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संबलपुर में देश के 51वें डॉप्लर मौसम रडार का उद्घाटन

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने ओडिशा के संबलपुर में देश के 51वें डॉप्लर मौसम रडार (Doppler Weather Radar) का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी उपस्थित रहे।

इस रडार के शुरू होने से ओडिशा में डॉप्लर मौसम रडार की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। इससे पहले राज्य में गोपालपुर और पारादीप में डॉप्लर मौसम रडार स्थापित किए जा चुके हैं।

पश्चिमी ओडिशा में मौसम निगरानी को मिलेगा बढ़ावा

संबलपुर में स्थापित नया रडार विशेष रूप से पश्चिमी ओडिशा में मौसम संबंधी घटनाओं की निगरानी को मजबूत करेगा। इसके अलावा इससे आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

इसकी निगरानी क्षमता का लाभ मुख्य रूप से—

  • दक्षिणी झारखंड के आसपास के क्षेत्रों,
  • उत्तरी छत्तीसगढ़,
  • आंध्र प्रदेश के कुछ उत्तरी हिस्सों और
  • पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों

को मिल सकेगा।

इससे इन क्षेत्रों में मौसम की स्थिति का अधिक सटीक और समय पर आकलन करने में सहायता मिलेगी।

डॉप्लर मौसम रडार क्या है?

डॉप्लर मौसम रडार एक उन्नत मौसम निगरानी प्रणाली है, जिसका उपयोग वायुमंडल में मौजूद वर्षा, बादलों और अन्य मौसम संबंधी गतिविधियों का पता लगाने के लिए किया जाता है।

यह रडार वर्षा की तीव्रता, उसकी दिशा और गति जैसी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम होता है। इससे मौसम वैज्ञानिकों को खराब मौसम की निगरानी और उसके पूर्वानुमान में सहायता मिलती है।

प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी में उपयोगी

संबलपुर का नया रडार पूर्व-मानसून आंधी-तूफान, बिजली गिरने, ओलावृष्टि, भारी वर्षा और चक्रवात जैसी मौसम संबंधी घटनाओं के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करेगा।

समय रहते मौसम संबंधी चेतावनी मिलने से प्रशासन और आम लोगों को आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए अधिक समय मिल सकेगा। इससे जान-माल के नुकसान को कम करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।

बिजली और परिवहन जैसे क्षेत्रों में लाभ

बेहतर मौसम पूर्वानुमान का लाभ केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा। मौसम संबंधी सटीक जानकारी से बिजली, उद्योग, परिवहन और विद्युत ग्रिड संचालन जैसे क्षेत्रों में भी आवश्यक सावधानी बरतने में मदद मिलेगी।

उदाहरण के लिए, तेज आंधी, भारी बारिश या बिजली गिरने की संभावना की जानकारी पहले मिलने पर बिजली वितरण व्यवस्था और परिवहन सेवाओं से जुड़े विभाग आवश्यक सुरक्षा उपाय कर सकते हैं।

मिशन मौसम के तहत रडार नेटवर्क का विस्तार

संबलपुर रडार की स्थापना भारत में मौसम निगरानी क्षमता बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार, मिशन मौसम के तहत लगभग 40 और मौसम रडार स्थापित करने की योजना है।

इस विस्तार का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में मौसम संबंधी घटनाओं की निगरानी को अधिक व्यापक और आधुनिक बनाना है।

चरम मौसम की घटनाओं से निपटने में मदद

जलवायु और मौसम में होने वाले बदलावों के कारण कई क्षेत्रों में भारी वर्षा, आंधी-तूफान, बिजली गिरने, चक्रवात और अन्य चरम मौसम घटनाओं की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

ऐसे में आधुनिक मौसम निगरानी उपकरणों का विस्तार मौसम वैज्ञानिकों को अधिक मात्रा में वास्तविक समय का आंकड़ा उपलब्ध करा सकता है। इन आंकड़ों के आधार पर मौसम की स्थिति को समझने और पूर्वानुमान तैयार करने में सहायता मिलती है।

मिशन मौसम क्या है?

