Skip to content

टोक्यो में क्वाड ने टेबलटॉप अभ्यास आयोजित किया

भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के समूह क्वाड (QUAD) ने 3–4 सितंबर 2026 को जापान की राजधानी टोक्यो में एक टेबलटॉप एक्सरसाइज (Tabletop Exercise—TTX) आयोजित किया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्वाड इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (Indo-Pacific Logistics Network—IPLN) को आगे बढ़ाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बड़े प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नागरिक राहत एवं प्रतिक्रिया क्षमताओं को अधिक प्रभावी बनाना था। इस अभ्यास की मेजबानी जापान के रक्षा मंत्रालय ने की थी।

यह अभ्यास मई 2026 में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में बनी सहमति के अनुरूप आयोजित किया गया। यह IPLN से संबंधित पहले के अभ्यासों की अगली कड़ी भी था।

टेबलटॉप एक्सरसाइज क्या है?

टेबलटॉप एक्सरसाइज (TTX) एक ऐसा अभ्यास होता है जिसमें किसी संभावित संकट या आपदा की वास्तविक स्थिति पैदा किए बिना, संबंधित देश या संस्थाएं काल्पनिक परिस्थितियों पर चर्चा करके अपनी प्रतिक्रिया-व्यवस्था की जांच करती हैं।

इस अभ्यास में यह देखा जाता है कि प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में विभिन्न देश अपने उपलब्ध संसाधनों, परिवहन व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और विशेषज्ञता को किस प्रकार एक-दूसरे के साथ समन्वित कर सकते हैं।

टोक्यो में आयोजित अभ्यास में क्वाड देशों ने प्राकृतिक आपदा से निपटने के विभिन्न परिदृश्यों पर विचार किया तथा इस बात की जांच की कि प्रत्येक साझेदार की लॉजिस्टिक्स क्षमता का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे किया जा सकता है। साथ ही, चारों देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और समन्वय को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया।

इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (IPLN) क्या है?

Indo-Pacific Logistics Network (IPLN) क्वाड देशों की एक ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर प्राकृतिक आपदाओं के समय साझा लॉजिस्टिक्स क्षमताओं का उपयोग करके तेज, प्रभावी और समन्वित नागरिक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

इसके माध्यम से भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका अपनी उपलब्ध लॉजिस्टिक्स क्षमताओं का बेहतर समन्वय कर सकेंगे, ताकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री और आवश्यक सहायता अधिक तेजी से पहुंचाई जा सके।

IPLN का व्यापक उद्देश्य है—

  • प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जीवन बचाना।
  • राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाना।
  • आपदा के बाद पुनर्वास एवं रिकवरी को बेहतर बनाना।
  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझेदार देशों को संकट के समय सहायता उपलब्ध कराना।
  • चारों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स और आपदा-प्रतिक्रिया संबंधी समन्वय को मजबूत करना।

टोक्यो अभ्यास में क्या प्रगति हुई?

टोक्यो में आयोजित अभ्यास के दौरान क्वाड देशों ने IPLN के Standard Operating Procedures (SOPs) विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की।

SOPs ऐसे मानकीकृत दिशा-निर्देश होंगे, जिनके आधार पर आपदा के समय चारों देशों के बीच जिम्मेदारियों, समन्वय और लॉजिस्टिक्स सहायता को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा।

इन SOPs के तैयार होने से IPLN को संस्थागत ढांचा मिलेगा और इसे व्यावहारिक रूप से लागू करना आसान होगा।

IPLN के पिछले अभ्यास

टोक्यो का अभ्यास IPLN से संबंधित पहला अभ्यास नहीं था। यह पहले आयोजित किए गए अभ्यासों पर आधारित था।

अप्रैल 2025: हवाई में IPLN का पहला Tabletop Exercise (TTX) आयोजित किया गया था।

दिसंबर 2025: गुआम में Field Training Exercise (FTX) आयोजित किया गया।

सितंबर 2026: टोक्यो में दूसरा महत्वपूर्ण TTX आयोजित किया गया, जिसमें प्राकृतिक आपदा प्रतिक्रिया और लॉजिस्टिक्स समन्वय पर विशेष ध्यान दिया गया। इस प्रकार, IPLN को केवल चर्चा तक सीमित रखने के बजाय टेबलटॉप अभ्यास, फील्ड प्रशिक्षण, विश्वास निर्माण उपायों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान के माध्यम से धीरे-धीरे परिचालन योग्य बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

हाल की बाढ़ और मानवीय सहायता पर चर्चा

टोक्यो अभ्यास के दौरान क्वाड देशों ने हाल की विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही, संकट और आपातकालीन परिस्थितियों में मानवीय सहायता एवं राहत कार्यों के बेहतर समन्वय के तरीकों पर भी चर्चा की गई।

यह पहल इस बात को दर्शाती है कि IPLN का प्रमुख फोकस नागरिक मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief—HADR) पर है।

क्वाड क्या है?

QUAD का पूरा नाम Quadrilateral Security Dialogue (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) है।

यह चार देशों का एक कूटनीतिक समूह है—

  1. भारत
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. जापान
  4. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)

क्वाड का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, खुले, समावेशी, समृद्ध और लचीले क्षेत्रीय वातावरण को बढ़ावा देना तथा व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान करना है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार क्वाड स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग करता है।

क्वाड की उत्पत्ति

क्वाड की पृष्ठभूमि को 2004 के हिंद महासागर भूकंप और सुनामी से जोड़ा जाता है। उस समय भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं सहायता के लिए मिलकर काम किया था।

महत्वपूर्ण सुधार: दिए गए मूल पाठ में “2024 tsunami” लिखा है, जबकि यहां संदर्भ 2004 के हिंद महासागर भूकंप और सुनामी का है।

इसके बाद चारों देशों के बीच सहयोग का यह प्रारंभिक स्वरूप धीरे-धीरे व्यापक कूटनीतिक सहयोग में विकसित हुआ।

क्वाड की संस्थागत यात्रा

क्वाड से संबंधित प्रमुख घटनाओं को इस प्रकार समझा जा सकता है—

2004: हिंद महासागर भूकंप एवं सुनामी के बाद चारों देशों ने राहत एवं सहायता के लिए समन्वय किया।

मई 2007: क्वाड अधिकारियों की पहली बैठक फिलीपींस में ASEAN Regional Forum के अवसर पर हुई।

नवंबर 2017: लगभग एक दशक के अंतराल के बाद मनीला में क्वाड अधिकारियों की बैठक हुई और संपर्क, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग तथा मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

सितंबर 2019: चारों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली क्वाड बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अवसर पर हुई।

12 मार्च 2021: पहला क्वाड लीडर्स’ समिट वर्चुअल प्रारूप में आयोजित हुआ और क्वाड को शीर्ष नेतृत्व के स्तर तक बढ़ाया गया।

क्वाड का हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण

क्वाड चारों देशों के बीच सहयोग के माध्यम से Free, Open, Inclusive and Resilient Indo-Pacific की अवधारणा को बढ़ावा देता है।

इसका प्रमुख आधार अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, नौवहन की स्वतंत्रता और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान जैसे सिद्धांत हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार क्वाड का एजेंडा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यावहारिक और सकारात्मक सहयोग पर केंद्रित है।

समुद्री सुरक्षा और UNCLOS

क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को क्षेत्रीय विकास एवं समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

चारों देश संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात करते हैं।

क्वाड क्षेत्रीय साझेदार देशों के साथ Maritime Domain Awareness (MDA), क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता के माध्यम से समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर भी काम करता है।

आतंकवाद-रोधी सहयोग

क्वाड देशों के सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र Counter-Terrorism भी है।

चारों देश आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के विभिन्न रूपों से निपटने के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को बढ़ावा देते हैं। 2023 में क्वाड के विदेश मंत्रियों ने आतंकवाद-रोधी सहयोग के लिए एक Counterterrorism Working Group के गठन का भी उल्लेख किया था।

स्वास्थ्य और वैक्सीन सहयोग

क्वाड ने कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को भी अपने एजेंडे में शामिल किया।

2021 के पहले क्वाड लीडर्स’ समिट में सुरक्षित, प्रभावी, समान और सस्ती वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सहयोग पर चर्चा हुई थी। क्वाड ने स्वास्थ्य सुरक्षा को अपने प्रमुख व्यावहारिक सहयोग क्षेत्रों में शामिल किया है। जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन

जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।

इसी कारण क्वाड ने जलवायु कार्रवाई, आपदा पूर्वानुमान, आपदा राहत और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में सहयोग विकसित किया है।

IPLN इसी व्यापक HADR सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आपदा के समय चारों देशों की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करना है।

क्वाड के सहयोग के अन्य प्रमुख क्षेत्र

क्वाड का सहयोग कई क्षेत्रों तक विस्तृत है। इनमें प्रमुख हैं—

  • स्वास्थ्य सुरक्षा
  • जलवायु परिवर्तन
  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)
  • समुद्री सुरक्षा
  • कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा
  • साइबर सुरक्षा
  • महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियां
  • अंतरिक्ष सहयोग
  • आतंकवाद-रोधी सहयोग
  • तकनीकी क्षमता निर्माण
  • छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अवसर
  • महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी एवं नवाचार

क्वाड की आधिकारिक रूपरेखा के अनुसार इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से हिंद-प्रशांत देशों के लिए सार्वजनिक हित की सुविधाओं और क्षमताओं को बढ़ावा देना है।

भारत के लिए IPLN का महत्व

भारत के लिए IPLN का महत्व विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने से जुड़ा है।

भारत भूकंप, चक्रवात, बाढ़ और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का व्यापक अनुभव रखता है। क्वाड के माध्यम से अन्य साझेदार देशों के साथ लॉजिस्टिक्स क्षमताओं का समन्वय करने से बड़े क्षेत्रीय संकटों के दौरान राहत एवं सहायता को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है।

यह सहयोग भारत की व्यापक Humanitarian Assistance and Disaster Relief (HADR) भूमिका के अनुरूप भी है। क्वाड ने पहले भी HADR के लिए साझेदारी और मानक संचालन प्रक्रियाओं को विकसित करने पर जोर दिया है।

टोक्यो अभ्यास का व्यापक महत्व

सितंबर 2026 का टोक्यो टेबलटॉप अभ्यास क्वाड के सहयोग में एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक कदम है क्योंकि इसका ध्यान केवल नीतिगत चर्चा के बजाय वास्तविक आपदा-प्रतिक्रिया व्यवस्था को बेहतर बनाने पर था।

इस अभ्यास से चारों देशों को यह समझने में मदद मिली कि प्राकृतिक आपदा के दौरान उनकी लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को किस प्रकार एक साथ उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही SOPs की दिशा में हुई प्रगति IPLN को भविष्य में अधिक व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए संस्थागत आधार प्रदान करेगी।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

तथ्य जानकारी
समूह क्वाड (QUAD)
पूरा नाम Quadrilateral Security Dialogue
सदस्य देश भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका
हालिया TTX 3–4 सितंबर 2026
स्थान टोक्यो, जापान
मेजबान जापान का रक्षा मंत्रालय
अभ्यास का उद्देश्य IPLN को आगे बढ़ाना
IPLN का पूरा नाम Indo-Pacific Logistics Network
मुख्य फोकस प्राकृतिक आपदा प्रतिक्रिया
IPLN का उद्देश्य तेज एवं प्रभावी नागरिक आपदा प्रतिक्रिया
महत्वपूर्ण परिणाम IPLN के SOPs के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति
पहला IPLN TTX हवाई, अप्रैल 2025
IPLN FTX गुआम, दिसंबर 2025
पहली Quad Foreign Ministers’ Meeting सितंबर 2019, न्यूयॉर्क
पहला Quad Leaders’ Summit मार्च 2021, वर्चुअल
क्वाड की प्रारंभिक पृष्ठभूमि 2004 हिंद महासागर भूकंप एवं सुनामी
प्रमुख सहयोग क्षेत्र HADR, समुद्री सुरक्षा, जलवायु, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, तकनीक आदि

 

Leave a Reply