संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च-स्तरीय सत्र के दौरान 23 सितंबर 2026 को भारत और कैरेबियाई देशों के समूह CARICOM के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कैरेबियाई देशों के अपने समकक्षों के साथ विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि CARICOM ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने का निर्णय व्यक्त किया।
यह समर्थन भारत की बहुपक्षीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्य के चुनाव में विभिन्न क्षेत्रीय समूहों के देशों का समर्थन आवश्यक होता है।
भारत-CARICOM विदेश मंत्रियों की बैठक
भारत-CARICOM विदेश मंत्रियों की बैठक सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च-स्तरीय सत्र के दौरान आयोजित की गई। यह बैठक भारत और कैरेबियाई देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक एवं कूटनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर बनी।
बैठक का संबंध नवंबर 2024 में गुयाना में आयोजित दूसरे भारत-CARICOM शिखर सम्मेलन से भी था। उस सम्मेलन की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और CARICOM देशों के नेताओं ने की थी।
भारत और CARICOM के बीच सहयोग में व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
2028-29 के लिए UNSC में भारत की उम्मीदवारी
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के गैर-स्थायी सदस्य के कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की है।
CARICOM देशों द्वारा भारत की उम्मीदवारी का समर्थन भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन है। सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा किया जाता है और इसमें क्षेत्रीय समूहों के बीच समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत इससे पहले 2021-22 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य रहा था। यह सुरक्षा परिषद में भारत का आठवां कार्यकाल था।
सुरक्षा परिषद में भारत के पिछले कार्यकाल
भारत अब तक निम्नलिखित वर्षों में UNSC का गैर-स्थायी सदस्य रहा है—
- 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12, 2021-22
इस प्रकार 2028-29 का कार्यकाल भारत के लिए सुरक्षा परिषद में नौवां गैर-स्थायी कार्यकाल होगा, यदि वह चुनाव में निर्वाचित होता है।
CARICOM क्या है?
CARICOM का पूरा नाम Caribbean Community यानी कैरेबियाई समुदाय है। यह कैरेबियाई क्षेत्र के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य आर्थिक एकीकरण, सामाजिक विकास, व्यापारिक सहयोग और विदेश नीति सहित विभिन्न क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
CARICOM को विकासशील देशों में क्षेत्रीय एकीकरण के सबसे पुराने मौजूदा आंदोलनों में से एक माना जाता है। वर्तमान में इसमें 15 पूर्ण सदस्य और 8 सहयोगी सदस्य हैं।
CARICOM की स्थापना
CARICOM की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम 4 जुलाई 1973 को उठाया गया, जब कैरेबियाई देशों ने चागुआरामास संधि (Treaty of Chaguaramas) पर हस्ताक्षर किए।
यह संधि 1 अगस्त 1973 को लागू हुई और इसके माध्यम से कैरेबियाई समुदाय तथा साझा बाजार की स्थापना की गई।
बाद में CARICOM की व्यवस्था को और व्यापक बनाने के लिए संशोधित चागुआरामास संधि (Revised Treaty of Chaguaramas) लाई गई, जिसमें आर्थिक एकीकरण तथा CARICOM एकल बाजार और अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
CARICOM के 15 पूर्ण सदस्य
CARICOM के पूर्ण सदस्य देशों में शामिल हैं—
एंटीगुआ और बारबुडा, बहामास, बारबाडोस, बेलीज, डोमिनिका, ग्रेनाडा, गुयाना, हैती, जमैका, मोंटेसेराट, सेंट किट्स और नेविस, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो
इनमें मोंटेसेराट को छोड़कर अन्य सभी पूर्ण सदस्य संप्रभु राष्ट्र हैं। मोंटेसेराट ब्रिटेन का एक विदेशी क्षेत्र है।
CARICOM के सहयोगी सदस्य
CARICOM के वर्तमान सहयोगी सदस्यों में शामिल हैं—
एंगुइला, बरमूडा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, केमैन आइलैंड्स, कुराकाओ, फ्रेंच गयाना, मार्टीनिक, तुर्क्स एंड कैकोस आइलैंड्स
सहयोगी सदस्य CARICOM की कुछ गतिविधियों और कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, लेकिन पूर्ण सदस्य देशों के समान अधिकार और दायित्व नहीं रखते।
CARICOM का भौगोलिक विस्तार
CARICOM का क्षेत्र उत्तर में बहामास से लेकर दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित गुयाना और सूरीनाम तक फैला हुआ है। पश्चिम में बेलीज और पूर्व में बारबाडोस इसके भौगोलिक विस्तार का हिस्सा हैं।
CARICOM के अधिकांश सदस्य छोटे द्वीपीय विकासशील देश हैं। गुयाना और सूरीनाम दक्षिण अमेरिका में तथा बेलीज मध्य अमेरिका में स्थित हैं।
CARICOM की जनसंख्या और विविधता
CARICOM क्षेत्र में लगभग 1.6 करोड़ लोग रहते हैं। यहां विभिन्न जातीय एवं सांस्कृतिक समूहों की मौजूदगी है, जिनमें मूल निवासी, अफ्रीकी मूल के लोग, भारतीय मूल के लोग, यूरोपीय, चीनी, पुर्तगाली और जावानीस समुदाय शामिल हैं।
क्षेत्र में अंग्रेजी प्रमुख भाषा है, जबकि फ्रेंच और डच सहित अन्य भाषाएं भी विभिन्न देशों में प्रचलित हैं।
CARICOM की प्रमुख विशेषताएं
CARICOM के सदस्य देश आकार और जनसंख्या की दृष्टि से अपेक्षाकृत छोटे हैं, लेकिन उनके बीच भौगोलिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विविधता काफी अधिक है।
इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं में पर्यटन, सेवाएं, वित्तीय सेवाएं, कृषि और प्राकृतिक संसाधन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छोटे आकार के कारण इन देशों को प्राकृतिक आपदाओं और बाहरी आर्थिक झटकों के प्रति विशेष संवेदनशीलता का सामना करना पड़ता है।
CARICOM के प्रमुख उद्देश्य
CARICOM के प्रमुख उद्देश्यों में सदस्य देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना शामिल है। इसके प्रमुख लक्ष्य हैं—
- जीवन और कार्य के स्तर में सुधार करना।
- रोजगार के अवसरों को बढ़ाना।
- आर्थिक विकास को तेज, समन्वित और टिकाऊ बनाना।
- सदस्य देशों के बीच व्यापार का विस्तार करना।
- अन्य देशों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करना।
- अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ाना।
- उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना।
- सदस्य देशों की सामूहिक आर्थिक क्षमता को मजबूत करना।
- विदेश नीति और विदेश आर्थिक नीति में बेहतर समन्वय स्थापित करना।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में कार्यात्मक सहयोग बढ़ाना।
CARICOM का भारत के लिए महत्व
भारत के लिए CARICOM केवल कैरेबियाई क्षेत्र का एक क्षेत्रीय संगठन नहीं है, बल्कि यह बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
CARICOM के 15 पूर्ण सदस्य और 8 सहयोगी सदस्य हैं। ऐसे समूह का समर्थन भारत की वैश्विक कूटनीतिक पहुंच को मजबूत करता है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत के पक्ष में सहयोग जुटाने में उपयोगी हो सकता है।
विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर छोटे और विकासशील देशों की सामूहिक आवाज महत्वपूर्ण होती है।
भारत और CARICOM के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
भारत और CARICOM के संबंधों में कई क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं—
व्यापार एवं निवेश: भारत कैरेबियाई देशों के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने पर जोर देता है।
स्वास्थ्य: दवाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता CARICOM देशों के लिए उपयोगी है।
डिजिटल सहयोग: भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना संबंधी अनुभव कैरेबियाई देशों के लिए सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
क्षमता निर्माण: भारत विभिन्न प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से विकासशील देशों के साथ सहयोग करता है।
जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन: छोटे द्वीपीय देशों के लिए जलवायु परिवर्तन, समुद्र-स्तर में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाएं महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। भारत और CARICOM के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं हैं।
UNSC में CARICOM के समर्थन का महत्व
भारत की 2028-29 की UNSC उम्मीदवारी के लिए CARICOM का समर्थन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत और कैरेबियाई देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक विश्वास को दर्शाता है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है। भारत की स्थायी सदस्यता की मांग और UNSC में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में चुनाव—दोनों अलग-अलग विषय हैं।
2028-29 की उम्मीदवारी गैर-स्थायी सदस्यता के लिए है, जबकि भारत की दीर्घकालिक मांग सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता से संबंधित है।
भारत-CARICOM संबंधों का व्यापक महत्व
भारत और CARICOM के बीच सहयोग भारत की दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) की नीति के व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। दोनों पक्ष विकासशील देशों के हितों, बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर सहयोग कर सकते हैं।
भारत के लिए कैरेबियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति को विस्तार मिलता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- CARICOM का पूरा नाम: Caribbean Community
- हिंदी नाम: कैरेबियाई समुदाय
- स्थापना: 4 जुलाई 1973
- स्थापना से संबंधित संधि: चागुआरामास संधि
- संधि लागू: 1 अगस्त 1973
- पूर्ण सदस्य: 15
- सहयोगी सदस्य: 8
- मुख्यालय/सचिवालय: जॉर्जटाउन, गुयाना
- भारत-CARICOM विदेश मंत्रियों की बैठक: 23 सितंबर 2026
- बैठक का अवसर: संयुक्त राष्ट्र महासभा का उच्च-स्तरीय सत्र
- भारत की UNSC उम्मीदवारी: 2028-29
- CARICOM का निर्णय: 2028-29 के लिए भारत की UNSC उम्मीदवारी का समर्थन
- भारत का पिछला UNSC कार्यकाल: 2021-22
- भारत अब तक UNSC का गैर-स्थायी सदस्य: 8 बार
- भारत के UNSC कार्यकाल: 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22
- CARICOM का प्रमुख उद्देश्य: आर्थिक एकीकरण, सामाजिक विकास, व्यापार विस्तार और सदस्य देशों के बीच समन्वय
- वर्तमान CARICOM अध्यक्षता: 2026 में सेंट लूसिया के प्रधानमंत्री फिलिप जे. पियरे के पास जुलाई-दिसंबर अवधि के लिए है।