केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 16 सितंबर 2026 को पाकिस्तान-आधारित शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क (Shahzad Bhatti Network—SBN) को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया। इसके लिए गृह मंत्रालय ने आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना S.O. 5080(E) जारी की और UAPA की धारा 35(1)(a) के तहत संगठन को अधिनियम की प्रथम अनुसूची (First Schedule) में शामिल किया।
इस अधिसूचना के बाद SBN को प्रथम अनुसूची में क्रम संख्या 46 पर रखा गया है। इसका अर्थ है कि इस सूची में इससे पहले 45 आतंकवादी संगठन दर्ज थे और SBN के जुड़ने के बाद सूची में कुल 46 संगठन हो गए।
शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क पर सरकार के आरोप
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क का उद्देश्य कथित तौर पर युवाओं और स्थानीय अपराधियों को अपने नेटवर्क में शामिल करना तथा सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी में उनका इस्तेमाल करना है।
अधिसूचना के अनुसार, सरकार का मानना है कि नेटवर्क आतंकवादी गतिविधियों के माध्यम से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, सामाजिक एवं साम्प्रदायिक सौहार्द तथा आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। सरकार ने यह भी कहा है कि नेटवर्क युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने, संसाधन जुटाने और डिजिटल माध्यमों से उकसाने वाली सामग्री के प्रसार में शामिल रहा है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना में बताए गए आधार और आरोप हैं; किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक कार्यवाही में होता है।
बहु-राज्यीय कार्रवाई के बाद आया यह निर्णय
शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। इससे पहले अगस्त 2026 में सुरक्षा एजेंसियों ने नेटवर्क के विरुद्ध कई राज्यों में समन्वित कार्रवाई की थी।
गृह मंत्रालय के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को 14 राज्यों में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया था। नेटवर्क के खिलाफ 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज होने और 200 से अधिक गिरफ्तारियों की जानकारी भी सरकार ने दी थी।
अगस्त की कार्रवाई और सितंबर में संगठन को UAPA की प्रथम अनुसूची में शामिल किए जाने के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। अगस्त में सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों ने कथित नेटवर्क और उससे जुड़े मामलों के खिलाफ कार्रवाई की, जबकि 16 सितंबर की अधिसूचना ने संगठन को कानूनी रूप से UAPA की आतंकवादी संगठनों वाली सूची में शामिल कर दिया।
UAPA क्या है?
गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967, जिसे सामान्यतः UAPA कहा जाता है, भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी कानून है।
इस कानून का मूल उद्देश्य भारत की संप्रभुता और अखंडता के विरुद्ध निर्देशित गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम तथा आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
UAPA में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। इसके महत्वपूर्ण संशोधन 2004, 2008, 2012/2013 और 2019 के दौरान हुए। 2019 का संशोधन विशेष रूप से महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे आतंकवादी के रूप में किसी व्यक्ति को भी नामित करने की व्यवस्था जोड़ी गई।
UAPA की प्रथम अनुसूची का क्या महत्व है?
UAPA की प्रथम अनुसूची में वे संगठन सूचीबद्ध होते हैं जिन्हें कानून के तहत आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया है।
16 सितंबर 2026 की अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने धारा 35(1)(a) के तहत प्रथम अनुसूची में नया नाम जोड़ा:
“46. Shahzad Bhatti Network (SBN)”।
इसलिए परीक्षा की दृष्टि से यह अंतर याद रखना उपयोगी है:
- प्रथम अनुसूची — आतंकवादी संगठन
- चतुर्थ अनुसूची — व्यक्तिगत आतंकवादी
- धारा 35 — आतंकवादी संगठनों/व्यक्तियों से संबंधित अनुसूचियों में नाम जोड़ने की केंद्रीय सरकार की शक्ति
- धारा 36 — सूची से हटाने के लिए आवेदन की व्यवस्था
- धारा 37 — समीक्षा समिति से संबंधित व्यवस्था
UAPA के वर्तमान पाठ में प्रथम अनुसूची से किसी संगठन को हटाने के लिए आवेदन और समीक्षा की वैधानिक व्यवस्था भी मौजूद है।
2019 का UAPA संशोधन क्यों महत्वपूर्ण था?
