चर्चा में क्यों?
भारत ने 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के श्री विजयपुरम (Sri Vijaya Puram), जिसे पहले पोर्ट ब्लेयर के नाम से जाना जाता था, में प्रथम बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास (BIMSTEC Maritime Security Exercise) की मेजबानी की।
यह अभ्यास बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation – BIMSTEC) के सदस्य देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस अभ्यास में BIMSTEC के सभी सात सदस्य देशों—भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड—ने भाग लिया।
अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, आपसी समन्वय तथा संयुक्त परिचालन क्षमता को बढ़ावा देना था।
यह पहल छठे BIMSTEC शिखर सम्मेलन के विषय ‘BIMSTEC: Prosperous, Resilient and Open’ (समृद्ध, सशक्त और मुक्त बिम्सटेक) के अनुरूप है।
इसके माध्यम से BIMSTEC के सदस्य देशों ने ‘दृष्टिकोण को कार्यरूप में बदलना’ (Translating Vision to Action) की अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया।
प्रथम BIMSTEC समुद्री सुरक्षा अभ्यास 2026 की प्रमुख विशेषताएँ
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महत्वपूर्ण बिंदु |
विवरण |
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अभ्यास का नाम |
BIMSTEC Maritime Security Exercise |
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संस्करण |
प्रथम |
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मेजबान देश |
भारत |
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आयोजन स्थल |
श्री विजयपुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह |
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आयोजन अवधि |
30 अक्टूबर–3 नवंबर 2026 |
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सदस्य देशों की संख्या |
7 |
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भाग लेने वाले देश |
भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड |
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प्रमुख उद्देश्य |
समुद्री सुरक्षा एवं क्षेत्रीय सहयोग |
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संबंधित क्षेत्र |
बंगाल की खाड़ी |
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संबंधित सैन्य कमान |
अंडमान एवं निकोबार कमान (ANC) |
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संबंधित शिखर सम्मेलन |
छठा BIMSTEC शिखर सम्मेलन |
BIMSTEC समुद्री सुरक्षा अभ्यास का उद्देश्य
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच समुद्री सुरक्षा से संबंधित सहयोग को मजबूत करना तथा समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करना है।
अभ्यास के माध्यम से विभिन्न देशों की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य बलों को आपसी अनुभवों तथा कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करने का अवसर प्राप्त हुआ।
इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. अंतरसंचालनीयता (Interoperability) को बढ़ावा
विभिन्न देशों की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य बलों के बीच संयुक्त रूप से कार्य करने की क्षमता बढ़ाना।
2. समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को मजबूत करना
समुद्री क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों की पहचान, निगरानी और विश्लेषण की क्षमता में सुधार करना।
3. समन्वय तंत्र को बेहतर बनाना
समुद्री सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के दौरान सदस्य देशों के बीच सूचना साझा करने और संयुक्त कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत करना।
4. सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान
समुद्री सुरक्षा, निगरानी और परिचालन प्रबंधन के क्षेत्र में प्राप्त अनुभवों तथा प्रभावी प्रक्रियाओं को साझा करना।
5. क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा
बंगाल की खाड़ी में सुरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण के विकास के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना।
समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) क्या है?
समुद्री क्षेत्र जागरूकता का अर्थ समुद्री क्षेत्रों में होने वाली विभिन्न गतिविधियों के बारे में व्यापक और सटीक जानकारी प्राप्त करने की क्षमता से है।
इसमें जहाजों की आवाजाही, समुद्री व्यापार, सुरक्षा संबंधी गतिविधियों और संभावित खतरों की निगरानी शामिल होती है।
समुद्री क्षेत्र जागरूकता के माध्यम से तस्करी, अवैध मछली पकड़ने, समुद्री अपराध तथा अन्य सुरक्षा चुनौतियों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।
BIMSTEC समुद्री सुरक्षा अभ्यास का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच इस क्षमता को मजबूत करना भी है।
बंगाल की खाड़ी का सामरिक महत्व
बंगाल की खाड़ी हिंद महासागर के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है।
यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच भौगोलिक तथा आर्थिक संपर्क स्थापित करती है।
बंगाल की खाड़ी अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस क्षेत्र का महत्व निम्नलिखित कारणों से है:
1. अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार
बंगाल की खाड़ी दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों का हिस्सा है।
2. ऊर्जा सुरक्षा
इस क्षेत्र से होकर ऊर्जा संसाधनों और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का समुद्री परिवहन होता है।
3. क्षेत्रीय संपर्क
बंगाल की खाड़ी भारत और उसके पड़ोसी देशों को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
4. समुद्री संसाधन
यह क्षेत्र मत्स्य संसाधनों, समुद्री जैव विविधता और अन्य आर्थिक गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
5. समुद्री सुरक्षा
समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, आपदा प्रतिक्रिया और अवैध समुद्री गतिविधियों की रोकथाम के लिए क्षेत्रीय सहयोग आवश्यक है।
अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का रणनीतिक महत्व
भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री क्षेत्रों के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के संगम क्षेत्र के निकट स्थित है।
इसके अतिरिक्त यह मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) की ओर जाने वाले प्रमुख समुद्री मार्गों के निकट स्थित है।
इस कारण अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भारत की समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यहाँ प्रथम BIMSTEC समुद्री सुरक्षा अभ्यास का आयोजन इस क्षेत्र के सामरिक महत्व को रेखांकित करता है।
अंडमान एवं निकोबार कमान (Andaman and Nicobar Command – ANC) क्या है?
अंडमान एवं निकोबार कमान भारत की पहली एकीकृत त्रि-सेवा कमान (Integrated Tri-Service Command) है।
इसकी स्थापना 8 अक्टूबर 2001 को की गई थी।
इसका मुख्यालय श्री विजयपुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है।
इस कमान के अंतर्गत भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के संसाधनों और परिचालन क्षमताओं का एकीकृत उपयोग किया जाता है।
अंडमान एवं निकोबार कमान के प्रमुख कार्य:
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अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की सुरक्षा।
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समुद्री क्षेत्रों की निगरानी।
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भारत के सामरिक हितों की रक्षा।
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तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त परिचालन समन्वय।
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समुद्री सुरक्षा और आपदा राहत से संबंधित गतिविधियों में सहयोग।
प्रथम BIMSTEC समुद्री सुरक्षा अभ्यास ने इस कमान की क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर किया।
BIMSTEC क्या है?
बिम्सटेक (BIMSTEC) का पूरा नाम ‘बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल’ (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) है।
यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है।
इस संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक, सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
BIMSTEC बंगाल की खाड़ी के तटीय और निकटवर्ती देशों को एक साझा क्षेत्रीय मंच प्रदान करता है।
BIMSTEC की स्थापना कब हुई?
BIMSTEC की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा (Bangkok Declaration) के माध्यम से हुई थी।
प्रारंभ में इस संगठन में चार देश शामिल थे:
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बांग्लादेश
-
भारत
-
श्रीलंका
-
थाईलैंड
उस समय संगठन को BIST-EC (Bangladesh, India, Sri Lanka and Thailand Economic Cooperation) कहा जाता था।
बाद में नए देशों के शामिल होने के साथ संगठन का विस्तार हुआ।
BIMSTEC का ऐतिहासिक विकास
1. वर्ष 1997 – BIST-EC की स्थापना
6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से चार देशों—बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड—ने इस संगठन की स्थापना की।
2. दिसंबर 1997 – म्यांमार का प्रवेश
22 दिसंबर 1997 को बैंकॉक में आयोजित विशेष मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान म्यांमार संगठन में शामिल हुआ।
इसके बाद संगठन का नाम BIMST-EC कर दिया गया।
3. फरवरी 2004 – नेपाल और भूटान का प्रवेश
फरवरी 2004 में आयोजित छठी मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान नेपाल और भूटान संगठन में शामिल हुए।
इसके बाद संगठन की सदस्य संख्या बढ़कर सात हो गई।
संगठन का नाम बदलकर Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (BIMSTEC) कर दिया गया।
BIMSTEC के सदस्य देश
BIMSTEC में कुल सात सदस्य देश शामिल हैं।
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क्रमांक |
देश |
राजधानी |
|---|---|---|
|
1 |
भारत |
नई दिल्ली |
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2 |
बांग्लादेश |
ढाका |
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3 |
भूटान |
थिम्पू |
|
4 |
म्यांमार |
नेपीडॉ |
|
5 |
नेपाल |
काठमांडू |
|
6 |
श्रीलंका |
श्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे |
|
7 |
थाईलैंड |
बैंकॉक |
इनमें से पाँच देश दक्षिण एशिया और दो देश दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित हैं।
दक्षिण एशियाई सदस्य: भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और श्रीलंका।
दक्षिण-पूर्व एशियाई सदस्य: म्यांमार और थाईलैंड।
BIMSTEC का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
BIMSTEC का स्थायी सचिवालय (BIMSTEC Secretariat) बांग्लादेश की राजधानी ढाका (Dhaka) में स्थित है।
सचिवालय सदस्य देशों के बीच सहयोग, बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
BIMSTEC का आर्थिक और जनसांख्यिकीय महत्व
BIMSTEC क्षेत्र विश्व की एक बड़ी आबादी और महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रदान किए गए आँकड़ों के अनुसार:
-
कुल सदस्य देश – 7
-
क्षेत्रीय जनसंख्या – लगभग 1.8 अरब
-
विश्व की जनसंख्या में हिस्सा – लगभग 22 प्रतिशत
-
संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) – लगभग 4.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर
ये आँकड़े BIMSTEC को आर्थिक सहयोग, व्यापार और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं।
BIMSTEC के प्रमुख उद्देश्य
1. आर्थिक सहयोग को बढ़ावा
सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना।
2. क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करना
परिवहन, संचार और अन्य अवसंरचनात्मक संपर्कों का विकास करना।
3. ऊर्जा सहयोग
सदस्य देशों के बीच ऊर्जा संसाधनों और ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित सहयोग बढ़ाना।
4. तकनीकी सहयोग
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में ज्ञान तथा अनुभवों का आदान-प्रदान करना।
5. समुद्री और क्षेत्रीय सुरक्षा
समुद्री सुरक्षा, सीमापार अपराध और अन्य साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाना।
6. सतत विकास
पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों को प्रोत्साहित करना।
BIMSTEC के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
BIMSTEC की स्थापना के समय सहयोग के छह प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई थी:
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व्यापार
-
प्रौद्योगिकी
-
ऊर्जा
-
परिवहन
-
पर्यटन
-
मत्स्य पालन
बाद में सहयोग के क्षेत्रों का विस्तार करके इनकी संख्या 14 कर दी गई।
आगे चलकर संगठनात्मक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सहयोग के क्षेत्रों का पुनर्गठन किया गया।
वर्तमान व्यवस्था में सात व्यापक सहयोग क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिनमें व्यापार एवं निवेश, पर्यावरण, सुरक्षा, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, जन-संपर्क, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा संपर्क व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं।
छठा BIMSTEC शिखर सम्मेलन
छठा BIMSTEC शिखर सम्मेलन 4 अप्रैल 2025 को बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित किया गया था।
इस सम्मेलन की थीम थी:
‘BIMSTEC: Prosperous, Resilient and Open’
अर्थात ‘समृद्ध, सशक्त और मुक्त बिम्सटेक’।
इस सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और संगठन की संस्थागत कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
प्रथम BIMSTEC समुद्री सुरक्षा अभ्यास इसी सम्मेलन के परिणामों और सहयोग संबंधी प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक रूप प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
भारत के लिए BIMSTEC का महत्व
BIMSTEC भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सहयोग मंच है।
यह भारत को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ संबंध मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
1. पड़ोसी प्रथम नीति (Neighbourhood First Policy)
BIMSTEC भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक, सुरक्षा और विकासात्मक सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम प्रदान करता है।
2. एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy)
BIMSTEC दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है।
इससे भारत की एक्ट ईस्ट नीति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलती है।
3. समुद्री सुरक्षा सहयोग
बंगाल की खाड़ी में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए BIMSTEC महत्वपूर्ण है।
4. क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण
BIMSTEC के माध्यम से भारत व्यापार, निवेश, परिवहन और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा दे सकता है।
5. दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच संपर्क
BIMSTEC भारत को आसियान (ASEAN) देशों के साथ क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने में सहायता करता है।
BIMSTEC और SAARC में अंतर
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) और BIMSTEC दोनों क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने वाले संगठन हैं, लेकिन इनकी सदस्यता और भौगोलिक प्राथमिकताएँ अलग-अलग हैं।
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आधार |
BIMSTEC |
SAARC |
|---|---|---|
|
स्थापना |
1997 |
1985 |
|
सदस्य देश |
7 |
8 |
|
मुख्यालय |
ढाका |
काठमांडू |
|
प्रमुख क्षेत्र |
दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया |
दक्षिण एशिया |
|
भारत सदस्य है? |
हाँ |
हाँ |
|
पाकिस्तान सदस्य है? |
नहीं |
हाँ |
|
थाईलैंड सदस्य है? |
हाँ |
नहीं |
|
म्यांमार सदस्य है? |
हाँ |
नहीं |
SAARC की कई क्षेत्रीय पहलों में राजनीतिक मतभेदों और विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के कारण प्रगति सीमित रही है।
ऐसी परिस्थितियों में BIMSTEC भारत के लिए क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मंच बनकर उभरा है।
BIMSTEC समुद्री सुरक्षा अभ्यास का सामरिक महत्व
1. बंगाल की खाड़ी में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग
यह अभ्यास सदस्य देशों के बीच समुद्री सुरक्षा संबंधी समन्वय को बढ़ाता है।
2. संयुक्त परिचालन क्षमता में सुधार
अभ्यास से सदस्य देशों की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के बीच अंतरसंचालनीयता मजबूत होती है।
3. समुद्री गतिविधियों की निगरानी
समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ने से समुद्री गतिविधियों और संभावित सुरक्षा खतरों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।
4. भारत की सामरिक स्थिति को मजबूती
अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में अभ्यास का आयोजन हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति और सुरक्षा सहयोग को रेखांकित करता है।
5. सदस्य देशों के बीच विश्वास निर्माण
संयुक्त अभ्यास से सैन्य और समुद्री सुरक्षा संस्थाओं के बीच आपसी विश्वास तथा पेशेवर सहयोग बढ़ता है।
निष्कर्ष
भारत द्वारा श्री विजयपुरम में आयोजित प्रथम BIMSTEC समुद्री सुरक्षा अभ्यास बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस अभ्यास में BIMSTEC के सातों सदस्य देशों की भागीदारी ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और संयुक्त परिचालन क्षमता के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया।
यह आयोजन भारत की पड़ोसी प्रथम और एक्ट ईस्ट नीतियों के साथ-साथ अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सामरिक महत्व को भी उजागर करता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
|
महत्वपूर्ण बिंदु |
विवरण |
|---|---|
|
अभ्यास का नाम |
BIMSTEC Maritime Security Exercise |
|
अभ्यास का संस्करण |
प्रथम |
|
मेजबान |
भारत |
|
आयोजन अवधि |
30 अक्टूबर–3 नवंबर 2026 |
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आयोजन स्थल |
श्री विजयपुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह |
|
भाग लेने वाले देश |
BIMSTEC के सात सदस्य |
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संबंधित कमान |
अंडमान एवं निकोबार कमान |
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ANC की स्थापना |
8 अक्टूबर 2001 |
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BIMSTEC की स्थापना |
6 जून 1997 |
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संस्थापक घोषणा |
बैंकॉक घोषणा |
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प्रारंभिक नाम |
BIST-EC |
|
BIMSTEC के सदस्य |
7 |
|
मुख्यालय |
ढाका, बांग्लादेश |
|
म्यांमार का प्रवेश |
दिसंबर 1997 |
|
नेपाल और भूटान का प्रवेश |
फरवरी 2004 |
|
छठा BIMSTEC शिखर सम्मेलन |
अप्रैल 2025 |
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शिखर सम्मेलन का स्थान |
बैंकॉक, थाईलैंड |
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शिखर सम्मेलन की थीम |
Prosperous, Resilient and Open |
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भारत की संबंधित नीतियाँ |
Neighbourhood First और Act East |