संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। इसी संदर्भ में G4 समूह के देश—भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान—सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसमें अधिक प्रतिनिधित्व की मांग को लगातार उठाते रहे हैं। G4 का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का विस्तार कर स्वयं सहित अधिक देशों को स्थायी प्रतिनिधित्व दिलाना है।
G4 क्या है?
G4 (Group of Four) चार देशों का एक समूह है—
- भारत
- ब्राजील
- जर्मनी
- जापान
इन चारों देशों का प्रमुख साझा उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का विस्तार करना है। चारों देश एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करते हैं।
G4 की बैठकें सामान्यतः संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च-स्तरीय सत्र के दौरान होती हैं। इन बैठकों में सुरक्षा परिषद में सुधार, सदस्यता के विस्तार, वीटो के प्रश्न और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति पर चर्चा की जाती है।
G4 देशों की स्थायी सदस्यता की मांग
वर्तमान में सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य और 10 अस्थायी अथवा गैर-स्थायी सदस्य होते हैं। स्थायी सदस्य हैं—
- चीन
- फ्रांस
- रूस
- यूनाइटेड किंगडम
- संयुक्त राज्य अमेरिका
इन पांचों स्थायी सदस्यों के पास वीटो अधिकार है। वहीं, 10 गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है।
G4 का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था में दुनिया की बदलती राजनीतिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होता। इसलिए सुरक्षा परिषद की सदस्यता का विस्तार दोनों श्रेणियों—स्थायी और गैर-स्थायी—में किया जाना चाहिए।
भारत के लिए G4 का महत्व
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का दावेदार रहा है। भारत का तर्क है कि विश्व की बड़ी आबादी, अर्थव्यवस्था, वैश्विक शांति अभियानों में योगदान और अंतरराष्ट्रीय मामलों में भूमिका को देखते हुए उसे सुरक्षा परिषद की निर्णय प्रक्रिया में स्थायी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
भारत कई बार सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य रह चुका है। संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार भारत 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22 में सुरक्षा परिषद का निर्वाचित सदस्य रहा है।
सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना
सुरक्षा परिषद का गठन अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय लेने के लिए किया गया है। इसकी वर्तमान संरचना इस प्रकार है—
कुल सदस्य — 15
स्थायी सदस्य — 5
- चीन
- फ्रांस
- रूस
- ब्रिटेन
- अमेरिका
गैर-स्थायी सदस्य — 10
- इनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा करती है।
- कार्यकाल दो वर्ष का होता है।
- गैर-स्थायी सदस्य के पास वीटो अधिकार नहीं होता।
वीटो शक्ति क्या है?
सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों को वीटो शक्ति प्राप्त है। किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर स्थायी सदस्य द्वारा वीटो का प्रयोग किए जाने पर वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता।
इसी कारण सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता केवल एक अतिरिक्त सीट नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से संबंधित निर्णयों में दीर्घकालिक प्रभाव रखने वाली स्थिति है।
G4 के भीतर वीटो के प्रश्न पर भी चर्चा हुई है। G4 ने सिद्धांततः कहा है कि नए स्थायी सदस्यों को वर्तमान स्थायी सदस्यों के समान जिम्मेदारियां और दायित्व मिलने चाहिए। साथ ही, नए स्थायी सदस्यों द्वारा वीटो के प्रयोग के प्रश्न की समीक्षा बाद के चरण में करने की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई है।
G4 सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों चाहता है?