UAPA (Amendment) Act, 2019 ने कानून में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया। इससे पहले UAPA के तहत आतंकवादी के रूप में मुख्यतः संगठनों को नामित करने की व्यवस्था थी। 2019 के संशोधन के बाद केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति को भी आतंकवादी के रूप में नामित करने का अधिकार मिला।
इस बदलाव के बाद संगठन और व्यक्ति के लिए अलग-अलग अनुसूचियां महत्वपूर्ण हो गईं:
| प्रावधान | क्या सूचीबद्ध होता है? |
|---|---|
| प्रथम अनुसूची | आतंकवादी संगठन |
| चतुर्थ अनुसूची | व्यक्तिगत आतंकवादी |
| धारा 35 | संबंधित अनुसूचियों में नामित करने की शक्ति |
| धारा 36 | नाम हटाने के लिए आवेदन |
| धारा 37 | समीक्षा समिति |
UAPA के आधिकारिक पाठ में चतुर्थ अनुसूची में व्यक्तियों के नाम जोड़े जाने और उन्हें हटाने की समीक्षा व्यवस्था दर्ज है।
UAPA में आतंकवादी संगठन घोषित होने का कानूनी अर्थ
किसी संगठन को UAPA की प्रथम अनुसूची में शामिल करना केवल सामान्य प्रशासनिक सूची तैयार करना नहीं है। इससे संगठन को भारतीय कानून के तहत औपचारिक रूप से नामित आतंकवादी संगठन का दर्जा मिलता है।
इसके बाद उस संगठन से संबंधित गतिविधियों पर UAPA के विभिन्न प्रावधान लागू हो सकते हैं। संगठन की सदस्यता, उसके लिए समर्थन, धन उपलब्ध कराने या उससे संबंधित अन्य गतिविधियों के मामले में कानून के अलग-अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई में संबंधित अपराध के कानूनी तत्व और निर्धारित प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहते हैं।
शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ दर्ज मामलों का दायरा
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में बताया गया है कि SBN के कैडरों के खिलाफ विभिन्न क्षेत्रों में कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
अधिसूचना में जिन कानूनों के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है, उनमें भारतीय न्याय संहिता, 2023, शस्त्र अधिनियम, UAPA, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, विस्फोटक अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और Immigration and Foreigners Act, 2025 सहित कई कानून शामिल हैं।
इससे यह भी पता चलता है कि सरकार ने नेटवर्क से संबंधित गतिविधियों को केवल एक प्रकार के अपराध के रूप में नहीं देखा, बल्कि कथित आतंकवादी गतिविधियों, तस्करी, डिजिटल गतिविधियों और अन्य आपराधिक मामलों के व्यापक संदर्भ में कार्रवाई की है।
सीमा पार तस्करी और आतंकवाद का संबंध
गृह मंत्रालय के अनुसार, SBN पर सीमा पार से हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी गतिविधियों का आरोप है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस तरह की गतिविधियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि अवैध तस्करी नेटवर्क का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए संसाधन जुटाने या आपराधिक नेटवर्क को मजबूत करने में किया जा सकता है। इस मामले में सरकार ने तस्करी, युवाओं की भर्ती और कथित आतंकवादी गतिविधियों को एक-दूसरे से जुड़े हुए नेटवर्क के रूप में प्रस्तुत किया है।
डिजिटल माध्यमों की भूमिका
गृह मंत्रालय की सितंबर की घोषणा में SBN पर डिजिटल माध्यमों के जरिए उकसाने वाली और नफरतपूर्ण सामग्री प्रसारित करने का भी आरोप लगाया गया है।
आधुनिक आतंकवाद-रोधी जांच में डिजिटल संचार और ऑनलाइन नेटवर्क एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुके हैं। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों के लिए केवल भौतिक गतिविधियों पर निगरानी रखना पर्याप्त नहीं होता; कानून के दायरे में डिजिटल संचार, वित्तीय नेटवर्क और ऑनलाइन संपर्कों की भी जांच की जा सकती है।
आतंकवादी संगठन और व्यक्तिगत आतंकवादी में अंतर
UAPA से जुड़े प्रश्नों में अक्सर आतंकवादी संगठन और व्यक्तिगत आतंकवादी के बीच अंतर पूछा जाता है।
आतंकवादी संगठन को UAPA की प्रथम अनुसूची में सूचीबद्ध किया जाता है। दूसरी ओर, 2019 के संशोधन के बाद केंद्र सरकार किसी व्यक्ति को आतंकवादी के रूप में नामित कर सकती है और उसका नाम चतुर्थ अनुसूची में दर्ज किया जाता है।
इसलिए शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क का मामला प्रथम अनुसूची में संगठन को शामिल किए जाने से संबंधित है, न कि किसी व्यक्ति को चतुर्थ अनुसूची में नामित करने से।
समीक्षा और नाम हटाने की व्यवस्था
UAPA में किसी संगठन या प्रभावित व्यक्ति के लिए नाम हटाने के संबंध में कानूनी व्यवस्था भी मौजूद है। अधिनियम की धारा 36 के तहत संबंधित संगठन अथवा प्रथम अनुसूची में संगठन के शामिल किए जाने से प्रभावित व्यक्ति केंद्र सरकार के समक्ष आवेदन कर सकता है। यदि आवेदन अस्वीकार होता है, तो धारा 37 के तहत निर्धारित समीक्षा व्यवस्था उपलब्ध है।
इससे स्पष्ट होता है कि UAPA में आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल किए जाने के साथ-साथ उस निर्णय की समीक्षा के लिए भी वैधानिक तंत्र मौजूद है।
UAPA में 2019 संशोधन के अन्य प्रमुख पहलू
2019 के संशोधन ने केवल व्यक्तिगत आतंकवादियों को नामित करने की व्यवस्था ही नहीं जोड़ी। इस संशोधन से आतंकवाद से संबंधित संपत्तियों और वित्तीय संसाधनों पर कार्रवाई की कानूनी व्यवस्था में भी बदलाव किए गए।
इसके अतिरिक्त, UAPA की द्वितीय अनुसूची में International Convention for the Suppression of Acts of Nuclear Terrorism, 2005 को शामिल किया गया। आधिकारिक अधिनियम-पाठ में यह प्रविष्टि 2019 संशोधन के माध्यम से जोड़े जाने का उल्लेख है।
शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क पर कार्रवाई का व्यापक महत्व
SBN को प्रथम अनुसूची में शामिल करना भारत की आतंकवाद-रोधी कानूनी व्यवस्था में एक औपचारिक कदम है। सरकार द्वारा बताए गए आधारों में सीमा पार तस्करी, युवाओं का कथित कट्टरपंथीकरण, आतंकवादी गतिविधियों के लिए संसाधन जुटाना और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल शामिल हैं।
यह कार्रवाई अगस्त 2026 में हुए बहु-राज्यीय अभियान की अगली महत्वपूर्ण कानूनी कड़ी के रूप में भी देखी जा सकती है, जिसमें सरकार ने 14 राज्यों में कार्रवाई, 253 लोगों को हिरासत में लिए जाने तथा 200 से अधिक गिरफ्तारियों की जानकारी दी थी।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| संगठन | शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क (SBN) |
| निर्णय | आतंकवादी संगठन के रूप में नामित |
| कानून | UAPA, 1967 |
| अधिसूचना की तारीख | 16 सितंबर 2026 |
| अधिसूचना | S.O. 5080(E) |
| संबंधित प्रावधान | धारा 35(1)(a) |
| सूची | UAPA की प्रथम अनुसूची |
| क्रम संख्या | 46 |
| प्रथम अनुसूची का विषय | आतंकवादी संगठन |
| चतुर्थ अनुसूची | व्यक्तिगत आतंकवादी |
| UAPA का मूल वर्ष | 1967 |
| महत्वपूर्ण संशोधन | 2004, 2008, 2012/13 और 2019 |
| 2019 संशोधन की प्रमुख विशेषता | व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने की व्यवस्था |
| SBN के विरुद्ध पहले की कार्रवाई | अगस्त 2026 में 14 राज्यों में बहु-राज्यीय कार्रवाई |
| अगस्त कार्रवाई में हिरासत | 253 लोग |
| SBN के खिलाफ दर्ज FIR | 80 से अधिक, सरकार के अनुसार |
निष्कर्ष
शाहज़ाद भट्टी नेटवर्क को UAPA की प्रथम अनुसूची में क्रम संख्या 46 पर शामिल करना 16 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया एक औपचारिक कानूनी कदम है। गृह मंत्रालय ने इसके लिए UAPA की धारा 35(1)(a) का इस्तेमाल किया और अधिसूचना में नेटवर्क पर सीमा पार हथियार, विस्फोटक एवं मादक पदार्थों की तस्करी, युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों की ओर ले जाने तथा हिंसक एवं डिजिटल गतिविधियों में शामिल होने जैसे आरोपों का उल्लेख किया है।