Skip to content
🔔 Latest:

DRDO ने स्वदेशी ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया, 500 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम

चर्चा में क्यों?

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation – DRDO) ने 5 नवंबर 2026 को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी ‘प्रलय’ (Pralay) मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया।

प्रलय एक कम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल (Short-Range Surface-to-Surface Quasi-Ballistic Missile) है।

यह मिसाइल 150 से 500 किलोमीटर की दूरी तक स्थित लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।

इसकी पेलोड वहन क्षमता 500 से 1,000 किलोग्राम है और इसे विभिन्न प्रकार के पारंपरिक युद्धक शीर्षों (Conventional Warheads) के साथ उपयोग किया जा सकता है।

इस स्वदेशी मिसाइल को अत्याधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणालियों से सुसज्जित किया गया है, जिससे लक्ष्यों पर उच्च सटीकता के साथ प्रहार करने में सहायता मिलती है।

परीक्षण के दौरान निर्धारित सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

इसकी पुष्टि चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range – ITR) द्वारा तैनात विभिन्न उपकरणों से प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण के आधार पर की गई।

प्रलय मिसाइल (Pralay Missile) क्या है?

प्रलय भारत में स्वदेशी रूप से विकसित एक सामरिक अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल (Tactical Quasi-Ballistic Missile) है।

इसे विशेष रूप से कम दूरी पर स्थित सैन्य और रणनीतिक लक्ष्यों के विरुद्ध सटीक प्रहार करने के लिए विकसित किया गया है।

यह सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, अर्थात इसे भूमि आधारित प्रक्षेपण प्रणाली से छोड़ा जाता है और यह भूमि पर स्थित लक्ष्यों पर प्रहार करती है।

प्रलय मिसाइल ठोस प्रणोदक (Solid Propellant) आधारित प्रणाली का उपयोग करती है।

इसके अतिरिक्त इसमें आधुनिक मार्गदर्शन, नियंत्रण और नेविगेशन तकनीकों को शामिल किया गया है।

प्रलय मिसाइल की प्रमुख विशेषताएँ

महत्वपूर्ण बिंदु

विवरण

मिसाइल का नाम

प्रलय (Pralay)

मिसाइल का प्रकार

अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल

श्रेणी

कम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल

मारक क्षमता

150–500 किलोमीटर

पेलोड क्षमता

500–1,000 किलोग्राम

प्रणोदन प्रणाली

ठोस प्रणोदक

युद्धक शीर्ष

पारंपरिक युद्धक शीर्ष

विकासकर्ता

DRDO

प्रमुख विकास प्रयोगशाला

रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद

विकास-सह-उत्पादन भागीदार

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड

परीक्षण स्थल

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा

परीक्षण की तिथि

5 नवंबर 2026

परीक्षण परिणाम

सफल

अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल (Quasi-Ballistic Missile) क्या होती है?

अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल ऐसी मिसाइल होती है, जिसकी उड़ान में बैलिस्टिक मिसाइलों की कुछ विशेषताएँ होती हैं, लेकिन वह पूरी तरह पारंपरिक बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र का अनुसरण नहीं करती।

सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण के बाद एक अनुमानित वक्राकार मार्ग पर उड़ान भरती है।

इसके विपरीत, अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल का उड़ान मार्ग अपेक्षाकृत कम ऊँचाई वाला हो सकता है और इसमें उड़ान के दौरान दिशा परिवर्तन करने की क्षमता हो सकती है।

इस प्रकार की उड़ान क्षमता से मिसाइल को पहचानना, उसके मार्ग का अनुमान लगाना और उसे रोकना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

प्रलय मिसाइल की अर्ध-बैलिस्टिक विशेषताएँ इसकी सामरिक उपयोगिता को बढ़ाती हैं।

प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता

प्रलय मिसाइल की निर्धारित मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर है।

इसका अर्थ है कि यह अपने प्रक्षेपण स्थल से इस दूरी के भीतर स्थित लक्ष्यों पर प्रहार करने के लिए विकसित की गई है।

मिसाइल की वास्तविक परिचालन क्षमता पेलोड, उड़ान परिस्थितियों और अन्य तकनीकी कारकों से प्रभावित हो सकती है।

प्रलय मिसाइल की पेलोड क्षमता

प्रलय मिसाइल 500 से 1,000 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है।

पेलोड का अर्थ वह भार है, जिसे मिसाइल अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए वहन करती है।

इसमें युद्धक शीर्ष तथा उससे संबंधित उपकरण शामिल हो सकते हैं।

प्रलय को विभिन्न प्रकार के पारंपरिक युद्धक शीर्षों के साथ उपयोग करने के लिए विकसित किया गया है।

ठोस प्रणोदक (Solid Propellant) क्या होता है?

ठोस प्रणोदक एक ऐसी सामग्री होती है, जिसका उपयोग रॉकेट या मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक बल उत्पन्न करने में किया जाता है।

ठोस प्रणोदक आधारित प्रणालियों में ईंधन और ऑक्सीकारक ठोस रूप में मौजूद होते हैं।

इनका उपयोग विभिन्न सैन्य मिसाइलों तथा रॉकेट प्रणालियों में किया जाता है।

ठोस प्रणोदक के प्रमुख लाभ:

  • लंबे समय तक भंडारण की सुविधा।

  • अपेक्षाकृत सरल रखरखाव।

  • परिचालन तत्परता बढ़ाने में सहायता।

  • कुछ तरल प्रणोदक प्रणालियों की तुलना में प्रक्षेपण संबंधी तैयारियों की कम आवश्यकता।

प्रलय मिसाइल में ठोस प्रणोदक का उपयोग इसकी सामरिक परिचालन क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रलय मिसाइल में आधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणाली

प्रलय मिसाइल को उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य भेदने के लिए आधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन तकनीकों से सुसज्जित किया गया है।

मार्गदर्शन प्रणाली (Guidance System) मिसाइल को निर्धारित लक्ष्य तक पहुँचने के लिए आवश्यक उड़ान निर्देश प्रदान करती है।

नेविगेशन प्रणाली (Navigation System) मिसाइल की स्थिति, दिशा और गति का आकलन करने में सहायता करती है।

इन प्रणालियों का संयुक्त उपयोग लक्ष्य पर सटीक प्रहार करने की क्षमता को बेहतर बनाता है।

प्रलय मिसाइल का विकास किसने किया?

प्रलय मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है।

इसके विकास में रिसर्च सेंटर इमारत (Research Centre Imarat – RCI), हैदराबाद की प्रमुख भूमिका रही है।

RCI ने DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से इस मिसाइल प्रणाली का विकास किया है।

इस परियोजना में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (Bharat Dynamics Limited – BDL) भी विकास-सह-उत्पादन भागीदार के रूप में शामिल है।

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) क्या है?

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एक सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी है।

इसकी स्थापना वर्ष 1970 में की गई थी।

इसका मुख्यालय हैदराबाद, तेलंगाना में स्थित है।

यह कंपनी विभिन्न प्रकार की निर्देशित मिसाइलों, मिसाइल प्रणालियों और रक्षा उपकरणों के उत्पादन से संबंधित कार्य करती है।

प्रलय मिसाइल के विकास और उत्पादन में भी BDL की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप कहाँ स्थित है?

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप ओडिशा के तट से दूर बंगाल की खाड़ी में स्थित है।

इसे पहले व्हीलर द्वीप (Wheeler Island) के नाम से जाना जाता था।

इसका नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सम्मान में रखा गया।

यह द्वीप भारत के प्रमुख मिसाइल परीक्षण स्थलों में से एक है।

यहाँ से भारत की अनेक स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के परीक्षण किए जाते हैं।

एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range – ITR), चांदीपुर

एकीकृत परीक्षण रेंज ओडिशा के चांदीपुर में स्थित DRDO की एक प्रमुख परीक्षण सुविधा है।

यह विभिन्न मिसाइलों, रॉकेट प्रणालियों और अन्य रक्षा प्रौद्योगिकियों के परीक्षण एवं मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस परीक्षण रेंज में रडार, टेलीमेट्री और अन्य उपकरणों की सहायता से मिसाइलों की उड़ान तथा प्रदर्शन से संबंधित आँकड़े एकत्र किए जाते हैं।

5 नवंबर 2026 को प्रलय मिसाइल के उड़ान परीक्षण के दौरान भी ITR के उपकरणों द्वारा प्राप्त आँकड़ों के आधार पर सभी निर्धारित परीक्षण उद्देश्यों की सफलता की पुष्टि की गई।

प्रलय मिसाइल के परीक्षण का महत्व

1. स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा

प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी मिसाइल विकास क्षमता को मजबूत करता है।

2. सामरिक सैन्य क्षमता में वृद्धि

यह मिसाइल कम दूरी पर स्थित विभिन्न सैन्य लक्ष्यों के विरुद्ध पारंपरिक युद्धक क्षमता को बढ़ाने के लिए विकसित की गई है।

3. उच्च सटीकता वाली मिसाइल प्रणाली

आधुनिक मार्गदर्शन और नेविगेशन तकनीकों के कारण प्रलय मिसाइल की सटीक प्रहार क्षमता महत्वपूर्ण है।

4. सैन्य परिचालन तैयारियों को मजबूती

इस प्रकार की मिसाइल प्रणालियाँ विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों के लिए सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को मजबूत कर सकती हैं।

5. आत्मनिर्भर भारत अभियान को प्रोत्साहन

प्रलय मिसाइल का स्वदेशी विकास और उत्पादन रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई

प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, सशस्त्र बलों और रक्षा उद्योग से जुड़े भागीदारों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि उन्नत तकनीकों से सुसज्जित यह मिसाइल उभरते खतरों से निपटने में भारतीय सेना की तकनीकी क्षमताओं और परिचालन तैयारियों को मजबूत करेगी।

यह परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों (User Evaluation Trials) के अंतर्गत किया गया था।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण की सफलता के बाद इस मिसाइल प्रणाली को सशस्त्र बलों में शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण के करीब पहुँच गई है।

 

निष्कर्ष

DRDO द्वारा 5 नवंबर 2026 को स्वदेशी प्रलय मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

150 से 500 किलोमीटर की मारक क्षमता और 500 से 1,000 किलोग्राम पेलोड वहन करने की क्षमता वाली यह मिसाइल आधुनिक मार्गदर्शन एवं नेविगेशन प्रणालियों से सुसज्जित है।

इसका सफल परीक्षण भारत की सामरिक सैन्य क्षमता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

महत्वपूर्ण बिंदु

विवरण

मिसाइल का नाम

प्रलय (Pralay)

परीक्षण तिथि

5 नवंबर 2026

परीक्षण करने वाली संस्था

DRDO

परीक्षण स्थल

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा

मिसाइल का प्रकार

अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल

मिसाइल की श्रेणी

सतह से सतह

मारक क्षमता

150–500 किमी

पेलोड क्षमता

500–1,000 किलोग्राम

प्रणोदक

ठोस प्रणोदक

युद्धक शीर्ष

पारंपरिक

प्रमुख विकास प्रयोगशाला

रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद

उत्पादन भागीदार

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड

परीक्षण का मूल्यांकन

एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर

परीक्षण का परिणाम

सभी निर्धारित उद्देश्य सफल

संबंधित मंत्रालय

रक्षा मंत्रालय

 
error: