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ब्रिक्स देशों ने अनाज व्यापार मंच स्थापित करने पर सहमति जताई

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की नई दिल्ली घोषणा में सदस्य देशों के नेताओं ने कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज (BRICS Grain Exchange) स्थापित करने की पहल को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। नेताओं ने इसके संचालन की व्यवस्था और भविष्य में इसके विस्तार से संबंधित विषयों पर आगे चर्चा करने का स्वागत किया। साथ ही, इसके दायरे को आगे चलकर अन्य कृषि उत्पादों और जिंसों तक बढ़ाने की संभावना भी व्यक्त की गई।

ब्रिक्स देशों को वैश्विक कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसलिए इन देशों की सामूहिक भूमिका कृषि उत्पादकता बढ़ाने, टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करने तथा वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

खाद्य सुरक्षा और पोषण पर विशेष जोर

नई दिल्ली घोषणा में खाद्य सुरक्षा और पोषण को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। नेताओं ने खाद्य कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव, अचानक उत्पन्न होने वाले आपूर्ति संकट और उर्वरकों की कमी जैसी चुनौतियों के प्रभाव को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

ब्रिक्स देशों ने खाद्य उपलब्धता, पहुंच, उपयोग, स्थिरता और वहनीयता को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही। इसके साथ ही, आपूर्ति में व्यवधान से निपटने के लिए राष्ट्रीय खाद्य भंडार प्रणाली तथा सूखा-सहनीय और जलवायु-अनुकूल बीज प्रणालियों के महत्व को भी स्वीकार किया गया।

ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज

ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज इस पहल का प्रमुख हिस्सा है। इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच अनाज के व्यापार और सहयोग से संबंधित व्यवस्था को आगे विकसित करना है।

भारत की अध्यक्षता में जून 2026 में इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक के दौरान भी इस पहल पर विशेष चर्चा हुई थी। उस बैठक में ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज के संचालन से जुड़े पहलुओं पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाया गया था।

भविष्य में इस मंच को केवल अनाज तक सीमित न रखते हुए अन्य कृषि उत्पादों और जिंसों तक विस्तारित करने पर भी चर्चा की जा सकती है। इससे सदस्य देशों के बीच कृषि व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं में सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास होगा।

कृषि व्यापार और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना

ब्रिक्स देशों ने कृषि उत्पादों और कृषि उत्पादन में उपयोग होने वाले इनपुट के बीच अंतर-ब्रिक्स व्यापार को सुगम बनाने पर भी जोर दिया। इसके लिए अधिक लचीली और गैर-भेदभावपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं को बढ़ावा देने तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई गई।

इसका उद्देश्य ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है, जिनमें किसी देश में उत्पादन या आपूर्ति प्रभावित होने पर दूसरे सदस्य देशों के साथ सहयोग के माध्यम से खाद्य एवं कृषि आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिल सके।

ब्रिक्स एग्रिन की स्थापना

घोषणा में ब्रिक्स एग्रिन (BRICS AGRIN) की स्थापना का भी स्वागत किया गया। इसका पूरा नाम एग्रो-इनपुट्स, जेनेटिक रिसोर्सेज एंड इन्फॉर्मेशन नेटवर्क है।

यह एक सहयोगात्मक, गैर-बाध्यकारी और किसान-केंद्रित ढांचा होगा। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच कृषि इनपुट, बीज और आनुवंशिक संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है।

ब्रिक्स एग्रिन के प्रमुख कार्य

ब्रिक्स एग्रिन के माध्यम से सदस्य देशों के बीच कृषि संबंधी जानकारी का आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।

इससे विभिन्न देशों में उपलब्ध उन्नत कृषि किस्मों, आनुवंशिक संसाधनों, कृषि इनपुट और बेहतर कृषि पद्धतियों से संबंधित जानकारी को अधिक प्रभावी ढंग से साझा करने में मदद मिल सकती है। इसका व्यापक उद्देश्य किसानों को बेहतर संसाधनों और ज्ञान तक पहुंच प्रदान करना है।

बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों के लिए वैश्विक मंच

ब्रिक्स देशों ने ‘ग्लोबल फोरम ऑन फार्मर्स’ राइट्स इन सीड सिस्टम्स’ शुरू करने का भी स्वागत किया।

इस मंच का उद्देश्य बीज प्रणालियों से जुड़े किसानों के अधिकारों, साझा चुनौतियों और प्रभावी नीतियों पर चर्चा को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से कृषि और बीज प्रणालियों से संबंधित पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण और आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

पारंपरिक बीजों का संरक्षण

इस वैश्विक मंच का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पारंपरिक और देशी बीजों का संरक्षण करना है। पारंपरिक बीजों की विविधता जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मंच यह सुनिश्चित करने की दिशा में सहयोग करेगा कि महत्वपूर्ण पारंपरिक बीजों की उपलब्धता बनी रहे और उनसे संबंधित किसानों का पारंपरिक ज्ञान भी संरक्षित रहे। भारत की कृषि विरासत में विभिन्न स्थानीय और पारंपरिक बीज किस्मों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस

घोषणा में कृषि-पारिस्थितिकी और पुनर्योजी कृषि के लिए ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का भी स्वागत किया गया।

यह नेटवर्क प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि से संबंधित संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के लिए सहयोगात्मक मंच के रूप में काम करेगा। इसका उद्देश्य जलवायु-सहनीय और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देना है।

मोदीनगर स्थित भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान की भूमिका

भारत की ओर से आईसीएआर–भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीनगर (मोडीपुरम) को इस नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।

यह संस्थान भारत के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि से संबंधित संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान साझा करने और प्रशिक्षण में योगदान करेगा। इससे विभिन्न ब्रिक्स देशों की कृषि पद्धतियों और अनुभवों के बीच सहयोग बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

जलवायु-सहनीय और पुनर्योजी कृषि

कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए ब्रिक्स देशों ने जलवायु-सहनीय, टिकाऊ और पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।

पुनर्योजी कृषि का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाते हुए लंबे समय तक टिकाऊ उत्पादन को बढ़ावा देना है। ब्रिक्स नेटवर्क के माध्यम से सदस्य देश अपने अनुभव, तकनीक और सफल कृषि पद्धतियां साझा कर सकते हैं।

ब्रिक्स डिजिटल कृषि नेटवर्क

ब्रिक्स देशों ने ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर की स्थापना का भी स्वागत किया। इस नेटवर्क का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

इसके अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और डेटा-आधारित कृषि समाधान जैसे क्षेत्रों पर सहयोग किया जाएगा।

कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा का उपयोग

डिजिटल कृषि नेटवर्क आधुनिक तकनीक और कृषि नवाचार के बीच एक सेतु के रूप में काम करेगा। इसके अंतर्गत एआई आधारित निर्णय-सहायता प्रणाली, भू-स्थानिक जानकारी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित निगरानी और उन्नत डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।

इन तकनीकों का उपयोग मौसम, मिट्टी, फसल की स्थिति, सिंचाई, कीट एवं रोग प्रबंधन और कृषि उत्पादन से संबंधित निर्णयों में सहायता के लिए किया जा सकता है।

आईआईटी दिल्ली करेगा डिजिटल कृषि नेटवर्क का प्रारंभिक समन्वय

भारत की ओर से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली (IIT Delhi) को डिजिटल कृषि नेटवर्क के प्रारंभिक समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है।

सदस्य देश अपने-अपने तकनीकी नवाचार, अनुभव और नीतिगत पहलों को साझा करेंगे। इसका उद्देश्य डिजिटल तकनीकों के विकास को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना और कृषि क्षेत्र में तकनीकी समाधान के उपयोग को बढ़ाना है।

छोटे किसानों की भूमिका

नई दिल्ली घोषणा में परिवार आधारित किसानों, छोटे किसानों, पशुपालकों, छोटे स्तर के मत्स्य उत्पादकों, आदिवासी समुदायों तथा स्थानीय समुदायों को कृषि एवं खाद्य प्रणालियों का महत्वपूर्ण हितधारक माना गया है।

इससे स्पष्ट होता है कि ब्रिक्स की कृषि पहलों का उद्देश्य केवल कृषि व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ उत्पादन और तकनीकी पहुंच को भी मजबूत करना है।

भारत की अध्यक्षता में इंदौर कृषि बैठक का योगदान

इन पहलों की नींव भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान आयोजित 16वीं ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक, इंदौर में रखी गई। 12–13 जून 2026 को हुई इस बैठक में खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार, जलवायु-सहनीय कृषि और कृषि नवाचार को प्रमुख प्राथमिकताएं बनाया गया था। बैठक में इंदौर घोषणा को सर्वसम्मति से अपनाया गया।

इसी बैठक में डिजिटल कृषि नेटवर्क, किसानों के बीज अधिकारों से संबंधित वैश्विक मंच और ब्रिक्स एग्रिन जैसी पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी। बाद में इन पहलों को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स नेताओं की घोषणा में भी समर्थन मिला।

वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए महत्व

ब्रिक्स देशों के बीच कृषि सहयोग का विस्तार ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दुनिया को खाद्य कीमतों में अस्थिरता, उर्वरक आपूर्ति में बाधा, जलवायु परिवर्तन, सूखा, आपूर्ति शृंखला संकट और कृषि उत्पादन पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रेन एक्सचेंज, एग्रिन, किसानों के बीज अधिकारों का वैश्विक मंच, कृषि उत्कृष्टता केंद्र और डिजिटल कृषि नेटवर्क—ये सभी पहल अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने का प्रयास करती हैं। इनका साझा उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि, कृषि नवाचार और किसानों के बीच ज्ञान एवं संसाधनों के आदान-प्रदान को मजबूत करना है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज → ब्रिक्स देशों के बीच अनाज व्यापार के लिए प्रस्तावित मंच
BRICS AGRIN → Agro-Inputs, Genetic Resources and Information Network
BRICS AGRIN का स्वरूप → सहयोगात्मक, गैर-बाध्यकारी और किसान-केंद्रित
वैश्विक मंच → Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems
मुख्य उद्देश्य → किसानों के बीज अधिकार, पारंपरिक बीज और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण
कृषि उत्कृष्टता केंद्र → प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि पर सहयोग
भारत का केंद्र → आईसीएआर–भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीनगर (मोडीपुरम)
डिजिटल कृषि नेटवर्क → एआई, भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और डेटा-आधारित कृषि
डिजिटल कृषि नेटवर्क का प्रारंभिक समन्वय → आईआईटी दिल्ली
16वीं ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक → 12–13 जून 2026, इंदौर
कृषि बैठक का परिणाम → इंदौर घोषणा
नई दिल्ली घोषणा → ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज और कृषि सहयोग की नई पहलों का समर्थन

Source: PIB