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भारत और लाइबेरिया ने समुद्री नाविकों की सुरक्षा के लिए नए समूह की शुरुआत की

India & World 📅 October 11, 2026
भारत और लाइबेरिया ने समुद्री नाविकों (Seafarers) तथा वाणिज्यिक जहाजरानी (Commercial Shipping) की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ (Group of Friends on Safety & Security of Shipping & Seafarers—GoF on S4) नामक एक नए समूह की शुरुआत की है।

इस पहल का उद्देश्य समुद्री नाविकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना तथा वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले हमलों और समुद्री परिवहन से संबंधित अन्य खतरों का प्रभावी ढंग से सामना करना है।

इस समूह का शुभारंभ 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) के उच्चस्तरीय सत्र के अवसर पर किया गया। इस अवसर पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यांती उपस्थित थीं।

समूह की स्थापना की पृष्ठभूमि

वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों के माध्यम से संचालित होता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य पदार्थों के परिवहन और औद्योगिक उत्पादन के लिए समुद्री परिवहन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, हाल के वर्षों में विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों और उन पर कार्यरत नाविकों के विरुद्ध हमलों तथा सुरक्षा संबंधी खतरों में चिंता बढ़ी है।

समुद्री नाविकों को केवल प्रत्यक्ष हमलों का ही सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में जहाजों पर लंबे समय तक फँसे रहने, चालक दल के सदस्यों के निर्धारित समय पर न बदल पाने, स्वदेश वापसी में देरी और परिवारों से दूर रहने जैसी समस्याएँ भी झेलनी पड़ती हैं।

इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारत और लाइबेरिया ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच की स्थापना की है, जो समुद्री नाविकों की सुरक्षा को वैश्विक प्राथमिकता बनाने और संबंधित देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने का कार्य करेगा।

भारत और लाइबेरिया की भूमिका

इस पहल में भारत और लाइबेरिया की भागीदारी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि दोनों देशों की समुद्री क्षेत्र में अलग-अलग लेकिन परस्पर पूरक भूमिकाएँ हैं।

  • भारत: भारत दुनिया के प्रमुख समुद्री नाविक उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। भारतीय नाविक वैश्विक वाणिज्यिक जहाजरानी उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

  • लाइबेरिया: लाइबेरिया अपने विशाल जहाज पंजीकरण तंत्र के लिए जाना जाता है और पंजीकृत जहाजों के कुल टन भार के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी जहाज रजिस्ट्रियों में शामिल है।

इस प्रकार, भारत के पास समुद्री नाविकों से संबंधित अनुभव और लाइबेरिया के पास जहाज पंजीकरण व्यवस्था से जुड़ा व्यापक अनुभव है। दोनों देशों का संयुक्त नेतृत्व इस समूह को वैश्विक स्तर पर प्रभावी बनाने में सहायक हो सकता है।

भारत और लाइबेरिया इस समूह के सह-अध्यक्ष (Co-Chairs) के रूप में कार्य करेंगे।

समूह के प्रमुख उद्देश्य

इस समूह की स्थापना समुद्री सुरक्षा से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।

1. समुद्री नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना

समुद्री नाविकों को सशस्त्र हमलों, संघर्षों, बंधक जैसी परिस्थितियों, लंबे समय तक जहाजों पर फँसे रहने और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से बचाने के लिए वैश्विक जागरूकता बढ़ाना।

2. वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा मजबूत करना

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रयुक्त वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने तथा समुद्री मार्गों पर उत्पन्न होने वाले खतरों से निपटने के लिए सहयोग को बढ़ावा देना।

3. सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना

समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच विचारों, अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना।

4. व्यावहारिक सहयोग को प्रोत्साहित करना

समुद्री आपात स्थितियों, नाविकों की सुरक्षा, चालक दल के सदस्यों के बदलाव और संकट के समय उनकी स्वदेश वापसी जैसे विषयों पर व्यावहारिक सहयोग विकसित करना।

5. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं को मजबूत करना

यह समूह समुद्री सुरक्षा और नाविकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पहले से मौजूद अंतरराष्ट्रीय समझौतों, संस्थागत व्यवस्थाओं और कानूनी ढाँचों का पूरक बनेगा। इसका उद्देश्य मौजूदा व्यवस्थाओं को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उनकी प्रभावशीलता बढ़ाना है।

समूह की प्रमुख विशेषताएँ

‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन S4’ को तीन प्रमुख विशेषताओं के आधार पर विकसित किया गया है।

  • समावेशी (Inclusive): इसमें समुद्री सुरक्षा से संबंधित विभिन्न देशों और हितधारकों को सहयोग का अवसर मिलेगा।

  • स्वैच्छिक (Voluntary): इसमें भागीदारी स्वैच्छिक आधार पर होगी।

  • कार्रवाई-उन्मुख (Action-oriented): इसका जोर केवल चर्चा तक सीमित रहने के बजाय व्यावहारिक सहयोग और ठोस प्रयासों को प्रोत्साहित करने पर होगा।

इस समूह में प्रमुख जहाज-स्वामी देश, बड़ी संख्या में जहाजों का पंजीकरण करने वाले देश तथा अधिक संख्या में समुद्री नाविक उपलब्ध कराने वाले देश शामिल हैं।

इस संरचना के माध्यम से समुद्री परिवहन के विभिन्न पक्षों से जुड़े देशों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया गया है।

समूह की स्थापना का वैश्विक महत्व

1. अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा

दुनिया में प्रतिदिन 140 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है। समुद्र इस व्यापार और उससे संबंधित आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ (Global Supply Chains) एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

यदि किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर संघर्ष या हमले के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो उसका प्रभाव कई देशों के आयात-निर्यात, ऊर्जा आपूर्ति, उत्पादन लागत और वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

इसलिए समुद्री मार्गों और उनसे जुड़े साझा समुद्री क्षेत्रों (Maritime Commons) की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है।

2. समुद्री नाविकों के अधिकारों की रक्षा

दुनिया के वाणिज्यिक जहाजों पर लगभग 20 लाख समुद्री नाविक कार्यरत हैं। ये नाविक अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समुद्री संघर्षों और हमलों के दौरान इन नाविकों को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे:

  • जहाज पर लंबे समय तक फँसे रहना।

  • चालक दल के सदस्यों को समय पर बदलने में असमर्थता।

  • अनुबंध पूरा होने के बाद भी स्वदेश लौटने में देरी।

  • परिवार से लंबे समय तक दूर रहना।

  • मानसिक तनाव और मनोवैज्ञानिक परेशानियाँ।

  • हमलों के कारण घायल होने या जान जाने का खतरा।

यह समूह इन समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने और नाविकों की सुरक्षा एवं कल्याण के लिए सहयोग बढ़ाने का प्रयास करेगा।

3. समुद्री क्षेत्रों में बढ़ते सुरक्षा खतरों का मुकाबला

हाल के महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से लेकर लाल सागर तथा काला सागर तक वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आई हैं।

इन क्षेत्रों में होने वाली हिंसक घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के साथ-साथ नाविकों के जीवन और सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकती हैं।

वाणिज्यिक जहाजों और उनके चालक दल पर ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून तथा मानवीय दृष्टिकोण से गंभीर चिंता का विषय हैं। यह समूह सदस्य देशों के बीच समन्वय बढ़ाकर इन खतरों पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है।

4. अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता

समुद्री नाविकों की सुरक्षा के लिए पहले से कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय व्यवस्थाएँ मौजूद हैं। इसके बावजूद, समुद्री संघर्षों और सुरक्षा संबंधी संकटों के दौरान नाविकों के अधिकारों की प्रभावी रक्षा के लिए देशों के बीच अधिक निकट सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है।

समुद्री नाविक जिस देश के नागरिक होते हैं, वह देश अक्सर उस देश से अलग होता है जिसके ध्वज के अंतर्गत उनका जहाज संचालित होता है। इसके अतिरिक्त, जहाज का स्वामी, पंजीकरण का देश और नाविकों की राष्ट्रीयता भी अलग-अलग हो सकती है।

इस कारण किसी संकट के दौरान जिम्मेदारी, समन्वय और सहायता से संबंधित जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। नया समूह इन विभिन्न पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा।

5. वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की निरंतरता

समुद्री परिवहन में बाधा उत्पन्न होने से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, खाद्य पदार्थों, उर्वरकों और औद्योगिक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप परिवहन लागत बढ़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता उत्पन्न हो सकती है।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इसलिए केवल जहाजरानी उद्योग का विषय नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है।

भारत के लिए इस पहल का महत्व

भारत के लिए यह पहल कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

  • भारतीय नाविकों की सुरक्षा: वैश्विक समुद्री उद्योग में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने का अवसर मिलेगा।

  • समुद्री कूटनीति: भारत को समुद्री सुरक्षा से संबंधित वैश्विक सहयोग को मजबूत करने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

  • व्यापारिक हितों की रक्षा: सुरक्षित समुद्री मार्ग भारत के आयात-निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

  • बहुपक्षीय सहयोग: लाइबेरिया और अन्य समुद्री देशों के साथ मिलकर भारत अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के समाधान में योगदान दे सकेगा।

  • नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था: मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनों और व्यवस्थाओं के अनुरूप समुद्री सुरक्षा तथा नाविकों के अधिकारों की रक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

निष्कर्ष

भारत और लाइबेरिया द्वारा शुरू किया गया ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ समुद्री नाविकों की सुरक्षा, वाणिज्यिक जहाजरानी की संरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

वैश्विक व्यापार में समुद्री परिवहन की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए, जहाजों और उन पर कार्यरत नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों के साझा हित में है। यह समूह सदस्य देशों के बीच संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों का सामना करने में योगदान दे सकता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

  • समूह का नाम: Group of Friends on Safety & Security of Shipping & Seafarers (GoF on S4)

  • शुभारंभ की तिथि: 25 सितंबर

  • शुभारंभ का अवसर: संयुक्त राष्ट्र महासभा का उच्चस्तरीय सत्र

  • प्रमुख देश: भारत और लाइबेरिया

  • भारत के प्रतिनिधि: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

  • लाइबेरिया की प्रतिनिधि: विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यांती

  • सह-अध्यक्ष: भारत और लाइबेरिया

  • मुख्य उद्देश्य: समुद्री नाविकों की सुरक्षा, वाणिज्यिक जहाजरानी की संरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।

  • प्रमुख विशेषताएँ: समावेशी, स्वैच्छिक और कार्रवाई-उन्मुख मंच

  • वैश्विक समुद्री नाविकों की अनुमानित संख्या: लगभग 20 लाख

  • समुद्री सुरक्षा से संबंधित प्रमुख क्षेत्र: होर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर।