15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) के क्रियान्वयन से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह परियोजना यमुना नदी बेसिन से संबंधित एक महत्वपूर्ण जल संसाधन परियोजना है
समझौते पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हस्ताक्षर किए
इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल उपस्थित थे।
किशाऊ परियोजना की पृष्ठभूमि
किशाऊ परियोजना यमुना नदी बेसिन में प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय जल संसाधन परियोजना है। इसके अंतर्गत जल भंडारण, सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और नदी में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने जैसे उद्देश्यों को पूरा करने की योजना है
12 मई 1994 को ऊपरी यमुना बेसिन में विभिन्न भंडारण परियोजनाओं के संबंध में यह सहमति बनी थी कि प्रत्येक प्रस्तावित भंडारण परियोजना के लिए अलग-अलग समझौते किए जाएंगे
किशाऊ परियोजना भी इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा रही है। परियोजना लंबे समय से विभिन्न तकनीकी, वित्तीय और अंतरराज्यीय मुद्दों के कारण आगे नहीं बढ़ सकी थी
लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं के विवाद का समाधान
किशाऊ परियोजना की प्रगति को लखवार और रेणुकाजी बांध परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान से भी गति मिली
इन परियोजनाओं से संबंधित विवादों के समाधान के बाद किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हुई। जल संसाधनों के बंटवारे और परियोजना से संबंधित विभिन्न राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के बीच लगातार विचार-विमर्श किया गया
16 जून 2026 को बनी अंतरराज्यीय सहमति
16 जून 2026 को नई दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक में किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनी थी
इस बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान परियोजना के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए थे
बैठक में यह भी तय किया गया था कि परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत वित्तीय भार छह सहभागी राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा।
15 सितंबर 2026 को औपचारिक समझौता
16 जून की सहमति के बाद परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर राज्यों के साथ आगे विचार-विमर्श किया गया। अंततः 15 सितंबर 2026 को छह राज्यों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए
इस समझौते के साथ परियोजना के क्रियान्वयन के लिए राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा
भारत सरकार ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना (National Project) घोषित किया है
राष्ट्रीय परियोजना के रूप में केंद्र सरकार परियोजना के वित्तीय भार में बड़ी हिस्सेदारी वहन करेगी। वर्तमान समझौते के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार द्वारा तथा शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा
यह वित्तीय व्यवस्था 1994 में हुए समझौते से संबंधित प्रावधानों के अनुरूप है।
टोंस नदी पर बनेगा विशाल बांध
परियोजना के तहत टोंस नदी (Tons River) पर एक विशाल कंक्रीट ग्रेविटी बांध का निर्माण किया जाएगा
टोंस नदी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के साथ बहती है। प्रस्तावित बांध की ऊंचाई लगभग 232.6 मीटर होगी
बांध की जल भंडारण क्षमता लगभग 1,562 मिलियन घन मीटर (MCM) होगी। इतनी बड़ी भंडारण क्षमता से मानसून के दौरान उपलब्ध पानी को संग्रहित करके आवश्यकता के अनुसार नियंत्रित ढंग से छोड़ा जा सकेगा।
सिंचाई के क्षेत्र में लाभ
किशाऊ परियोजना के माध्यम से लगभग 97,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाएगी
इससे ऊपरी यमुना बेसिन से जुड़े राज्यों में कृषि के लिए जल उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। मानसून के दौरान संग्रहित पानी को जरूरत के अनुसार नियंत्रित रूप से उपलब्ध कराया जा सकेगा
इस प्रकार परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य कृषि क्षेत्र के लिए अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है
जलविद्युत उत्पादन
किशाऊ परियोजना से लगभग 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत के उत्पादन का अनुमान है
इससे परियोजना केवल सिंचाई और जल भंडारण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जलविद्युत उत्पादन के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र में भी योगदान देगी।
दिल्ली को जल आपूर्ति में लाभ
परियोजना से दिल्ली को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है
समझौते के अनुसार दिल्ली को लगभग 110 मिलियन घन मीटर (MCM) पानी प्राप्त होगा। इससे राष्ट्रीय राजधानी में जल आपूर्ति को बढ़ाने में मदद मिलेगी
इसके अतिरिक्त, यमुना में पर्याप्त पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow) बनाए रखने में भी परियोजना की भूमिका होगी
यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह में सुधार
यमुना नदी में पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखना नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है
किशाऊ परियोजना में मानसून के दौरान उपलब्ध पानी को संग्रहित करके आवश्यकता के अनुसार नियंत्रित रूप से छोड़े जाने की व्यवस्था की जाएगी। इससे ऊपरी यमुना बेसिन में जल उपलब्धता को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में सहायता मिल सकती है
केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना से यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह को बढ़ाने और नदी के संरक्षण में योगदान मिलने की उम्मीद है।
छह राज्यों की भूमिका
किशाऊ परियोजना में छह राज्य प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं
- उत्तर प्रदेश
- उत्तराखंड
- हिमाचल प्रदेश
- हरियाणा
- राजस्थान
- दिल्ली
इन राज्यों के बीच जल, वित्तीय दायित्व और परियोजना से संबंधित अन्य पहलुओं पर सहमति के बाद समझौते को अंतिम रूप दिया गया
परियोजना में केंद्र सरकार की भूमिका
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने संबंधित राज्यों के साथ विचार-विमर्श कर परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों को आगे बढ़ाया
तकनीकी और आर्थिक पहलुओं के साथ-साथ सभी सहभागी राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए सहमति बनाने का प्रयास किया गया
परियोजना के जल घटक की लागत का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सहायता के रूप में वहन किया जाना इस परियोजना की वित्तीय संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से से संबंधित व्यवस्था
16 जून 2026 की सहमति में हिमाचल प्रदेश के लिए निर्धारित जल हिस्से को दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराने के संबंध में भी सहमति बनी थी
इसके बदले परियोजना के विद्युत घटक में हिमाचल प्रदेश के हिस्से की लागत को साझा करने की व्यवस्था पर सहमति बनी। यह व्यवस्था छह राज्यों के बीच परियोजना के जल एवं ऊर्जा संबंधी हितों को समायोजित करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मानसून के पानी का नियंत्रित उपयोग
भारत में मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में वर्षा होती है, जबकि वर्ष के अन्य समय में कई क्षेत्रों में जल उपलब्धता कम हो सकती है
किशाऊ परियोजना में बड़े जलाशय के माध्यम से मानसून के दौरान उपलब्ध पानी को संग्रहित करने की योजना है। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार पानी को नियंत्रित रूप से छोड़ा जा सकेगा
इससे ऊपरी यमुना बेसिन में वर्षभर जल प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है
परियोजना का बहुउद्देशीय स्वरूप
किशाऊ परियोजना को बहुउद्देशीय परियोजना इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके कई प्रमुख उद्देश्य हैं
प्रमुख उद्देश्य
- जल का भंडारण
- सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना
- स्वच्छ जलविद्युत का उत्पादन
- दिल्ली की जल आपूर्ति में योगदान
- यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने में सहायता
- ऊपरी यमुना बेसिन में जल उपलब्धता का बेहतर प्रबंधन
- मानसून के अतिरिक्त जल का नियंत्रित उपयोग
किशाऊ परियोजना का महत्व
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना उत्तर भारत की जल संसाधन व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इसमें एक साथ सिंचाई, जल भंडारण, जलविद्युत उत्पादन और नदी संरक्षण से संबंधित उद्देश्यों को शामिल किया गया है
परियोजना के माध्यम से बड़े क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने, स्वच्छ जलविद्युत उत्पन्न करने और दिल्ली सहित संबंधित क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुधारने की योजना है
बिल्कुल, दिए गए तथ्यों को साफ़ और परीक्षा-उपयोगी तालिका के रूप में:
| क्रमांक | महत्वपूर्ण तथ्य | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | परियोजना का नाम | किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना |
| 2 | संबंधित नदी | टोंस नदी |
| 3 | टोंस नदी की स्थिति | उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा के साथ बहती है |
| 4 | समझौते पर हस्ताक्षर | 15 सितंबर 2026 |
| 5 | संबंधित राज्य | उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा |
| 6 | राज्यों के बीच सहमति | 16 जून 2026 |
| 7 | बांध का प्रकार | कंक्रीट ग्रेविटी डैम |
| 8 | प्रस्तावित बांध की ऊंचाई | 232.6 मीटर |
| 9 | जल भंडारण क्षमता | 1,562 मिलियन घन मीटर |
| 10 | सिंचाई क्षमता | लगभग 97,000 हेक्टेयर |
| 11 | स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन | 1,476 मिलियन यूनिट |
| 12 | दिल्ली के लिए जल | लगभग 110 मिलियन घन मीटर |
| 13 | परियोजना की वित्तीय संरचना | 90% केंद्र सरकार और 10% सहभागी राज्य |
| 14 | परियोजना का दर्जा | राष्ट्रीय परियोजना |
| 15 | मुख्य मंत्रालय | जल शक्ति मंत्रालय |
| 16 | समझौते के समय उपस्थित केंद्रीय मंत्री | अमित शाह और सी. आर. पाटिल |