इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भाग लेने वाले देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, नौसेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करना तथा साझा समुद्री चुनौतियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना था।
इस संयुक्त गतिविधि ने यह प्रदर्शित किया कि पेशेवर संवाद, व्यावहारिक प्रशिक्षण और बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
भारत की भागीदारी उसकी ‘एक्ट ईस्ट नीति’ (Act East Policy) और ‘महासागर’ (MAHASAGAR) दृष्टिकोण के अनुरूप है। महासागर का पूरा नाम Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions है, जिसका आशय विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति से है।
ADMM-Plus क्या है?
ADMM-Plus दक्षिण-पूर्व एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने वाला एक प्रमुख बहुपक्षीय मंच है। इसमें आसियान के 11 सदस्य देशों के साथ आठ संवाद भागीदार देश शामिल हैं।
इन आठ संवाद भागीदार देशों को सामूहिक रूप से ‘प्लस देश’ (Plus Countries) कहा जाता है।
इसके सदस्य संवाद भागीदार देश हैं:
भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका,
प्रमुख तथ्य:
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पूरा नाम: ASEAN Defence Ministers’ Meeting-Plus
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स्थापना संबंधी प्रथम बैठक: अक्टूबर 2010
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प्रथम बैठक का आयोजन स्थल: हनोई, वियतनाम
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प्रमुख उद्देश्य: रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देना।
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बैठक की आवृत्ति: वर्ष 2017 से प्रतिवर्ष बैठक आयोजित की जाती है।
इस मंच के माध्यम से सदस्य देश रक्षा नीतियों पर विचार-विमर्श करते हैं, सैन्य संस्थानों के बीच विश्वास बढ़ाते हैं और समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, मानवीय सहायता तथा आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग करते हैं।
ADMM-Plus के प्रमुख उद्देश्य
1. सदस्य देशों की क्षमता का विकास
इसका उद्देश्य आसियान सदस्य देशों को साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और संस्थागत क्षमता विकसित करने में मदद करना है। इसमें सदस्य देशों की अलग-अलग क्षमताओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाता है।
2. आपसी विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देना
रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच नियमित संवाद, विचारों का आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाकर सदस्य देशों के बीच विश्वास एवं पारदर्शिता स्थापित करना इसका प्रमुख लक्ष्य है।
3. क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखना
समुद्री डकैती, आतंकवाद, मानव तस्करी, अवैध गतिविधियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दिया जाता है।
4. आसियान सुरक्षा समुदाय की स्थापना में योगदान
यह मंच ऐसे क्षेत्रीय वातावरण के निर्माण में सहयोग करता है, जहाँ देश शांतिपूर्ण तरीके से विवादों का समाधान कर सकें तथा लोकतंत्र, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा दे सकें। यह उद्देश्य बाली कॉनकॉर्ड-II में व्यक्त आसियान की क्षेत्रीय आकांक्षाओं से जुड़ा है।
5. वियनतियाने कार्ययोजना के क्रियान्वयन में सहायता
इसका उद्देश्य शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध आसियान के निर्माण को आगे बढ़ाना तथा संवाद भागीदारों के साथ बाह्य संबंधों और सहयोग को अधिक प्रभावी बनाना है।
ADMM-Plus के अंतर्गत सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
ADMM-Plus के अंतर्गत रक्षा सहयोग को व्यावहारिक रूप देने के लिए विशेषज्ञ कार्य समूहों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
प्रमुख सहयोग क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
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समुद्री सुरक्षा: समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नौसैनिक समन्वय और समुद्री खतरों से निपटना।
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आतंकवाद-रोधी कार्रवाई: आतंकवादी गतिविधियों तथा उनसे संबंधित सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करना।
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मानवीय सहायता एवं आपदा राहत: प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों में संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करना।
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सैन्य चिकित्सा: सैन्य चिकित्सा सेवाओं और आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता में सहयोग।
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शांति स्थापना अभियान: अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में प्रशिक्षण और समन्वय को बढ़ावा देना।
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साइबर सुरक्षा: रक्षा क्षेत्र से संबंधित साइबर खतरों और तकनीकी चुनौतियों पर सहयोग।
इन गतिविधियों से सदस्य देशों की सेनाओं के बीच परिचालन समन्वय, पारस्परिक समझ और संयुक्त रूप से कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होती है।
आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश का महत्व
भारतीय नौसेना के दोनों पोतों की भूमिका
आईएनएस सह्याद्रि (INS Sahyadri)
यह भारतीय नौसेना का शिवालिक श्रेणी का स्टील्थ बहुउद्देशीय निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट है। इसकी डिजाइन में रडार पर पहचान कम करने वाली तकनीकों का उपयोग किया गया है। यह समुद्री निगरानी, सतह एवं हवाई खतरों से निपटने और विभिन्न नौसैनिक अभियानों में भाग लेने में सक्षम है।
आईएनएस कुलिश (INS Kulish)
यह भारतीय नौसेना का कोरा श्रेणी का निर्देशित मिसाइल कार्वेट है। यह अपेक्षाकृत छोटा, तेज और विभिन्न समुद्री अभियानों के लिए उपयोगी युद्धपोत है। इसका उपयोग समुद्री गश्त, सतही लक्ष्यों के विरुद्ध कार्रवाई तथा नौसैनिक सुरक्षा अभियानों में किया जा सकता है।
इन दोनों पोतों की भागीदारी से भारतीय नौसेना को क्षेत्रीय नौसेनाओं के साथ परिचालन अनुभव साझा करने, समुद्री परिस्थितियों में समन्वय बढ़ाने और व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने का अवसर मिलता है।
भारत के लिए ADMM-Plus का महत्व
1. एक्ट ईस्ट नीति को मजबूती
भारत की एक्ट ईस्ट नीति का उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक, रणनीतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करना है। ADMM-Plus इस नीति के सुरक्षा एवं रक्षा संबंधी आयाम को आगे बढ़ाता है।
2. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग
हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भारत क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग करता है।
3. समुद्री सुरक्षा में वृद्धि
भारत की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर के निकट होने के कारण समुद्री सुरक्षा उसके राष्ट्रीय हितों से सीधे जुड़ी है। बहुपक्षीय नौसैनिक गतिविधियाँ समुद्री डकैती, अवैध तस्करी और अन्य समुद्री खतरों से निपटने में उपयोगी हैं।
4. रक्षा कूटनीति का विस्तार
संयुक्त सैन्य अभ्यास और विशेषज्ञ कार्य समूह भारत को विभिन्न देशों के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने तथा अपने परिचालन अनुभव का आदान-प्रदान करने का अवसर प्रदान करते हैं।
5. महासागर दृष्टिकोण को बढ़ावा
महासागर दृष्टिकोण क्षेत्रीय देशों के बीच सुरक्षा, विकास और सहयोग को प्रोत्साहित करता है। ADMM-Plus में भारत की भागीदारी इस व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
आसियान (ASEAN) क्या है?
आसियान दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 8 अगस्त 1967 को बैंकॉक, थाईलैंड में की गई थी। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, सांस्कृतिक सहयोग और शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देना है।
आसियान की स्थापना बैंकॉक घोषणा के माध्यम से पाँच देशों ने की थी – इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड
वर्तमान में आसियान के 11 सदस्य देश हैं – इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, लाओस, म्यांमार, कंबोडिया, वियतनाम, तिमोर-लेस्ते (पूर्वी तिमोर)
तिमोर-लेस्ते के शामिल होने के बाद आसियान की सदस्य संख्या 11 हो गई है।
आसियान शिखर सम्मेलन
आसियान शिखर सम्मेलन संगठन का सर्वोच्च नीतिगत निर्णय लेने वाला निकाय है। इसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष भाग लेते हैं।
इसके प्रमुख कार्य हैं:
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क्षेत्रीय नीतियों और प्राथमिकताओं का निर्धारण करना।
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आर्थिक एकीकरण और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देना।
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क्षेत्रीय सुरक्षा तथा राजनीतिक सहयोग पर चर्चा करना।
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सदस्य देशों के बीच विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को प्रोत्साहित करना।
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आसियान और उसके संवाद भागीदारों के बीच संबंधों को मजबूत करना।
आसियान की नियमित व्यवस्था के अनुसार शिखर सम्मेलन वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है। इसका पहला शिखर सम्मेलन 23–24 फरवरी 1976 को इंडोनेशिया के बाली में आयोजित हुआ था।
भारत और आसियान के संबंध
भारत और आसियान के बीच संबंध व्यापार, निवेश, संपर्क, संस्कृति और सुरक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में विस्तृत हैं। भारत की एक्ट ईस्ट नीति में आसियान का विशेष स्थान है।
रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे विषयों पर सहयोग करते हैं।
भारत के लिए आसियान का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि दक्षिण-पूर्व एशिया हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच रणनीतिक संपर्क का प्रमुख क्षेत्र है। इस क्षेत्र में स्थिरता वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
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ADMM-Plus का पहला सम्मेलन: अक्टूबर 2010, हनोई (वियतनाम)
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ADMM-Plus में कुल देश: 19 — आसियान के 11 सदस्य और 8 संवाद भागीदार
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भारत की संबंधित नीति: एक्ट ईस्ट नीति
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महासागर का पूर्ण रूप: Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions
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आसियान की स्थापना: 8 अगस्त 1967
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आसियान की स्थापना का स्थान: बैंकॉक, थाईलैंड
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आसियान के संस्थापक सदस्य: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड
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आसियान का वर्तमान सदस्य संख्या: 11
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आसियान का पहला शिखर सम्मेलन: 23–24 फरवरी 1976, बाली (इंडोनेशिया)
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भारत की नौसैनिक भागीदारी: आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश
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संयुक्त गतिविधि का स्थान: सुबिक बे, फिलीपींस
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संयुक्त गतिविधि का प्रमुख क्षेत्र: समुद्री सुरक्षा सहयोग