1. वर्तमान संरचना पुरानी हो चुकी है
G4 का मानना है कि सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना लगभग आठ दशक पहले की वैश्विक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करती है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था में उस समय की शक्ति-संरचना को अधिक महत्व दिया गया था।
आज विश्व की राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का वितरण काफी बदल चुका है। इसलिए G4 वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप परिषद में बदलाव की मांग करता है।
2. प्रतिनिधित्व की कमी
G4 के अनुसार दुनिया के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं।
विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई क्षेत्र को अधिक प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है।
G4 ने अफ्रीकी देशों की सुरक्षा परिषद में बेहतर भागीदारी का भी समर्थन किया है।
3. परिषद की वैधता और विश्वसनीयता
G4 के अनुसार यदि दुनिया के प्रमुख क्षेत्र और महत्वपूर्ण योगदान देने वाले देश सुरक्षा परिषद की स्थायी निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं हैं, तो परिषद की प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता और विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।
इसलिए G4 सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और समावेशी बनाने की मांग करता है।
4. वैश्विक चुनौतियों में बदलाव
आज अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे केवल पारंपरिक युद्धों तक सीमित नहीं हैं। आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, महामारी और अन्य उभरती चुनौतियां भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो गई हैं।
G4 का मत है कि ऐसी बदलती परिस्थितियों में निर्णय लेने वाली संस्था में वर्तमान वैश्विक शक्ति-संतुलन और क्षेत्रीय विविधता का बेहतर प्रतिबिंब होना चाहिए।
5. केवल गैर-स्थायी सीटों का विस्तार पर्याप्त नहीं
G4 विशेष रूप से दोनों श्रेणियों—स्थायी और गैर-स्थायी—में विस्तार की मांग करता है।
G4 के अनुसार केवल गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने से सुरक्षा परिषद की मूल संरचनात्मक असमानता दूर नहीं होगी, क्योंकि परिषद में सबसे महत्वपूर्ण शक्ति स्थायी सदस्यता से जुड़ी है।
अफ्रीका के प्रतिनिधित्व का मुद्दा
G4 की सुधार संबंधी मांग में अफ्रीका का प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण है। वर्तमान में सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में कोई अफ्रीकी देश नहीं है।
G4 ने अफ्रीकी समूह द्वारा प्रस्तुत सुधार मॉडल का समर्थन किया है। 2026 में G4 ने कहा कि अफ्रीका की ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व वाली स्थिति को दूर करने के लिए स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार आवश्यक है।
G4 का प्रस्तावित दृष्टिकोण
G4 सुरक्षा परिषद के सुधार को केवल सदस्य देशों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं मानता। उसके प्रस्तावों में—
- स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना
- गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना
- अफ्रीका सहित कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों को अधिक स्थान देना
- सुरक्षा परिषद के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना
- परिषद की जवाबदेही और प्रतिनिधित्व में सुधार करना
- सुधार प्रक्रिया को सदस्य देशों के नेतृत्व में आगे बढ़ाना
जैसे मुद्दे शामिल हैं।
सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया
सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के अंतर्गत Intergovernmental Negotiations (IGN) प्रक्रिया चलती है। इसमें सदस्य देश सुरक्षा परिषद की सदस्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, वीटो, कार्यप्रणाली और अन्य सुधारों पर चर्चा करते हैं।
G4 का कहना है कि इस प्रक्रिया को केवल वक्तव्यों और चर्चाओं तक सीमित न रखकर ठोस सुधार मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाया जाना चाहिए। 2026 में G4 ने सदस्य देशों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न मॉडलों के आधार पर एक समेकित सुधार मॉडल तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
G4 की मांग का व्यापक महत्व
G4 की मांग मूल रूप से इस प्रश्न से जुड़ी है कि 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रतिनिधित्व कैसा होना चाहिए।
G4 का मानना है कि सुरक्षा परिषद में सुधार से विकासशील देशों और कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ेगी तथा परिषद की निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण हो सकेगी।
वहीं, सुरक्षा परिषद में सुधार एक जटिल प्रक्रिया है क्योंकि इसके लिए सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया की जरूरत होती है। इसलिए G4 की मांग के बावजूद सुधार पर बातचीत एक बहुपक्षीय और लंबी प्रक्रिया बनी हुई है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- G4 के सदस्य: भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान
- मुख्य उद्देश्य: UNSC में स्थायी सदस्यता का विस्तार
- वर्तमान UNSC सदस्य: 15
- स्थायी सदस्य: 5
- गैर-स्थायी सदस्य: 10
- स्थायी सदस्यों की संख्या: 5
- गैर-स्थायी सदस्यों का कार्यकाल: 2 वर्ष
- वीटो अधिकार: पांच वर्तमान स्थायी सदस्यों के पास
- G4 की मुख्य मांग: स्थायी और गैर-स्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार
- प्रमुख प्रतिनिधित्व मुद्दा: अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई क्षेत्र को बेहतर प्रतिनिधित्व
- सुधार वार्ता का मंच: Intergovernmental Negotiations (IGN)
- भारत की प्राथमिकता: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता प्राप्त करना