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विशाखापत्तनम में कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव का टेबल टॉप अभ्यास

नीचे विस्तार से तैयार सामग्री पीआईबी के 12 सितंबर 2026 के आधिकारिक रक्षा मंत्रालय के विवरण तथा कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव से संबंधित सरकारी स्रोतों पर आधारित है। अभ्यास 9 सितंबर से शुरू होकर 11 सितंबर 2026 को पूर्वी नौसेना कमान, विशाखापत्तनम में संपन्न हुआ। इसमें समुद्री आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अवैध, अनियमित तथा अनधिकृत मत्स्यन जैसी चुनौतियों पर चर्चा हुई।

भारत के पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम में कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (सीएससी) के तत्वावधान में तीन दिवसीय टेबल टॉप अभ्यास आयोजित किया गया। यह अभ्यास पूर्वी नौसेना कमान में आयोजित हुआ और 9 सितंबर 2026 को शुरू होकर 11 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ।

इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली अवैध समुद्री गतिविधियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच समन्वित और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना था।

टेबल टॉप अभ्यास क्या है?

टेबल टॉप अभ्यास एक ऐसा सिमुलेशन-आधारित अभ्यास होता है जिसमें वास्तविक सैन्य अभियान चलाने के बजाय संभावित संकट या सुरक्षा घटनाओं की काल्पनिक परिस्थितियाँ बनाई जाती हैं। इसके बाद विभिन्न देशों के अधिकारी और विशेषज्ञ यह चर्चा करते हैं कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर किस प्रकार सूचना साझा की जाएगी, निर्णय लिए जाएंगे तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।

इस प्रकार के अभ्यास से वास्तविक संकट की स्थिति में प्रतिक्रिया देने की तैयारी, प्रक्रियाओं और आपसी समन्वय को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य

इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में अवैध समुद्री गतिविधियों के प्रति समन्वित प्रतिक्रिया विकसित करना था।

अभ्यास के दौरान सदस्य देशों तथा पर्यवेक्षक देशों के प्रतिनिधियों और समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों ने विभिन्न काल्पनिक परिस्थितियों पर चर्चा की। साथ ही, मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की समीक्षा की गई और समुद्री क्षेत्र की निगरानी तथा सूचना साझा करने की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

किन समुद्री चुनौतियों पर चर्चा हुई?

अभ्यास में हिंद महासागर क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली कई गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों को शामिल किया गया। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित विषय शामिल थे—

1. समुद्री आतंकवाद
समुद्री मार्गों, बंदरगाहों और जहाजों को आतंकवादी गतिविधियों से उत्पन्न खतरों से सुरक्षित रखना इस सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

2. मादक पदार्थों की तस्करी
समुद्री मार्गों का उपयोग मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाता है। इसलिए संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, सूचना का आदान-प्रदान और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है।

3. मानव तस्करी
समुद्री मार्गों के माध्यम से होने वाली मानव तस्करी तथा उससे जुड़े संगठित अपराधों से निपटना भी क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण विषय है।

4. अवैध, अनियमित और अनधिकृत मत्स्यन
अवैध, अनियमित तथा अनधिकृत मत्स्यन से समुद्री संसाधनों और तटीय समुदायों की आजीविका पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इसके नियंत्रण के लिए समुद्री निगरानी और सूचना साझाकरण महत्वपूर्ण है।

समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने पर जोर

अभ्यास में समुद्री क्षेत्र जागरूकता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका अर्थ समुद्री क्षेत्र में जहाजों, गतिविधियों और संभावित सुरक्षा खतरों से संबंधित सूचनाओं को एकत्रित करना, साझा करना और उनका विश्लेषण करना है।

सदस्य देशों के बीच बेहतर सूचना साझाकरण से संदिग्ध गतिविधियों की समय पर पहचान करने तथा संभावित समुद्री अपराधों के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।

कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव क्या है?

कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव हिंद महासागर क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसकी शुरुआत भारत, श्रीलंका और मालदीव के बीच त्रिपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था के रूप में हुई थी।

बाद में इसका विस्तार हुआ और मॉरीशस, बांग्लादेश तथा सेशेल्स भी इसके सदस्य बने। इस प्रकार वर्तमान में इसके छह सदस्य देश हैं—

  • भारत
  • श्रीलंका
  • मालदीव
  • मॉरीशस
  • बांग्लादेश
  • सेशेल्स

सीएससी का उद्देश्य सदस्य देशों के साझा हितों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सहयोग एवं समन्वय को मजबूत करना है।

कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

सीएससी के अंतर्गत सहयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित पाँच प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित है—

1. समुद्री सुरक्षा और संरक्षा
समुद्री मार्गों, जहाजों और समुद्री संसाधनों की सुरक्षा तथा समुद्री अपराधों से निपटने के लिए सहयोग।

2. आतंकवाद और उग्रवाद का मुकाबला
आतंकवाद तथा उग्रवाद से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देना।

3. मानव एवं मादक पदार्थों की तस्करी तथा अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का मुकाबला
सीमा-पार संगठित अपराधों और तस्करी के नेटवर्क से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग।

4. साइबर सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण अवसंरचना और प्रौद्योगिकी की सुरक्षा
साइबर खतरों से निपटने, महत्वपूर्ण डिजिटल एवं भौतिक अवसंरचना की सुरक्षा और साइबर घटनाओं के प्रति सामूहिक प्रतिक्रिया को मजबूत करना।

5. मानवीय सहायता और आपदा राहत
प्राकृतिक आपदाओं तथा अन्य मानवीय संकटों के दौरान राहत, बचाव और सहायता के लिए क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।

हिंद महासागर क्षेत्र के लिए अभ्यास का महत्व

हिंद महासागर विश्व के महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में से एक है। यहां से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग गुजरते हैं। इस क्षेत्र में समुद्री अपराध, तस्करी, आतंकवाद और अवैध मत्स्यन जैसी गतिविधियाँ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती हैं।

ऐसे में सीएससी के तहत आयोजित टेबल टॉप अभ्यास सदस्य देशों को संभावित संकटों के दौरान एक-दूसरे के साथ बेहतर समन्वय, सूचना साझाकरण और संयुक्त प्रतिक्रिया की क्षमता विकसित करने का अवसर देता है।

भारत की भूमिका

भारत हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना कमान के स्तर पर इस अभ्यास का आयोजन भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति उसकी भूमिका को दर्शाता है।

अभ्यास में मानक संचालन प्रक्रियाओं की समीक्षा और सूचना साझा करने की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया, जिससे भविष्य में समुद्री घटनाओं के प्रति अधिक प्रभावी समन्वित प्रतिक्रिया विकसित करने में सहायता मिल सकती है।

MAHASAGAR दृष्टिकोण से संबंध

यह अभ्यास भारत के MAHASAGAR दृष्टिकोण के अनुरूप भी है। MAHASAGAR का पूर्ण रूप Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions है।

इस दृष्टिकोण में क्षेत्रीय देशों के साथ सुरक्षा और विकास के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव के माध्यम से समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, तस्करी, साइबर सुरक्षा तथा मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में सहयोग इसी व्यापक क्षेत्रीय दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है।

अभ्यास का व्यापक महत्व

विशाखापत्तनम में आयोजित यह अभ्यास केवल समुद्री सुरक्षा से संबंधित एक प्रशिक्षण गतिविधि नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संस्थागत समन्वय और सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना था।

सदस्य देशों द्वारा संभावित संकटों पर एक साथ चर्चा करने से यह समझ विकसित होती है कि किसी समुद्री घटना की स्थिति में सूचना किस प्रकार साझा की जाए, संबंधित एजेंसियाँ कैसे समन्वय करें और सामूहिक प्रतिक्रिया को किस प्रकार प्रभावी बनाया जाए।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • अभ्यास का नाम: कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव टेबल टॉप अभ्यास
  • आयोजन स्थल: पूर्वी नौसेना कमान, विशाखापत्तनम
  • अवधि: 9–11 सितंबर 2026
  • मुख्य उद्देश्य: हिंद महासागर क्षेत्र में अवैध समुद्री गतिविधियों के प्रति समन्वित प्रतिक्रिया विकसित करना
  • प्रमुख मुद्दे: समुद्री आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी तथा अवैध, अनियमित एवं अनधिकृत मत्स्यन
  • सीएससी के सदस्य: भारत, श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस, बांग्लादेश और सेशेल्स
  • मुख्य सहयोग क्षेत्र: समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद एवं उग्रवाद-रोध, तस्करी एवं संगठित अपराध-रोध, साइबर सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत
  • क्षेत्रीय क्षेत्र: हिंद महासागर क्षेत्र
  • संबंधित दृष्टिकोण: MAHASAGAR

Source: PIB