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BIMSTEC के आतंकवाद-रोधी सहयोग पर 11वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित

Summits & Conferences 📅 October 11, 2026
भारत ने 28 और 29 सितंबर को नई दिल्ली में बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC) के आतंकवाद-रोधी एवं अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध संबंधी संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter-Terrorism and Transnational Crime — JWG-CTTC) की 11वीं बैठक की मेजबानी की।

इस बैठक में BIMSTEC के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। बैठक का प्रमुख उद्देश्य बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में पारंपरिक और उभरती हुई गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना तथा सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था।

इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी क्षेत्र दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला एक महत्त्वपूर्ण भौगोलिक एवं सामरिक क्षेत्र है। यहाँ समुद्री व्यापार, ऊर्जा परिवहन, संपर्क मार्ग और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियाँ बड़ी भूमिका निभाते हैं। आतंकवाद, सीमा-पार अपराध और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ इस क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।

BIMSTEC क्या है?

BIMSTEC का पूरा नाम Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation है। हिंदी में इसे ‘बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल’ कहा जाता है।

यह बंगाल की खाड़ी के तटीय तथा उससे लगे क्षेत्रों में स्थित सात देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी, सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।

BIMSTEC के सात सदस्य देश हैं:

  1. भारत

  2. बांग्लादेश

  3. म्यांमार

  4. श्रीलंका

  5. थाईलैंड

  6. भूटान

  7. नेपाल

इनमें पाँच देश दक्षिण एशिया से संबंधित हैं—भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और श्रीलंका। वहीं, दो देश दक्षिण-पूर्व एशिया से हैं—म्यांमार और थाईलैंड।

इस प्रकार BIMSTEC दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार और सहयोग का एक महत्त्वपूर्ण मंच है।

BIMSTEC की स्थापना और ऐतिहासिक विकास

BIMSTEC की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा (Bangkok Declaration) के माध्यम से हुई थी। हालांकि, इसकी शुरुआत चार देशों के आर्थिक सहयोग समूह के रूप में हुई थी।

इसके विकास के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:

  • 6 जून 1997: बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड ने मिलकर BIST-EC नामक समूह की स्थापना की। इसका पूरा नाम Bangladesh, India, Sri Lanka and Thailand Economic Cooperation था।

  • 22 दिसंबर 1997: बैंकॉक में आयोजित विशेष मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान म्यांमार इस समूह में शामिल हुआ। इसके बाद समूह का नाम BIMST-EC रखा गया।

  • फरवरी 2004: छठी मंत्रिस्तरीय बैठक में नेपाल और भूटान को सदस्य के रूप में शामिल किया गया। इसके बाद संगठन का नाम बदलकर Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (BIMSTEC) कर दिया गया।

इस ऐतिहासिक विस्तार के साथ BIMSTEC चार देशों के आर्थिक सहयोग समूह से विकसित होकर दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों के बहु-क्षेत्रीय सहयोग मंच के रूप में सामने आया।

BIMSTEC का भौगोलिक और आर्थिक महत्त्व

BIMSTEC क्षेत्र की विशेषता यह है कि यह दक्षिण एशिया को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ता है। बंगाल की खाड़ी इस क्षेत्र के देशों के बीच समुद्री व्यापार और संपर्क का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है।

दिए गए विवरण के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 1.8 अरब लोग रहते हैं, जो वैश्विक जनसंख्या का करीब 22 प्रतिशत है। सदस्य देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 4.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताया गया है।

इस विशाल जनसंख्या और आर्थिक क्षमता के कारण BIMSTEC में व्यापार, निवेश, परिवहन, ऊर्जा, पर्यटन और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएँ हैं।

इसके भौगोलिक महत्त्व के प्रमुख पहलू हैं:

  • समुद्री संपर्क: बंगाल की खाड़ी सदस्य देशों के बीच समुद्री व्यापार और परिवहन को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करती है।

  • क्षेत्रीय व्यापार: बेहतर संपर्क व्यवस्था से वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान में वृद्धि हो सकती है।

  • आर्थिक एकीकरण: सदस्य देशों के बीच सहयोग से क्षेत्रीय आपूर्ति शृंखलाओं और निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है।

  • सामरिक महत्त्व: हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच स्थित होने के कारण यह क्षेत्र समुद्री सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्त्वपूर्ण है।

  • सांस्कृतिक संपर्क: ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध भी सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं।

BIMSTEC सचिवालय

BIMSTEC का सचिवालय ढाका, बांग्लादेश में स्थित है।

सचिवालय संगठन के प्रशासनिक और संस्थागत कार्यों में सहयोग करता है। इसमें सदस्य देशों के बीच समन्वय, बैठकों के आयोजन, निर्णयों के क्रियान्वयन की निगरानी और विभिन्न सहयोग कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने जैसे कार्य शामिल हैं।

एक स्थायी सचिवालय होने से सदस्य देशों के बीच नियमित संवाद और संगठन की गतिविधियों में निरंतरता बनाए रखने में सहायता मिलती है।

BIMSTEC के प्रमुख उद्देश्य

BIMSTEC का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच बहु-क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना तथा बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा को मजबूत करना है।

इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. आर्थिक सहयोग: सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देना।

  2. तकनीकी सहयोग: विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करना।

  3. क्षेत्रीय संपर्क: सड़क, रेल, समुद्री परिवहन और अन्य संपर्क व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना।

  4. ऊर्जा सहयोग: ऊर्जा व्यापार, ऊर्जा संपर्क और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना।

  5. सुरक्षा सहयोग: आतंकवाद, संगठित अपराध, मानव तस्करी और अन्य सीमा-पार खतरों से निपटने के लिए समन्वय स्थापित करना।

  6. सतत विकास: पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों पर सहयोग करना।

  7. क्षेत्रीय एकीकरण: दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच आर्थिक एवं संस्थागत संबंधों को मजबूत करना।

BIMSTEC के अंतर्गत सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

BIMSTEC की शुरुआत छह सहयोग क्षेत्रों से हुई थी। समय के साथ इसका दायरा बढ़ाकर 14 क्षेत्रों तक विस्तारित किया गया। इनमें व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्र शामिल रहे हैं।

इन क्षेत्रों का उद्देश्य सदस्य देशों की साझा आवश्यकताओं के आधार पर सहयोग को बढ़ावा देना है।

प्रमुख सहयोग क्षेत्रों का महत्त्व

  • व्यापार एवं निवेश: सीमा-पार व्यापार की बाधाओं को कम करना तथा निवेश के अवसर बढ़ाना।

  • प्रौद्योगिकी: डिजिटल सेवाओं, तकनीकी नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना।

  • ऊर्जा: ऊर्जा संसाधनों और क्षेत्रीय ऊर्जा संपर्क को विकसित करना।

  • परिवहन एवं संपर्क: सड़क, रेल, बंदरगाह और समुद्री मार्गों के माध्यम से सदस्य देशों के बीच संपर्क बेहतर बनाना।

  • पर्यटन: ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को क्षेत्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करना।

  • मत्स्य पालन: समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और मत्स्य क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना।

  • कृषि: कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा और कृषि संबंधी तकनीकों में सहयोग करना।

  • पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयास करना।

  • जनस्वास्थ्य: स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से जनकल्याण को बढ़ावा देना।

  • आतंकवाद-रोधी सहयोग: आतंकवादी गतिविधियों और सीमा-पार अपराधों से निपटने के लिए सूचना एवं समन्वय व्यवस्था मजबूत करना।

इस प्रकार BIMSTEC केवल एक आर्थिक संगठन नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, संपर्क, तकनीक और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर सहयोग का भी मंच है।

आतंकवाद-रोधी एवं अंतरराष्ट्रीय अपराध संबंधी संयुक्त कार्य समूह (JWG-CTTC)

JWG-CTTC का पूरा नाम Joint Working Group on Counter-Terrorism and Transnational Crime है। हिंदी में इसे ‘आतंकवाद-रोधी एवं अंतरराष्ट्रीय सीमा-पार अपराध संबंधी संयुक्त कार्य समूह’ कहा जा सकता है।

यह BIMSTEC के अंतर्गत सुरक्षा सहयोग से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण तंत्र है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श तथा सहयोग को प्रोत्साहित करना है।

नई दिल्ली में आयोजित 11वीं बैठक में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी संवाद के महत्त्व को दर्शाती है।

इस प्रकार की बैठकों में निम्नलिखित मुद्दे महत्त्वपूर्ण होते हैं:

  • आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहतर बनाना।

  • आतंकवाद के वित्तपोषण और अवैध वित्तीय नेटवर्क से जुड़ी चुनौतियों पर सहयोग करना।

  • संगठित अपराध तथा सीमा-पार आपराधिक गतिविधियों से निपटने के उपायों पर चर्चा करना।

  • साइबर क्षेत्र में उभरते सुरक्षा खतरों को समझना।

  • सदस्य देशों के सुरक्षा एवं कानून प्रवर्तन संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाना।

  • बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप संयुक्त रणनीतियों और क्षमता निर्माण पर विचार करना।

ये संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं; बैठक में इनमें से किन विशिष्ट विषयों पर निर्णय लिए गए, इसका विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे क्या हैं?

बैठक में BIMSTEC क्षेत्र के पारंपरिक और उभरते गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर चर्चा की गई।

1. पारंपरिक सुरक्षा खतरे

पारंपरिक सुरक्षा खतरे मुख्य रूप से देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित होते हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • सैन्य संघर्ष और सशस्त्र टकराव।

  • सीमा विवाद तथा सीमा पर तनाव।

  • क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने वाले अंतरराज्यीय विवाद।

  • सामरिक और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ।

2. गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे

गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे वे चुनौतियाँ हैं, जो केवल सैन्य शक्ति के माध्यम से हल नहीं की जा सकतीं। इनके लिए पुलिस, खुफिया एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • आतंकवाद: हिंसक गतिविधियों के माध्यम से भय उत्पन्न करना और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करना।

  • सीमा-पार संगठित अपराध: कई देशों में फैले आपराधिक नेटवर्क के माध्यम से अवैध गतिविधियाँ संचालित करना।

  • आतंकवाद का वित्तपोषण: आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन और अन्य संसाधनों की व्यवस्था करना।

  • साइबर अपराध: डिजिटल प्रणालियों, नेटवर्क और सूचनाओं को निशाना बनाना।

  • मानव तस्करी: लोगों का अवैध शोषण और उनके अधिकारों का उल्लंघन करना।

  • अवैध हथियारों की तस्करी: गैरकानूनी हथियारों के प्रसार से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होना।

  • समुद्री अपराध: समुद्री मार्गों पर अवैध गतिविधियाँ और नौवहन सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ।

इन खतरों की सीमा राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहती। किसी एक देश में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क दूसरे देशों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए क्षेत्रीय सहयोग आवश्यक हो जाता है।

BIMSTEC में आतंकवाद-रोधी सहयोग का महत्त्व

बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मार्गों, व्यापारिक संपर्कों और भौगोलिक निकटता के कारण सुरक्षा सहयोग का विशेष महत्त्व है।

आतंकवादी और संगठित आपराधिक नेटवर्क कभी-कभी कई देशों की सीमाओं का उपयोग करके अपनी गतिविधियाँ संचालित करते हैं। ऐसी स्थिति में केवल किसी एक देश की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती।

BIMSTEC के माध्यम से सदस्य देश निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं:

सूचना का आदान-प्रदान: संदिग्ध गतिविधियों, आपराधिक नेटवर्क और सुरक्षा खतरों से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान में सुधार।

संस्थागत समन्वय: पुलिस, सीमा सुरक्षा, खुफिया और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच संपर्क को मजबूत करना।

आतंकवाद के वित्तपोषण पर नियंत्रण: अवैध वित्तीय लेन-देन और आतंकवादी नेटवर्क को धन उपलब्ध कराने के तरीकों की पहचान में सहयोग।

साइबर सुरक्षा: डिजिटल माध्यमों से संचालित अपराधों और उभरते तकनीकी खतरों से निपटने के लिए अनुभव साझा करना।

समुद्री सुरक्षा: समुद्री मार्गों पर सुरक्षा, अवैध गतिविधियों की रोकथाम और क्षेत्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना।

क्षमता निर्माण: प्रशिक्षण, विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और सुरक्षा संस्थानों की कार्यक्षमता में सुधार करना।

हालाँकि, प्रभावी सहयोग के लिए सदस्य देशों के बीच विश्वास, सूचनाओं की सुरक्षित साझेदारी, कानूनी व्यवस्थाओं का समन्वय और राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान भी आवश्यक है।

भारत के लिए BIMSTEC का रणनीतिक महत्त्व

भारत के लिए BIMSTEC विदेश नीति, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा का एक महत्त्वपूर्ण मंच है। यह भारत को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

भारत की दो प्रमुख विदेश नीति प्राथमिकताएँ—‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’—BIMSTEC के भौगोलिक स्वरूप से सीधे संबंधित हैं।

1. नेबरहुड फर्स्ट नीति (Neighbourhood First Policy)

इस नीति का उद्देश्य भारत के पड़ोसी देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना है।

BIMSTEC में बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार जैसे भारत के पड़ोसी देश शामिल हैं। इस मंच के माध्यम से भारत क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार और साझा सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग को आगे बढ़ा सकता है।

2. एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy)

भारत की एक्ट ईस्ट नीति का उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है।

BIMSTEC में म्यांमार और थाईलैंड की सदस्यता भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ संपर्क बढ़ाने का अवसर देती है। यह मंच भारत की पूर्वोत्तर क्षेत्र की संपर्क परियोजनाओं और व्यापक क्षेत्रीय सहयोग के संदर्भ में भी महत्त्वपूर्ण है।

3. समुद्री सुरक्षा

बंगाल की खाड़ी भारत की समुद्री सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा परिवहन के लिए महत्त्वपूर्ण है। BIMSTEC के माध्यम से भारत समुद्री सहयोग और सीमा-पार सुरक्षा संबंधी संवाद को प्रोत्साहित कर सकता है।

4. आर्थिक अवसर

क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार को बढ़ावा देने से भारत के उद्योगों, व्यापारियों और सेवा क्षेत्र को व्यापक बाजारों तक पहुँचने के अवसर मिल सकते हैं।

5. क्षेत्रीय कूटनीति

BIMSTEC भारत को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ बहुपक्षीय संवाद के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराता है।

BIMSTEC और SAARC में अंतर

BIMSTEC और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) दोनों क्षेत्रीय सहयोग के मंच हैं, लेकिन उनकी सदस्यता और भौगोलिक प्राथमिकताएँ अलग हैं।

आधार BIMSTEC SAARC
पूरा नाम Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation South Asian Association for Regional Cooperation
स्थापना 6 जून 1997 1985
सदस्य देशों की संख्या 7 8
प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देश दक्षिण एशिया
सदस्यता की विशेषता भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान
सचिवालय ढाका, बांग्लादेश काठमांडू, नेपाल
प्रमुख उद्देश्य बहु-क्षेत्रीय तकनीकी, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग

भारत ने BIMSTEC को क्षेत्रीय सहयोग के एक महत्त्वपूर्ण मंच के रूप में आगे बढ़ाया है। SAARC के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रीय पहलें भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेदों तथा सहयोग की सीमाओं से प्रभावित रही हैं। इसके विपरीत, BIMSTEC में पाकिस्तान सदस्य नहीं है और इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के दो देश भी शामिल हैं।

हालाँकि, दोनों संगठनों के उद्देश्य और भौगोलिक दायरे अलग-अलग हैं। BIMSTEC को दक्षिण एशिया तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच संपर्क बढ़ाने वाले एक अतिरिक्त क्षेत्रीय मंच के रूप में समझना अधिक उपयुक्त है।

BIMSTEC के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ

क्षेत्रीय सहयोग की पर्याप्त संभावनाओं के बावजूद BIMSTEC को प्रभावी बनाने के लिए कई चुनौतियों का समाधान आवश्यक है।

1. संपर्क संबंधी बाधाएँ: सदस्य देशों के बीच सड़क, रेल, बंदरगाह और समुद्री परिवहन संपर्क को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

2. व्यापारिक बाधाएँ: सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, नियामकीय अंतर और अन्य व्यापारिक अवरोधों से क्षेत्रीय व्यापार की गति प्रभावित हो सकती है।

3. राजनीतिक एवं आर्थिक असमानताएँ: सदस्य देशों की आर्थिक क्षमता, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और प्राथमिकताओं में अंतर है।

4. संस्थागत क्षमता: क्षेत्रीय निर्णयों को व्यावहारिक परियोजनाओं में बदलने के लिए पर्याप्त संसाधन और प्रभावी संस्थागत समन्वय आवश्यक है।

5. सुरक्षा चुनौतियाँ: आतंकवाद, संगठित अपराध, साइबर अपराध और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार सहयोग बनाए रखना आवश्यक है।

6. निर्णयों का क्रियान्वयन: केवल बैठकें आयोजित करना पर्याप्त नहीं है। सहयोग संबंधी समझौतों और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना भी जरूरी है।

आगे की राह

BIMSTEC को अधिक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन बनाने के लिए सदस्य देशों को आर्थिक सहयोग और सुरक्षा समन्वय दोनों पर समान रूप से ध्यान देना होगा।

इसके लिए निम्नलिखित कदम उपयोगी हो सकते हैं:

  • आतंकवाद और संगठित अपराध से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रभावी व्यवस्था विकसित करना।

  • सदस्य देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच नियमित संवाद और प्रशिक्षण बढ़ाना।

  • समुद्री सुरक्षा तथा साइबर अपराध से निपटने के लिए सहयोग मजबूत करना।

  • सड़क, रेल, बंदरगाह और अन्य क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में तेजी लाना।

  • व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और निवेश को प्रोत्साहित करने के उपाय करना।

  • क्षेत्रीय समझौतों और बैठकों में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करना।

  • सदस्य देशों के बीच विश्वास, पारदर्शिता और समान भागीदारी को प्रोत्साहित करना।

परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • संगठन: BIMSTEC।

  • पूरा नाम: Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation।

  • स्थापना: 6 जून 1997।

  • स्थापना का आधार: बैंकॉक घोषणा।

  • सदस्य देशों की संख्या: 7।

  • दक्षिण एशिया से सदस्य: भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और श्रीलंका।

  • दक्षिण-पूर्व एशिया से सदस्य: म्यांमार और थाईलैंड।

  • प्रारंभिक समूह: BIST-EC, जिसमें बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे।

  • म्यांमार का प्रवेश: 22 दिसंबर 1997।

  • नेपाल और भूटान का प्रवेश: फरवरी 2004।

  • सचिवालय: ढाका, बांग्लादेश।

  • क्षेत्रीय जनसंख्या: लगभग 1.8 अरब, दिए गए विवरण के अनुसार।

  • संयुक्त GDP: लगभग 4.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर, दिए गए विवरण के अनुसार।

  • हालिया बैठक: आतंकवाद-रोधी एवं अंतरराष्ट्रीय अपराध संबंधी संयुक्त कार्य समूह की 11वीं बैठक।

  • बैठक का स्थान: नई दिल्ली।

  • बैठक की तिथियाँ: 28 और 29 सितंबर।

  • भारत की संबंधित विदेश नीति प्राथमिकताएँ: नेबरहुड फर्स्ट और एक्ट ईस्ट।

निष्कर्ष

नई दिल्ली में आयोजित BIMSTEC के आतंकवाद-रोधी एवं अंतरराष्ट्रीय अपराध संबंधी संयुक्त कार्य समूह की 11वीं बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर सदस्य देशों के बीच संवाद के महत्त्व को रेखांकित करती है।

BIMSTEC की विशेषता यह है कि यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को एक साझा मंच पर जोड़ता है। इसके माध्यम से सदस्य देश आर्थिक विकास, व्यापार, परिवहन, ऊर्जा, तकनीकी सहयोग और आतंकवाद-रोधी प्रयासों को आगे बढ़ा सकते हैं।

भारत के लिए यह संगठन नेबरहुड फर्स्ट और एक्ट ईस्ट नीतियों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में संपर्क, आर्थिक साझेदारी और सुरक्षा सहयोग मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता सदस्य देशों के बीच निरंतर सहयोग, प्रभावी संस्थागत समन्वय और लिए गए निर्णयों के समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।