भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly—UNGA) के 81वें सत्र के अवसर पर भारत-CELAC विस्तारित ट्रोइका बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य भारत और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई देशों के बीच व्यापार, आर्थिक विकास, राजनीतिक संवाद तथा बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना था।
इस बैठक में CELAC के 33 सदस्य देशों में से 30 देशों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया, जो भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने में इस क्षेत्र की रुचि को दर्शाता है।
बैठक के दौरान भारत और CELAC देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के वित्त वर्ष 2025-26 में 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की उपलब्धि का स्वागत किया गया। साथ ही, व्यापार, निवेश, विकास साझेदारी और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग की व्यापक संभावनाओं पर बल दिया गया।
यह बैठक भारत की वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के साथ साझेदारी मजबूत करने की नीति के संदर्भ में भी महत्त्वपूर्ण है। लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, कृषि, ऊर्जा, खनिजों, उभरते बाजारों तथा क्षेत्रीय सहयोग की दृष्टि से भारत के लिए महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
CELAC क्या है?
CELAC का पूरा नाम Community of Latin American and Caribbean States है, जिसे हिंदी में लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई राज्यों का समुदाय कहा जाता है।
यह लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के देशों का एक क्षेत्रीय राजनीतिक समन्वय मंच है। इसमें अमेरिका महाद्वीप के लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई क्षेत्र के सभी 33 देश शामिल हैं।
CELAC का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग, सामाजिक विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। यह मंच क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सदस्य देशों के हितों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
CELAC की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह क्षेत्र के देशों को साझा हितों के आधार पर एक मंच पर लाता है, जबकि सदस्य देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएँ, आर्थिक परिस्थितियाँ और विकास संबंधी प्राथमिकताएँ अलग-अलग हो सकती हैं।
इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
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लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों के बीच राजनीतिक समन्वय को मजबूत करना।
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क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और व्यापार को बढ़ावा देना।
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सामाजिक कल्याण तथा नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना।
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स्वतंत्र, समावेशी और सतत विकास को प्रोत्साहित करना।
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शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना।
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अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच साझा दृष्टिकोण विकसित करना।
CELAC की स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
CELAC की स्थापना लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में क्षेत्रीय एकता तथा राजनीतिक समन्वय को मजबूत करने के प्रयासों का परिणाम है।
इसकी स्थापना की प्रक्रिया के प्रमुख पड़ाव निम्नलिखित हैं:
1. फरवरी 2010 — स्थापना की पहल: CELAC की शुरुआत फरवरी 2010 में रियो समूह (Rio Group) और कैरेबियाई समुदाय (Caribbean Community—CARICOM) के एकता शिखर सम्मेलन के दौरान हुई।
2. 3 दिसंबर 2011 — औपचारिक स्थापना: वेनेजुएला में आयोजित बैठक के दौरान काराकास घोषणा (Declaration of Caracas) को अपनाकर CELAC की औपचारिक स्थापना की गई।
3. पूर्ववर्ती क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका: CELAC ने रियो समूह और लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियाई एकीकरण तथा विकास शिखर सम्मेलन (Latin American and Caribbean Summit on Integration and Development—CALC) की भूमिका को आगे बढ़ाया।
4. साझा कार्ययोजनाओं को आगे बढ़ाना: काराकास घोषणा के अंतर्गत CELAC ने अपने पूर्ववर्ती समूहों की कार्ययोजनाओं और कार्य कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस प्रकार CELAC क्षेत्रीय सहयोग की पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं को एक व्यापक राजनीतिक मंच के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास है।
CELAC के 33 सदस्य देश कौन-कौन से हैं?
