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GRSE ने नौसेना को पाँचवाँ पनडुब्बी रोधी उथले जलक्षेत्र का युद्धपोत ‘अमिनी’ सौंपा

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने 5 नवंबर को भारतीय नौसेना को आठ पनडुब्बी रोधी उथले जलक्षेत्र के युद्धपोतों (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft – ASW-SWC) में से पाँचवाँ युद्धपोत ‘अमिनी’ सौंप दिया।

‘अमिनी’ का नाम केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप के नाम पर रखा गया है।

यह युद्धपोत पूर्ववर्ती आईएनएस अमिनी का नया स्वरूप है। पुराना आईएनएस अमिनी पेट्या-III श्रेणी का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत था, जिसे वर्ष 2002 में नौसेना से सेवामुक्त कर दिया गया था। इस प्रकार भारतीय नौसेना की विशिष्ट नामों और गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने की परंपरा जारी है।

इस युद्धपोत को चेन्नई में भारतीय नौसेना को सौंपा गया। यह उन्नत युद्ध प्रबंधन प्रणाली, हल्के टॉरपीडो तथा पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से सुसज्जित है।

पनडुब्बी रोधी उथले जलक्षेत्र युद्धपोत (ASW-SWC) परियोजना

  • आठ ASW-SWC युद्धपोतों के निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय और कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) के बीच 29 अप्रैल, 2019 को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

  • इस परियोजना का पहला युद्धपोत ‘अर्नाला’ 20 दिसंबर, 2022 को जलावतरण किया गया था।

  • इसे 8 मई को एलएंडटी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली में भारतीय नौसेना को सौंपा गया था।

  • ‘अर्नाला’ का नाम महाराष्ट्र के वसई के तट के निकट स्थित ऐतिहासिक अर्नाला किले के नाम पर रखा गया है।

  • अर्नाला श्रेणी के युद्धपोत भारतीय नौसेना के वर्तमान अभय श्रेणी के पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों का स्थान लेंगे।

  • इन युद्धपोतों को तटीय जलक्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (LIMO) तथा समुद्र के भीतर निगरानी सहित बारूदी सुरंग बिछाने के अभियानों के लिए तैयार किया गया है।

  • इन युद्धपोतों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

    • लंबाई – 77.6 मीटर

    • विस्थापन क्षमता – 900 टन

    • अधिकतम गति – 25 नॉट

  • इन युद्धपोतों में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इससे भारतीय विनिर्माण इकाइयों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा देश में रोजगार के अवसरों और तकनीकी क्षमताओं का विकास होगा।

  • GRSE द्वारा निर्मित अन्य ASW-SWC युद्धपोतों के नाम हैं— अंड्रोथ, अंजदीप, अमिनी, अभय, अग्रय, अक्षय और अजय।

  • इनमें से अर्नाला, अंड्रोथ, अंजदीप और अग्रय को भारतीय नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

  • इन युद्धपोतों को पानी के भीतर निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान तथा कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (LIMO) के लिए तैयार किया गया है।

  • ये तटीय जलक्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियान चलाने के साथ-साथ उन्नत बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता भी रखते हैं।

  • ये युद्धपोत डीजल इंजन और वाटरजेट प्रणाली के संयोजन से संचालित होते हैं।

  • इनमें अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट तथा उन्नत उथले जलक्षेत्र का सोनार (SONAR – Sound Navigation and Ranging) लगाया गया है। इससे समुद्र के तटीय एवं उथले क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का प्रभावी ढंग से पता लगाने और उन्हें निशाना बनाने में सहायता मिलती है।

  • ASW-SWC युद्धपोतों को भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने से देश की उथले जलक्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

 
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