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पटना में देश का पहला ‘Victim Rights Centre’ स्थापित किया जाएगा

पटना में देश का पहला Victim Rights Centre

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत शनिवार को पटना में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BLSA) के परिसर में देश के अपनी तरह के पहले ‘Victim Rights Centre’ (पीड़ित अधिकार केंद्र) का उद्घाटन करेंगे।

यह केंद्र बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की एक पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पीड़ितों को कानून के तहत उपलब्ध विभिन्न अधिकारों और राहतों तक पहुंच दिलाना तथा उनके मामलों में विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

पीड़ित अधिकार केंद्र की आवश्यकता क्यों पड़ी?

वर्तमान व्यवस्था में किसी पीड़ित व्यक्ति के लिए अलग-अलग प्रकार की सहायता प्राप्त करने हेतु कई संस्थाओं और विभागों से संपर्क करना पड़ सकता है। किसी एक मामले में पीड़ित को कानूनी सहायता, चिकित्सा सहायता, पुनर्वास, मुआवजा या अन्य सरकारी लाभ की आवश्यकता हो सकती है।

ऐसी स्थिति में कोई एक ऐसी केंद्रीय एजेंसी नहीं है जो पीड़ित को प्राप्त होने वाले सभी अधिकारों और पात्रताओं की पहचान करे और प्रत्येक राहत को उसके अंतिम परिणाम तक पहुंचाए।

इसके कारण कानून द्वारा दिए गए कुछ अधिकार और लाभ व्यावहारिक रूप से पीड़ित तक नहीं पहुंच पाते हैं। प्रस्तावित Victim Rights Centre इसी समन्वय की कमी को दूर करने का प्रयास करेगा।

केंद्र पीड़ितों के लिए एकल संपर्क केंद्र के रूप में काम करेगा

Victim Rights Centre पीड़ित के लिए एक प्रकार के प्रवेश द्वार (Gateway) के रूप में काम करेगा।

केंद्र में प्रत्येक मामले का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे पीड़ित को अपनी पूरी स्थिति और घटना का विवरण अलग-अलग काउंटरों या संस्थाओं के सामने बार-बार बताने की आवश्यकता कम होगी।

एक बार मामला केंद्र के रिकॉर्ड में आने के बाद उससे संबंधित आवश्यक अधिकारों और राहतों की पहचान की जाएगी तथा संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय के माध्यम से उन्हें पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।

प्रत्येक मामले की निगरानी और समयसीमा

केंद्र के कामकाज में आंतरिक समयसीमा निर्धारित की जाएगी। इसका अर्थ है कि किसी मामले को केवल दर्ज करके छोड़ नहीं दिया जाएगा, बल्कि उसके समाधान की प्रक्रिया की निगरानी भी की जाएगी।

केंद्र अपने कार्यों के लिए संबंधित प्राधिकरण के प्रति जवाबदेह रहेगा। मामले में उपलब्ध राहत प्राप्त होने और उसके परिणाम का सत्यापन होने के बाद ही उसे बंद किया जाएगा।

यदि पीड़ित स्वयं यह निर्दिष्ट करता है कि मामले को बंद किया जाना चाहिए, तो उस स्थिति में भी मामला बंद किया जा सकेगा।

विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय

Victim Rights Centre अकेले काम नहीं करेगा। यह पहले से काम कर रही विभिन्न सरकारी और संस्थागत व्यवस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करेगा।

इसके लिए निम्न संस्थाओं और संगठनों के साथ सहयोग किया जाएगा:

  • पुलिस
  • अस्पताल
  • बाल कल्याण समितियां
  • वन स्टॉप सेंटर
  • राज्य सरकार के विभाग
  • संबंधित क्षेत्र में कार्यरत अन्य संगठन

इस व्यवस्था का उद्देश्य पीड़ित को उपलब्ध विभिन्न सेवाओं और अधिकारों को एक-दूसरे से जोड़ना है।

मौजूदा संसाधनों और कर्मचारियों से संचालन

यह केंद्र बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मौजूदा परिसर, कर्मचारियों और संसाधनों के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

इससे एक नई समानांतर व्यवस्था तैयार करने के बजाय पहले से मौजूद संस्थागत ढांचे का उपयोग करके पीड़ित सहायता व्यवस्था को अधिक समन्वित बनाने का प्रयास किया जाएगा।

