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जयशंकर ने V4 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ पहली V4+भारत बैठक में भाग लिया

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 21 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान पहली V4+भारत विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया। यह बैठक भारत और मध्य यूरोप के विसेग्राद समूह (Visegrad Group—V4) के बीच विदेश मंत्री स्तर पर औपचारिक सामूहिक संवाद की शुरुआत के लिहाज से महत्वपूर्ण रही। बैठक स्लोवाकिया की V4 अध्यक्षता में आयोजित हुई।

इस बैठक में भारत और V4 देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा तथा लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

Visegrad Group में कौन-कौन से देश शामिल हैं?

Visegrad Group यानी V4 मध्य यूरोप के चार देशों का एक क्षेत्रीय सहयोग समूह है। इसमें शामिल हैं—

  • चेक गणराज्य (Czech Republic/Czechia)
  • हंगरी (Hungary)
  • पोलैंड (Poland)
  • स्लोवाकिया (Slovakia)

यह समूह राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग के साथ-साथ आर्थिक, सुरक्षा, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में समन्वय का मंच प्रदान करता है। V4 एक अनौपचारिक अंतर-सरकारी मंच है और इसके सदस्य देशों की संख्या इसकी स्थापना के बाद से चार ही रही है।

V4+भारत बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?

पहली V4+भारत विदेश मंत्रियों की बैठक ने भारत और चारों V4 देशों के बीच पहले से मौजूद द्विपक्षीय संबंधों के ऊपर एक बहुपक्षीय क्षेत्रीय संवाद का अतिरिक्त मंच उपलब्ध कराया है।

भारत के प्रत्येक V4 देश के साथ अलग-अलग राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। V4+भारत प्रारूप इन संबंधों को सामूहिक स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर देता है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह प्रारूप भारत और V4 देशों के बीच पहले से मौजूद संबंधों को पूरक बनाते हुए सहयोग को नई गति देने की क्षमता रखता है।

बैठक में किन देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए?

बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ V4 के चारों देशों के विदेश मंत्री स्तर के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इनमें—

  • स्लोवाकिया के विदेश एवं यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराज ब्लानार
  • पोलैंड के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की
  • चेक गणराज्य के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री पेट्र माचिंका
  • हंगरी की उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अनिता ओर्बान

शामिल थीं।

बैठक में सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

बैठक में भारत और V4 देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इनमें प्रमुख रूप से—

  • व्यापार और निवेश
  • प्रौद्योगिकी एवं नवाचार
  • मजबूत और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं
  • रक्षा एवं सुरक्षा
  • कनेक्टिविटी
  • शिक्षा
  • लोगों की आवाजाही एवं जन-से-जन संपर्क
  • अनुसंधान
  • सांस्कृतिक सहयोग
  • बहुपक्षीय सहयोग

शामिल रहे।

वार्षिक विदेश मंत्री बैठक और बिजनेस फोरम

बैठक के बाद सामने आए विवरण के अनुसार, भारत और V4 देशों के बीच विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

इसके अलावा, आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए Annual Business Forum शुरू करने की दिशा में भी सहमति बनी। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के व्यापारिक समुदायों के बीच संपर्क बढ़ाना और निवेश एवं व्यावसायिक अवसरों को प्रोत्साहित करना है।

प्रौद्योगिकी और नवाचार पर जोर

भारत और V4 देशों ने Technology and Innovation के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

इसके तहत प्रौद्योगिकी कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाया जा सकता है। बैठक में अनुसंधान और शिक्षा साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाएं भी सामने आईं।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग

भारत के चारों V4 देशों के साथ लंबे समय से रक्षा संबंध हैं। पहली V4+भारत बैठक में इन संबंधों को आगे बढ़ाने और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।

विशेष रूप से रक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने तथा बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में नए अवसर तलाशने पर जोर दिया गया।

कनेक्टिविटी और जन-से-जन संबंध

बैठक में कनेक्टिविटी तथा People-to-People Contacts को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति और लोगों की आवाजाही के माध्यम से भारत और मध्य यूरोप के बीच संपर्क को व्यापक बनाने की संभावनाएं इस नए प्रारूप का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा

बैठक केवल द्विपक्षीय या आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रही। मंत्रियों ने वैश्विक एवं क्षेत्रीय घटनाक्रम, शांति और सुरक्षा तथा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।

बैठक में बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और समकालीन वैश्विक चुनौतियों, विशेषकर ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता

बैठक के बाद स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की दावेदारी के समर्थन की बात कही। रिपोर्टों के अनुसार, V4 के चारों देशों ने भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन का सामूहिक रुख व्यक्त किया।

हालांकि, किसी देश की स्थायी सदस्यता के लिए केवल किसी समूह या कुछ देशों का समर्थन पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में आवश्यक बदलाव की प्रक्रिया की जरूरत होती है।

Visegrad Group की स्थापना कब हुई?

Visegrad Group की स्थापना 15 फरवरी 1991 को हुई थी। उस समय पोलैंड, हंगरी और चेकोस्लोवाकिया ने यूरोपीय एकीकरण तथा आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सहयोग की शुरुआत की।

समूह का नाम हंगरी के शहर विसेग्राद (Visegrád) से लिया गया है, जहां तीन देशों के नेताओं की बैठक हुई थी। V3 से V4 कैसे बना?

1991 में समूह में तीन देश थे, इसलिए इसे V3 कहा जाता था।

बाद में 1993 में चेकोस्लोवाकिया के विभाजन के बाद दो स्वतंत्र देश—चेक गणराज्य और स्लोवाकिया—अस्तित्व में आए। इसके परिणामस्वरूप समूह का स्वरूप V3 से बदलकर V4 हो गया।

इस प्रकार वर्तमान V4 में चार देश हैं—चेक गणराज्य, हंगरी, पोलैंड और स्लोवाकिया।

V4 की शुरुआती प्राथमिकताएं

Visegrad Group की स्थापना के समय इसके प्रमुख उद्देश्यों में मध्य यूरोप के इन देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और उन्हें यूरोपीय तथा अटलांटिक संस्थाओं के साथ एकीकृत होने में सहायता करना शामिल था।

विशेष रूप से NATO और यूरोपीय संघ (EU) की सदस्यता की दिशा में आगे बढ़ना इसके शुरुआती एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा था। V4 के आधिकारिक ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य 1999 में NATO में शामिल हुए, जबकि चारों V4 देश 2004 में यूरोपीय संघ के सदस्य बने।

NATO और EU सदस्यता के बाद V4 की भूमिका

NATO और EU की सदस्यता प्राप्त करने के बाद V4 की भूमिका समाप्त नहीं हुई। समूह ने स्वयं को क्षेत्रीय परामर्श, सहयोग और साझा हितों पर समन्वय के मंच के रूप में विकसित किया।

आज V4 देश यूरोपीय संघ और NATO के सदस्य होने के साथ-साथ V4 के माध्यम से भी क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।

V4 का संगठनात्मक ढांचा

Visegrad Group किसी पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय संगठन की तरह स्थायी संस्थागत ढांचे वाला संगठन नहीं है। यह मुख्य रूप से एक अनौपचारिक अंतर-सरकारी सहयोग मंच है।

इसके निर्णय सामान्यतः सर्वसम्मति (Consensus) के आधार पर लिए जाते हैं। समूह का कोई स्थायी मुख्यालय या स्थायी प्रशासनिक संरचना नहीं है। इसकी गतिविधियों का समन्वय एक घूर्णनशील अध्यक्षता के माध्यम से किया जाता है।

V4 की अध्यक्षता कैसे होती है?

V4 की अध्यक्षता हर वर्ष एक सदस्य देश से दूसरे सदस्य देश को स्थानांतरित होती है।

अध्यक्ष देश समूह की बैठकों और प्राथमिकताओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी व्यवस्था के तहत 1 जुलाई 2026 को स्लोवाकिया ने हंगरी से V4 की अध्यक्षता संभाली, जिसका कार्यकाल 30 जून 2027 तक है।

2026-27 में स्लोवाकिया की अध्यक्षता स्लोवाकिया ने अपनी अध्यक्षता के दौरान व्यावहारिक क्षेत्रीय सहयोग, यूरोप की प्रतिस्पर्धात्मकता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जोर देने की बात कही है।

स्लोवाक सरकार के अनुसार, उसकी 2026-27 की अध्यक्षता में क्षेत्रीय सहयोग को व्यावहारिक रूप से मजबूत करने और अधिक सुरक्षित एवं प्रतिस्पर्धी यूरोप में योगदान देने पर ध्यान दिया जाएगा।

V4 और भारत के संबंधों का महत्व

भारत के चारों V4 देशों के साथ अलग-अलग स्तर पर व्यापक संबंध हैं। नए V4+भारत प्रारूप से इन द्विपक्षीय संबंधों को एक सामूहिक क्षेत्रीय मंच भी मिल गया है।

भारत के लिए यह मंच मध्य यूरोप के साथ व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा, शिक्षा, कनेक्टिविटी और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में संवाद बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

V4+भारत प्रारूप का व्यापक महत्व

V4+भारत प्रारूप को भारत और मध्य यूरोप के बीच सहयोग के एक अतिरिक्त माध्यम के रूप में देखा जा सकता है। इसमें एक ओर V4 देशों की क्षेत्रीय समन्वय क्षमता है, वहीं दूसरी ओर भारत की यूरोपीय संघ और मध्य यूरोप के साथ बढ़ती सहभागिता है।

इस प्रारूप के माध्यम से राजनीतिक संवाद, आर्थिक संपर्क, तकनीकी सहयोग, रक्षा संबंध, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क को एक साथ आगे बढ़ाने की संभावना बनी है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • समूह: विसेग्राद समूह (Visegrad Group—V4)
  • सदस्य देश: चेक गणराज्य, हंगरी, पोलैंड और स्लोवाकिया
  • स्थापना: 15 फरवरी 1991
  • स्थापना का स्थान: विसेग्राद, हंगरी
  • प्रारंभिक स्वरूप: V3
  • V4 का गठन: 1993 में चेकोस्लोवाकिया के विभाजन के बाद
  • पहली V4+भारत विदेश मंत्रियों की बैठक: 21 सितंबर 2026
  • स्थान: न्यूयॉर्क
  • अवसर: संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र
  • बैठक की अध्यक्षता: स्लोवाकिया
  • भारत का प्रतिनिधित्व: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर
  • V4 की वर्तमान अध्यक्षता: स्लोवाकिया
  • स्लोवाकिया की अध्यक्षता: 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027
  • मुख्य सहयोग क्षेत्र: व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा, कनेक्टिविटी, शिक्षा और अनुसंधान
  • V4 का निर्णय आधार: सर्वसम्मति
  • NATO सदस्यता: V4 देशों ने क्रमशः 1999 और बाद के चरण में सदस्यता हासिल की; सभी चार 2004 तक EU के सदस्य बन चुके थे।
  • प्रस्तावित संस्थागत पहल: वार्षिक V4+भारत विदेश मंत्री बैठक और Annual Business Forum