CELAC में लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के कुल 33 देश शामिल हैं। इन देशों की कुल जनसंख्या लगभग 60 करोड़ है। यह सदस्यता क्षेत्रीय राजनीतिक एकता और सहयोग के लिए CELAC को एक महत्त्वपूर्ण मंच बनाती है।
CELAC के सभी 33 सदस्य देशों की सूची निम्नलिखित है:
| क्रमांक | सदस्य देश | क्रमांक | सदस्य देश |
|---|---|---|---|
| 1 | एंटीगुआ और बारबुडा | 18 | गयाना |
| 2 | अर्जेंटीना | 19 | हैती |
| 3 | बहामास | 20 | होंडुरास |
| 4 | बारबाडोस | 21 | जमैका |
| 5 | बेलीज | 22 | मेक्सिको |
| 6 | बोलीविया | 23 | निकारागुआ |
| 7 | ब्राज़ील | 24 | पनामा |
| 8 | चिली | 25 | पराग्वे |
| 9 | कोलंबिया | 26 | पेरू |
| 10 | कोस्टा रिका | 27 | सेंट किट्स और नेविस |
| 11 | क्यूबा | 28 | सेंट लूसिया |
| 12 | डोमिनिका | 29 | सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस |
| 13 | डोमिनिकन गणराज्य | 30 | सूरीनाम |
| 14 | इक्वाडोर | 31 | त्रिनिदाद और टोबैगो |
| 15 | अल सल्वाडोर | 32 | उरुग्वे |
| 16 | ग्रेनेडा | 33 | वेनेजुएला |
| 17 | ग्वाटेमाला |
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण: CELAC में कुल 33 सदस्य देश हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा इसके सदस्य नहीं हैं।
CELAC के प्रमुख उद्देश्य
CELAC का उद्देश्य लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों को एक साझा राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक मंच पर लाना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं।
1. राजनीतिक समन्वय: क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच संवाद और साझा दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।
2. आर्थिक एकीकरण: सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को प्रोत्साहित करना।
3. सामाजिक कल्याण: गरीबी, असमानता और सामाजिक बहिष्करण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सहयोग को बढ़ावा देना।
4. जीवन स्तर में सुधार: शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित क्षेत्रों में विकास को प्रोत्साहित करना।
5. सतत विकास: पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना।
6. सांस्कृतिक सहयोग: सदस्य देशों की भाषाओं, परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और लोगों के बीच संपर्क को प्रोत्साहित करना।
7. वैश्विक मंचों पर सहयोग: संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर साझा हितों के मुद्दों पर समन्वय विकसित करना।
CELAC की संगठनात्मक संरचना और ट्रोइका व्यवस्था
CELAC एक क्षेत्रीय राजनीतिक समन्वय तंत्र है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना है। इसकी कार्यप्रणाली में राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन, विदेश मंत्रियों की बैठकें और अस्थायी अध्यक्षता जैसी व्यवस्थाएँ महत्त्वपूर्ण हैं।
ट्रोइका (Troika) CELAC की एक महत्त्वपूर्ण समन्वय व्यवस्था है, जिसमें सामान्यतः पूर्ववर्ती, वर्तमान और आगामी अस्थायी अध्यक्षता से जुड़े देशों की भूमिका रहती है। इसका उद्देश्य संगठन की गतिविधियों में निरंतरता बनाए रखना और सदस्य देशों के बीच समन्वय को मजबूत करना है।
विस्तारित ट्रोइका बैठक में संबंधित क्षेत्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी के माध्यम से संवाद का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
भारत-CELAC विस्तारित ट्रोइका बैठक के संदर्भ में:
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भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सह-अध्यक्षता की।
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उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने भारत के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता की।
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सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा बैप्टिस्ट ने CELAC ट्रोइका में अपने देश की भूमिका प्रस्तुत की।
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CELAC के 33 में से 30 सदस्य देशों ने बैठक में भाग लिया।
यह भागीदारी भारत और CELAC के बीच राजनीतिक संवाद को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है।
भारत-CELAC संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई क्षेत्र के देशों के बीच संबंध व्यापार, ऊर्जा, कृषि, औषधि, प्रौद्योगिकी और विकास सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में विस्तृत हैं।
भारत के लिए यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, कृषि उत्पादों, ऊर्जा और खनिजों की उपलब्धता के साथ-साथ भारतीय वस्तुओं तथा सेवाओं के निर्यात के लिए भी महत्त्वपूर्ण है।
दूसरी ओर, CELAC के सदस्य देश भारत को एक बड़े बाजार, तकनीकी साझेदार और विकास सहयोग के संभावित स्रोत के रूप में देखते हैं।
भारत और इस क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
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व्यापार एवं निवेश।
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कच्चा तेल, ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा।
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औषधि तथा स्वास्थ्य सेवाएँ।
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कृषि और खाद्य सुरक्षा।
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सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल परिवर्तन।
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महत्त्वपूर्ण खनिज और औद्योगिक विकास।
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अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी।
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बुनियादी ढाँचा एवं क्षमता निर्माण।
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जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन।
CELAC जैसे क्षेत्रीय मंच के माध्यम से भारत को अनेक देशों के साथ एक ही व्यवस्था में संवाद करने और साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग विकसित करने का अवसर मिलता है।
भारत-CELAC व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा
भारत और CELAC देशों के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। यह उपलब्धि दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों के विस्तार को दर्शाती है।
हालाँकि, इस आँकड़े को भारत और CELAC के सभी 33 देशों के साथ होने वाले कुल व्यापार के संदर्भ में समझना चाहिए, न कि किसी एक देश के साथ व्यापार के रूप में।
भारत और इस क्षेत्र के बीच व्यापार को आगे बढ़ाने की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं।
भारत से निर्यात की संभावनाएँ
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औषधियाँ और जेनेरिक दवाएँ।
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मशीनरी तथा औद्योगिक उपकरण।
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वाहन और वाहन कलपुर्जे।
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रसायन एवं पेट्रोलियम उत्पाद।
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सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाएँ।
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वस्त्र तथा अन्य विनिर्मित उत्पाद।
CELAC देशों से भारत के आयात की संभावनाएँ
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कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा संसाधन।
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सोयाबीन तथा अन्य कृषि उत्पाद।
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तांबा, लिथियम और अन्य महत्त्वपूर्ण खनिज।
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खाद्य पदार्थ एवं कृषि आधारित उत्पाद।
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औद्योगिक कच्चा माल।
व्यापार में वृद्धि के लिए परिवहन संपर्क, निवेश, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, बाजार तक पहुँच और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करना आवश्यक होगा।
भारत-CELAC बैठक के प्रमुख विषय
बैठक में द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार के साथ-साथ व्यापक विकास साझेदारी और वैश्विक चुनौतियों पर भी विचार किया गया।
1. व्यापार और निवेश में वृद्धि: दोनों पक्षों ने व्यापार की मौजूदा उपलब्धियों का स्वागत करते हुए भविष्य में और अधिक आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।
2. विकास साझेदारी: कृषि, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढाँचे और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया गया।
3. बहुपक्षवाद को मजबूत करना: वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और बहुपक्षीय सहयोग की भूमिका पर बल दिया गया।
4. राजनीतिक संवाद: भारत और CELAC देशों के बीच नियमित संवाद तथा उच्चस्तरीय संपर्क को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
5. जन-से-जन संपर्क: शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की संभावनाओं को महत्त्व दिया गया।
6. संस्थागत समन्वय: दोनों पक्षों ने अपने संपर्कों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की।
भारत के लिए CELAC का रणनीतिक महत्त्व
CELAC भारत की विदेश नीति में विशेष महत्त्व रखता है, क्योंकि यह लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के 33 देशों के साथ व्यापक स्तर पर संपर्क स्थापित करने का अवसर देता है।
1. वैश्विक दक्षिण के साथ सहयोग
भारत और CELAC के अनेक सदस्य देश विकासशील देशों की साझा चुनौतियों का सामना करते हैं। खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और विकास के लिए तकनीक जैसे मुद्दों पर सहयोग दोनों पक्षों के हित में है।
2. ऊर्जा सुरक्षा
लैटिन अमेरिका के कई देशों के पास तेल, गैस और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन हैं। इन देशों के साथ सहयोग भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को विविध बनाने में योगदान दे सकता है।
3. महत्त्वपूर्ण खनिजों तक पहुँच
लिथियम, तांबा और अन्य महत्त्वपूर्ण खनिज विद्युत वाहनों, बैटरी निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आवश्यक हैं। इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग भारत की औद्योगिक और तकनीकी आवश्यकताओं के लिए उपयोगी हो सकता है।
4. निर्यात बाजारों का विस्तार
CELAC क्षेत्र में भारतीय दवाओं, वाहनों, मशीनरी, रसायनों और डिजिटल सेवाओं के लिए बाजार विस्तार की संभावनाएँ मौजूद हैं।
5. बहुपक्षीय कूटनीति
CELAC के सदस्य देशों के साथ सहयोग से भारत को संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकास, व्यापार, जलवायु और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर संवाद मजबूत करने का अवसर मिलता है।
6. विकास सहयोग
भारत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में अपने अनुभव साझा करके क्षेत्रीय साझेदारी को मजबूत कर सकता है।
CELAC और वैश्विक दक्षिण का संबंध
वैश्विक दक्षिण (Global South) शब्द का प्रयोग सामान्यतः उन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए किया जाता है, जो आर्थिक विकास, विकास वित्त, तकनीकी पहुँच और अंतरराष्ट्रीय निर्णय-निर्माण में अधिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर सहयोग की आवश्यकता महसूस करती हैं।
CELAC के अनेक सदस्य देश इन मुद्दों पर भारत के साथ साझा हित रखते हैं।
भारत और CELAC के बीच सहयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण हो सकता है:
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विकासशील देशों के हितों का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन।
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जलवायु वित्त और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुँच।
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खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादकता।
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डिजिटल समावेशन और तकनीकी क्षमता निर्माण।
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अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार।
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सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति।
भारत की वैश्विक दक्षिण के प्रति प्रतिबद्धता और CELAC की क्षेत्रीय एकता की भावना मिलकर सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकती हैं।
CELAC के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
CELAC के सदस्य देश भौगोलिक दृष्टि से एक क्षेत्र से जुड़े होने के बावजूद आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक रूप से विविध हैं। इस विविधता के कारण साझा नीतियाँ विकसित करना हमेशा आसान नहीं होता।