परियोजना के पीछे न्यायिक मार्गदर्शन

इस पायलट परियोजना की अवधारणा न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव, पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं BLSA के संरक्षक-प्रमुख, के मार्गदर्शन में की गई है।

इसके अलावा न्यायमूर्ति सुधीर सिंह, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष, के निर्देश पर इस परियोजना को मंजूरी दी गई और इसे लागू किया गया।

संचालन के लिए स्टीयरिंग कमेटी

Victim Rights Centre की नीतिगत दिशा के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी बनाई गई है।

इस समिति की अध्यक्षता पटना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश करेंगे। न्यायमूर्ति अजीत कुमार इस स्टीयरिंग कमेटी के पहले अध्यक्ष हैं।

यह समिति केंद्र के कामकाज के लिए आवश्यक नीतिगत दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करेगी।

ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन भी शुरू होगी

Victim Rights Centre के साथ ही ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी।

यह हेल्पलाइन बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की 2023 की ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के समेकन, पुनर्वास और न्याय तक पहुंच संबंधी योजना के साथ मिलकर काम करेगी।

यह योजना Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को किन क्षेत्रों में सहायता मिलेगी?

ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन और संबंधित सहायता व्यवस्था के माध्यम से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को विभिन्न अधिकारों और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच बनाने में सहायता दी जाएगी।

इसमें विशेष रूप से:

  • पहचान प्रमाणपत्र प्राप्त करने में सहायता
  • आवास तक पहुंच
  • रोजगार से संबंधित सहायता
  • स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच
  • कल्याणकारी योजनाओं और लाभों तक पहुंच

जैसे विषय शामिल होंगे।

केंद्र से संबंधित प्रकाशन जारी किया जाएगा

इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा विधिक सेवा प्राधिकरण के विशेष केंद्र से संबंधित प्रकाशन का भी विमोचन किया जाएगा।

इस प्रकाशन में केंद्र की योजना, उसके कामकाज की मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure—SOP) और विभिन्न चरणों को दर्ज करने के लिए निर्धारित प्रपत्रों की जानकारी दी गई है।

इस प्रकाशन को अधिवक्ता शमा सिन्हा ने तैयार किया है, जो इस केंद्र की परियोजना समन्वयक के रूप में कार्य कर रही हैं।

मल्टी-यूटिलिटी वाहनों को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी

Victim Rights Centre के उद्घाटन के अवसर पर मल्टी-यूटिलिटी वाहनों के एक बेड़े को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी।

इन वाहनों को परियोजना से संबंधित विभिन्न गतिविधियों और सहायता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उपयोग किए जाने की योजना है।

12 महीने तक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलेगा

Victim Rights Centre को प्रारंभिक रूप से पटना में 12 महीने तक पायलट परियोजना के रूप में संचालित किया जाएगा।

इस अवधि के दौरान इसके कामकाज और परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा। मूल्यांकन के आधार पर परियोजना को अन्य जिलों तक विस्तारित किया जाएगा।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से विस्तार

पटना में पायलट परियोजना के मूल्यांकन के बाद इसे राज्य के अन्य जिलों तक ले जाने की योजना है।

अन्य जिलों में इसके विस्तार के लिए District Legal Services Authorities (जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों) का उपयोग किया जाएगा।

इससे एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाएगा जिसमें पीड़ितों को अलग-अलग संस्थाओं के बीच भटकने के बजाय एक समन्वित सहायता प्रणाली के माध्यम से उनके अधिकारों और उपलब्ध राहतों तक पहुंच प्राप्त हो सके।

परियोजना का व्यापक महत्व

Victim Rights Centre का मुख्य फोकस केवल पीड़ित की शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मामले में उपलब्ध अधिकारों और राहतों को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने पर रहेगा।

इस व्यवस्था में मामले का रिकॉर्ड बनाए रखना, संबंधित संस्थाओं से समन्वय करना, समयसीमा के भीतर कार्रवाई की निगरानी करना और राहत प्राप्त होने के बाद परिणाम का सत्यापन करना महत्वपूर्ण तत्व होंगे।

इस प्रकार यह पायलट परियोजना कानून में पहले से मौजूद अधिकारों को वास्तविक रूप से पीड़ितों तक पहुंचाने के लिए समन्वित और जवाबदेह सहायता तंत्र विकसित करने का प्रयास है।