केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार, स्टील स्लैग से सड़क निर्माण की तकनीक पारंपरिक सड़क निर्माण की तुलना में लागत को लगभग 40 प्रतिशत तक कम कर सकती है और सड़कों को कई गुना अधिक मजबूती प्रदान कर सकती है। इस तकनीक से न केवल सड़क निर्माण की लागत घटती है, बल्कि सड़क की उपयोग अवधि बढ़ने के कारण मरम्मत और रखरखाव पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकता है।
स्टील स्लैग को सड़क निर्माण में उपयोग करने की तकनीक को औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्टील स्लैग क्या है?
स्टील स्लैग इस्पात निर्माण प्रक्रिया से निकलने वाला एक ठोस उप-उत्पाद है। इस्पात उत्पादन के दौरान धातु को अलग करने के बाद बचने वाले पदार्थ को स्लैग कहा जाता है।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से इस स्लैग को संसाधित करके सड़क निर्माण में उपयोग किए जाने योग्य समुच्चय सामग्री में बदला जा सकता है। इससे सड़क निर्माण में प्राकृतिक पत्थरों और अन्य खनिज समुच्चयों पर निर्भरता कम होती है।
भारत में स्टील स्लैग उत्पादन
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है। देश के विभिन्न एकीकृत इस्पात संयंत्रों से वर्तमान में लगभग 1.9 करोड़ टन स्टील स्लैग प्रतिवर्ष उत्पन्न होने का अनुमान है।
इस्पात उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि के साथ आने वाले वर्षों में स्टील स्लैग का उत्पादन भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। वर्ष 2030-31 तक भारत का इस्पात उत्पादन 30 करोड़ टन तक पहुंचाने के लक्ष्य को देखते हुए स्टील स्लैग का वार्षिक उत्पादन लगभग 6 करोड़ टन तक पहुंच सकता है।
स्टील स्लैग के निपटान की समस्या
स्टील स्लैग से धातु की उपयोगी मात्रा निकालने के बाद इसका बड़ा हिस्सा इस्पात संयंत्रों के आसपास कचरा डंप या लैंडफिल के रूप में जमा कर दिया जाता है।
इससे बड़ी मात्रा में भूमि घिर जाती है और इसके अनुचित निपटान से वायु, भूमि तथा जल प्रदूषण जैसी पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
सड़क निर्माण में संसाधित स्टील स्लैग का उपयोग इस औद्योगिक उप-उत्पाद को उपयोगी निर्माण सामग्री में बदलने का अवसर प्रदान करता है।
रायगढ़ में बना विश्व रिकॉर्ड
जिंदल स्टील लिमिटेड ने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) के सहयोग से छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में संसाधित स्टील स्लैग से सड़क का निर्माण किया।
इस सड़क को केवल संसाधित स्टील स्लैग समुच्चय का उपयोग करके बनाई गई सबसे लंबी सड़क के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला।
इस परियोजना में लगभग 2 लाख टन संसाधित स्टील स्लैग का उपयोग किया गया। इससे प्राकृतिक समुच्चय सामग्री की आवश्यकता कम हुई और पत्थरों के लिए होने वाली खदानों पर निर्भरता को कम करने में मदद मिली।
यह सड़क लगभग 1.85 किलोमीटर लंबी और चार लेन की है।
स्टील स्लैग से बनी सड़कों की प्रमुख विशेषताएं
वैज्ञानिक रूप से संसाधित स्टील स्लैग सड़क निर्माण में कई महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है।
कम लागत: स्टील स्लैग से बनी सड़कें पारंपरिक सड़क निर्माण की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत अधिक लागत-प्रभावी हो सकती हैं।
अधिक मजबूती: स्टील स्लैग समुच्चय से बनी सड़कों की मजबूती पारंपरिक सड़कों की तुलना में काफी अधिक हो सकती है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में इनकी मजबूती पारंपरिक सड़कों से लगभग चार गुना तक हो सकती है।
अधिक उपयोग अवधि: इन सड़कों की उपयोग अवधि मानक डामर सड़कों की तुलना में काफी अधिक हो सकती है और कुछ आकलनों के अनुसार ये लगभग तीन गुना तक अधिक समय तक टिक सकती हैं।
कम रखरखाव: अधिक मजबूती और लंबी उपयोग अवधि के कारण बार-बार मरम्मत की आवश्यकता कम हो सकती है।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण: प्राकृतिक पत्थरों और खनिज समुच्चयों के स्थान पर स्टील स्लैग के उपयोग से खनन पर निर्भरता कम होती है।
अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में उपयोग
स्टील स्लैग से बनी सड़कों की मजबूती उन्हें विभिन्न भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में उपयोग के लिए उपयुक्त बनाती है।
इनका उपयोग तटीय क्षेत्रों से लेकर कठिन एवं दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों तक किया जा रहा है। विशेष रूप से भारी यातायात और अधिक भार सहने वाली सड़क परियोजनाओं में भी इस तकनीक की उपयोगिता सामने आई है।
