अन्य परिवहन क्षेत्र: आधुनिक परिवहन प्रणालियों तथा संबंधित बुनियादी ढांचे में तकनीकी सहयोग बढ़ाना।
स्विट्जरलैंड को सुरंग निर्माण, पर्वतीय परिवहन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशेष अनुभव प्राप्त है। भारत में परिवहन नेटवर्क के विस्तार और आधुनिक अवसंरचना के विकास के लिए ऐसा सहयोग उपयोगी हो सकता है।
4. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन के बीच आशय पत्र (LoI)
भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) के बीच आशय पत्र (Letter of Intent—LoI) का उद्देश्य दोनों देशों के अनुसंधान समुदायों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
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वैज्ञानिक सहयोग: भारतीय और स्विस वैज्ञानिकों के बीच प्रारंभिक स्तर की संयुक्त शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करना।
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अनुसंधान साझेदारी: भविष्य में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के लिए संस्थागत साझेदारी विकसित करना।
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दीर्घकालिक कार्यक्रम: सहमत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निरंतर सहयोग के लिए व्यापक ढांचा तैयार करना।
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ज्ञान का आदान-प्रदान: वैज्ञानिक विशेषज्ञता, शोध अनुभव और नई तकनीकों से संबंधित जानकारी साझा करना।
इस सहयोग से दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और वैज्ञानिक समुदायों के बीच संपर्क मजबूत हो सकता है। इससे नई तकनीकों और वैज्ञानिक समाधानों के विकास के लिए अवसर भी बढ़ सकते हैं।
5. नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता पर कार्यान्वयन व्यवस्था
भारत और स्विट्जरलैंड ने नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक कार्यान्वयन व्यवस्था (Implementation Arrangement—IA) पर सहमति व्यक्त की।
इस व्यवस्था के अंतर्गत इंडो-स्विस अकादमिक-उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम (AIT India) को लागू करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य शुरुआती चरण के स्टार्टअप और उद्यमियों को सहयोग प्रदान करना है।
प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं:
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द्विपक्षीय आदान-प्रदान: भारतीय और स्विस उद्यमियों तथा विशेषज्ञों के बीच अनुभव साझा करना।
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संयुक्त कार्यशालाएं: नवाचार, प्रौद्योगिकी और व्यवसाय विकास पर प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएं आयोजित करना।
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क्षमता निर्माण: स्टार्टअप को व्यावसायिक कौशल, तकनीकी ज्ञान और प्रबंधन क्षमता विकसित करने में मदद करना।
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प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच तकनीक के व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देना।
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नेटवर्किंग: स्टार्टअप, निवेशकों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच संपर्क विकसित करना।
यह व्यवस्था अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के बीच की दूरी कम करने तथा नए उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती है।
भारत-स्विट्जरलैंड द्विपक्षीय संबंधों का ऐतिहासिक विकास
भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध लंबे समय से मैत्रीपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग का इतिहास है।
कूटनीतिक संबंधों की स्थापना: भारत और स्विट्जरलैंड के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध 14 अगस्त 1948 को नई दिल्ली में मैत्री संधि पर हस्ताक्षर के साथ स्थापित हुए। इसके बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग का विस्तार हुआ।
व्यापारिक संबंधों का इतिहास: दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक संपर्क 19वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों से विकसित होने लगे थे। वर्ष 1851 में वोलकार्ट ट्रेडिंग कंपनी ने बासेल और मुंबई में अपने कार्यालय स्थापित किए। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को संस्थागत आधार मिला।
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान स्विस उपस्थिति: प्रथम विश्व युद्ध के समय स्विट्जरलैंड ने खाद्य आपूर्ति और आर्थिक हितों से संबंधित आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मुंबई सहित विश्व के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर वाणिज्य दूतावास स्थापित किए।
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री और भारत-स्विट्जरलैंड सहयोग
चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) भारत के रेल कोच निर्माण क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इसकी स्थापना से संबंधित सहयोग भारत सरकार और ज्यूरिख की स्विस कार्स एंड एलिवेटर्स मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड के बीच 1949 में हुए समझौते से जुड़ा था।
इस औद्योगिक सहयोग ने भारत में स्विस आर्थिक उपस्थिति को विस्तार देने में योगदान दिया। समय के साथ स्विस कंपनियों ने भारत में अपने कारोबार और गतिविधियों का विविधीकरण किया।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापारिक संबंध
स्विट्जरलैंड भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार में औद्योगिक उत्पादों, रसायनों, औषधियों, मशीनरी, कीमती धातुओं, वस्त्रों और तकनीकी उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वित्त वर्ष 2024–25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार का मूल्य 23.27 अरब अमेरिकी डॉलर बताया गया। इस आधार पर स्विट्जरलैंड भारत का 15वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।
भारत से स्विट्जरलैंड को प्रमुख निर्यात
भारत स्विट्जरलैंड को कई प्रकार की वस्तुओं का निर्यात करता है। प्रमुख वस्तुएं निम्नलिखित हैं:
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कार्बनिक रसायन
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कीमती पत्थर और आभूषण
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धातुएं
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वस्त्र और सूती उत्पाद
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विद्युत मशीनरी और उपकरण
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औषधियां और फार्मास्यूटिकल उत्पाद
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कृषि उत्पाद
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मशीनरी और परिशुद्धता उपकरण
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चमड़े के उत्पाद
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जूते और जूतों के ऊपरी हिस्से
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प्लास्टिक उत्पाद
इन वस्तुओं का निर्यात भारतीय विनिर्माण, रसायन, औषधि और आभूषण उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच का अवसर प्रदान करता है।
स्विट्जरलैंड से भारत को प्रमुख आयात
भारत स्विट्जरलैंड से भी विभिन्न औद्योगिक और उच्च मूल्य वाले उत्पाद आयात करता है। प्रमुख आयातों में शामिल हैं:
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सोना और अन्य बुलियन
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रसायन एवं औषधियां
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मशीनरी
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परिवहन उपकरण
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परिशुद्धता इंजीनियरिंग उत्पाद
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घड़ियां और संबंधित उत्पाद
स्विट्जरलैंड विश्व के प्रमुख स्वर्ण शोधन केंद्रों में से एक है। इसलिए दोनों देशों के व्यापार में सोने और कीमती धातुओं का विशेष महत्व है। इसके अतिरिक्त, स्विस मशीनरी, औषधि और परिशुद्धता इंजीनियरिंग उद्योग भारत की औद्योगिक जरूरतों से जुड़े हुए हैं।
भारत में स्विस निवेश और रोजगार
स्विट्जरलैंड भारत में विदेशी निवेश का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। अप्रैल 2000 से जून 2025 तक भारत में स्विट्जरलैंड से प्राप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का संचयी मूल्य 10.87 अरब अमेरिकी डॉलर बताया गया है। इस आधार पर स्विट्जरलैंड वैश्विक निवेशक देशों में 12वें स्थान पर था।
भारत में लगभग 330 स्विस कंपनियां अपनी सहायक कंपनियों, संयुक्त उद्यमों, संपर्क कार्यालयों या प्रतिनिधि कार्यालयों के माध्यम से मौजूद हैं। इनमें से 294 कंपनियों ने 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद भारतीय बाजार में प्रवेश किया।
इन कंपनियों ने भारत में 1.66 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए हैं।
स्विस निवेश की प्रमुख विशेषताएं हैं:
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आधुनिक प्रौद्योगिकी और औद्योगिक विशेषज्ञता का हस्तांतरण।
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विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में निवेश।
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औषधि एवं रसायन उद्योग में व्यावसायिक गतिविधियां।
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भारतीय श्रमिकों और पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर।
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वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के साथ भारतीय उद्योगों का जुड़ाव।
भारत-EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA)