मिशन मौसम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) की एक केंद्रीय क्षेत्र की व्यापक योजना है। इसका प्रमुख उद्देश्य भारत को “मौसम के लिए तैयार और जलवायु के प्रति स्मार्ट राष्ट्र” बनाना है।

इस मिशन के माध्यम से पृथ्वी प्रणाली के अवलोकन और मौसम पूर्वानुमान से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करने, उच्च प्रभाव वाली मौसम घटनाओं के लिए प्रारंभिक चेतावनी व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा निर्बाध मौसम एवं जलवायु सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

मिशन मौसम का बजट

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2024 में मिशन मौसम को मंजूरी दी थी। इसके लिए 2024-25 और 2025-26 के लिए कुल 2,000 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान को मंजूरी दी गई।

इस मिशन का व्यापक उद्देश्य मौसम और जलवायु संबंधी जानकारी की गुणवत्ता तथा उपलब्धता में सुधार करके देश की जलवायु सहनशीलता और आपदा तैयारी को मजबूत करना है।

मिशन मौसम के प्रमुख उद्देश्य

मिशन मौसम के अंतर्गत मौसम निगरानी और पूर्वानुमान प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों को निर्धारित किया गया है।

1. उन्नत मौसम निगरानी तकनीक विकसित करना
अत्याधुनिक मौसम निगरानी तकनीकों और प्रणालियों का विकास एवं उपयोग करना।

2. उच्च रिजॉल्यूशन वाले वायुमंडलीय अवलोकन
वायुमंडल की अधिक सटीक और विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए बेहतर स्थानिक एवं समय संबंधी कवरेज विकसित करना।

3. अगली पीढ़ी के मौसम उपकरणों की स्थापना
अत्याधुनिक डॉप्लर मौसम रडार, विंड प्रोफाइलर और उन्नत उपकरणों से लैस उपग्रहों की तैनाती करना।

4. उच्च प्रदर्शन वाली कंप्यूटिंग प्रणाली विकसित करना
मौसम और जलवायु से जुड़े विशाल आंकड़ों के विश्लेषण तथा तेज पूर्वानुमान के लिए उन्नत हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग प्रणाली का उपयोग करना।

5. मौसम एवं जलवायु प्रक्रियाओं की समझ बढ़ाना
मौसम और जलवायु से जुड़ी प्रक्रियाओं की वैज्ञानिक समझ को बेहतर बनाना तथा पूर्वानुमान क्षमता में सुधार करना।

6. उन्नत पृथ्वी प्रणाली मॉडल विकसित करना
अत्याधुनिक अर्थ सिस्टम मॉडल और डेटा आधारित तकनीकों का विकास एवं उपयोग करना।

7. प्रभावी मौसम प्रबंधन तकनीक विकसित करना
मौसम संबंधी जोखिमों से निपटने के लिए प्रभावी तकनीकों और प्रोटोकॉल का विकास करना।

8. निर्णय सहायता और अंतिम छोर तक सूचना पहुंचाना
अत्याधुनिक निर्णय सहायता प्रणाली तथा सूचना प्रसार प्रणाली स्थापित करना, ताकि मौसम संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी अंतिम उपयोगकर्ता तक समय पर पहुंच सके।

9. क्षमता निर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा देना
मौसम एवं जलवायु विज्ञान के क्षेत्र में मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाना तथा विभिन्न संस्थानों के बीच अनुसंधान सहयोग को मजबूत करना।

भारत के लिए महत्व

संबलपुर में 51वें डॉप्लर मौसम रडार की स्थापना भारत की मौसम निगरानी और पूर्व चेतावनी क्षमता के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेष रूप से पश्चिमी ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में आंधी, बिजली, भारी वर्षा और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं की बेहतर निगरानी से समय पर चेतावनी जारी करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

मिशन मौसम के तहत रडार, उपग्रह, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग और आधुनिक पूर्वानुमान प्रणालियों का विस्तार भारत को अधिक सटीक मौसम पूर्वानुमान और बेहतर आपदा तैयारी की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है।