हजीरा में प्रमुख प्रदर्शन परियोजना
इस तकनीक का एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन गुजरात के हजीरा में किया गया। यहां संसाधित स्टील स्लैग समुच्चय का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र को हजीरा बंदरगाह से जोड़ने वाली छह लेन की सड़क के निर्माण में किया गया।
इस परियोजना ने यह प्रदर्शित किया कि औद्योगिक उप-उत्पाद को बड़े पैमाने की सड़क अवसंरचना में उपयोगी निर्माण सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
मुंबई-गोवा राजमार्ग पर उपयोग
स्टील स्लैग तकनीक का प्रयोग राष्ट्रीय राजमार्ग-66 के मुंबई-गोवा खंड में भी किया गया।
इस परियोजना में लगभग 80,000 टन स्टील स्लैग को संसाधित करके समुच्चय सामग्री में परिवर्तित किया गया और इसका उपयोग लगभग 1 किलोमीटर लंबे चार लेन वाले सड़क खंड के निर्माण में किया गया।
यह परियोजना बड़े राजमार्गों में स्टील स्लैग के व्यावहारिक उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
अरुणाचल प्रदेश में रणनीतिक सड़क निर्माण
इस तकनीक का उपयोग अरुणाचल प्रदेश में भारी भार सहने वाली सड़क अवसंरचना में भी किया गया है।
राज्य के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों तथा रणनीतिक सीमा क्षेत्रों में सड़क निर्माण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे क्षेत्रों में मजबूत और टिकाऊ सड़क सामग्री की आवश्यकता को देखते हुए स्टील स्लैग आधारित निर्माण उपयोगी साबित हो सकता है।
सड़क निर्माण में स्टील स्लैग का पर्यावरणीय महत्व
स्टील स्लैग का सड़क निर्माण में उपयोग परिपत्र अर्थव्यवस्था की अवधारणा को बढ़ावा देता है। इसमें औद्योगिक प्रक्रिया से निकलने वाले अपशिष्ट को फेंकने के बजाय उसे दोबारा उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया जाता है।
इसके प्रमुख पर्यावरणीय लाभों में प्राकृतिक पत्थरों के खनन में कमी, औद्योगिक कचरे के ढेर में कमी तथा लैंडफिल के लिए आवश्यक भूमि में कमी शामिल हैं।
इस प्रकार यह तकनीक एक साथ औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और टिकाऊ अवसंरचना निर्माण को आगे बढ़ा सकती है।
बड़े पैमाने पर उपयोग की सरकारी पहल
इस्पात मंत्रालय स्टील स्लैग सड़क तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। मंत्रालय इस औद्योगिक उप-उत्पाद के बड़े पैमाने पर उपयोग को बढ़ाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ सहयोग कर रहा है।
इस सहयोग का उद्देश्य संसाधित स्टील स्लैग के वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ाना तथा इसे देश की विभिन्न सड़क एवं अवसंरचना परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर अपनाने की संभावनाओं को विकसित करना है।
भारत के लिए व्यापक महत्व
भारत में इस्पात उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, इसलिए स्टील स्लैग की मात्रा भी आने वाले वर्षों में बढ़ने की संभावना है। यदि इसका बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक प्रसंस्करण और उपयोग किया जाता है, तो यह बढ़ते औद्योगिक अपशिष्ट को अवसंरचना निर्माण के लिए उपयोगी संसाधन में बदल सकता है।
स्टील स्लैग सड़क तकनीक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक साथ कम लागत, अधिक मजबूती, लंबी उपयोग अवधि, कम रखरखाव, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और औद्योगिक कचरे के पुनः उपयोग जैसे कई उद्देश्यों को संबोधित करती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
तकनीक → स्टील स्लैग सड़क निर्माण तकनीक
स्टील स्लैग → इस्पात निर्माण प्रक्रिया का ठोस उप-उत्पाद
भारत → विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक
वर्तमान स्टील स्लैग उत्पादन → लगभग 1.9 करोड़ टन प्रतिवर्ष
भविष्य में संभावित उत्पादन → लगभग 6 करोड़ टन प्रतिवर्ष
2030-31 इस्पात उत्पादन लक्ष्य → 30 करोड़ टन
विश्व रिकॉर्ड → संसाधित स्टील स्लैग से निर्मित सबसे लंबी सड़क
स्थान → रायगढ़, छत्तीसगढ़
सड़क की लंबाई → 1.85 किलोमीटर
सड़क → चार लेन
स्टील स्लैग का उपयोग → लगभग 2 लाख टन
सहयोग → जिंदल स्टील लिमिटेड और CSIR-CRRI
प्रमुख अन्य परियोजनाएं → हजीरा, राष्ट्रीय राजमार्ग-66, अरुणाचल प्रदेश
मुख्य लाभ → कम लागत, अधिक मजबूती, लंबी उपयोग अवधि और प्राकृतिक संसाधनों की बचत