प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
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आर्थिक असमानता: सदस्य देशों की आर्थिक क्षमताओं, आय और विकास स्तर में अंतर है।
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राजनीतिक मतभेद: देशों की घरेलू नीतियों और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं में अंतर होने से साझा दृष्टिकोण विकसित करना कठिन हो सकता है।
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क्षेत्रीय व्यापार की बाधाएँ: परिवहन लागत, बुनियादी ढाँचे की कमी और व्यापार संबंधी प्रक्रियाएँ आर्थिक एकीकरण को प्रभावित कर सकती हैं।
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सामाजिक चुनौतियाँ: गरीबी, असमानता, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच जैसे मुद्दे अनेक देशों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
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जलवायु परिवर्तन: तूफान, बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाएँ विशेष रूप से कैरेबियाई देशों को प्रभावित कर सकती हैं।
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संस्थागत निरंतरता: सदस्य देशों की प्राथमिकताओं में बदलाव होने पर क्षेत्रीय कार्यक्रमों को लगातार आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इन चुनौतियों के बावजूद CELAC क्षेत्रीय संवाद और सहयोग के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच बना हुआ है।
भारत-CELAC सहयोग की भविष्य की संभावनाएँ
भारत और CELAC देशों के बीच व्यापार में वृद्धि भविष्य के सहयोग के लिए एक सकारात्मक आधार प्रस्तुत करती है। आने वाले वर्षों में दोनों पक्ष पारंपरिक व्यापार के अतिरिक्त तकनीक, नवाचार और सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा सकते हैं।
भविष्य में सहयोग की प्रमुख संभावनाएँ हैं:
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नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन।
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डिजिटल भुगतान और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना।
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औषधि निर्माण तथा स्वास्थ्य सेवाएँ।
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कृषि तकनीक और खाद्य प्रसंस्करण।
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लिथियम, तांबा और अन्य महत्त्वपूर्ण खनिज।
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अंतरिक्ष विज्ञान तथा उपग्रह आधारित सेवाएँ।
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कौशल विकास और शैक्षणिक आदान-प्रदान।
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आपदा प्रबंधन तथा मानवीय सहायता।
इन क्षेत्रों में सहयोग से भारत और CELAC के देशों को आर्थिक लाभ के साथ-साथ साझा विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता मिल सकती है।
निष्कर्ष
CELAC लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के 33 देशों का एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय राजनीतिक समन्वय मंच है। इसकी स्थापना का उद्देश्य क्षेत्रीय एकता, राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
भारत-CELAC विस्तारित ट्रोइका बैठक में 30 सदस्य देशों की भागीदारी और वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापार के 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की उपलब्धि दोनों पक्षों के बीच बढ़ते संबंधों को दर्शाती है।
भारत के लिए CELAC के साथ सहयोग ऊर्जा सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता, निर्यात बाजारों के विस्तार, विकास साझेदारी और बहुपक्षीय कूटनीति के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है। वहीं, CELAC देशों के लिए भारत एक बड़े बाजार और तकनीकी एवं विकास सहयोग के संभावित साझेदार के रूप में उभरता है।
इस प्रकार, भारत-CELAC संबंध वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और अधिक समावेशी एवं सतत वैश्विक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
परीक्षा उपयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य
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CELAC का पूरा नाम: Community of Latin American and Caribbean States
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हिंदी नाम: लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई राज्यों का समुदाय
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स्थापना की पहल: फरवरी 2010
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औपचारिक स्थापना: 3 दिसंबर 2011
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स्थापना का स्थान: काराकास, वेनेजुएला
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स्थापना से संबंधित दस्तावेज: काराकास घोषणा (Declaration of Caracas)
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कुल सदस्य देश: 33
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अनुमानित जनसंख्या: लगभग 60 करोड़
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पूर्ववर्ती क्षेत्रीय मंच: रियो समूह और CALC
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भारत-CELAC बैठक का अवसर: संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वाँ सत्र
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बैठक का स्थान: न्यूयॉर्क
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भारत की ओर से सह-अध्यक्ष: डॉ. एस. जयशंकर
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उरुग्वे की ओर से सह-अध्यक्ष: मारियो लुबेटकिन
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बैठक में भाग लेने वाले सदस्य: 33 में से 30 देश
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भारत-CELAC व्यापार: वित्त वर्ष 2025-26 में 50 अरब अमेरिकी डॉलर
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मुख्य उद्देश्य: क्षेत्रीय राजनीतिक समन्वय, आर्थिक एकीकरण, सामाजिक कल्याण और सतत विकास
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विशेष महत्त्व: वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग तथा भारत के व्यापारिक और रणनीतिक हितों का विस्तार