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G7 देशों ने 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई

International 📅 October 11, 2026

G7 देशों का तेल भंडार जारी करने का निर्णय

• सात देशों के समूह (Group of Seven—G7) के सदस्य देशों ने चार महीने की अवधि में अपने भंडार से 10 करोड़ बैरल डीजल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति व्यक्त की है।

• यह घोषणा 2 अक्टूबर को ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने और इस संबंध में समन्वित कार्रवाई करने के लिए G7 नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद की गई।

• G7 नेताओं ने सदस्य देशों के बीच ऊर्जा और ऊर्जा उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने सभी तेल एवं ऊर्जा उत्पादकों से भी ऐसे प्रतिबंध नहीं लगाने का आग्रह किया, जिनसे बाजार में तनाव और बढ़ सकता है।

• तेल जारी करने का यह निर्णय मार्च में की गई उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सदस्य देशों ने तेल बाजार को स्थिर करने के लिए 42.6 करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद जारी करने की बात कही थी।

तेल की कीमतों में वृद्धि के प्रमुख कारण

• आठ महीने से जारी अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका सहित कई देशों में पेट्रोल और अन्य ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।

• बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी पर दबाव बढ़ गया है। उन्हें 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले इन कीमतों को नियंत्रित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

• अमेरिका ने यूरोपीय संघ पर आपातकालीन डीजल भंडार का उपयोग करने के लिए दबाव बनाया। ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी कि यदि आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो अमेरिका डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकता है।

• यदि अमेरिका डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाता है, तो यूरोप को होने वाली डीजल की आपूर्ति में भारी कमी आ सकती है। इससे यूरोपीय देशों में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।

सात देशों का समूह (G7) क्या है?

G7 का परिचय

• G7 विश्व की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसके सदस्य देश हैं:

  1. यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन)

  2. कनाडा

  3. फ्रांस

  4. जर्मनी

  5. इटली

  6. जापान

  7. संयुक्त राज्य अमेरिका (अमेरिका)

• G7 की स्थापना 1973 के ऊर्जा संकट के बाद आर्थिक और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।

• इस समूह का पहला शिखर सम्मेलन नवंबर 1975 में फ्रांस के रामबुइये (Rambouillet) में आयोजित किया गया था। इसमें फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और इटली शामिल थे।

• वर्ष 1976 में कनाडा के शामिल होने के बाद यह समूह G7 बन गया और इसका वर्तमान स्वरूप स्थापित हुआ।

• वर्ष 1977 से यूरोपीय आर्थिक समुदाय, जिसे अब यूरोपीय संघ (EU) कहा जाता है, के प्रतिनिधियों ने भी समूह की गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया।

G7 के कार्यक्षेत्र का विस्तार

• वर्ष 1980 के दशक से G7 ने आर्थिक और वित्तीय सहयोग के अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, मानवाधिकार और वैश्विक स्थिरता जैसे विषयों पर भी ध्यान देना शुरू किया।

• बाद के वर्षों में इस समूह ने विकासशील देशों के साथ सहयोग और संवाद को भी प्राथमिकता दी।

• G7 ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों को मजबूत बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके प्रमुख कार्यक्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, लैंगिक समानता, विकासशील देशों को सहायता प्रदान करना और निरस्त्रीकरण कार्यक्रमों को समर्थन देना शामिल हैं।

• G7 के माध्यम से सदस्य देश वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करते हैं और उनके समाधान के लिए साझा राजनीतिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास करते हैं।

G7 और यूरोपीय संघ

• यूरोपीय संघ G7 की बैठकों में भाग लेता है, लेकिन उसे सात सदस्य देशों की सूची में शामिल नहीं किया जाता। इस कारण उसे एक गैर-संख्यांकित सदस्य (Non-enumerated Member) कहा जाता है।

• यूरोपीय संघ G7 की अध्यक्षता ग्रहण नहीं करता। इसकी अध्यक्षता केवल सात सदस्य देशों के बीच बारी-बारी से बदलती है।

G7 से G8 और फिर G7 बनने की प्रक्रिया

• वर्ष 1997 में रूस के शामिल होने के बाद G7 का विस्तार G8 के रूप में हुआ।

• वर्ष 2014 में रूस द्वारा यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर कब्जा करने के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा थे।

• रूस को बाहर किए जाने के बाद समूह पुनः G7 के रूप में कार्य करने लगा।

G7 की अध्यक्षता

• G7 की अध्यक्षता प्रतिवर्ष इसके सदस्य देशों के बीच बदलती रहती है। अध्यक्षता करने वाले देश को शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने और समूह की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका प्राप्त होती है।

• अध्यक्षता का क्रम इस प्रकार है: फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा।

• वर्ष 2026 में फ्रांस G7 की अध्यक्षता कर रहा है।

G7 की आर्थिक और राजनीतिक महत्ता

• G7 के सदस्य देशों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 40 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के आधे हिस्से से थोड़ा कम है।

• G7 के वार्षिक शिखर सम्मेलन समय के साथ वैश्विक मुद्दों पर बहुपक्षीय चर्चा करने और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के प्रति राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ निर्धारित करने का एक महत्त्वपूर्ण मंच बन गए हैं।

• G7, G20 की भूमिका को भी पूरक बनाता है। G20 को वैश्विक आर्थिक समन्वय के लिए एक प्रमुख मंच माना जाता है।

• G7 वैश्विक एजेंडा निर्धारित करने में प्रभावशाली भूमिका निभाता है, क्योंकि इसके सदस्य देश विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन देशों के नेताओं द्वारा किसी नीति या मुद्दे पर अपनाया गया दृष्टिकोण अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थानों की नीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।

• G7 में लिए गए निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते, लेकिन उनका राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव व्यापक होता है। सदस्य देशों की साझा घोषणाएँ अन्य देशों की नीतियों और वैश्विक संस्थाओं के निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं।

G7 में भारत की स्थिति

• भारत G7 का सदस्य नहीं है। हालाँकि, भारत को G7 के शिखर सम्मेलनों में नियमित रूप से आमंत्रित किया जाता रहा है।

• भारत की भागीदारी वैश्विक आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, विकास और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे मुद्दों पर प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ संवाद का अवसर प्रदान करती है।