18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में किया गया। सम्मेलन में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणा’ (New Delhi Declaration) को अपनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान तथा अन्य नेताओं की उपस्थिति में घोषणा को अपनाए जाने की जानकारी दी।
घोषणा में वैश्विक शांति, आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु सुरक्षा, संयुक्त राष्ट्र सुधार, जलवायु परिवर्तन और वित्तीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ब्रिक्स देशों की साझा चिंताओं और सहयोग की दिशा को रेखांकित किया गया। ब्रिक्स की पूर्व घोषणाओं में भी बहुपक्षवाद, आर्थिक सहयोग और वैश्विक शासन में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
1. पश्चिम एशिया में शांति का आह्वान
नई दिल्ली घोषणा में मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। सदस्य देशों ने दीर्घकालिक शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संवाद और कूटनीति के माध्यम से प्रयास बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ब्रिक्स देशों ने यह भी कहा कि क्षेत्र में स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप सामूहिक प्रयास करने की बात कही गई।
2. पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा
घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की मृत्यु हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
ब्रिक्स नेताओं ने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों तथा उन्हें समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और संबंधित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।
घोषणा में आतंकवाद से निपटने में राज्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया तथा कहा गया कि आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक प्रयास अंतरराष्ट्रीय कानून के दायित्वों के अनुरूप होने चाहिए।
3. व्यापार प्रतिबंधों और बढ़ते शुल्क पर चिंता
ब्रिक्स देशों ने वर्तमान बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था में बढ़ती चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। घोषणा के अनुसार, विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप न होने वाले व्यापार-प्रतिबंधात्मक कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेष रूप से अत्यधिक शुल्क, गैर-टैरिफ उपायों और संरक्षणवादी नीतियों के विस्तार को लेकर चिंता जताई गई। नेताओं ने कहा कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को कम कर सकते हैं, आपूर्ति शृंखलाओं में बाधा डाल सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों में अनिश्चितता बढ़ा सकते हैं।
4. परमाणु प्रतिष्ठानों के आसपास हमलों पर चिंता
ब्रिक्स नेताओं ने नागरिक बुनियादी ढांचे तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए गए हमलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
घोषणा में कहा गया कि परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और निगरानी व्यवस्था को हर परिस्थिति में बनाए रखना आवश्यक है, जिसमें सशस्त्र संघर्ष की स्थिति भी शामिल है।
इसका उद्देश्य परमाणु दुर्घटनाओं तथा उनसे लोगों और पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान को रोकना है।
5. संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग
ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता को दोहराया।
चीन और रूस, जो सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, ने भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका देने की आकांक्षा के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
इसका व्यापक उद्देश्य वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और समावेशी बनाना है। ब्रिक्स पहले भी वैश्विक संस्थाओं में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक भागीदारी की वकालत करता रहा है।
6. एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध
घोषणा में एकतरफा दबावकारी उपायों और आर्थिक प्रतिबंधों की आलोचना की गई। नेताओं के अनुसार, एकतरफा आर्थिक तथा द्वितीयक प्रतिबंधों के व्यापक नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
ब्रिक्स देशों ने ऐसे उपायों को समाप्त करने की आवश्यकता व्यक्त की, जिन्हें वे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों के विपरीत मानते हैं।
7. कार्बन सीमा करों का विरोध
ब्रिक्स नेताओं ने ऐसे एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपायों का विरोध किया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं हैं। इनमें कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (Carbon Border Adjustment Mechanisms—CBAM) को भी शामिल किया गया।
विकासशील देशों की चिंता यह है कि ऐसे व्यापारिक पर्यावरणीय उपायों से उनकी निर्यात प्रतिस्पर्धा और जलवायु कार्रवाई की क्षमता प्रभावित हो सकती है। घोषणा में विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने तथा अपनी अनुकूलन क्षमता और लचीलापन बढ़ाने में सहायता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
8. सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा
ब्रिक्स देशों ने ब्रिक्स भुगतान कार्यबल (BPTF) के प्रयासों का स्वागत किया। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अधिक प्रभावी और सुगम सीमा-पार भुगतान व्यवस्था विकसित करने के व्यावहारिक विकल्पों का अध्ययन करना है।
नेताओं ने भुगतान और संदेश-प्रेषण प्रणालियों के बीच परस्पर संचालन की संभावनाओं पर किए गए कार्य को भी स्वीकार किया।
इसके साथ ही ब्रिक्स देशों की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और निवेश को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई। हालांकि, इसमें प्रत्येक देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और परिस्थितियों का सम्मान करने की बात कही गई।
9. ब्रिक्स अनाज व्यापार मंच की योजना
घोषणा में ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज (BRICS Grain Exchange) स्थापित करने की पहल को आगे बढ़ाने के महत्व को स्वीकार किया गया।
इस मंच का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच कृषि उत्पादों और अनाज के व्यापार को अधिक व्यवस्थित एवं सहयोगात्मक बनाना है। आगे चलकर इसके दायरे को अन्य कृषि उत्पादों और जिंसों तक बढ़ाने की संभावना पर भी चर्चा की गई।
ब्रिक्स कृषि सहयोग में खाद्य सुरक्षा और कृषि आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने पर पहले से जोर देता रहा है।
10. ब्रिक्स एग्रिन की स्थापना
ब्रिक्स देशों ने BRICS AGRIN स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। इसका पूरा नाम Agro-Inputs, Genetic Resources, and Information Network है।
यह एक सहयोगात्मक, गैर-बाध्यकारी और किसान-केंद्रित नेटवर्क होगा। इसका उद्देश्य कृषि आदानों, आनुवंशिक संसाधनों और कृषि संबंधी सूचनाओं के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग एवं ज्ञान-विनिमय को बढ़ावा देना है।
इस पहल से कृषि क्षेत्र में बेहतर जानकारी, संसाधनों और अनुभवों के आदान-प्रदान तथा खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
11. वैश्विक खाद्य एवं आपूर्ति सुरक्षा पर जोर
ब्रिक्स देशों के लिए कृषि और खाद्य सुरक्षा महत्वपूर्ण सहयोग क्षेत्रों में शामिल हैं। सदस्य देशों ने कृषि उत्पादों तथा आवश्यक कृषि आदानों की आपूर्ति में अनावश्यक बाधाओं को कम करने और अधिक लचीली खाद्य आपूर्ति शृंखलाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
ग्रेन एक्सचेंज और एग्रिन जैसी पहलों को इसी व्यापक कृषि सहयोग के संदर्भ में देखा जा सकता है।
12. चीन को 2027 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए समर्थन
नई दिल्ली घोषणा में 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए चीन को समर्थन दिया गया।
सदस्य देशों ने 2027 में चीन में 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन का भी समर्थन किया। इस प्रकार भारत की अध्यक्षता के बाद ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता और शिखर सम्मेलन की मेजबानी चीन को मिलेगी।
नई दिल्ली घोषणा का महत्व
नई दिल्ली घोषणा में सुरक्षा, आतंकवाद और पश्चिम एशिया से लेकर व्यापार, जलवायु, वित्तीय प्रणाली, कृषि और वैश्विक शासन तक कई विषयों को शामिल किया गया। विशेष रूप से पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध, कार्बन सीमा उपायों पर चिंता, सीमा-पार भुगतान तथा ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज जैसे मुद्दे भारत के लिए महत्वपूर्ण रहे।
इस घोषणा से ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में बहुपक्षीय सहयोग, विकासशील देशों की भागीदारी और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ब्रिक्स की पिछली घोषणाओं में भी वैश्विक शासन में अधिक प्रतिनिधित्व तथा आर्थिक और वित्तीय सहयोग को प्रमुखता दी गई है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन → नई दिल्ली
तिथि → 12 सितंबर 2026
घोषणा → नई दिल्ली घोषणा
प्रमुख मुद्दे → पश्चिम एशिया, आतंकवाद, पहलगाम हमला, व्यापार शुल्क, परमाणु सुरक्षा, संयुक्त राष्ट्र सुधार, प्रतिबंध, कार्बन सीमा कर, सीमा-पार भुगतान
नई कृषि पहल → ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज और BRICS AGRIN
2027 की ब्रिक्स अध्यक्षता → चीन
19वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन → चीन में आयोजित किया जाएगा