भारत और स्विट्जरलैंड के आर्थिक संबंधों में व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (Trade and Economic Partnership Agreement—TEPA) एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यह समझौता भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (European Free Trade Association—EFTA) के सदस्य देशों के बीच हुआ है। EFTA के चार सदस्य हैं:
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स्विट्जरलैंड
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नॉर्वे
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आइसलैंड
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लिकटेंस्टाइन
दिए गए विवरण के अनुसार, यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 को लागू हुआ।
TEPA का उद्देश्य भारत और EFTA देशों के बीच व्यापार तथा आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। इसके प्रमुख संभावित लाभों में बाजार तक पहुंच बेहतर करना, निवेश को प्रोत्साहित करना, व्यापारिक बाधाओं को कम करना और आर्थिक साझेदारी का विस्तार करना शामिल है।
भारत के लिए यह समझौता यूरोपीय बाजारों में निर्यात के अवसर बढ़ाने तथा विदेशी निवेश आकर्षित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वहीं EFTA देशों को भारत के बड़े बाजार और आर्थिक विकास से जुड़े अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
स्विट्जरलैंड में भारतीय समुदाय
स्विट्जरलैंड में भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और पेशेवर संबंधों को मजबूत करने में योगदान देता है।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, स्विट्जरलैंड में 29,000 से अधिक भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इनमें लगभग 9,662 भारतीय मूल के व्यक्ति शामिल हैं।
भारतीय समुदाय के कई सदस्य निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्यरत हैं:
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इंजीनियरिंग
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सूचना प्रौद्योगिकी
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औषधि उद्योग
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पैरामेडिकल सेवाएं
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नर्सिंग और स्वास्थ्य सेवाएं
भारतीय समुदाय की उपस्थिति से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क, पेशेवर नेटवर्क और लोगों के बीच संबंध मजबूत होते हैं।
पांच समझौतों का भारत के लिए महत्व
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुए पांच समझौते केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक विकास, कौशल निर्माण, वैज्ञानिक प्रगति और तकनीकी सहयोग से भी जुड़े हैं।
आर्थिक लाभ: बाजार तक पहुंच और निवेश को सुगम बनाने से भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
युवाओं के लिए अवसर: युवा पेशेवरों की आवाजाही और अस्थायी रोजगार से संबंधित व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय अनुभव तथा कौशल विकास में मदद कर सकती है।
वैज्ञानिक अनुसंधान: DST और SNSF के बीच सहयोग से शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक संस्थानों को संयुक्त अनुसंधान की संभावनाएं मिल सकती हैं।
परिवहन एवं अवसंरचना: इलेक्ट्रिक वाहनों, रोपवे, सुरंगों और सतत परिवहन तकनीकों में सहयोग भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में उपयोगी हो सकता है।
स्टार्टअप और नवाचार: AIT India के माध्यम से उद्यमियों को प्रशिक्षण, नेटवर्किंग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के अवसर मिल सकते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| भारत-स्विट्जरलैंड वार्ता | 5 अक्टूबर, नई दिल्ली |
| भारतीय प्रधानमंत्री | नरेंद्र मोदी |
| स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति | गाय पार्मेलिन |
| औपचारिक राजनयिक संबंध | 14 अगस्त 1948 |
| कुल व्यापार, वित्त वर्ष 2024–25 | 23.27 अरब अमेरिकी डॉलर |
| भारत में स्विस FDI | 10.87 अरब अमेरिकी डॉलर, अप्रैल 2000–जून 2025 |
| भारत में मौजूद स्विस कंपनियां | लगभग 330 |
| स्विस कंपनियों द्वारा सृजित रोजगार | 1.66 लाख से अधिक |
| EFTA के सदस्य | स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन |
| TEPA लागू होने की तिथि | 1 अक्टूबर 2025 |
| विज्ञान संबंधी भारतीय संस्था | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) |
| स्विस विज्ञान संस्था | स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) |
| युवा पेशेवर योजना | YPS |
| नवाचार कार्यक्रम | इंडो-स्विस अकादमिक-उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम (AIT India) |
निष्कर्ष
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच पांच समझौतों पर सहयोग दोनों देशों की साझेदारी को व्यापार, निवेश, प्रवासन, विज्ञान, परिवहन और नवाचार जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का प्रयास है। ऐतिहासिक मैत्रीपूर्ण संबंधों, बढ़ते व्यापार, स्विस निवेश और TEPA जैसे आर्थिक ढांचों के आधार पर दोनों देशों के पास सहयोग विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं।