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मंगल ग्रह पर ज्वालामुखीय गतिविधियों के नए संकेत मिले: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के ExoMars ऑर्बिटर की महत्वपूर्ण खोज

चर्चा में क्यों?

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency – ESA) के एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर (ExoMars Trace Gas Orbiter – TGO) ने मंगल ग्रह (Mars) पर हालिया अथवा संभावित रूप से वर्तमान ज्वालामुखीय गतिविधियों के महत्वपूर्ण संकेत खोजे हैं।

मंगल के वायुमंडल में हाइड्रोजन क्लोराइड (Hydrogen Chloride – HCl) गैस के उत्सर्जन का पता चला है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह गैस मंगल की सतह के नीचे मौजूद गर्म मैग्मा (Magma) से संबंधित हो सकती है।

विशेष रूप से मंगल के अल्बा मॉन्स (Alba Mons) ज्वालामुखीय क्षेत्र में मौजूद दरारों के ऊपर इस गैस की असामान्य मात्रा दर्ज की गई है।

यह खोज संकेत देती है कि मंगल ग्रह भूगर्भीय दृष्टि से पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुआ है, बल्कि इसके आंतरिक भागों में ज्वालामुखीय प्रक्रियाएँ अब भी जारी हो सकती हैं।

इस अध्ययन के निष्कर्ष 4 नवंबर 2026 को वैज्ञानिक पत्रिका Science Advances में प्रकाशित हुए।

हालाँकि वैज्ञानिकों ने मंगल पर किसी सक्रिय ज्वालामुखी विस्फोट या नए लावा प्रवाह का प्रत्यक्ष प्रमाण अभी तक नहीं पाया है।

 

University of Oxford Department of Physics+1

मंगल ग्रह पर ज्वालामुखीय गतिविधि के नए प्रमाण

मंगल ग्रह पर प्राचीन ज्वालामुखियों और विशाल लावा मैदानों की उपस्थिति लंबे समय से ज्ञात है।

लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि मंगल की आंतरिक ज्वालामुखीय गतिविधियाँ पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं या नहीं।

हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने मंगल के वायुमंडल और सतह की भूगर्भीय संरचनाओं का संयुक्त अध्ययन किया।

इस अध्ययन में दो महत्वपूर्ण प्रमाण मिले:

1. हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का उत्सर्जन

मंगल के अल्बा मॉन्स क्षेत्र के ऊपर वायुमंडल में हाइड्रोजन क्लोराइड गैस की असामान्य सांद्रता दर्ज की गई।

2. सतह पर नई दिखाई देने वाली दरारें

उपग्रह से प्राप्त चित्रों में अल्बा मॉन्स ज्वालामुखी के आसपास संकरी दरारें दिखाई दीं।

कुछ दरारें सैकड़ों मीटर लंबी हैं और इनके आसपास सतह के रंग में परिवर्तन भी देखा गया है।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इन दरारों के माध्यम से ग्रह के आंतरिक भागों से गैसें सतह तक पहुँच रही हो सकती हैं।

हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) गैस क्या है?

हाइड्रोजन क्लोराइड एक रासायनिक यौगिक है, जिसका रासायनिक सूत्र HCl है।

यह हाइड्रोजन और क्लोरीन से मिलकर बना होता है।

पृथ्वी पर यह गैस ज्वालामुखीय क्षेत्रों में मैग्मा से निकलने वाली गैसों के साथ पाई जा सकती है।

जब गर्म मैग्मा पृथ्वी की सतह के निकट आता है, तो उसमें घुली विभिन्न गैसें बाहर निकल सकती हैं।

इसी कारण वैज्ञानिकों ने मंगल के वायुमंडल में हाइड्रोजन क्लोराइड की उपस्थिति को संभावित ज्वालामुखीय गतिविधियों से जोड़कर देखा है।

हालाँकि HCl की उपस्थिति अपने आप में सक्रिय ज्वालामुखी का निर्णायक प्रमाण नहीं है। इसका संबंध अन्य रासायनिक प्रक्रियाओं से भी हो सकता है।

मंगल के वायुमंडल में पहली बार HCl गैस कब मिली?

ExoMars Trace Gas Orbiter ने वर्ष 2021 में पहली बार मंगल के वायुमंडल में हाइड्रोजन क्लोराइड गैस की उपस्थिति की जानकारी दी थी।

उस समय वैज्ञानिक यह निर्धारित नहीं कर सके थे कि गैस का स्रोत ज्वालामुखीय गतिविधि है या मंगल के वायुमंडल में होने वाली अन्य रासायनिक प्रक्रियाएँ।

बाद में किए गए विस्तृत अवलोकनों में गैस की सांद्रता, मौसमी परिवर्तन और भौगोलिक वितरण का अध्ययन किया गया।

इन अध्ययनों से अल्बा मॉन्स क्षेत्र में HCl के असामान्य मौसमी उत्सर्जन के संकेत प्राप्त हुए।

मंगल पर HCl गैस में मौसमी परिवर्तन

सामान्यतः मंगल के वायुमंडल में हाइड्रोजन क्लोराइड गैस की मात्रा मौसम के अनुसार बदलती रहती है।

मंगल के उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों के दौरान इसकी सांद्रता अधिक हो सकती है।

इसके विपरीत, गर्मियों के दौरान इसकी मात्रा सामान्यतः काफी कम हो जाती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, HCl की इस मौसमी परिवर्तनशीलता का संबंध मुख्य रूप से मंगल के धूल चक्र (Dust Cycle) और जल चक्र (Water Cycle) से है।

लेकिन अल्बा मॉन्स क्षेत्र में एक असामान्य स्थिति देखी गई।

यहाँ उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों की शुरुआत में भी HCl गैस की सांद्रता में वृद्धि दर्ज की गई।

विशेष बात यह थी कि यह वृद्धि बार-बार एक ही भौगोलिक क्षेत्र में देखी गई।

इससे वैज्ञानिकों को संदेह हुआ कि गैस का स्रोत स्थानीय भूगर्भीय गतिविधि हो सकता है।

अल्बा मॉन्स (Alba Mons) क्या है?

अल्बा मॉन्स मंगल ग्रह पर स्थित एक विशाल ज्वालामुखीय संरचना है।

यह मंगल के उत्तरी थार्सिस (Tharsis) क्षेत्र में स्थित है।

अल्बा मॉन्स को उसके अत्यधिक विस्तृत क्षेत्रफल के कारण मंगल के सबसे बड़े ज्वालामुखीय संरचनाओं में गिना जाता है।

इसकी ढाल अपेक्षाकृत कम है और यह एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है।

यह एक प्रकार का शील्ड ज्वालामुखी (Shield Volcano) है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • मंगल ग्रह के थार्सिस क्षेत्र में स्थित है।

  • अत्यधिक विस्तृत ज्वालामुखीय संरचना है।

  • इसकी ढाल अपेक्षाकृत कम है।

  • इसके आसपास अनेक भूगर्भीय दरारें और प्राचीन लावा प्रवाह के प्रमाण मिलते हैं।

  • हालिया अध्ययन में इसी क्षेत्र के ऊपर HCl गैस का असामान्य उत्सर्जन दर्ज किया गया।

मंगल ग्रह के प्रमुख ज्वालामुखी

मंगल ग्रह पर सौरमंडल के कुछ सबसे विशाल ज्वालामुखी पाए जाते हैं।

इनमें प्रमुख हैं:

  • ओलंपस मॉन्स (Olympus Mons)

  • अल्बा मॉन्स (Alba Mons)

  • आर्सिया मॉन्स (Arsia Mons)

  • पैवोनिस मॉन्स (Pavonis Mons)

  • एस्क्रियस मॉन्स (Ascraeus Mons)

ओलंपस मॉन्स (Olympus Mons) सौरमंडल का सबसे ऊँचा ज्ञात ज्वालामुखी है।

यह मंगल ग्रह पर स्थित है और इसकी ऊँचाई आसपास के मैदानी क्षेत्रों से लगभग 22 किलोमीटर तक पहुँचती है।

मंगल की सतह के नीचे मैग्मा की संभावित उपस्थिति

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अल्बा मॉन्स क्षेत्र में पाए गए हाइड्रोजन क्लोराइड उत्सर्जन का संबंध मंगल की सतह के नीचे मौजूद एक सुप्त मैग्मा कक्ष (Dormant Magma Chamber) से हो सकता है।

मैग्मा पृथ्वी या अन्य चट्टानी ग्रहों के आंतरिक भागों में मौजूद पिघली हुई अथवा आंशिक रूप से पिघली चट्टानी सामग्री को कहा जाता है।

यदि मंगल की सतह के नीचे मैग्मा मौजूद है, तो इससे संकेत मिलता है कि ग्रह के आंतरिक भागों में अभी भी पर्याप्त गर्मी बची हो सकती है।

यह गर्मी भूगर्भीय गतिविधियों को बनाए रखने में सहायक हो सकती है।

मंगल की दरारों से गैस बाहर कैसे निकल सकती है?

वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को समझाने के लिए एक संभावित परिकल्पना प्रस्तुत की है।

  1. मंगल की सतह के नीचे मौजूद गर्म मैग्मा से गैसें निकलती हैं।

  2. ये गैसें चट्टानों में मौजूद दरारों के माध्यम से ऊपर की ओर बढ़ती हैं।

  3. सर्दियों में अत्यधिक कम तापमान के कारण दरारों में बर्फ जम सकती है।

  4. बर्फ गैसों के बाहर निकलने के मार्ग को अस्थायी रूप से अवरुद्ध कर सकती है।

  5. गर्मियों की शुरुआत में बर्फ के ऊर्ध्वपातन (Sublimation) से दरारें पुनः खुल सकती हैं।

  6. इसके बाद संचित गैसें मंगल के वायुमंडल में निकल सकती हैं।

यह प्रक्रिया मंगल पर HCl गैस के असामान्य मौसमी उत्सर्जन को समझाने में सहायता कर सकती है।

महत्वपूर्ण: यह वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत संभावित व्याख्या है। मंगल पर सक्रिय मैग्मा कक्ष की उपस्थिति अभी प्रत्यक्ष रूप से प्रमाणित नहीं हुई है।

ऊर्ध्वपातन (Sublimation) क्या है?

ऊर्ध्वपातन वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई ठोस पदार्थ तरल अवस्था में आए बिना सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाता है।

मंगल ग्रह पर अत्यधिक कम वायुमंडलीय दबाव और तापमान की परिस्थितियों में बर्फ के ऊर्ध्वपातन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, अल्बा मॉन्स की दरारों में जमा बर्फ का ऊर्ध्वपातन गैसों के उत्सर्जन को प्रभावित कर सकता है।

मंगल पर ज्वालामुखीय गतिविधि के अन्य प्रमाण

नई खोज से पहले भी वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर अपेक्षाकृत हालिया भूगर्भीय गतिविधियों के संकेत मिल चुके हैं।

1. अपेक्षाकृत युवा लावा प्रवाह

मंगल की कक्षीय तस्वीरों में कुछ ऐसे ज्वालामुखीय भू-आकृतिक प्रमाण मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि ग्रह पर पिछले कुछ मिलियन वर्षों के दौरान ज्वालामुखीय गतिविधियाँ हुई हो सकती हैं।

2. मंगल ग्रह पर भूकंप

मंगल पर भेजे गए भूकंपीय उपकरणों ने मंगलकंप (Marsquakes) दर्ज किए हैं।

ये पृथ्वी पर आने वाले भूकंपों के समान ग्रह की आंतरिक गतिविधियों से संबंधित कंपन हैं।

3. भूगर्भीय दरारें

मंगल की सतह पर मौजूद अनेक दरारें उसके भूगर्भीय इतिहास और आंतरिक तनावों के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

4. वायुमंडल में गैसों का उत्सर्जन

अल्बा मॉन्स क्षेत्र में HCl गैस का स्थानीय उत्सर्जन संभावित आंतरिक ज्वालामुखीय गतिविधि का एक नया संकेत है।

मंगल ग्रह पर सक्रिय ज्वालामुखी क्यों नहीं देखे गए?

मंगल पर विशाल ज्वालामुखियों और प्राचीन लावा प्रवाहों की उपस्थिति के बावजूद अभी तक किसी नए ज्वालामुखीय विस्फोट या ताजा लावा प्रवाह को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा गया है।

इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि मंगल के ज्वालामुखी वर्तमान समय में सक्रिय हैं।

हालिया शोध ने इस संभावना को मजबूत किया है कि मंगल के कुछ क्षेत्रों में सतह के नीचे भूगर्भीय गर्मी और मैग्मा से संबंधित प्रक्रियाएँ जारी हो सकती हैं।

मंगल पर जीवन की खोज के लिए इस खोज का महत्व

मंगल पर संभावित ज्वालामुखीय गतिविधियों के संकेत केवल भूविज्ञान के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि इनका संबंध ग्रह पर जीवन की संभावनाओं से भी है।

यदि मंगल की सतह के नीचे गर्म मैग्मा मौजूद है और उसका संपर्क भूमिगत जल या बर्फ से होता है, तो वहाँ गर्म जल से संबंधित वातावरण विकसित हो सकता है।

ऐसे वातावरण को जलतापीय प्रणाली (Hydrothermal System) कहा जाता है।

पृथ्वी पर अनेक सूक्ष्मजीव अत्यधिक गर्म और रासायनिक रूप से सक्रिय जलतापीय वातावरण में जीवित रहते हैं।

इसलिए मंगल पर ऐसी संभावित प्रणालियाँ सूक्ष्मजीवी जीवन की खोज के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

हालाँकि वैज्ञानिकों ने मंगल पर जीवन की उपस्थिति की पुष्टि नहीं की है।

जलतापीय प्रणाली (Hydrothermal System) क्या है?

जलतापीय प्रणाली वह प्राकृतिक व्यवस्था है, जिसमें भूमिगत जल भूगर्भीय गर्मी के संपर्क में आकर गर्म होता है।

ऐसी प्रणालियों में विभिन्न खनिज और रासायनिक पदार्थ भी उपस्थित हो सकते हैं।

पृथ्वी पर जलतापीय क्षेत्रों में ऐसे सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं, जो सूर्य के प्रकाश के बजाय रासायनिक ऊर्जा का उपयोग करते हैं।

यदि मंगल पर सक्रिय जलतापीय प्रणालियाँ मौजूद हैं, तो वे संभावित सूक्ष्मजीवी जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान कर सकती हैं।

एक्सोमार्स कार्यक्रम (ExoMars Programme) क्या है?

एक्सोमार्स (ExoMars) यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का एक महत्वपूर्ण मंगल अन्वेषण कार्यक्रम है।

इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य मंगल ग्रह के वायुमंडल, सतह और उपसतह का अध्ययन करना तथा यह पता लगाना है कि क्या मंगल पर कभी जीवन मौजूद था।

ExoMars नाम ‘Exobiology’ शब्द से लिया गया है।

एक्सोबायोलॉजी (Exobiology) का अर्थ पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावनाओं और उससे संबंधित जैविक प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है।

एक्सोमार्स कार्यक्रम में दो प्रमुख मिशन शामिल हैं।

1. एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर (Trace Gas Orbiter – TGO)

ट्रेस गैस ऑर्बिटर को 14 मार्च 2016 को लॉन्च किया गया था।

यह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) की साझेदारी में विकसित किया गया मिशन था।

इसका प्रमुख उद्देश्य मंगल के वायुमंडल में अत्यंत कम मात्रा में मौजूद गैसों का अध्ययन करना है।

इन गैसों में मीथेन (Methane), हाइड्रोजन क्लोराइड तथा अन्य ट्रेस गैसें शामिल हैं।

TGO के प्रमुख उद्देश्य:

  • मंगल के वायुमंडल की रासायनिक संरचना का अध्ययन।

  • मीथेन और अन्य ट्रेस गैसों का पता लगाना।

  • गैसों के संभावित जैविक या भूगर्भीय स्रोतों की पहचान करना।

  • मंगल की सतह और भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन।

  • भविष्य के मंगल अभियानों के लिए वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना।

ट्रेस गैस (Trace Gas) क्या होती है?

ट्रेस गैस वह गैस होती है, जो किसी ग्रह के वायुमंडल में अत्यंत कम मात्रा में मौजूद होती है।

मंगल के वायुमंडल में कुछ ट्रेस गैसों की उपस्थिति ग्रह की रासायनिक, भूगर्भीय और संभावित जैविक प्रक्रियाओं के संबंध में महत्वपूर्ण संकेत प्रदान कर सकती है।

उदाहरण के लिए, मीथेन गैस विभिन्न जैविक तथा भूगर्भीय प्रक्रियाओं से उत्पन्न हो सकती है।

इसलिए वैज्ञानिक मंगल के वायुमंडल में ऐसी गैसों की उत्पत्ति और परिवर्तनशीलता का अध्ययन करते हैं।

2. रोजालिंड फ्रैंकलिन रोवर मिशन (Rosalind Franklin Rover Mission)

एक्सोमार्स कार्यक्रम का दूसरा प्रमुख मिशन रोजालिंड फ्रैंकलिन रोवर है।

इस मिशन को वर्ष 2028 में लॉन्च करने की योजना है।

इसका मुख्य उद्देश्य मंगल की सतह और सतह के नीचे मौजूद पदार्थों का अध्ययन करके प्राचीन अथवा वर्तमान जीवन के संभावित संकेतों की खोज करना है।

रोवर को मंगल की सतह के नीचे लगभग 2 मीटर तक ड्रिलिंग करने की क्षमता के साथ विकसित किया गया है।

इससे ऐसी मिट्टी और चट्टानों के नमूने प्राप्त किए जा सकेंगे, जो सतह की कठोर विकिरण परिस्थितियों से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे हों।

रोवर के मंगल पर वर्ष 2030 में पहुँचने की योजना है।

रोजालिंड फ्रैंकलिन कौन थीं?

रोजालिंड फ्रैंकलिन (Rosalind Franklin) ब्रिटेन की प्रसिद्ध वैज्ञानिक थीं।

उन्होंने एक्स-रे विवर्तन तकनीक की सहायता से DNA की संरचना को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

उनके वैज्ञानिक योगदान के सम्मान में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अपने मंगल रोवर का नाम रोजालिंड फ्रैंकलिन रखा है।

NASA के मंगल रोवरों के लिए TGO की भूमिका

ExoMars Trace Gas Orbiter केवल मंगल के वायुमंडल का अध्ययन ही नहीं करता, बल्कि संचार संबंधी महत्वपूर्ण कार्य भी करता है।

यह NASA के मंगल रोवरों और पृथ्वी के बीच वैज्ञानिक डेटा संचारित करने में सहायता करता है।

विशेष रूप से यह निम्नलिखित रोवरों के लिए डेटा रिले का कार्य करता है:

  • क्यूरियोसिटी रोवर (Curiosity Rover)

  • पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover)

इसके लिए TGO में इलेक्ट्रा रेडियो प्रणाली (Electra Radio System) का उपयोग किया जाता है।

इस प्रकार यह ऑर्बिटर मंगल के वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मंगल पर ज्वालामुखीय गतिविधियों की खोज का वैज्ञानिक महत्व

1. मंगल की आंतरिक संरचना को समझना

यह खोज मंगल के आंतरिक भागों में शेष बची गर्मी और संभावित मैग्मा गतिविधियों को समझने में सहायता कर सकती है।

2. मंगल के भूगर्भीय इतिहास का अध्ययन

इससे यह समझने में सहायता मिल सकती है कि मंगल पर ज्वालामुखीय गतिविधियाँ कब तक जारी रहीं और क्या वे वर्तमान में भी किसी रूप में मौजूद हैं।

3. जीवन की संभावनाओं का अध्ययन

भूमिगत गर्मी और जल की संभावित उपस्थिति भविष्य में सूक्ष्मजीवी जीवन की खोज के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

4. भविष्य के मंगल अभियानों की योजना

अल्बा मॉन्स जैसे क्षेत्रों को भविष्य के वैज्ञानिक अभियानों के लिए संभावित अध्ययन स्थलों के रूप में देखा जा सकता है।

5. ग्रहों के विकास की बेहतर समझ

मंगल की ज्वालामुखीय गतिविधियों का अध्ययन पृथ्वी सहित अन्य चट्टानी ग्रहों के विकास को समझने में भी सहायक हो सकता है।

निष्कर्ष

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के ExoMars Trace Gas Orbiter द्वारा मंगल ग्रह के अल्बा मॉन्स क्षेत्र में हाइड्रोजन क्लोराइड गैस के असामान्य उत्सर्जन की खोज ग्रह के भूगर्भीय इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह खोज संकेत देती है कि मंगल ग्रह के आंतरिक भागों में अभी भी पर्याप्त गर्मी मौजूद हो सकती है, जो संभावित ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं को बनाए रखने में सक्षम हो।

इसके अतिरिक्त, यदि मंगल की सतह के नीचे जलतापीय प्रणालियाँ मौजूद हैं, तो वे सूक्ष्मजीवी जीवन की खोज के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन स्थल हो सकती हैं।

हालाँकि मंगल पर सक्रिय ज्वालामुखीय विस्फोट, ताजा लावा प्रवाह या जीवन की उपस्थिति का प्रत्यक्ष प्रमाण अभी प्राप्त नहीं हुआ है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

महत्वपूर्ण बिंदु

विवरण

प्रमुख खोज

मंगल पर संभावित ज्वालामुखीय गतिविधि के संकेत

संबंधित ग्रह

मंगल (Mars)

खोज करने वाला अंतरिक्ष यान

ExoMars Trace Gas Orbiter

अंतरिक्ष एजेंसी

ESA

खोजी गई गैस

हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl)

संबंधित क्षेत्र

अल्बा मॉन्स (Alba Mons)

अध्ययन का प्रकाशन

4 नवंबर 2026

वैज्ञानिक पत्रिका

Science Advances

HCl की पहली पहचान

2021

संभावित गैस स्रोत

सतह के नीचे गर्म मैग्मा

मंगल का सबसे ऊँचा ज्ञात ज्वालामुखी

ओलंपस मॉन्स

एक्सोमार्स कार्यक्रम का उद्देश्य

मंगल पर जीवन के संभावित संकेतों की खोज

TGO का प्रक्षेपण

14 मार्च 2016

ExoMars के साझेदार (TGO)

ESA और Roscosmos

दूसरा प्रमुख मिशन

Rosalind Franklin Rover

रोवर का प्रस्तावित प्रक्षेपण

2028

प्रस्तावित मंगल आगमन

2030

रोवर की ड्रिलिंग क्षमता

लगभग 2 मीटर

TGO से डेटा रिले प्राप्त करने वाले रोवर

Curiosity और Perseverance

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