तपेदिक यानी टीबी (Tuberculosis) दुनिया की सबसे गंभीर संक्रामक बीमारियों में से एक है। अब नई पीढ़ी की टीकों को लेकर एक महत्वपूर्ण उम्मीद सामने आई है। अनुमान है कि 2029 से उपलब्ध हो सकने वाली नई टीबी वैक्सीन वर्ष 2030 से 2050 के बीच लगभग 73 लाख लोगों की जान बचाने में मदद कर सकती हैं। साथ ही, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इनसे 135 अरब अमेरिकी डॉलर तक के आर्थिक लाभ मिलने का अनुमान है।
टीबी का वैश्विक बोझ
टीबी Mycobacterium tuberculosis नामक बैक्टीरिया से होने वाली संक्रामक बीमारी है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के जरिए हवा में मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आने से फैल सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2024 में दुनिया भर में करीब 1.07 करोड़ लोग टीबी से बीमार हुए और लगभग 12.3 लाख लोगों की मौत हुई। इनमें एचआईवी के साथ रहने वाले लगभग 1.5 लाख लोग भी शामिल थे।
टीबी का बोझ मुख्य रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर पड़ता है। इन देशों में बीमारी के साथ-साथ गरीबी, कुपोषण, स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच और दवा-प्रतिरोधी टीबी जैसी समस्याएं इसके प्रभाव को और गंभीर बनाती हैं।
नई टीबी वैक्सीन क्यों जरूरी है?
वर्तमान में टीबी से बचाव के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली प्रमुख वैक्सीन बीसीजी (BCG—Bacille Calmette-Guérin) है। इसे एक सदी से भी अधिक समय पहले विकसित किया गया था।
बीसीजी वैक्सीन शिशुओं और छोटे बच्चों को टीबी के गंभीर रूपों से बचाने में प्रभावी है, लेकिन इसका संरक्षण समय के साथ कम हो सकता है। विशेष रूप से किशोरों और वयस्कों में फेफड़ों की टीबी को रोकने के लिए अधिक प्रभावी नए विकल्पों की आवश्यकता बनी हुई है।
यही वह अंतर है जिसे नई पीढ़ी की टीबी वैक्सीन भरने का प्रयास कर रही है।
नई वैक्सीन किन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होगी?
नई वैक्सीनों का प्रमुख उद्देश्य किशोरों और वयस्कों में संक्रामक फुफ्फुसीय टीबी को रोकना है।
इसका महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि वयस्कों में फेफड़ों की टीबी संक्रमण फैलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। यदि बीमारी को उसके सक्रिय और संक्रामक चरण में पहुंचने से पहले रोका जा सके, तो इससे केवल व्यक्ति ही नहीं बल्कि उसके परिवार और समुदाय की भी सुरक्षा बढ़ सकती है।
73 लाख जान बचाने का अनुमान कैसे महत्वपूर्ण है?
Gavi के नए विश्लेषण के अनुसार, यदि नई टीबी वैक्सीनें 2029 के आसपास उपलब्ध होती हैं और उनका पर्याप्त स्तर पर उपयोग किया जाता है, तो 2030 से 2050 के बीच लगभग 73 लाख मौतें टाली जा सकती हैं। यह एक मॉडल-आधारित अनुमान है, इसलिए वास्तविक प्रभाव वैक्सीन की प्रभावशीलता, कीमत, उपलब्धता, देशों द्वारा अपनाने और टीकाकरण कवरेज जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।
इस अनुमान का महत्व इस बात में है कि टीबी के खिलाफ नई वैक्सीन केवल बीमारी की रोकथाम का एक और साधन नहीं होगी, बल्कि वैश्विक टीबी नियंत्रण की रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।
135 अरब डॉलर तक का आर्थिक लाभ
नई वैक्सीनों का संभावित लाभ केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा।
Gavi के विश्लेषण के अनुसार, नई टीबी वैक्सीनों से निम्न और मध्यम आय वाले देशों को 2050 तक 135 अरब अमेरिकी डॉलर तक का आर्थिक लाभ मिल सकता है। बीमारी कम होने से इलाज पर होने वाला खर्च घट सकता है, लोगों के काम से अनुपस्थित रहने के दिन कम हो सकते हैं और बीमारी के कारण होने वाली उत्पादकता की हानि को भी कम किया जा सकता है।
इस प्रकार टीकाकरण में निवेश को स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक निवेश के रूप में भी देखा जा सकता है।
हर साल 8.6 करोड़ टीकाकरण पाठ्यक्रमों की मांग
Gavi के अनुमान के अनुसार, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में नई टीबी वैक्सीनों की मांग औसतन हर वर्ष लगभग 8.6 करोड़ वैक्सीनेशन कोर्स तक पहुंच सकती है।
शुरुआती वर्षों में मांग और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि जिन देशों में टीबी का बोझ ज्यादा है, वे अलग-अलग आयु वर्गों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में तेजी से टीकाकरण शुरू करना चाहेंगे।
इसलिए वैक्सीन विकसित करना ही पर्याप्त नहीं होगा। करोड़ों खुराकों का समय पर उत्पादन, भंडारण, परिवहन और वितरण भी सुनिश्चित करना होगा।
Gavi क्या है?
Gavi, the Vaccine Alliance एक सार्वजनिक-निजी साझेदारी है, जिसका उद्देश्य दुनिया के सबसे गरीब और कमजोर देशों में टीकाकरण की पहुंच बढ़ाना है।
इसमें विकासशील देशों और दाता देशों की सरकारों के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), UNICEF, विश्व बैंक, वैक्सीन उद्योग, तकनीकी संस्थाएं, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के अन्य साझेदार शामिल हैं।
वर्ष 2000 में स्थापना के बाद से Gavi ने 1.2 अरब से अधिक बच्चों के टीकाकरण में मदद की है।
टीबी वैक्सीन के मामले में Gavi की भूमिका खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि नई वैक्सीनों की शुरुआती कीमत और सीमित उत्पादन क्षमता गरीब देशों में उनकी पहुंच को प्रभावित कर सकती है।
टीबी से निपटने में नई वैक्सीन की भूमिका
नई वैक्सीनें टीबी के खिलाफ अकेला समाधान नहीं होंगी। टीबी की रोकथाम के लिए समय पर जांच, संक्रमित लोगों की पहचान, प्रभावी उपचार, संपर्क में आए लोगों की निगरानी, पोषण सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी जरूरी हैं।
नई वैक्सीन इन उपायों के साथ मिलकर बीमारी के प्रसार को कम करने में मदद कर सकती है।
यदि टीकाकरण से किशोरों और वयस्कों में सक्रिय फुफ्फुसीय टीबी के मामले घटते हैं, तो समुदाय में संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में भी सहायता मिल सकती है।
टीबी और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस
टीबी का एक और महत्वपूर्ण पहलू दवा-प्रतिरोधी टीबी है। जब टीबी के बैक्टीरिया उपलब्ध दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं, तो बीमारी का उपचार अधिक कठिन, लंबा और महंगा हो सकता है।
WHO के अनुसार, 2024 में लगभग 3.9 लाख लोग दवा-प्रतिरोधी टीबी से बीमार हुए।
यदि नई वैक्सीनें टीबी के संक्रमण और बीमारी को रोकने में सफल होती हैं, तो भविष्य में दवा-प्रतिरोधी टीबी के मामलों और उनके उपचार की आवश्यकता को कम करने में भी अप्रत्यक्ष योगदान मिल सकता है।
नई वैक्सीनों के सामने नीति संबंधी जोखिम
नई वैक्सीन विकसित और लाइसेंस होने के बाद भी उनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल अपने आप शुरू नहीं होगा।
पहली चुनौती नीति और वैज्ञानिक प्रमाणों से जुड़ी है। यदि उपलब्ध प्रमाण किसी विशेष आयु वर्ग या जोखिम समूह के लिए पर्याप्त स्पष्ट नहीं होंगे, तो देशों की टीकाकरण नीतियां केवल सबसे अधिक जोखिम वाले समूहों तक सीमित रह सकती हैं।
इससे वैक्सीन का संभावित व्यापक प्रभाव कम हो सकता है।
वित्तीय जोखिम
दूसरी बड़ी चुनौती वित्तपोषण है।
टीबी से सबसे अधिक प्रभावित कई देश सीमित स्वास्थ्य बजट वाले हैं। यदि वैक्सीन की कीमत अधिक होती है या टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त घरेलू और अंतरराष्ट्रीय वित्त उपलब्ध नहीं होता, तो कई देशों में नई वैक्सीन की पहुंच सीमित रह सकती है।
इसलिए वैक्सीन की कीमत को वहनीय रखना और देशों को स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।
आपूर्ति और उत्पादन की चुनौती
तीसरी चुनौती वैक्सीन की आपूर्ति से जुड़ी है।
यदि निर्माता यह सुनिश्चित नहीं कर पाते कि भविष्य में पर्याप्त मांग होगी, तो वे उत्पादन क्षमता बढ़ाने में बड़े निवेश से बच सकते हैं। दूसरी ओर, यदि वैक्सीन की मांग अचानक बढ़ती है और उत्पादन क्षमता पहले से तैयार नहीं है, तो कमी पैदा हो सकती है।
इसीलिए Gavi ने अभी से बाजार और आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया है।
Gavi की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं
Gavi के रोडमैप में नई टीबी वैक्सीनों को उन देशों तक तेजी और समान रूप से पहुंचाने के लिए तीन प्रमुख लक्ष्य बताए गए हैं।
पहला लक्ष्य—पर्याप्त और सस्ती आपूर्ति:
नई टीबी वैक्सीनों की पर्याप्त, समय पर, किफायती और टिकाऊ आपूर्ति सुनिश्चित करना, ताकि मांग बढ़ने पर भी देशों को वैक्सीन की कमी का सामना न करना पड़े।
दूसरा लक्ष्य—व्यापक टीकाकरण:
नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर विशेष कैच-अप टीकाकरण अभियान चलाकर अधिक से अधिक पात्र लोगों तक वैक्सीन पहुंचाना।
तीसरा लक्ष्य—विभिन्न वैक्सीन उम्मीदवारों को प्रोत्साहन:
नई टीबी वैक्सीनों के विकास में प्रतिस्पर्धी और भौगोलिक रूप से विविध आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना, ताकि किसी एक निर्माता या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न हो और अलग-अलग देशों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध हो सकें।
देशों के लिए सस्ती वैक्सीन क्यों जरूरी है?
किसी नई वैक्सीन की वैज्ञानिक सफलता तभी व्यापक स्वास्थ्य लाभ में बदलती है, जब वह उन लोगों तक पहुंच सके जिन्हें उसकी सबसे अधिक जरूरत है।
कम आय वाले देशों में वैक्सीन की कीमत, स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या और कोल्ड-चेन जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसलिए नई टीबी वैक्सीन के मामले में सस्ती कीमत + पर्याप्त उत्पादन + मजबूत वितरण व्यवस्था + पर्याप्त वित्तपोषण चारों का एक साथ होना जरूरी होगा।
आगे की राह
नई टीबी वैक्सीनों के 2029 के आसपास उपलब्ध होने की उम्मीद ने टीबी नियंत्रण के क्षेत्र में नई संभावना पैदा की है। हालांकि, वैक्सीन का लाइसेंस मिलना अंतिम चरण नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की शुरुआत होगी।
यदि वैक्सीनें प्रभावी साबित होती हैं और उन्हें उच्च-जोखिम वाले देशों में पर्याप्त मात्रा में, उचित कीमत पर और समय पर उपलब्ध कराया जा सके, तो वे टीबी से होने वाली बीमारी और मौतों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
वहीं, यदि वित्तपोषण, उत्पादन क्षमता, नीति-निर्माण और वितरण से जुड़ी बाधाएं बनी रहती हैं, तो नई तकनीक का संभावित लाभ सीमित रह सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विकास?
टीबी आज भी दुनिया की सबसे बड़ी संक्रामक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। 2024 में 1.07 करोड़ नए मामले और लगभग 12.3 लाख मौतें इस बीमारी के वैश्विक बोझ को स्पष्ट करती हैं।
ऐसे में नई पीढ़ी की टीबी वैक्सीन एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त रोकथाम उपकरण बन सकती है। अनुमानित 73 लाख मौतों को टालने और 135 अरब डॉलर तक का आर्थिक लाभ पैदा करने की इसकी संभावित क्षमता बताती है कि इसका प्रभाव स्वास्थ्य क्षेत्र से कहीं व्यापक हो सकता है।
हालांकि, ये आंकड़े संभावित प्रभाव के मॉडल-आधारित अनुमान हैं, गारंटीकृत परिणाम नहीं। वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि वैक्सीन कितनी प्रभावी होती हैं, कब और किन समूहों के लिए उपलब्ध होती हैं, कितनी सस्ती होती हैं और सबसे अधिक बोझ वाले देशों में उनका टीकाकरण कितनी व्यापकता से हो पाता है।