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भारत में FDI ने बनाया नया रिकॉर्ड, PLI योजनाओं से निवेश और रोजगार को बढ़ावा

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का नया रिकॉर्ड

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वोच्च स्तर हासिल किया है। इस अवधि में भारत में कुल 94.53 अरब अमेरिकी डॉलर का FDI आया।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच भारत में कुल संचयी FDI प्रवाह 843 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।

यह आंकड़ा भारत में विदेशी निवेशकों के बढ़ते विश्वास और देश में निवेश तथा विनिर्माण के लिए तैयार किए जा रहे वातावरण को दर्शाता है।

मेक इन इंडिया अभियान की 12वीं वर्षगांठ

यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब 25 सितंबर को ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की 12वीं वर्षगांठ मनाई गई।

मेक इन इंडिया अभियान का उद्देश्य भारत को एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना तथा देश में निवेश, उत्पादन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।

इस अभियान के साथ भारत में निवेश को आसान बनाने, विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल की गई हैं।

2025-26 में FDI 94.53 अरब डॉलर

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक FDI प्रवाह 94.53 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। यह भारत में दर्ज अब तक का सबसे अधिक वार्षिक FDI प्रवाह है।

FDI के माध्यम से विदेशी कंपनियां भारत में निवेश कर सकती हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन, व्यवसाय तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों में भाग ले सकती हैं।

भारत में FDI के बढ़ते स्तर को देश में निवेश और विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2014-15 से 2025-26 तक 843 अरब डॉलर का संचयी FDI

वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत में कुल संचयी FDI प्रवाह 843 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।

इस अवधि में भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत सुधारों, व्यापार सुगमता और विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली पहलों पर जोर दिया।

PLI योजनाओं से 2.40 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश

सरकार की Production Linked Incentive (PLI) योजनाओं ने भी भारत में निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

25 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, PLI योजनाओं के अंतर्गत 2.40 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ है।

PLI योजना का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और कंपनियों को भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

PLI योजनाओं से 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और बिक्री

PLI योजनाओं के तहत अब तक 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन/बिक्री दर्ज की गई है।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना के तहत किए गए निवेश का प्रभाव केवल निवेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्पादन और बिक्री गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है।

15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात

PLI योजनाओं के तहत 15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात भी दर्ज किया गया है।

इससे भारत के विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और देश में उत्पादित वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने में इन योजनाओं की भूमिका सामने आती है।

14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार

PLI योजनाओं के माध्यम से 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न हुए हैं।

प्रत्यक्ष रोजगार से आशय उन नौकरियों से है जो सीधे उत्पादन या संबंधित कंपनियों में पैदा होती हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रोजगार आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन, सेवाओं और अन्य संबंधित आर्थिक गतिविधियों में उत्पन्न होते हैं।

किन क्षेत्रों को PLI से लाभ मिला?

विभिन्न महत्वपूर्ण विनिर्माण क्षेत्रों ने PLI योजनाओं से लाभ प्राप्त किया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार
  • फार्मास्यूटिकल्स
  • चिकित्सा उपकरण
  • ऑटोमोबाइल
  • आईटी हार्डवेयर
  • विशेष इस्पात (Speciality Steel)

इन क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार क्षेत्र

PLI योजनाओं से इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार क्षेत्र को महत्वपूर्ण लाभ मिला है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ाने और इस क्षेत्र में निवेश तथा रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिया गया है।

फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र

फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र भी PLI योजनाओं के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ भारत को वैश्विक विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

ऑटोमोबाइल और आईटी हार्डवेयर क्षेत्र

ऑटोमोबाइल तथा आईटी हार्डवेयर भी PLI योजनाओं के तहत महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

इन क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन बढ़ने से भारत के विनिर्माण आधार को मजबूत करने तथा वैश्विक बाजारों के लिए उत्पादन क्षमता विकसित करने में सहायता मिलती है।

विशेष इस्पात क्षेत्र को बढ़ावा

विशेष इस्पात (Speciality Steel) क्षेत्र को भी PLI योजनाओं से लाभ मिला है।

इस क्षेत्र में घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और भारत के इस्पात उद्योग को अधिक उन्नत एवं प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट सिटी का विकास

सरकार देशभर में ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट सिटी विकसित कर रही है। ये परियोजनाएं National Industrial Corridor Development Programme के तहत स्थापित की जा रही हैं।

ग्रीनफील्ड औद्योगिक क्षेत्रों का उद्देश्य आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ नए औद्योगिक केंद्र विकसित करना है। इससे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

वैश्विक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण को बढ़ावा

औद्योगिक स्मार्ट सिटी और औद्योगिक कॉरिडोर का उद्देश्य भारत में ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करना है जिससे देश में विनिर्माण गतिविधियां अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकें।

इससे निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने और भारत को वैश्विक विनिर्माण व्यवस्था में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

Ease of Doing Business में सुधार

सरकार ने Ease of Doing Business यानी व्यवसाय करने में सुगमता बढ़ाने के लिए विभिन्न सुधार किए हैं।

इन सुधारों का उद्देश्य नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा व्यवसायों पर पड़ने वाले अनुपालन बोझ (Compliance Burden) को कम करना है।

सरकार के अनुसार, नियमों को सरल बनाने से कंपनियों के लिए भारत में व्यवसाय शुरू करना और उसका संचालन करना अधिक सुविधाजनक हुआ है।

प्रमुख क्षेत्रों में सुधार से निवेश के नए अवसर

विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किए गए सुधारों ने निवेश और विनिर्माण के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

सरकार के अनुसार, इन सुधारों और नीतिगत पहलों का उद्देश्य भारत में निवेश का वातावरण बेहतर बनाना तथा घरेलू एवं विदेशी कंपनियों को उत्पादन गतिविधियों के विस्तार के लिए प्रोत्साहित करना है।

ONDC पर 470 करोड़ से अधिक ऑर्डर

डिजिटल कॉमर्स के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। Open Network for Digital Commerce (ONDC) के माध्यम से अब तक 470 करोड़ से अधिक ऑर्डर किए जा चुके हैं।

ONDC भारत में डिजिटल वाणिज्य के लिए एक नेटवर्क आधारित व्यवस्था विकसित करने की पहल है। इसके माध्यम से डिजिटल कॉमर्स में विभिन्न प्रतिभागियों को एक खुले नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

निवेश, उत्पादन और रोजगार के बीच संबंध

FDI में वृद्धि, PLI योजनाओं के माध्यम से निवेश और उत्पादन में वृद्धि तथा औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विकास को भारत की विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने वाली प्रमुख पहलों के रूप में देखा जा सकता है।

FDI से विदेशी पूंजी और निवेश आता है, PLI योजनाएं उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देती हैं, जबकि औद्योगिक कॉरिडोर और स्मार्ट सिटी जैसी परियोजनाएं आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने पर केंद्रित हैं।

इन सभी पहलों के माध्यम से निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  • वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड FDI: 94.53 अरब अमेरिकी डॉलर
  • 2014-15 से 2025-26 तक संचयी FDI: 843 अरब अमेरिकी डॉलर
  • PLI योजनाओं के तहत वास्तविक निवेश: 2.40 लाख करोड़ रुपये
  • PLI के तहत उत्पादन/बिक्री: 23.8 लाख करोड़ रुपये
  • PLI के तहत निर्यात: 15.2 लाख करोड़ रुपये
  • प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार: 14.6 लाख से अधिक
  • PLI से लाभान्वित प्रमुख क्षेत्र: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, IT हार्डवेयर और विशेष इस्पात
  • औद्योगिक स्मार्ट सिटी: National Industrial Corridor Development Programme के तहत
  • डिजिटल कॉमर्स: ONDC पर 470 करोड़ से अधिक ऑर्डर
  • मेक इन इंडिया की 12वीं वर्षगांठ: 25 सितंबर