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प्रधानमंत्री मोदी ने ‘प्रोजेक्ट राइनो’ की शुरुआत की घोषणा

22 सितंबर 2026 को विश्व गैंडा दिवस (World Rhino Day) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में गैंडा संरक्षण को आगे बढ़ाने के लिए ‘प्रोजेक्ट राइनो’ (Project Rhino) शुरू किए जाने की जानकारी दी। इस पहल का उद्देश्य गैंडा संरक्षण वाले राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत गैंडों की सुरक्षा, उनके आवास का बेहतर प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार तथा उनकी आबादी की गतिशीलता को समझने से जुड़े प्रयासों को समर्थन दिया जाएगा।

विश्व गैंडा दिवस का महत्व

हर वर्ष 22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गैंडों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और उनके सामने मौजूद खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करना है।

गैंडों के लिए सबसे गंभीर खतरों में अवैध शिकार और उनके सींगों की तस्करी शामिल है। गैंडे के सींग के बारे में पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े कई दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन इनके औषधीय प्रभाव का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए गैंडे के सींग की अवैध मांग को कम करना उनके संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

‘प्रोजेक्ट राइनो’ क्या है?

‘प्रोजेक्ट राइनो’ को भारत में गैंडा संरक्षण के प्रयासों को अधिक व्यवस्थित और व्यापक बनाने की पहल के रूप में देखा जा सकता है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, इस परियोजना के तहत गैंडा संरक्षण वाले रेंज राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। इसके प्रमुख क्षेत्र हैं—

  • गैंडों की सुरक्षा और संरक्षण
  • प्राकृतिक आवास का बेहतर प्रबंधन
  • गैंडों की आबादी की निगरानी और अध्ययन
  • आनुवंशिक सुधार से जुड़े प्रयास
  • गैंडों की आबादी में होने वाले बदलावों को समझना
  • संरक्षण कार्यों के लिए राज्यों की क्षमता को मजबूत करना

इस प्रकार इसका उद्देश्य केवल गैंडों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके दीर्घकालिक संरक्षण के लिए वैज्ञानिक और प्रबंधन आधारित व्यवस्था को मजबूत करना है।

भारत में गैंडा संरक्षण की स्थिति

भारत में एक सींग वाला भारतीय गैंडा (Greater One-Horned Rhinoceros) मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में पाया जाता है। असम इसका सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है, जबकि बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में भी इसके संरक्षण और पुनर्वास से जुड़े प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में गैंडे या तो वापस लौटे हैं या अच्छी तरह संरक्षित हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के दुधवा में गैंडों के पुनर्वास की सफलता को भी उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उल्लेखित किया।

दुधवा में गैंडों का पुनर्वास

उत्तर प्रदेश का दुधवा क्षेत्र गैंडा संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बन रहा है। यहां गैंडों को फिर से स्थापित करने के प्रयास किए गए हैं।

गैंडे का किसी ऐसे क्षेत्र में पुनः स्थापित होना, जहां उसकी आबादी पहले कम या समाप्त हो गई थी, संरक्षण जीवविज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें उपयुक्त आवास, भोजन, सुरक्षा और दीर्घकालिक निगरानी की आवश्यकता होती है।

दुधवा में पुनर्वास की सफलता इस बात का उदाहरण है कि उपयुक्त संरक्षण प्रबंधन और सुरक्षा उपायों के माध्यम से गैंडों के वितरण क्षेत्र को बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।

असम में गैंडा संरक्षण

असम भारत में गैंडा संरक्षण का सबसे प्रमुख केंद्र है। प्रधानमंत्री के अनुसार, दुनिया की लगभग 80 प्रतिशत गैंडा आबादी असम में है। काजीरंगा सहित राज्य के विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों ने एक सींग वाले गैंडे के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी गैंडा संरक्षण में राज्य की उपलब्धियों को रेखांकित किया है। आपके दिए विवरण के अनुसार, राज्य में 3,260 गैंडे बताए गए हैं और 2025 में शिकार के मामलों में शून्य दर्ज होने की बात कही गई है।

गैंडे के सींगों को नष्ट करने का महत्व

गैंडे के सींगों की अवैध मांग उनके शिकार का एक प्रमुख कारण रही है। असम में जब्त किए गए गैंडे के सींगों को नष्ट करने की कार्रवाई का उद्देश्य यह स्पष्ट संदेश देना रहा है कि इन सींगों का कोई वैध व्यापारिक या औषधीय बाजार नहीं बनाया जाएगा।

असम सरकार के एक आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 2,479 गैंडे के सींगों को नष्ट किया गया था। उस कार्रवाई का उद्देश्य गैंडे के सींगों से जुड़े कथित औषधीय मूल्य के मिथक को तोड़ना और अवैध शिकार तथा तस्करी के विरुद्ध संदेश देना था।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का महत्व

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व असम के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्रों में से एक है। यह ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ मैदान में, मिकिर पहाड़ियों की तलहटी के पास स्थित है। UNESCO के अनुसार, यह क्षेत्र लगभग 42,996 हेक्टेयर में फैला है और ब्रह्मपुत्र घाटी के बाढ़ मैदान का एक बड़ा प्राकृतिक एवं प्रतिनिधि क्षेत्र है।

काजीरंगा को दुनिया में एक सींग वाले गैंडे की सबसे बड़ी आबादी वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां गैंडे के अलावा बाघ, हाथी, तेंदुए, भालू और अनेक पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं।

काजीरंगा का ऐतिहासिक विकास

काजीरंगा का संरक्षण इतिहास काफी पुराना है।

  • 1908 में इसे आरक्षित वन के रूप में गठित किया गया।
  • बाद में इसे गेम सैंक्चुअरी और वन्यजीव अभयारण्य के रूप में संरक्षण मिला।
  • 1974 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
  • 1985 में इसे UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
  • बाद में काजीरंगा को टाइगर रिजर्व का दर्जा भी मिला।

काजीरंगा के संरक्षण प्रयासों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस क्षेत्र ने भारतीय एक सींग वाले गैंडे को विलुप्ति के गंभीर खतरे से बचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

ब्रह्मपुत्र की बाढ़ और काजीरंगा

काजीरंगा का पारिस्थितिकी तंत्र ब्रह्मपुत्र नदी की वार्षिक बाढ़ से गहराई से जुड़ा हुआ है।

बाढ़ को काजीरंगा के लिए केवल समस्या के रूप में नहीं देखा जाता। बाढ़ के साथ आने वाली उपजाऊ गाद घासभूमि और आर्द्रभूमि के पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में योगदान देती है। हालांकि, अत्यधिक बाढ़ के दौरान वन्यजीवों को ऊंचे क्षेत्रों की ओर जाने की आवश्यकता पड़ती है और उनके लिए अतिरिक्त खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।

काजीरंगा और एक सींग वाला गैंडा

काजीरंगा की सबसे बड़ी पहचान भारतीय एक सींग वाला गैंडा है। UNESCO के अनुसार, इस क्षेत्र ने इस प्रजाति को विलुप्ति के खतरे से बचाने और उसकी बड़ी आबादी को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गैंडे की सुरक्षा के लिए अवैध शिकार पर नियंत्रण, आवास संरक्षण, निगरानी, वन प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर संरक्षण गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं।

काजीरंगा और बाघ संरक्षण

काजीरंगा केवल गैंडों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। यह बाघों सहित अनेक वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास है।

काजीरंगा को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया है और यह क्षेत्र बाघ संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। UNESCO काजीरंगा को बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में वर्णित करता है।

काजीरंगा की पक्षी विविधता

काजीरंगा में बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं। यहां की घासभूमि, जलाशय, दलदली क्षेत्र और नदी-तटीय पारिस्थितिकी पक्षियों के लिए उपयुक्त आवास उपलब्ध कराती है।

इस कारण काजीरंगा का महत्व केवल गैंडा या बाघ संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समग्र जैव विविधता संरक्षण का महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

काजीरंगा के आसपास के संरक्षित क्षेत्र

काजीरंगा का पारिस्थितिक महत्व आसपास के वन क्षेत्रों और वन्यजीव क्षेत्रों से भी जुड़ा हुआ है। इसके आसपास कई आरक्षित वन और संरक्षित क्षेत्र हैं, जो वन्यजीवों के आवास और उनके आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

विशेष रूप से कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियां काजीरंगा के लिए महत्वपूर्ण हैं। UNESCO ने भी काजीरंगा और कार्बी आंगलोंग के बीच प्रभावी पारिस्थितिक संपर्क बनाए रखने को महत्वपूर्ण संरक्षण आवश्यकता बताया है।

गैंडा संरक्षण में मुख्य चुनौतियां

गैंडा संरक्षण के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें प्रमुख हैं—

  • अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी
  • गैंडे के सींग की अवैध मांग
  • प्राकृतिक आवास पर दबाव
  • बाढ़ और नदी के कटाव
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष
  • वन्यजीवों के आवागमन वाले गलियारों में बाधाएं
  • पर्यटन और परिवहन से उत्पन्न दबाव

UNESCO ने भी काजीरंगा के संदर्भ में गैंडा शिकार, नदी तट का कटाव, आक्रामक प्रजातियां, पर्यटन दबाव, राजमार्ग यातायात और मानव-वन्यजीव संबंधी चुनौतियों को संरक्षण से जुड़ी चिंताओं में शामिल किया है।

‘प्रोजेक्ट राइनो’ का व्यापक महत्व

‘प्रोजेक्ट राइनो’ का महत्व इस बात में है कि यह गैंडा संरक्षण को केवल किसी एक राष्ट्रीय उद्यान तक सीमित रखने के बजाय गैंडा-आबादी वाले विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के बीच समन्वित संरक्षण की दिशा में ले जाने का प्रयास है।

वित्तीय सहायता के साथ तकनीकी सहायता, आवास प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार और आबादी की वैज्ञानिक निगरानी पर ध्यान देने से संरक्षण प्रयासों को अधिक व्यापक बनाया जा सकता है।

भारत में गैंडा संरक्षण की दिशा

भारत में गैंडा संरक्षण का अनुभव बताता है कि प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था, वैज्ञानिक निगरानी, उपयुक्त आवास और राज्यों के बीच समन्वय से किसी संकटग्रस्त वन्यजीव की स्थिति में सुधार किया जा सकता है।

असम और काजीरंगा इसका प्रमुख उदाहरण हैं, जबकि बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में संरक्षण तथा पुनर्वास के प्रयास गैंडे के संभावित वितरण क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • परियोजना: प्रोजेक्ट राइनो (Project Rhino)
  • घोषणा/जानकारी: 22 सितंबर 2026
  • अवसर: विश्व गैंडा दिवस
  • विश्व गैंडा दिवस: 22 सितंबर
  • मुख्य उद्देश्य: गैंडा संरक्षण को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता
  • प्रमुख क्षेत्र: सुरक्षा, आवास प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार और आबादी की गतिशीलता का अध्ययन
  • भारत में प्रमुख गैंडा राज्य: असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश
  • असम: दुनिया की लगभग 80% गैंडा आबादी का घर होने की जानकारी प्रधानमंत्री ने दी
  • महत्वपूर्ण संरक्षण क्षेत्र: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
  • काजीरंगा का प्रारंभिक संरक्षण दर्जा: 1908 में आरक्षित वन
  • राष्ट्रीय उद्यान: 1974
  • UNESCO विश्व धरोहर सूची: 1985
  • काजीरंगा का UNESCO क्षेत्रफल: 42,996 हेक्टेयर
  • प्रमुख प्रजाति: एक सींग वाला भारतीय गैंडा
  • दुधवा: उत्तर प्रदेश में गैंडा पुनर्वास का महत्वपूर्ण उदाहरण
  • असम में नष्ट किए गए गैंडे के सींग: 2,479
  • काजीरंगा का महत्व: गैंडा, बाघ, हाथी तथा अनेक अन्य वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास

कुल मिलाकर, ‘प्रोजेक्ट राइनो’ भारत में एक सींग वाले गैंडे के संरक्षण को अधिक समन्वित, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक आधार देने की पहल के रूप में सामने आया है। काजीरंगा जैसे सफल संरक्षण क्षेत्रों के अनुभव के साथ दुधवा, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्रों में संरक्षण प्रयासों को जोड़ना भारत में गैंडा संरक्षण के व्यापक नेटवर्क को मजबूत कर सकता है।